Tuesday, 3 May 2022

Article : Akshaya Tritiya🎑🕉️

हम हिन्दुओं में हर शुभ कार्य, मूहुर्त देखकर ही संपन्न किए जाते हैं। ऐसे में पंडित जी के चक्कर लगाने पड़ते हैं, फिर भी, कभी-कभी मन में यह शंका रह ही जाती है कि पंडित जी ने सही गणना की होगी ना? कहीं धन के लोभ या व्यस्तता के कारण सही गणना ना की हो तो?

ऐसे सभी सवालों के समाधान हैं, हमारे यह स्वयं सिद्ध मुहूर्त...

यह स्वयं सिद्ध मुहूर्त क्या पहेली है? आप को बताते हैं, पहले आज के शुभ पर्व अक्षय तृतीया की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ 🙏🏻💐

अक्षय तृतीया🎑🕉️



आज अक्षय तृतीया है। शास्त्रों में अक्षय तृतीया एक स्वयं सिद्ध मुहूर्त है यानी ऐसी तिथि जिसमें किसी तरह का शुभ कार्य या शुभ खरीदारी करने के लिए पंडित से शुभ मुहूर्त निकलवाने की आवश्यकता नहीं होती है। अक्षय तृतीया के दिन सभी तरह के शुभ कार्य किए जा सकते हैं। अर्थात् बिना शुभ मुहूर्त के सभी तरह के शुभ कार्य की शुरुआत की जा सकती है।

शास्त्र कहते हैं कि, 'न क्षयः इति अक्षयः' अर्थात जिसका क्षय नहीं होता वह अक्षय है। वर्ष में चैत्र माह के शुक्लपक्ष की नवमी (रामनवमी), वैशाख शुक्लपक्ष की तृतीया,(अक्षय तृतीया), आश्विन माह शुक्लपक्ष की दशमी (विजय दशमी) और कार्तिक माह शुक्लपक्ष की एकादशी इन्हें स्वयं सिद्ध या अक्षय मुहूर्त के नाम से जाना जाता है। इनमें भी वैशाख माह की तृतीया को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इस दिन रोहिणी नक्षत्र और बुधवार का दिन भी हो तो यह और भी अमोघफल देने वाली हो जाती है।

हिंदू पंचांग के अनुसार हर वर्ष वैशाख महीने की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया का त्योहार मनाया जाता है। इस बार यह पर्व 03 मई को है। अक्षय तृतीया को आखा तीज के नाम से भी जाना जाता है। अक्षय का मतलब होता है जिसका कभी भी क्षय या नाश न होना। मान्यता है कि अक्षय तृतीया के दिन शुभ खरीदारी या शुभ कार्य करने पर हमेशा इसमें वृद्धि होती है। अक्षय तृतीया के दिन शुभ कार्य करने, दान, स्नान और जप आदि करने पर कभी भी शुभ फल की कमी नहीं होती है। वहीं खासतौर पर अक्षय तृतीया के दिन विशेष तौर पर सोने के आभूषण की खरीदारी की जाती है। मान्यता है इस दिन सोने और चांदी के आभूषण खरीदने से व्यक्ति के जीवन में माता लक्ष्मी का आशीर्वाद बना रहता है जिससे व्यक्ति का जीवन सुख, समृद्धि और वैभव का वास रहता है।

अक्षय तृतीया का महत्व आज से नहीं है, बल्कि हिन्दू ग्रंथों और पुराणों के अनुसार, त्रेता युग, द्वापरयुग आदि में भी इस तिथि की विशेष महत्ता थी और इस तिथि में बहुत से शुभ कार्य किए गए हैं, आपको उन कार्यों के विषय में बताते हैं, तो आप मन में आस्था और बढ़ जाएगी...


अक्षय तृतीया की खास बातें :

  • शास्त्रों के अनुसार अक्षय तृतीया पूरे एक वर्ष में उन साढ़े तीन शुभ मुहूर्त में से एक जिसे स्वयं सिद्ध मुहूर्त माना गया है। 
  • अक्षय तृतीया के दिन सोने से बने आभूषण की खरीदारी करना बहुत ही शुभ होता है। 
  • अक्षय तृतीया की तिथि पर भगवान परशुराम और हयग्रीव अवतार हुए थे।
  • माँ अन्नपूर्णा जी का जन्म भी आज ही के दिन हुआ था
  • सतयुग व त्रेतायुग का प्रारंभ भी इसी तिथि को हुआ था।
  • धार्मिक ग्रंथों के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन ही महाभारत के युद्ध का समापन हुआ था।
  • धार्मिक शास्त्रों के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन ही द्वापर युग का समापन हुआ था।
  • धार्मिक कथाओं के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन सुदामा भगवान कृष्ण से मिलने पहुंचे थे।
  • द्रोपदी को चीरहरण से कृष्ण ने आज ही के दिन बचाया था
  • अक्षय तृतीया के दिन से ही वेद व्यास और भगवान गणेश ने महाभारत ग्रंथ लिखना शुरू किया था।
  • धार्मिक ग्रंथों के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन ही मां गंगा का धरती पर आगमन हुआ था।
  • कुबेर को आज ही के दिन खजाना मिला था
  • अक्षय तृतीया के दिन उत्तराखंड स्थिति श्री बद्रीनाथ जी के कपाट खुलते हैं।
  • अक्षय तृतीया के शुभ दिन वृंदावन के बांके बिहारी जी के मंदिर में श्री विग्रह के चरणों के दर्शन होते हैं। साल में केवल एक बार इसी तिथि के दिन ही ऐसा होता है।  
  • अक्षय तृतीया के शुभ दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा का विधान है। इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। 
  • हिंदू धर्म ग्रंथों में कहा गया है कि अक्षय तृतीया के दिन किया गया दान-पुण्य कर्म का फल कभी नष्ट नहीं होता।इस तिथि पर सभी तरह के मांगलिक और शुभ कार्य बिना पंचांग देखे किए जाते हैं। अक्षय तृतीया के दिन विवाह करना, सोना खरीदना, माता लक्ष्मी की पूजा करने का विशेष महत्व होता है।


अक्षय तृतीया पूजा मुहूर्त : 

05:39 AM से 12:18 PM तक

अवधि : 6 घंटे 39 मिनट


अक्षय तृतीया पर बना शुभ योग :
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार अक्षय तृतीया 03 मई को सुकर्मा योग में मनाई जाएगी। अक्षय तृतीया के दिन शोभन और मातंग योग, तैतिल करण, रोहिणी नक्षत्र और वृष राशि का चंद्रमा रहेगा। मंगलवार, 03 मई के दिन अक्षय तृतीया रोहिणी नक्षत्र के संयोग से मातंग नाम का शुभ योग बन रहा है। इस योग में किए गए कार्य का फल अक्षय रहता है। शास्त्रों के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन रोहिणी नक्षत्र पड़ने को बहुत ही शुभ माना गया है। इसके अलावा इस अक्षय तृतीया पर पांच ग्रहों की शुभ स्थिति भी देखने को मिलेगी। ज्योतिष गणना के अनुसार इस बार अक्षय तृतीया पर सूर्य, चंद्रमा, शुक्र उच्च राशि में और गुरु और शनि अपनी स्वराशि में रहेंगे। इस तरह के शुभ योग और नक्षत्र में खरीदारी, निवेश और लेन-देन के लिए पूरा दिन बहुत ही शुभ रहने वाला होगा।

अक्षय तृतीया पर क्यों खरीदते हैं सोने के आभूषण :

हर वर्ष अक्षय तृतीया के त्योहार के दिन सोने के आभूषण खरीदने की परंपरा निभाई जाती है। मान्यता है इस दिन खरीदा गया सोना सुख, समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक होता है। ऐसा माना जाता है इस दिन खरीदा गया सोना या निवेश किया गया धन कभी भी खत्म नहीं होता। मान्यता है अक्षय तृतीया के दिन खरीदे गए सोने और निवेश का स्वयं भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी रक्षा और उसमें वृद्धि करते हैं।

Thursday, 28 April 2022

Article : हर प्रदेश चाहे, योगी सरकार

 हर प्रदेश चाहे, योगी सरकार... 




अभी कुछ दिन पहले ही उत्तर प्रदेश में चुनाव हुए, जिसमें भारी मतों से (बीजेपी) भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की, और उत्तर प्रदेश में एक बार पुनः योगी आदित्यनाथ जी, मुख्यमंत्री के रूप में चयनित हुए।

योगी जी, जब पहली बार उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री बने थे, उस समय जीत का सारा श्रेय मोदी जी का था। लेकिन इस बार के चुनाव के परिणाम, उनके द्वारा किए गए कार्यों के आंकलन पर भी होने थे। अर्थात् इस बार, योगी जी के मुख्यमंत्री बनने में, मोदी जी के साथ ही योगी जी के द्वारा किए गए कार्यों को भी, हार-जीत की कसौटी में कसा जाना था।

लोगों ने उनके द्वारा किए गए कार्यों को पूरे मन से सराहा और उन्हें शानदार जीत का तोहफा दिया।

आज तक चुनाव को जीतने के लिए बहुत से मुद्दे रखे जाते थे। पर law and order को कभी चुनाव का मुद्दा नहीं बनाया जाता था। शायद इसीलिए कि आज तक कभी भी किसी भी नेता ने इतनी सख्ती और ईमानदारी से law and order संभाला ही नहीं था।

सख्ती इतनी, कि एक से बढ़कर एक गैंगस्टर की भी इतनी हिम्मत नहीं है, कि वो योगी जी के कार्यकाल में कोई ग़लत काम करने की सोच भी सके। उनके बुलडोजर से सब डरते हैं और दबदबा तो इतना कि उनका नाम ही बुलडोजर बाबा रख दिया गया है।

और ईमानदारी इतनी, कि कोई भी जाति, धर्म, ऊंच, नीच, अमीर-गरीब के साथ न्याय में कोई भेद भाव नहीं है। 

चुनाव होने से पहले किसान आंदोलन, चुनाव के दौरान, हिजाब पहनने का एजेंडा और अब लाउडस्पीकर का कांड।

एक के बाद एक समस्या सामने आ कर खड़ी होती रही।

बहुत से प्रदेशों में हिजाब पहनने और लाउडस्पीकर के विवादों पर ना जाने कितनी हिंसा, तोड़-फोड़ कर दी गई। हिन्दू मुस्लिम के दंगे भड़क गए। लोगों पर अत्याचार हुए, कुछ लोग लापता भी हो गये।

पर इसकी तुलना अगर उत्तर प्रदेश से की जाए, तो आप पाएंगे कि, हिजाब का मुद्दा तो कब सुलझ गया, पता ही नहीं चला।

और जो लाउडस्पीकर का मुद्दा था, वो इतने सौहार्द्रपूर्ण तरीके से भी सुलझ सकता है, कोई सोच भी नहीं सकता था।

पर इस मुद्दे को भी योगी जी ने सुलझा दिया है, बिना किसी हिंसा के, बिना किसी ज़ोर जबरदस्ती के।

पर यह हुआ कैसे?

क्योंकि जब योगी जी ने उत्तर प्रदेश में इस समस्या को सुलझाने वाली बात कही और कहा कि High court के नियम के अनुसार, हर किसी को लाउडस्पीकर उतारने होंगे, फिर वो मस्जिद हों, मंदिर हों या मठ हों । और जो लाउडस्पीकर लगे रहेंगे, उससे भी आने वाली आवाज़, इतनी धीमी होनी चाहिए कि वो परिसर के बाहर नहीं जाए।

और आप को पता है कि, किस मठ के लाउडस्पीकर सबसे पहले उतारे गए? कोई और नहीं, उनके खुद का गोरखपुर का मठ, जहाँ के वो मठाधीश हैं। और जो लाउडस्पीकर लगे हैं, उनकी आवाज़, 45 decibels से भी कम कर दी गई है, साथ ही उन लाउडस्पीकर का face, जो कि बाहर की तरफ था, उसे मंदिरों की तरफ कर दिया गया है, जिससे, उनकी आवाज़ सिर्फ परिसर में ही सुनाई दे रही है। 

जब सत्ता में आसीन ताकत, अपने होने का वर्चस्व नहीं दिखाती है, बल्कि ईमानदारी और कर्तव्य निष्ठा से काम करती है, तो जनता भी उसका साथ देने में तत्परता से लग जाती है।

दूसरा लाउडस्पीकर उतरा, गोरखपुर की सबसे बड़ी मस्जिद से जो कि मठ के नज़दीक ही है। पर उस मस्जिद से लाउडस्पीकर उतारने के लिए, ना तो हिंसा करनी पड़ी, ना ही ज़ोर जबरदस्ती करनी पड़ी। उन्होंने स्वतः ही कानून के दायरे को अपना लिया। इसके बाद पूरे उत्तर प्रदेश के सभी धार्मिक स्थलों में स्वतः लाउडस्पीकर के नियम का पालन किया गया। 

उत्तर प्रदेश में सभी धार्मिक स्थलों के मिलाकर, लगभग 22,000 लाउडस्पीकर उतारे गए और 35,000 लाउडस्पीकर की आवाज़ कम की गई।

आप ने देखा, किस तरह प्रेम और सौहार्द्र से पूरे प्रदेश में law and order को follow किया गया। कहीं कोई मतभेद नहीं, कोई भेदभाव नहीं, कहीं कोई हिंसा नहीं, कहीं कोई पथराव नहीं, किसी को जेल में भर्ती भी नहीं किया गया।  

वहीं, राजस्थान, महाराष्ट्र, दिल्ली हिंसा की आग में जल रहे हैं, क्योंकि वहाँ एक तरफा कार्यवाही हो रही है। रामनवमी और हनुमान जन्मोत्सव पर रैली पर पथराव, हिंसा, मंदिरों और हिन्दूओं के घरों का खंडन किया जा रहा है। 

शायद जिन्होंने अपने निजी स्वार्थों के चलते योगी जी को वोट नहीं दिया था, उन्हें भी लगा हो, कि अच्छा हुआ कि योगी जी की ही सरकार बनी है, और वह भी आगे से अपनी भूल को सुधारते हुए, हमेशा योगी जी को दी वोट दें।

योगी जी, law and order के साथ ही, अमृत सरोवर, पर्यटन व परिवहन विभाग, सड़क यातायात व्यवस्था, रोजगार के अवसर, संस्कृति और विरासत का विकास व प्रदेश के आधुनिकीकरण पर भी विशेष ध्यान दें रहे हैं।

योगी जी हों साथ, तो सुरक्षा और विकास एक साथ...

वो दिन दूर नहीं, जब उत्तर प्रदेश का नाम भारत के सर्वश्रेष्ठ प्रदेश में लिया जाएगा।

कभी जो प्रदेश, सबसे अधिक गुंडागर्दी के लिए मशहूर था, वो आज law and order के नाम पर प्रसिद्धी प्राप्त कर रहा है।

अब आप खुद सोच लीजिए कि क्यों हर प्रदेश चाहे योगी सरकार…

Wednesday, 27 April 2022

Short Story: वरदान या श्राप

 वरदान या श्राप



एक बार की बात है कि तीन मित्र थे। वे चाहते थे कि उन्हें ज़्यादा मेहनत ना करनी पड़े, पर उन्हें सभी सुख-समृद्धि मिल जाए। 

एक दिन उनकी मुलाकात एक महात्मा से हुई। उन्होंने उन तीनों को कहा, ईश्वर से सर्वशक्तिशाली कोई नहीं है। अगर तुम लोग, पूरी आस्था और लगन से तपस्या करो और ईश्वर को खुश कर सको, तो तुम लोगों की मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होगी।

तीनों तपस्या में लीन हो गए। चंद महीनों की तपस्या के पश्चात, ईश्वर प्रसन्न हुए।

उन्होंने तीनों से कहा, मेरे पास तीन वरदान हैं, जिसको जो लेना हो, ले लो।

पहला - चारों तरफ बढ़िया खाना, खूब सारे लोग और सब लोग, चाह रहे हों कि तुम‌ उनके पास रहो।

दूसरा - बढ़िया आलीशान कमरा, जिसमें पूरे time, AC चलता रहे और खूब सारे आदमी-औरत तुम्हारी सेवा करें।

तीसरा - तुम्हारे चारों ओर, सोना-चांदी, हीरे-जवाहरात हों।

पहला बहुत चटोरा था, उसने सोचा, खूब सारा खाना पीना और सब चाहें कि वो ही सब के पास रहे। मतलब खाना-पीना और शोहरत, यही तो चाहिए थी उसे। उसने झट बढ़िया खाना रहे, वो वरदान मांग लिया।

दूसरा बहुत आलसी था, उसने सोचा, दिनभर आराम और आदमी-औरत उसकी सेवा करें। उसकी, ऐसी ही ज़िंदगी की कामना थी। उसने झट दूसरा वरदान ले लिया।

तीसरा बहुत लोभी था, उसने सोचा कि यह दोनों मूर्ख हैं, जिसके पास सोना-चांदी, हीरे-जवाहरात सब हों, उसे किस बात की कमी? अच्छा हुआ, दोनों ने अपने-अपने दुर्गुणों के कारण, असली चीज़ नहीं मांगी और उसने खुशी-खुशी तीसरा वरदान ले लिया। 

ईश्वर ने कहा, आज से ठीक चार दिन बाद, तुम लोगों की इच्छा पूरी हो जाएगी।

चौथे दिन, पहले मित्र को एक बड़े होटल में वेटर की नौकरी लग गई। उसके हर तरफ खाना-पीना था, खूब सारे लोग उसके चारों तरफ थे। सब उसे आवाज़ दे रहे थे और चाहते थे कि, सबसे पहले वो उनके पास आए।

काम बहुत ज़्यादा था, वो चक्करघिन्नी बना घूमता रहता, पर काम खत्म नहीं होता। उसे अपने खाना खाने का समय भी नहीं मिलता।

दूसरे मित्र का बहुत बड़ा accident हो गया, वो ICU में भर्ती हो गया। दिन भर बिस्तर पर लेटा रहता, पूरे time AC चलता और खूब सारे आदमी-औरत उसकी सेवा करते।

तीसरे मित्र को एक बहुत पुरानी बड़ी सी गुफा मिली, जहाँ सोना चांदी, हीरे जवाहरात सब थे। उसमें घुस तो वो गया, पर उससे बाहर निकलने का रास्ता उसे दिखाई नहीं दे रहा था। 

वहाँ, उसके अलावा कोई नहीं था, खाना-पीना भी नहीं था।

कुछ दिन पश्चात तीनों ही मृत्यु को प्राप्त हुए। तीनों ईश्वर के पास गए और बोले कि हे ईश्वर, यह कैसा वरदान था?

ईश्वर बोले, जब भी तुम चटोरे, आलसी और लोभी बनकर कोई भी कामना करोगे। वरदान, श्राप में ही बदल जाएगा।

जब भी परिश्रम, लगन और निष्ठा से काम करोगे, तभी तुम्हें सुख समृद्धि और प्रसिद्धी का वरदान मिलेगा।

इन सब को पाने का कोई shortcut नहीं है। जिसकी intention गलत होती है, उसके लिए वरदान भी श्राप बन जाता है...