Tuesday, 2 November 2021

Stories - Devotional : धनतेरस पर्व का आरंभ व पावन कथा

धनतेरस पर्व का आरंभ व पावन कथा

हमेशा मन में यही सोचा करते थे कि धनतेरस का यह नाम क्यों पड़ा? आखिर धन और तेरस का आपस में क्या सम्बंध है? 

पर आज हमें अपने प्रश्न के उत्तर मिल गये, तो सोचा आज यही साझा करते हैं, जिससे सभी को ज्ञात हो सके कि धनतेरस का नाम करण कैसे हुआ। और साथ ही यह भी ज्ञात हो कि इसमें, धन्वन्तरि देव, कुबेर जी व लक्ष्मी माता की पूजा की जाती है।

आप सभी को धनतेरस पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ 💐 

🙏🏻❤️माता लक्ष्मी जी की कृपा हम सब बनी रहे ❤️🙏🏻


कार्तिक माह (पूर्णिमान्त) की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन समुद्र-मंथन के समय आज ही के दिन आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के जन्मदाता भगवान धन्वन्तरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए इस तिथि को धनतेरस या धनत्रयोदशी के नाम से जाना जाता है। धन्वन्तरि जी को आयुर्वेद का पहला वैद्य माना जाता है।

‌‍ धन्वन्तरि को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। इनकी चार भुजाएं होती हैं। दो भुजाओं में शंख और चक्र धारण किये हुये हैं। शंख से सांस की बीमारियां दूर होती है और वातावरण शुद्ध होता है, जबकि दो अन्य भुजाओं मे से एक में जलूका और औषधि तथा दूसरे मे अमृत कलश लिये हुये हैं।

भारत सरकार ने धनतेरस को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है।

धन के देवता कुबेर और मृत्यु के देवता यमराज की इस दिन पूजा करने का विधान है। उत्तर दिशा को कुबेर का स्थान माना जाता है। इस स्थान को जितना हो सके खाली रखें और सुबह पानी से धोकर साफ करें। फिर तांबे के बर्तन में गंगा जल लेकर उत्तर दिशा और तिजोरी में छिड़काव करें, इस उपाय से कुबेर के स्वागत की तैयारी होती है।

कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी

जैन आगम में धनतेरस को 'धन्य तेरस' या 'ध्यान तेरस' भी कहते हैं। भगवान महावीर इस दिन तीसरे और चौथे ध्यान में जाने के लिये योग निरोध के लिये चले गये थे। तीन दिन के ध्यान के बाद योग निरोध करते हुये दीपावली के दिन निर्वाण को प्राप्त हुये। तभी से यह दिन धन्य तेरस के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

इस दिन को मनाने के पीछे धनवंतरी के जन्म लेने की कथा के अलावा, दूसरी कहानी भी प्रचलित है। 

कहा जाता है कि एक समय भगवान विष्णु मृत्युलोक में विचरण करने के लिए आ रहे थे तब लक्ष्मी जी ने भी उनसे साथ चलने का आग्रह किया।

तब विष्णु जी ने कहा कि यदि मैं जो बात कहूं तुम अगर वैसा ही मानो तो फिर चलो। तब लक्ष्मी जी उनकी बात मान गईं और भगवान विष्णु के साथ भू-मंडल पर आ गईं।

कुछ देर बाद एक जगह पर पहुंचकर भगवान विष्णु ने लक्ष्मी जी से कहा कि जब तक मैं न आऊं तुम यहां ठहरो। मैं दक्षिण दिशा की ओर जा रहा हूं, तुम उधर मत आना। विष्णुजी के जाने पर लक्ष्मी के मन में कौतूहल जागा कि आखिर दक्षिण दिशा में ऐसा क्या रहस्य है जो मुझे मना किया गया है और भगवान स्वयं चले गए।

लक्ष्मी जी से रहा न गया और जैसे ही भगवान आगे बढ़े लक्ष्मी भी पीछे-पीछे चल पड़ीं। कुछ ही आगे जाने पर उन्हें सरसों का एक खेत दिखाई दिया जिसमें खूब फूल लगे थे। सरसों की शोभा देखकर वह मंत्रमुग्ध हो गईं और फूल तोड़कर अपना श्रृंगार करने के बाद आगे बढ़ीं। आगे जाने पर एक गन्ने के खेत से लक्ष्मी जी गन्ने तोड़कर रस चूसने लगीं।

उसी क्षण विष्णु जी आए और यह देख लक्ष्मी जी पर नाराज होकर उन्हें शाप दे दिया कि मैंने तुम्हें इधर आने को मना किया था, पर तुम न मानी और किसान की चोरी का अपराध कर बैठी। अब तुम इस अपराध के जुर्म में इस किसान की 12 वर्ष तक सेवा करो। ऐसा कहकर भगवान उन्हें छोड़कर क्षीरसागर चले गए। तब लक्ष्मी जी उस गरीब किसान के घर रहने लगीं।

एक दिन लक्ष्मीजी ने उस किसान की पत्नी से कहा कि तुम स्नान कर पहले मेरी बनाई गई इस देवी लक्ष्मी का पूजन करो, फिर रसोई बनाना, तब तुम जो मांगोगी मिलेगा। किसान की पत्नी ने ऐसा ही किया।

पूजा के प्रभाव और लक्ष्मी की कृपा से किसान का घर दूसरे ही दिन से अन्न, धन, रत्न, स्वर्ण आदि से भर गया। लक्ष्मी ने किसान को धन-धान्य से पूर्ण कर दिया। किसान के 12 वर्ष बड़े आनंद से कट गए। फिर 12 वर्ष के बाद लक्ष्मीजी जाने के लिए तैयार हुईं।

विष्णुजी लक्ष्मीजी को लेने आए तो किसान ने उन्हें भेजने से इंकार कर दिया। तब भगवान ने किसान से कहा कि इन्हें कौन जाने देता है ,यह तो चंचला हैं, कहीं नहीं ठहरतीं। इनको बड़े-बड़े नहीं रोक सके। इनको मेरा शाप था इसलिए 12 वर्ष से तुम्हारी सेवा कर रही थीं। तुम्हारी 12 वर्ष सेवा का समय पूरा हो चुका है। किसान हठ पूर्वक बोला कि नहीं अब मैं लक्ष्मीजी को नहीं जाने दूंगा।

तब लक्ष्मीजी ने कहा कि हे किसान तुम मुझे रोकना चाहते हो तो जो मैं कहूं वैसा करो। कल तेरस है। तुम कल घर को लीप-पोत कर स्वच्छ करना। रात्रि में घी का दीपक जलाकर रखना और सायंकाल मेरा पूजन करना और एक तांबे के कलश में रुपए भरकर मेरे लिए रखना, मैं उस कलश में निवास करूंगी। किंतु पूजा के समय मैं तुम्हें दिखाई नहीं दूंगी।

इस एक दिन की पूजा से वर्ष भर मैं तुम्हारे घर से नहीं जाऊंगी। यह कहकर वह दीपकों के प्रकाश के साथ दसों दिशाओं में फैल गईं। अगले दिन किसान ने लक्ष्मीजी के कथा अनुसार पूजन किया। उसका घर धन-धान्य से पूर्ण हो गया। इसी वजह से हर वर्ष तेरस के दिन लक्ष्मीजी की पूजा होने लगी।

Monday, 1 November 2021

Article : पांच दिवसीय दीपोत्सव के पूजा मुहूर्त

पांच दिवसीय दीपोत्सव के पूजा मुहूर्त




पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत दो नवंबर मंगलवार को धनतेरस से होगी और छह को यम द्वितीया तक उत्सव रहेगा। चतुष्ग्रही योग में दिवाली का पर्व चार नवंबर गुरुवार को उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस दौरान लोग कुबेर और लक्ष्मी का पूजन-अर्चन कर सुख-समृद्धि की कामना करेंगे। ग्रहीय योग धनतेरस और ज्योति पर्व दिवाली को और मंगलकारी बना रहा है।

धनतेरस पर स्थिर लग्न में पूजन और खरीदारी शुभ :

दीपोत्सव का शुभारंभ दो नवंबर मंगलवार से होगा। इस दिन धनतेरस और धन्वंतरि जयंती मनाई जाएगी। 

मंगलवार सुबह 8:35 बजे से बुधवार सुबह 7:14 बजे तक रहेगा। इस दिन स्थिर लग्न में लक्ष्मी का पूजन और खरीदारी करना शुभ फलदायक रहेगा।


खरीदारी व पूजन का शुभ मुहूर्त :

सुबह नौ बजे से दोपहर 1:30 बजे तक।

शाम 7:30 से रात 9:30 बजे तक।

रात में 10:30 से 1:30 बजे तक।


स्थिर लग्न में पूजन मुहूर्त :

कुंभ : दोपहर 1:26 से 2:57 बजे तक।

प्रदोष काल : शाम छह से 7:57 तक।

सिंह : 12:28 से 2:44 बजे तक।

शुभ चौघड़िया : रात 12:28 से 1:30 बजे तक। 


नरक चतुर्दशी, छोटी दिवाली व हनुमान जयंती :


छोटी दिवाली यानी नरक चतुर्दशी और हनुमान जयंती तीन नवंबर, बुधवार को मनाई जाएगी। इस दिन यम के निमित्त चतुर्मुख दीपदान करने का विधान है।


नरक चतुर्दशी 3 नवंबर 2021 बुधवार को 09 बजकर 2 मिनट से आरंभ होगी और 4 नवंबर 2021, गुरुवार को सुबह 06 बजकर 03 मिनट पर समाप्त होगी। दोपहर 01 बजकर 33 मिनट से 02 बजकर 17 मिनट तक विजय मुहूर्त रहेगा। पूजा पाठ के लिए यह सर्वश्रेष्ठ समय है।


दीपावली व लक्ष्मी पूजन का शुभ योग :

दीपोत्सव का मुख्य पर्व दिवाली चार नवंबर गुरुवार को मनाई जाएगी। पूर्वांचली के अनुसार अमावस्या तिथि गुरुवार को सूर्योदय के पूर्व सुबह 5:31 बजे शुरू हो जाएगी जो गुरुवार को ही रात में 3:32 बजे तक रहेगी। इस दिन चतुष्ग्रही योग बन रहा है। इसमें प्रदोष काल, चित्रा नक्षत्र और स्वाति नक्षत्र रात तक व्याप्त रहेगी। रात 12:42 बजे तक प्रीति योग और आयुष्मान योग रहेगा।

अन्नकूट व गोवर्धन पूजा :

दीपोत्सव के चौथे दिन पांच नवंबर यानी शुक्रवार को अन्नकूट और गोवर्धन पूजन पांच नवंबर को होगा। इस दिन कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रतिपदा है। 

गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त- सुबह 7:59 से लेकर 10:47 तक होगा। - कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन सुबह शरीर पर तेल की मालिश करने के बाद ही स्नान करना चाहिए।


यम द्वितीया (भैया दूज) :

दीपोत्सव के अंतिम दिन छह नवंबर यानी शनिवार को यम द्वितीया (भैया दूज) का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन यमुना स्नान और दीपदान करना शुभ रहेगा।


भाई दूज शुभ मुहूर्त :

भाई दूज 06 नवंबर 2021 दिन शनिवार

भाईदूज पर तिलक का समय: दोपहर 01:10 मिनट से शाम 03:21 बजे तक रहेगा। 

तिलक अवधि: कुल मिलाकर 2 घंटा 11 मिनट की रहेगी। 

कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि आरंभ : 05 नवंबर 2021 दिन शुक्रवार को रात 11 बजकर 14 मिनट से। 

कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि समाप्त :  06 नवंबर 2021 दिन शनिवार को शाम 07 बजकर 44 मिनट पर।


चित्रगुप्त पूजा का मुहूर्त :

पूजा कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि की जाती है। इस तिथि को यम द्वितीया भी कहा जाता है। इस वर्ष किस तारीख को चित्रगुप्त महाराज की पूजा की जाएगी, जानते हैं।

 पंचांग के अनुसार 6 नवंबर 2021, शनिवार को कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि है। इसी दिन भगवान चित्रगुप्त की पूजा की जाती है। इस दिन कलम और दवात की भी पूजा की जाती है। इस दिन बहीखातों की भी पूजा की जाती है। कार्तिक शुक्ल की द्वितीया तिथि को भाई दूज का भी मनाया जाता है।

भाईदूज पर्व के साथ ही चित्रगुप्त पूजा भी की जाती है- 

चित्रगुप्त पूजा का महत्व :

भगवान चित्रगुप्त को देवलोक धर्म अधिकारी भी कहा गया है। इसके साथ ही इनका संबंध लेखन कार्य से भी है। इसी कारण इस दिन कलम और दवात की भी पूजा की जाती है। भगवान चित्रगुप्त का वर्णन पद्य पुराण, स्कन्द पुराण, ब्रह्मपुराण, यमसंहिता व याज्ञवलक्य स्मृति सहित कई ग्रंथों में मिलता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार श्री चित्रगुप्त जी की उत्पत्ति सृष्टिकर्ता ब्रह्मा जी की काया से हुई है। वहीं एक अन्य कथा के अनुसार इनकी उत्पत्ति समुद्र मंथन से भी बताई जाती है। माना जाता है समुद्र मंथन से 14 रत्न प्राप्त हुए थे। जिसमें इनकी उत्पत्ति लक्ष्मी जी साथ हुई। श्री चित्रगुप्त जी ने ज्वालामुखी देवी, चण्डी देवी और महिषासुर मर्दिनी की पूजा और साधना की थी।


चित्रगुप्त पूजा तिथि :

पंचांग के अनुसार चित्रगुप्त जी की पूजा 6 नवंबर 2021, शनिवार के दिन की जाएगी।

चित्रगुप्त जी की पूजा का शुभ मुहूर्त : 6 नवंबर 2021, शनिवार को दोपहर 1:15 मिनट से शाम को 3:25 मिनट तक पूजा का शुभ मुहूर्त बना हुआ है।

Friday, 29 October 2021

Article : घर की साफ-सफाई

घर की साफ-सफाई




दीपावली आने वाली है और इसमें घर की साफ-सफाई भी बहुत बड़ा काम होता है। कभी-कभी सफाई करते समय जल्दबाजी में ज्यादा मेहनत करनी पड़ जाती है, जैसे आपने अपने सोफे आदि साफ कर लिए और पंखा भूल गए, या बर्तन धो लिए और रसोई का कोई हिस्सा रह गया। ऐसे में एक ही चीज को दोबारा साफ करना पड़ जाता है। हम यहां आपको क्रम से बता रहे हैं कि घर की सफाई कैसे करनी चाहिए। सफाई के लिए आप मोटे और मुलायम कपड़े से बने dusters का इस्तेमाल कर सकते हैं।

Retire करें पुराना सामान :

सबसे पहले आपको घर से फालतू सामान निकाल देना चाहिए। अपनी wardrobe  से पुराने कपड़े निकाल दीजिए। इसके अलावा टूटे हुए सामान, crockery आदि सब चीजें निकाल दें। इसके बाद अपनी wardrobe को व्यवस्थित करें।

धूप लगाना जरूरी :

अपनी wardrobe में रखे कपड़ों को कुछ देर धूप में रख दें, जिससे उनमें से सीलन की बदबू चली जाए।

जालों से करें शुरुआत :

अक्सर घर में मकड़ियों के जाले होते हैं। घर की सफाई करने से पहले इन जालों को हटाना जरूरी है, पर याद रखियेगा, जालों के साथ मकड़ी और उसके अंडे भी हटाना जरूरी होता है, नहीं तो बाद में बहुत जल्दी जाले लग जाते हैं और घर फिर से गंदा हो जाएगा। आप मकड़ी के जाले हटाने वाले ब्रश का प्रयोग कर सकते हैं। अगर आप के पास vaccum cleaner है तो उससे बहुत अच्छी सफाई होती है।

Kitchen की सफाई :

सबसे मुश्किल काम kitchen की सफाई है। Kitchen की सफाई के लिए सबसे पहले बर्तन आदि को बाहर निकाल दें। Kitchen की slab व tiles को detergent powder के पानी से साफ कर सकते हैं। जिद्दी दागों के लिए vinegar, baking soda व नींबू का घोल अच्छा होता है, लेकिन इसका इस्तेमाल दीवारों पर न करें, नहीं तो paint खराब हो सकता है। Kitchen के slab की सफाई के बाद बर्तन stand व डिब्बों की सफाई करें और उन्हें व्यवस्थित करके लगाएं। इसके बाद सभी बर्तन साफ करके सही जगह पर रख दें।

पंखों की सफाई :

पंखे भी बहुत गंदे हो जाते हैं। पंखों की सफाई करने से पहले furniture आदि पर पुरानी bedsheet डाल दें जिससे वे गंदे न हों। सबसे पहले देख लें कि पंखें का switch बंद हो। पंखे की सफाई पहले सूखे कपड़े से करें और जरूरी हो तो उसके blades को गीले कपड़े से पोछें।

दरवाजे, खिड़की, Furniture :

पंखों की सफाई के बाद आप घर के दरवाजों, खिड़कियों व furniture आदि की सफाई करें। इनकी सफाई के लिए detergent वाले पानी में कपड़ा भिगो दें और निचोड़कर उससे पोंछ दें। साथ ही घर की shelf आदि की भी सफाई करें और shelf के सामान को सूखे कपड़े से पोंछ कर रख दें।

 Curtain व cushion cover :

Curtain व cushion cover को साफ करें। अगर आपके पास समय की कमी है तो laundry में धुलवा सकते हैं। अकसर लोग दिवाली के मौके पर नए पर्दे व cushion cover लगाते हैं। अगर आप भी नए लगाने वाले हैं तो पूरे घर की सफाई होने के बाद लगाएं।

Bathroom की सफाई :

Bathroom की सफाई के लिए बाजार में toilet cleaner आते हैं। आप उनका इस्तेमाल कर सकते हैं। Soda का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। अगर आपको कुछ देर के लिए toilet की बदबू से निजात पानी है तो वहां एक माचिस की तिली जला दीजिए।

दीवारों की सफाई :

दीवारों की सफाई सूखे कपड़े से की जा सकती है। इससे paint खराब नहीं होता और धूल-मिट्टी झड़ जाती है। अगर घर में plastic emulsion है तो गीले कपड़े से कर सकते हैं लेकिन ज्यादा गीला कपड़ा लगाने से चमक जल्दी खत्म हो सकती है।

आखिर में फर्श की सफाई :

पूरे घर की सफाई होने के बाद अंत में घर के फर्श की सफाई करनी चाहिए। जहां आप आसानी से धो सकते हैं, वहां पानी से धो दें, नहीं तो एक बाल्टी में पानी लेकर थोड़ा सा सर्फ व phenyl मिलाकर पोछे को गीला कर फर्श की सफाई करें।