Monday, 13 August 2018

Story Of Life : रत्ना भाग -२


रत्ना और राजन की किस तरह मुलाकात हुई, और वो उसे घर, अपने दादा जी के पास ले गयी अब आगे.....

रत्ना भाग -२ 


पर राजन की हालत उसके एहसान के आगे दादा जी कुछ नहीं बोले।
राजन बहुत ही ज़िंदादिल इंसान था। पूरे घर से घुलने-मिलने में उसे ज्यादा समय नहीं लगा। वो भी बड़ा ही निडर, जोशीला था, तो उसकी सबसे ज्यादा तो दादा जी और रत्ना से ही पटने लगी।
खुशवंत जी का अपना बेटा राजीव S.P. था। और एक दंगे में Prime minister  अरुण देव और public की जान बचाते हुए देश पर शहीद हो चुका था। उनके खेतों को संभालने वाला कोई नहीं था, और वो बूढ़े भी हो चुके थे।
राजन उन्हें बहुत पसंद आने लगा था। राजन और रत्ना भी दिन भर साथ रहा करते थे। अत: उन्होंने राजन और रत्ना का विवाह तय कर दिया।
रत्ना और राजन दोनों बहुत खुश थे।

विवाह की सारी तैयारी शुरू हो गयी। रत्ना के हाथों में मेहंदी लग गयी थी।

जब P.M. अरुण देव जी को पता चला की S.P. राजीव की बेटी की शादी का invitation आया है, तो उन्होंने आने को हां कर दिया।
रत्ना को जब पता चला कि P.M. अरुण देव  जी भी आ रहे हैं, तो वो इसकी खुशखबरी देने राजन के पास चली गयी।
वो guest house जहां राजन के रुकने की व्यवस्था की गयी थी, वहाँ पंहुची ही थी, कि उसे.....


जहाँ राजन रुका हुआ था, वहाँ क्या हुआ.... जानते हैं रत्ना (भाग -3) में 

Sunday, 12 August 2018

Story Of Life : रत्ना

रत्ना


रत्ना retired  मेजर खुशवंत सिंह की लाली पोती थी। चुलबुली, मनमोहिनी मासूम सी रत्ना को देशभक्ति तो दादा जी से विरासत में मिली थी। दादा जी की तरह रत्ना में भी देश के लिए मर मिटने का जज्बा कूट-कूट के भरा था और उन्हीं की तरह वो भी बहुत ही जोशीली और हिम्मत वाली थी।
एक दिन अपनी दोस्तों के साथ वो पहड़ियों में घूमने गयी थी, सभी photo ले रहीं थी
जोश जोश में रत्ना ज्यादा ही ऊंची पहाड़ियों की तरफ चली गयी। वो selfy ले रही थी, कि अचानक उसका पैर imbalance हो गया, और वो नीचे गिरने लगी, उसकी सारी दोस्तें चिल्लाने लगीं। तभी एक मजबूत हाथों ने रत्ना को थाम लिया।
वो एक गठीला नौजवान था, बिखरे हुए बाल, सूखे होंठ और फटे हुए कपड़ों में।
रत्ना ने उसको धन्यवाद दिया। और पूछा वो कौन है? यहाँ इस हालत में कैसे है?
जी, आप ने तो सवालों कि बौछार ही कर दी है। मैं राजन हूँ। मुसाफिर हूँ, थोड़ी दूर से आया हूँ। मेरा सारा समान किसी ने चुरा लिया है, दो दिन से कुछ खाने को नहीं मिला है।
रत्ना को उसकी बातें सुन कर तरस आ गया, फिर राजन ने उसकी जान भी बचाई थी, तो वो अपने आपको, राजन से साथ चलने को कहने से नहीं रोक पायी। राजन भी तुरंत मान गया, वैसे भी उसके पास कोई ठिकाना भी तो नहीं था।
रत्ना उसे अपने साथ घर ले गयी, और उसने दादा जी को बताया, कि कैसे राजन ने उसकी जान बचाई। और वो भी बताया, जो आपबीती राजन ने उसे बताई थी। फिर वो दादा जी से बोली, दादा जी मैंने ठीक किया ना, इन्हें अपने साथ ला कर?
दादा जी को अनजाने व्यक्ति पर एतबार नहीं था,....


क्या दादा जी रत्ना के इस तरह से राजन को घर ले आने से क्रोध से आग बबूला हो गए या उन्हे ठीक लगा?जानने के लिए पढ़ें रत्ना (भाग -2)

Saturday, 11 August 2018

Kids Story : साहस और सूझबूझ

साहस और सूझबूझ


ऋषभ और ऋतिक दोनों बहुत पक्के दोस्त थे, दोनों ही दोस्तों में मस्ती और साहस का अनोखा संगम था। उन लोगों की इस आदत से दोनों के माँ-पापा बहुत ही परेशान रहते थे। क्योंकि वो कब  कौन सा नया कारनामा कर के लौटेंगे, कोई नहीं जानता था।
ऐसे ही एक दिन मस्ती मस्ती में वो दोनों अपनी अपनी साइकिलों से जंगल की ओर निकल गए।
जंगल पहुँच कर ऋषभ बोला, यहाँ से हम लोग साइकिल छोड़ के आगे की तरफ दौड़ते हुए जाएंगे, और उस चट्टान को छू कर जो जल्दी लौटेगा, उसको दूसरा pizza party देगा।
ऋतिक कौन सा कम था, सुनते ही उछल पड़ा, बोला अपने कहे से मुकरना नहीं। हाँ हाँ, नहीं मुकरुंगा।
दोनों इस बात से बेखबर, तेज़ी से दौड़ने लगे, कि वहाँ एक खूंखार शेर पास ही की गुफा में सोया हुआ था।  
पत्तों की खरखराहट के शोर से शेर जग गया। तभी शेर की गुफा, पहले ऋषभ ने फिर ऋतिक ने भी cross की। दोनों को देखकर शेर की भूख बढ़ गयी।
वो दहाड़ता हुआ अपनी गुफा से बाहर निकल आया।
एक दम से शेर की दहाड़ सुन कर दोनों बुरी तरह घबरा गए। साइकिल भी वो लोग पीछे छोड़ आए थे। ऋषभ ज़ोर से चिल्लायाऋतिकछोटे-छोटे पत्थरों को उठा के जल्दी से पेड़ पर चढ़ो। दोनों छोटे- छोटे पत्थरों को उठा कर पेड़ की तरफ भागने लगे।
ऋतिक तो पेड़ पर गया, पर ऋषभ पत्थरों के साथ सूखे टहनी-पत्तों के बीच उलझ गया। शेर ऋषभ की ओर बढ़ने लगा। ऋतिक को लगा आज तो उसने ऋषभ को हमेशा के लिए खो दिया है। पर तभी उसे एक युक्ति सूझी। उसने बहुत ही जोश में भर के ऋषभ को आवाज़ लगाई, दोस्त- आज हमारी दोस्ती और साहस, इस शेर को हरा देगी। हिम्मत मत हारना, मेरे दोस्त। हम दोनों को कोई कभी भी अलग नहीं कर सकता। मैं पत्थरों से शेर को थोड़ी देर रोकने की कोशिश करूंगा, तब तक तुम पत्थरों को रगड़ के पत्तों में आग लगाने की कोशिश करो। इसके बाद उसने पूरी ताकत से शेर पर ताबड़तोड़ पत्थर फेंकने शुरू कर दिये। उससे शेर की चाल की रफ्तार में कमी तो आई, पर ऋतिक शेर को आगे बढ़ने से रोक नहीं पा रहा था। उधर ऋषभ दो पत्थरों को रगड़ने में लगा था। शेर भी पत्थरों के वार से और खूंखार होता जा रहा था। ऋतिक के पत्थरों के फेंकते जाने से पेड़ बुरी तरह हिल रहा था। और इस सब में, वो डाल टूट गयी, जिसपर ऋतिक बैठा हुआ था। ऋतिक को गिरा हुआ देख कर शेर ऋतिक की ओर ही उछल पड़ा, ऋतिक ये देखकर एकदम से बेहोश हो गया। जब उसे होश आया, तो वो अपने दोस्त के साथ था, उसने देखा ऋषभ के हाथ जले हुए थे। उसने पूछा, ये क्या हुआ? और शेर कहाँ गया?

ऋषभ बोला- जब वो तुम्हारी तरफ उछला था, उसी समय पत्तों में आग लग गयी थी। तो वो पत्ते मैंने उसकी तरफ उछाल दिये। और तुम तक उसके पहुँचने से पहले आग उस तक पहुँच गई। जिसके कारण वो वहाँ से भाग गया। ऋषभ की सारी बात सुन कर ऋतिक बोलाआज तुमने मेरी जान बचा ली। ऋषभ बोला- नहीं मेरे दोस्त, हम दोनों की दोस्ती, साहस और सूझबूझ ने हम दोनों की जान बचाई है। ऋतिक ने ऋषभ को अपनी साइकिल में बैठाया और दोनों घर की तरफ चल दिये। आज भी वो एक कारनामे को अंजाम दे कर लौट रहे थे, पर आज इन लोगों की दोस्ती और साहस पर सब गर्व कर रहे थे।