Wednesday, 16 December 2020

Story of Life : बहू का हिसाब

 बहू का हिसाब


रमा जी व प्रेमप्रकाश जी बहुत खुश दिखाई दे रहे थे। 

होते भी क्यों नहीं उनके एकलौते बेटे की शादी जो हो रही थी।

प्रेमप्रकाश जी एक बड़े व्यापारी थे, उनका बेटा सूरज IAS officer था, बहुत संस्कारी और देखने में भी बेहद smart था।

अपने शहर का most eligible bachelor था, उसकी शादी के लिए बहुत सारे रिश्ते आ रहे थे।

पर प्रेमप्रकाश जी नजरें एक ऐसी होनहार बहू को ढूंढ रहे थे, जिसे अपने परिवार की बागडोर सौंपे तो, जिंदगी भर नाज़ कर सकें।

आखिरकार उनकी खोज, अपने एक दोस्त के घर जाकर पूरी हुई।

प्रेमप्रकाश जी को बचपन के दोस्त हरिप्रसाद जी की बेटी सुलक्षणा बहुत पसंद आई, अपने बेटे सूरज के लिए।

हरिप्रसाद जी, प्रेम प्रकाश जी जैसे धनाढ्य तो नहीं थे, पर सुलक्षणा अपने नाम सी सुंदर सुशील और गृहकार्य दक्ष थी।

धूमधाम से विवाह संपन्न हुआ। जो भी उन्हें देखता, सब उनकी खूबसूरत जोड़ी को निहारता रहा जाता। लोग कहते, सब चाहते थे कि, प्रेमप्रकाश जी के घर उनकी बेटी जाए। और प्रेम प्रकाश जी अपने राजकुमार से सूरज के लिए आसमान से परी उतार लाएं।

 दुनिया भर की रस्मों रिवाज में हफ्ता निकल गया।

फिर सूरज और सुलक्षणा हनीमून पर चले गए। दोनों जहाँ भी घूमने जाते, ना जाने कितने उनके साथ अपनी फोटो खींचवाने लगते।

एक दिन तो, सुलक्षणा सूरज से बोल ही दी, मेरी आप से शादी हुई है और हम हनीमून मनाने आए हैं या किसी फिल्मी शूटिंग पर।

लोग हमें अकेला रहने ही नहीं देते हैं।

सूरज बोला, एक तो हम पापा के बच्चे हैं, जिनका देश में बहुत नाम है। फिर आप का पति IAS officer. पर आप को पता है सबसे बड़ी बात क्या है?

सुलक्षणा ने बड़ी मासूमियत से पूछा और वो क्या है?

मेरी बहुत हसीन, परियों की रानी से शादी हो गई है, यह कहते हुए सूरज ने सुलक्षणा को अपनी बाहों में भर लिया।

सुलक्षणा शर्म से लाल हो गई। 

ऐसे ही प्यार के स्वर्णिम पलों से भरे दस दिन कब बीत गए, पता ही नहीं चला।

वो लोग घर पहुंचे तो रोज का निमंत्रण मिलने लगा।

शादी को दो महीने बीत गए, पर सुलक्षणा को सब नया सा ही लगता था।

उसके घर में सब उसको हाथों हाथ लेते थे।

एक दिन सुलक्षणा ने रमा जी से कहा, माँ जी, मैं अब इस घर की जिम्मेदारी लेना चाहती हूँ।

रमा जी बोलीं, यह तो बहुत अच्छी बात है।  उन्होंने पूरे घर की चाबी, सुलक्षणा को सौंपते हुए कहा कि यह तुम्हारा घर है। आज से इसे अपने तरीके से संभालो।

घर की जिम्मेदारी आते ही सुलक्षणा ने पाया कि उसकी ससुराल तो उसकी सोच से बिल्कुल अलग है......

आगे पढ़ें, बहू का हिसाब (भाग -2) में......


Tuesday, 15 December 2020

Recipe : Moong ki dal ka chila

पनीर टिक्का तो आप सीख गये, तो चलिए आज आपके साथ एक और yummy recipe share करते हैं। 
शादी और parties में जिसकी stall जरुर से शामिल की जाती है।
 यह light and healthy होता है, तो हर किसी को पसंद भी होता है।
जी हांँ हम मूंग के दाल के चीले की ही बात कर रहे हैं।
हमारे बहुत से viewers की demand आती है कि वो बना तो लेते हैं, पर उसमें वो बात नहीं आती है, जो stall की रहती है।
तो आइए आज आपको tips and tricks के साथ बताते हैं, सारे राज़, जिससे आप के चीले में भी आ जाए stall वाली बात।

Moong ki dal ka chila 




Ingredients

Moong yellow/ skinned dal - ½kg.
Asafoetida/Hing - ½ pinch
Salt - according to taste
Clarified butter (Ghee)- for shallow fry
Paneer - 150 gm.
Rice flour - 1tbsp.
Ginger Julienne- 1 tsp.
Chat masala - 2tbsp.
Green chillies - according to taste
Green coriander leaves - 50 gm.
Baking powder - 1 tsp.

Method

  1. मूंगदाल को overnight के लिए soak कर दीजिए।
  2. Soaked दाल को महीन पीसकर लीजिए।
  3. पनीर को grate कर लीजिए।
  4. Chillies and coriander leaves को fine chop कर लीजिए।
  5. पनीर में हरी मिर्च, धनिया पत्ती, अदरक और नमक डालकर filling के लिए पनीर mix ready कर लीजिए।
  6. दाल में नमक, चावल का आटा और baking powder add करके अच्छे से Whip कर लीजिए।
  7. इसमें, पानी मिलाकर घोल बना लीजिए, इसकी consistency पकौड़े के घोल से पतली और डोसे के घोल से गाढ़ी होगी।
  8. डोसा बनाने वाला तवा गरम कीजिए, पूरे तवे में brush से घी apply कीजिए।
  9. Flame slow कर दीजिए।
  10. अब इसमें घोल डालकर अच्छे से पतला फैला लीजिए, जैसे डोसा बनाने के लिए घोल फैलाते हैं।
  11. तवे को lid से cover कर दीजिए, 1 minute के लिए flame high कर दीजिए।
  12. Lid हटा कर 1tsp. घी चीले में फैला कर डाल दीजिए।
  13. 2 minute के लिए slow flame कर दीजिए।
  14. चीला ऊपर से dry हो जाएगा और नीचे उसमें browning आ जाएगी।
  15. इसमें थोड़ा पनीर mix की filling और चाट मसाले को sprinkle कर लीजिए और चीला roll कर दीजिए।
  16. Now it's ready to serve.

आप इसे खट्टी मीठी चटनी के साथ serve कर दीजिए।
Chutneys की recipe आप को blog में मिल जाएगी, जिसका link यहाँ आप को दे रहे हैं -

Note 

  • मूंग के दाल का चीला बनाने में 2 to 4 hours के लिए Moong dal soak करने को कहते हैं। पर अगर आप overnight soaked करेंगे तो दाल का एक एक दाना अंदर तक फूल जाता है, जिसके तीन benifits हैं। 

(a) दाल अच्छे से फूलने से more Light हो जाती है, तो चीला भी more healthy होता है।

(b). चीला more delicious बनता है।

(c). चीला तवे पर चिपकता नहीं है।
  • दाल बिल्कुल महीन और चिकनी पीसनी है।
  • दाल को पीसते समय कम पानी डालकर पीसना चाहिए, वरना दाल महीन नहीं पिसती है।
  • तवे की heating इतनी होनी चाहिए, कि तवे पर घोल डालने पर एक जगह ही stick ना हो, easily फैल सके। 
  • पर एकदम ठंडा भी नहीं होना चाहिए, वरना चीले में  crispy texture नहीं आएगा।
  • तवे में दो तरह से proper heating रखी जा सकती है -
(a) तवे पर पानी छिड़ककर पोंछ दें। जो ज्यादातर सब करते हैं। पर इससे तवे की चिकनाई भी चली जाती है। Experts तो इसे handle कर लेते हैं पर beginners के चीले चिपकने लगते हैं।
(b) आप gas को winter में ½  minute के लिए और summer में 1 minute के लिए off कर दीजिए, इससे तवे में proper heating रहेगी और तवेे में non-stick property बनी रहती है। तो चीले चिपकते नहीं हैैं।
  • मूंग की दाल के चीले में पनीर की हल्की filling भरी जाती है, आप चाहें तो अपने taste के according ज्यादा filling भी भर सकते हैं।
  • Mostly इसमें पनीर की filling ही भरते हैं, आप अपने taste के according आलू या onion, capsicum and tomato की filling भी भर सकते हैं।
  • Baking powder डालने से चीला easily तवे की surface को छोड़ देता है। अगर आप बहुत अच्छे से whip कर लेते हैं तो baking powder avoid कर सकते हैैं।
  • Rice flour add करने से बहुत अच्छा crispy texture आता है, जो चीले को बहुत tasty बनाता है।
  • आप के पास rice flour ना हो तो आप, दाल soak करते समय 1 मुठ्ठी rice भी डाल दीजिए।
  • आपको crispy texture नहीं चाहिए तो आप rice avoid भी कर सकते हैं और चीले मोटे भी बना सकते हैं।
 तो बस recipe, tips and tricks follow कीजिए, और आज ही बना कर ठंडक का लुत्फ उठाएं।

जल्दी ही हरी धनिया की variety की चटनी की recipes share करेंगे.....

So stay tuned........



Monday, 14 December 2020

Short Story : अहं

 अहं 



अहम हर क्षेत्र में बहुत ही होनहार था, हर काम में नम्बर वन। पर एक ही कमी थी, उसे इस बात का बहुत अहं था, कि वो सर्वश्रेष्ठ है।

बस यही कारण था कि, उसकी किसी से ज्यादा दिन बनती नहीं थी।

सौम्या भी सर्वगुणसंपन्न थी, पर वो नाम सी ही, सौम्य और शांत स्वभाव की थी।

एक दिन अहम और सौम्या दोनों को एक ही project पर काम करना था।

दोनों ने बहुत अच्छा project तैयार किया। पर आदतन अहम, सौम्या से बोला, तुमने data and details तो बहुत अच्छी रखें हैं, फिर भी अभी project बनाने में तुम्हें बहुत कुछ सीखना है।

सौम्या यह सुनकर मायूस हो गई, आज तक सभी ने उसके काम की बढ़ाई ही की थी, फिर आज कहाँ कमी रह गई? 

वो सोच ही रही थी कि board room से दोनों की call आ गई।

दोनों ने अपने अपने project को head के सामने रखा।

Project देखने के बाद head, सौम्या से बोलीं, इतना अच्छा project बनाने के बाद भी आप कम confident क्यों हैं?

सौम्या, अहम को देख रही थी, और अहम ऐसे सौम्या को देख रहा था, मानों कह रहा हो, मैंने तो पहले ही कहा था कि तुम perfect नहीं हो।

तभी head बोलीं, सौम्या आप का project select हुआ है।

यह सुनकर अहम को झटका लगा, कि उसके आगे कोई और कैसे निकल सकता है।

अहम जी, आप रुक जाएं, बाकी सब जा सकते हैं।

सबके जाने के बाद, head बोलीं, project आपका भी अच्छा था पर follow करने लायक नहीं।

क्या मतलब है आपका? अहम को ऐसा किसी ने कभी नहीं कहा था।

मेरा मतलब है कि आप और सौम्या दोनों के project एक से बढ़कर एक थे। यह कहना कि किस का ज्यादा अच्छा है, बोल पाना असंभव था।

पर आप के व्यवहार ने मुझे निर्णय लेने में सुविधा प्रदान कर दी।

आप कहना क्या चाहती हैं?

देखिए follow उसे किया जाता है, जो सबको लेकर चले, ना कि उसे, जिसे सबको नीचा दिखाना होता है।

आज पहली बार किसी ने अहम को आईना दिखाया था।

बाहर निकल कर, अहम सोचने लगा, सही बात थी, सौम्या का project किसी तरह से कम नहीं था। 

अहम के अहं को ऐसी चोट लगी, कि वो बहुत अच्छे से समझ गया था कि, किसी को नीचा दिखाकर या व्यर्थ में छोटा साबित करने से आप आगे नहीं निकल सकते।

बड़प्पन सबको साथ लेकर चलने में होता है। सोच के इस बदलाव ने अहम को सबका प्रिय बना दिया।