Friday, 23 September 2022

Article : राजू श्रीवास्तव - एक प्रेरणा

 राजू श्रीवास्तव - एक प्रेरणा

राजू श्रीवास्तव, एक ऐसा नाम, जो प्रेरणा से ओत-प्रोत है, जिन्होंने सिद्ध किया कि अगर आप में दृढनिश्चय हो तो सफलता आपके कदम चूमेगी ही।

सफलता के लिए, न तो looks मायने रखते हैं, न ही nepotism, न ही godfather, न ही रुपए पैसे और इन्होंने तो यह भी सिद्ध कर दिया कि कामयाबी के लिए पढ़ाकू होना भी कोई benchmark नहीं है।

आप कहेंगे कि फिर मायने क्या रखता है? 

मायने रखता है, आप का talent, determination, continuous efforts & ख़ुद पर belief.

आप कहेंगे कि talent तो जरुरी है, पर वह ही न हो तो?

तो हम कहेंगे कि कोई भी ऐसा नहीं होता है, जिसमें कोई भी talent ना हो, सब में कोई न कोई talent तो होता ही है। ईश्वर ने हर एक को कोई ना कोई talent अवश्य दिया है। बस जरूरत है तो उस talent को पहचानने की, दृढनिश्चय करने की और निरंतर लक्ष्य को पाने के लिए प्रयासरत रहने की।

राजू श्रीवास्तव ने भी जब stand-up comedian बनने की इच्छा सबको बताई थी, तो उनका profession सुनकर किसी ने उनकी बहुत तारीफ नहीं की थी, बल्कि बहुत सारे ताने ही मिले थे कि "भला, यह भी कोई काम हुआ!" "यह तो शौक होता है, इससे पैसे थोड़ी कमाए जाते हैं।"

लेकिन उन्होंने किसी बात की परवाह नहीं की। जब उन्हें काम मिलना आरंभ हुआ, तब मात्र ₹50 से उन्होंने अपनी stage shows की शुरुआत की थी; किसी से उन्हें इस काम के लिए सम्मान भी नहीं मिलता था।

पर वो डटे रहे, अपनी मेहनत और लगन के साथ...

आख़िरकार, उनकी मेहनत और उनका talent रंग लाए, उन्हें काम भी मिला और नाम भी, साथ ही धन-धान्य भी। अगर सूत्रों की मानें तो हाल में वह उसी एक stage show के वह 5 से 10 लाख रुपए charge करते थे।

उन्हें ऐसी पहचान मिल गई कि वो भी सितारा बन कर उभर आए। उसके बाद तो वे TV, movies सब में नज़र आने लगे थे।

TV artists, फिल्मी सितारे, अभिनेता, नेता सभी के साथ तो, राजू श्रीवास्तव नज़र आते थे। 

राजू श्रीवास्तव, इस तरह से अपनी रचनाओं में हास्य व्यंग को पिरोते थे कि, कुछ क्षण के लिए वे हम सबसे जुड़ जाते थे। और उनका वह काल्पनिक किरदार, 'गजोधर भइया' भी ऐसा गज़ब का था, कि वो मात्र एक कलपना है, इसका भी एहसास नहीं होता था।  राजू श्रीवास्तव में जिंदादिली और spontaneity कमाल की थी। उनकी किस्सागोई से, हम सब अपने गमों को भूलाकर, उनके साथ कहकहे लगाने लगते थे।

राजू श्रीवास्तव जी ने सबको बता दिया, आप किसी भी field में successful हो सकते हैं, famous हो सकते हैं, कुछ कर के दिखा सकते हैं। बस करना वो चाहिए, जिसमें आप माहिर हों, जिसमें आप कुछ ऐसा कर सकते हैं, जो औरों से अलग हो। साथ ही दृढ़निश्चय रहें और बहानेबाज न बनें...

किसी को हंसाने का कार्य दुनिया में सबसे कठिन होता है, पर उसके माहिर फनकार – राजू श्रीवास्तव – सामने हों तो कोई भी अपनी हंसी रोक सके, यह नामुमकिन है।

परंतु वे इंसान, जो हम सब को हँसाने में माहिर थे, वे अब चिर निद्रा में लीन हो गए हैं।

वे महान हैं और उन पर मेरा article लिखना, उनके लिए कोई बड़ी बात नहीं है।

पर हमारे लिए इस विषय पर article लिखने का सिर्फ एक ही उद्देश्य है — अगर अभी तक, आप नहीं सोच पाए हैं कि किस ओर आगे बढ़ना है; तो एक बार राजू श्रीवास्तव जी के विषय में जरुर सोचिएगा, उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दीजिएगा और एक बार अपने मन से पूछिएगा कि, 'ऐ दिल मुझे बता, मेरा कौन-सा रास्ता, कौन-सी मंजिल?' फिर आप को भी दुनिया पर छा जाने से कोई नहीं रोक सकता।

राजू श्रीवास्तव जी, हास्य जगत की दुनिया में आप सदैव अमर रहेंगे। हम सब के दिलों में हमेशा रहेंगे, एक प्रेरणा बनकर...

आप को शत् शत् नमन 🙏🏻

ईश्वर आपकी महान आत्मा को मोक्ष प्रदान करें 🙏🏻🙏🏻



Thursday, 22 September 2022

Article : लड़कियाँ कितनी सुरक्षित?

 लड़कियाँ कितनी सुरक्षित? 



आज का हमारा यह article, एक बहुत important news और साथ ही एक ऐसी सोच जिसके बारे में अब awareness जरूरी है। 

लड़कियाँ कितनी सुरक्षित? 

यह एक बहुत बड़ा सवाल है, और तब यह और बड़ा बन जाएगा, जब आप article पूरा पढ़ेंगे, अतः इसे पूरा अंत तक अवश्य पढ़िएगा। क्योंकि हम इसमें आपको ऐसी घटना के विषय में बताने जा रहे हैं, जो पूर्णतया सत्य है और हमें सोचने को भी मजबूर कर देगी...

यह घटना है, एक girls hostel की है, जहाँ लड़कियों की bathing के समय की अश्लील videos बना कर दूसरों को send की जा रहा थीं। और हैरानी की बात यह है कि वो videos बनाने का काम उस hostel में रह रही एक लड़की, एक साथ पढ़ने वाली छात्रा, ही कर रही थी।

और जिन लड़कियों के videos बने, उनमें से, कहा जा रहा है कि एक ने suicide भी कर ली है; वहीं कुछ छात्राओं के लिए यह बताया जा रहा है कि वह self-harm कर रही हैं। 

मतलब आप समझ रहे हैं? 

अब लड़कियों को केवल लड़कों से सावधान रहने की नहीं बल्कि लड़कियों से भी सावधान रहने की जरूरत है। 

एक लड़की होकर, अगर वो दूसरी लड़की की अस्मिता (esteem), अस्तित्व (identity) या वेदना (pain) नहीं समझ सकती है, तो किसी पर भी विश्वास करना कितना कठिन है।

या दूसरे शब्दों में कहें तो, लड़कियों को हर क्षण हर पल, सावधान रहने की आवश्यकता है, वरना कब, कहाँ, कौन आप का फायदा उठाकर चल देगा, कोई नहीं जानता...

जिस घटना का हमने जिक्र किया है, यह एक सत्य घटना है। हमने college, hostel और उस लड़की का नाम mention नहीं किया है, क्योंकि इस article का उद्देश्य किसी की बदनामी करना नहीं है। बल्कि यह उद्देश्य है कि लड़कियों को किस हद तक सुरक्षित रहना चाहिए।

यह घटना, कहीं भी, कभी भी हो सकती है, लेकिन हमें अपनी बेटियों को पूर्णतः सचेत करना आवश्यक है। और ऐसा कुछ किसी और बेटी के साथ ना हो, इसी सोच के तहत हमने इस article को post किया है। इस बात पर विशेष ध्यान दें।

सतर्क रहें, सुरक्षित रहें। 

Tuesday, 20 September 2022

Article : हिन्दी भाषा का अस्तित्व

हिन्दी भाषा का अस्तित्व 


अभी जब हिन्दी पखवाड़ा चल रहा है तो हमने सोचा, हम भी हिन्दी भाषा का जितना अधिक प्रचार-प्रसार कर सकते हैं, करें।

जब हिन्दी भाषा का प्रचार-प्रसार व प्रयोग करेंगे, तभी हिन्दी भाषा को वो अधिकार मिलेगा, जिसकी वो अधिकारिणी है। अर्थात राष्ट्रभाषा बनने का मान।

अब जब बात चली ही है तो, अभ्युदय से प्रारंभ होनी चाहिए।  माँ भारती‌‌ के कोटि कोटि प्रणाम के साथ ही  यह लेख आरंभ कर रहे है।

  • उत्पत्ति - हिंदी भाषा की उत्पत्ति, संस्कृत भाषा से हुई है। 
  • संस्कृत भाषा, विश्व की सर्वक्षेष्ठ भाषा है। संस्कृत से बढ़कर कोई भी वैज्ञानिक भाषा नहीं है। पर यह भाषा थोड़ी कठिन भी है।
  • अतः हर कोई इसके सभी शब्दों का उच्चारण शुद्धता के साथ नहीं कर पाता था, अतः ऐसी भाषा की उत्पत्ति की गई, जो संस्कृत भाषा जैसी वैज्ञानिक तो हो, साथ ही साथ सरल व सहज भी हो; जिससे प्रत्येक व्यक्ति उससे जुड़कर अपने ह्रदय के हर भाव को व्यक्त कर सके। और ऐसी ही वैज्ञानिक, सरल व सहज है, हम सब की प्रिय भाषा - हिन्दी।
  • हिंदी, भारतीय गणराज्य की राजकीय और मध्य भारत की आर्य भाषा है।
  • हिंदी भाषा की लिपि देवनागरी हैं। (लिपि अर्थात हम किसी भाषा को लिखित रूप में किस तरह से लिखते हैं।)
  • हिन्दी को भारत की आधिकारिक भाषा माना जाता है।
  • भारत में हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए, एक निदेशालय निर्मित किया गया है, जिसे केंद्रीय हिंदी निदेशालय कहते हैं। 

यह तो हुई उत्पत्ति, अब जान लेते हैं, हिंदी भाषा का कितने लोग प्रयोग करते हैं।

आप को हर्ष और गर्व की अनुभूति होगी कि हमारी हिंदी भाषा, विश्व में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली, तीसरी भाषा है।

इसमें मेंडरिन प्रथम स्थान पर, अंग्रेजी द्वितीय स्थान और हिंदी तृतीय स्थान पर है। 

मेंडरिन भाषा, चीन की राष्ट्रभाषा है। वहाँ की सर्वाधिक जनसंख्या के कारण ही मेंडरिन प्रथम स्थान पर है। पर मेंडरिन भाषा, केवल चीन में ही बोली जाती है।

अंग्रेजी भाषा, इंग्लैंड की राष्ट्र-भाषा है। इंग्लैंड की जनसंख्या तो अधिक नहीं है, पर अंग्रेजी भाषा बहुत से देशों में बोली जाने वाली भाषा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि ब्रिटिश सरकार ने जहाँ जहाँ भी शासन किया, वहाँ अपनी भाषा को स्थापित कर दिया, लोग को बाधित कर दिया, अंग्रेजी भाषा के प्रयोग के प्रति...

यहाँ तक कि कुछ देशों में अंग्रेजी भाषा का प्रयोग इतना अधिक है कि वो उनकी मातृभाषा से ज्यादा बोली जाती है। 

अब आते हैं हमारी राजभाषा हिंदी भाषा पर: यह विश्व में तीसरे स्थान पर है, क्योंकि हमारी जनसंख्या, विश्व में दूसरे स्थान पर है। साथ ही हिन्दी भाषा भी अन्य देशों में बहुतायत में बोली जाती है। 

आइए आपको बताते हैं कि भारत के बाहर हिन्दी किन-किन देशों में बोली जाती है। इनमें से पाकिस्तान, भूटान, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका, मालदीव्स, म्यानमार, इंडोनेशिया, सिंगापुर, थाईलैंड, चीन, जापान, जर्मनी, न्यूज़ीलैड, दक्षिण अफ्रीका, मॉरिशस, यमन, युगांडा, कनाडा, आदि में हिंदी बोलने वालों की अच्छी-खासी संख्या है। इसके आलावा इंग्लैंड, अमेरिका और मध्य एशिया में भी इसे बोलने और समझने वाले लोगों की अच्छी संख्या है।

सोचिए, भारत ने तो किसी भी अन्य देश पर शासन नहीं किया, ना ही किसी अन्य देश को बाधित किया कि वह हिंदी बोलें, फिर भी हिन्दी भाषा अन्य देशों में भी बोली जाती है। 

सोचिए, भारत की जनसंख्या दूसरे स्थान पर है, साथ ही अन्य देशों में भी बोली जाती है, फिर भी हिन्दी तृतीय स्थान पर है, अगर हिन्दी भाषा अन्य देशों में नहीं बोली जाती तो शायद वो तृतीय स्थान पर भी न होती। 

ऐसा इसलिए है, क्योंकि हिंदी भाषा की विशेषता जो अन्य देशों को समझ आ गई है, वो हम समझना ही नहीं चाहते हैं। ना ही हम अपनी हिंदी को वह सम्मान देना चाहते हैं जो चीन और इंग्लैंड ने अपनी राष्ट्रभाषा को दिया हुआ है। 

आखिर हम कब तक गुलामी को ऐसे ही ढोते रहेंगे और हिंदी भाषा को उसका अस्तित्व, उसका सम्मान प्रदान नहीं करेंगे?

आखिर क्यों नहीं, हम अपनी राजभाषा को राष्ट्र-भाषा का सम्मान दे देते हैं।

यदि भारत में सब लोग हिंदी भाषा का प्रयोग करने लगें तो वो दिन दूर नहीं, जब हिन्दी, विश्व में बोली जाने वाली भाषाओं में प्रथम स्थान प्राप्त कर लेगी। 

तो चलिए, हिंदी भाषा का प्रयोग हर क्षेत्र में कर के एक प्रयास करते हैं, हिंदी भाषा को विश्व में प्रथम स्थान पर पहुंचाने का, हिंदी भाषा को उसका अस्तित्व दिलाने का, उसे राजभाषा से राष्ट्र-भाषा बनाने का...

जय हिन्द जय हिन्दी 🇮🇳