Wednesday, 27 July 2022

Tip : Fake paneer vs Real paneer

हम vegetarian लोगों के लिए, party में कुछ special arrangements करना हो तो सबसे पहले जो याद आता है तो वो है पनीर...

हमारी हर दावत की शान होता है पनीर। फिर वो चाहे कोई official party हो या unofficial.

बच्चों की birthday party हो, हम लोगों की anniversary party हो या marriage party. 

मतलब ज़रा कुछ special events हुए नहीं कि, पनीर की एक recipe तो पक्की। 

इसका बहुत बड़ा कारण यह है कि, मौसम कोई हो, state कोई हो, पनीर हमेशा मिल जाता है, सबको बहुत पसंद आता है, और सबकी बड़ी बात, premium dish मानी जाती है।

लेकिन आज हम आपको इसकी कोई recipe बताने नहीं जा रहे हैं, बल्कि उससे भी important बात बताने जा रहे हैं, जो हर पनीर‌ lover को जाननी चाहिए। 

पनीर, असली है या नकली? 

जानना चाहते हैं कि क्यों? 

क्योंकि, कई बार पनीर खाने की वजह से बदहजमी हो जाती है या फिर सेहत बिगड़ जाता है ऐसे में आपको समझ जाना चाहिए कि जो पनीर आप ने खरीदा था, क्या वो वह असली नहीं है? 

अब आपके मन में यह सवाल आ रहा होगा कि इसकी पहचान कैसे की जाए? तो यह बिल्कुल भी मुश्किल नहीं है इसका हल हम आपको बताने जा रहे हैं आइए जानते हैं असली और नकली पनीर की पहचान कैसे करते हैं 

नकली पनीर की पहचान

 

By Rubbing

जब भी बाजार से पनीर खरीद कर लाए तो उसके एक टुकड़े को हाथ से मसलकर देखिए, अगर वह एक ही बार में चूरा बन जाता है, तो समझ लें मिलावटी है। इसे skimmed milk Powder से बनाया जाता है जिसकी वजह से ऐसा होता है।

Treat with Iodine 

पनीर के एक block को पानी में डाल कर उबालिए और Iodine tincture की कुछ बूंदें डालकर कुछ सेकंड के लिए छोड़ दीजिए, अगर यह नीला पड़ जाएगा इसका मतलब आप ने नकली पनीर खरीदा है

By taste and texture

सबसे आसान तरीका है कि पनीर का एक टुकड़ा खा कर देखें, अगर खाने में यह रबड़ की तरह खींचता है तो समझ जाइए यह नकली है इसके अलावा यह छूने में सख्त है तो भी पनीर नहीं खरीदना चाहिए 

Treat with soyabean or arhar dal powder

एक तरीका यह भी है, पनीर के एक block को उबाल लीजिए, जब पनीर ठंडा हो जाएगा तब इस पर सोयाबीन या अरहर की दाल का पाउडर छिड़क 10 मिनट के लिए रखें अगर पनीर लाल पड़ जाता है इसका मतलब इसमें Urea की मिलावट की गई है। 

तो अब से पहले आप पनीर की जांच कर लें, उसके बाद ही उससे अपनी favourite dish बनाएं।

Tuesday, 26 July 2022

Poem: माँ का अस्तित्व

अभी बच्चों के दसवीं और बारहवीं के परिणाम घोषित हुए हैं, जिसमें ईश्वर की कृपा और अपने सभी लोगों के आशीर्वाद से बच्चों के बहुत अच्छे परिणाम आए हैं। सभी बच्चों को बहुत सारी बधाइयां, शुभकामनाएं एवं आशीर्वाद...

उन सभी माँ के प्रेम, समर्पण और प्रसन्नता को समर्पित आज की कविता...

माँ का अस्तित्व 



बच्चे की सफलता पर, 

किसी ने माँ से पूछा।

उसके सफल होने से,

आप ने क्या है पाया? 

नाम, यश, कीर्ति सब उसकी, 

आपके हिस्से क्या आया? 

माँ ने बड़े प्यार से, 

अपने बच्चे का माथा चूमा।

फिर अपने अस्तित्व को टटोला,

कुछ देर बाद, उसने बोला,

मेरे पंखों को परवाज़ मिल गये। 

सुर को मेरे, साज मिल गये। 

जो सपने थे अधूरे,

पूरे वो आज हो गए।

जी रही थी मैं,

 आज तक जिस आस में, 

उस आस को मायने मिल गये।

माँ के अस्तित्व को,  

जीने के बहाने मिल गये।।

Monday, 18 July 2022

Article: शिव जी को भांग और धतूरा प्रिय क्यों?

सावन का पवित्र महीना 14 जुलाई 2022 से शुरू हो चुका है जोकि 12 अगस्त 2022 तक रहेगा। 

भगवान शिव को सावन माह अति प्रिय होता है। इस माह शिवभक्त महादेव की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और व्रत रखते हैं। इस पूजा में उन्हें ऐसी चीजें अर्पित की जाती है जो शिवजी को अत्यंत प्रिय है। 

वैसे तो शिवलिंग पर कई चीजें चढ़ाई जाती हैं। लेकिन शिवजी की प्रिय चीजों में बेलपत्र, भांग और धतूरा शामिल है। 

कहा जाता है कि इन चीजों को पूजा में अर्पित करने से महादेव प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों को सर्वमनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर क्यों शिवलिंग पर भांग और धतूरा चढ़ाया जाता है। 

सावन के पूरे महीने में भगवान शिवजी की पूजा की जाती है। इस माह पड़ने वाले सोमवार का सावन के व्रत में सबसे ज्यादा महत्व माना जाता है, क्योंकि भगवान शिव को माह में सबसे प्रिय माह, सावन लगता है और दिन में सोमवार। इसलिए जो शिव भक्त, सावन के पूरे महीने व्रत नहीं रख पाते हैं, वो सावन के सारे सोमवार को अवश्य व्रत रखते हैं।

आज सावन का पहला सोमवार है, अतः हमने सोचा, कि आज यही लेख डालें कि भगवान शिव को भांग और धतूरा क्यों चढ़ाते हैं? आखिर क्यों भोलेनाथ को भांग और धतूरा अति प्रिय है?

शिव जी को भांग और धतूरा प्रिय क्यों?

शिव जी को भांग और धतूरा चढ़ाने का संबंध समुद्र मंथन की कथा से जुड़ी हुई है। भगवान शिव को भांग और धतूरा चढ़ाने का अर्थ यह भी है कि मन से कड़वाहट तो दूर करें और अपने वाणी व व्यवहार में मधुरता लाएं। यदि मन में कड़वाहट नहीं होगी तो ईश्वर तो स्वतः ही मिल जाएंगे।

पौराणिक कथा के अनुसार कहा जाता है कि देवताओं और असुरों के बीच जब समुद्र मंथन हुआ तो उसमें हलाहल नाम का विष निकला। 

जब विष निकला तो, सब एक दूसरे की ओर देखने लगे, क्योंकि अच्छी चीज निकलने से दानव और देव दोनों लेना चाहते थे। पर विष कोई नहीं लेना चाहता था।

फिर विष, कोई साधारण विष नहीं बल्कि हलाहल विष था, जिसका बहुत घातक असर था। तभी, जो बहुत ही भोले और मस्त मलंग हैं, जो अभय हैं, ऐसे गुणों से युक्त हमारे भोलेनाथ, ने सृष्टि को इस विष से बचाने के लिए स्वयं यह विष पी लिया। 

जिससे भोलेनाथ का कंठ नीला पड़ गया इस कारण शिवजी को नीलकंठ भी कहा जाता है। विष का सेवन करते ही शिवजी व्याकुल होने लगे।  

देवताओं और अश्विनी कुमारों ने शिवजी को भांग, धतूरा और बेलपत्र को दूध में मिलाकर औषधि के रूप में पिलाया। इसके बाद शिवजी की व्याकुलता दूर हुई। तब से ही भगवान शिव को भांग धतूरा अतिप्रिय है और भक्त पूजा में उन्हें उनकी प्रिय चीजें अर्पित करते हैं। इसलिए शिवजी की पूजा में भांग और धतूरा चढ़ाने का विधान है।

आप सभी को सावन के पहले सोमवार की हार्दिक शुभकामनाएँ 💐

भगवान शिव, हम सब पर अपनी कृपा दृष्टि बनाएं रखें 🙏🏻🙏🏻

बम बम भोले🕉️ 🔱