Friday, 3 February 2023

Tips : How to identify Plastic Rice

चावल, India के most of the states में खाया जाने वाला, staple food है। साथ ही बच्चों से बुजुर्गों तक, बहुत से लोगों की पहली पसंद भी होती है। 

यह Easily digest होने वाला, carbohydrate का rich source है, जो कि बहुत अच्छा energy provider भी हैं। 

पर आजकल चावल में इस हद तक मिलावट होने लगी है, कि जिस का अंदाजा लगाना भी मुश्किल है।

आज कल plastic के चावल भी बहुतायत से बनाए जाने लगे हैं, और वो इतने ज्यादा real लगेंगे कि,  हाथ में चावल को लेकर आप नहीं जान सकते कि चावल असली है या नकली। 

पर इस synthetic rice को खाने से आपके बहुत से internal organs damage जरूर हो जाएंगे। 

पर जब आप जुड़ें हैं, shades of Life के साथ, तो फिक्र की नहीं है बात...

आज आप को कुछ ऐसी tips share कर रहे हैं, जिससे आप घर पर साधारण जांच करके पता लगा सकते हैं, कि चावल असली हैं, नकली हैं या हैं plastic के... 

 How to identify Plastic Rice 



पहले आप को चावलों के बादशाह, बासमती चावल (Basmati Rice) के identification के बारे में जानकारी दें देते हैं। 

Basmati Rice :  खुशबूदार चावल कहा जाता है, जिसका production, India, Pakistan and Nepal में होता है। ये चावल महीन, खुशबू के साथ पारदर्शी और चमकदार होता है। इसे बनाने के बाद चावल की लंबाई दोगुना हो जाती है। ये चावल पकने के बाद खिला-खिला बनता है, बल्कि हल्का सा फूल जाता है। इस खासियत की वजह से इसे देश भर में खूब पसंद किया जाता है। 

नकली चावल की पहचान करने के लिए, आप चूने का इस्तेमाल कर सकते हैं।

 Identify by adding lime

चावल का कुछ sample एक बर्तन में रख लें। इसमें चूना यानी lime और पानी को मिलाकर एक घोल बनाएं।

अब इस घोल में चावलों को भिगोकर कुछ देर के लिए छोड़ दें। अगर कुछ समय बाद ही चावल का रंग बदल जाये या रंग छोड़ दे तो समझ जाइये कि ये चावल नकली है।

 अब चलिए, आप को बता देते हैं कि plastic rice की पहचान कैसे की जाए। 

Identification of plastic rice

1. By smell : 

थोड़े से चावल को आग में डालें, असली चावल, भूरा, काला हो जाएगा, पर जलेगा नहीं। पर अगर चावल जले और जलते समय उसकी smell, plastic के जलने जैसी हो तो समझ लें कि plastic का चावल हैं. 

2. By melting :

खाने वाले तेल को धुंआ निकलने तक गर्म कर लीजिए, अब इसमें चावल डाले, अगर यह पिघलना शुरू हो जाता है, तो चावल plastic का है। 

3. By floating test :

Plastic के चावल को पानी में डालने पर वो तैरने लगता है।

4 . By boiling :

Plastic के चावल उबलाने के बाद container के ऊपरी हिस्से में मोटी परत की तरह नजर आते हैं।

5.  By Rotting :

इसके अलावा एक तरीका ये है कि चावल पकाने के बाद कुछ दिनों तक उसे ऐसे ही छोड़ दें, अगर  plastic  का चावल होगा तो यह बदबू नहीं करेगा क्योंकि यह सड़ता नहीं है।

Wednesday, 1 February 2023

Story of Life : होनी होकर रहती है (भाग- 2)

 होनी होकर रहती है (भाग - 1) के आगे...

होनी होकर रहती है (भाग- 2)


सब उस जगह पहुंचें, जहां ऐसा हुआ था, और जो उन्होंने वहां देखा, उसे देखकर सब हैरान रह गए...

उन्होंने देखा कि जहां राजकुमार की मृत्यु हुई थी, वहां पास में सांप का फन जैसा पड़ा था, जो रक्तरंजित था।

यह कहां से आया?

सब यह देख रहे थे, तभी साधू महाराज बोले, यह उस कलाकृति से आया है?

यह कैसे संभव है? रानी पीड़ा से भरकर बोली... 

महामंत्री ने, बहुत ध्यान से कलाकृति देखी, तत्पश्चात् कलाकृति बनाने वाले कलाकार को बुलाया, उससे पूछताछ की, फिर पूरी घटना के तार जोड़े, उसके बाद राजमहल में पहुंचा।

महाराज, मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि, साधू महाराज की बात सत्य साबित हुई..

क्या कहना चाहते हो, साफ-साफ कहो? पहेलियां मत बुझाओ...

महाराज, जब पुष्प वर्षा की जा रही थी, तो उससे बहुत सारी कलाकृतियां हिल रही थी।

उन्हीं में से एक कलाकृति का हाथ थोड़ा मुड़ गया, साथ ही उसकी एक उंगली में एक तार निकल गया। जिससे ऐसी संरचना बनी, मानों कोई सांप अपनी विषैली जिह्वा निकाल कर बैठा हो।

और जैसे ही राजकुमार सिंहासन पर विराजमान हुए, वो कलाकृति ऐसी हिली कि वो हाथ राजकुमार के ऊपर गिर गया और राजकुमार की उसी क्षण मृत्यु हो गई।

तुम क्या कहानी सुना रहे हो? तार चुभने से कोई मृत्यु होती है। 

महाराज, मैंने पूरा परिक्षण किया है, वो तार जिस स्थान से लाया गया था, वहां पर जहरीले फूलों का पौधा था। उसका एक फूल उस तार में लगा रह गया था। 

कलाकार ने जल्दी बाज़ी में कुछ ध्यान नहीं दिया और वैसा तार ही मूर्ति को मजबूत करने में लगा दिया। 

फिर वही हुआ जो होना था।

राजा ने सारी बातें सुनकर, साधू महाराज से अनेकानेक क्षमा मांगी। महाराज आपने मुझे अगाह किया था, पर मैं मूर्ख, अपनी सामर्थ्य पर विश्वास कर के ईश्वर के विधान को बदलने चला था।

राजन्, तुमने दुःख में मुझसे कहा था, मैंने उसका किंचित मात्र भी बुरा नहीं माना और ना ही तुम से क्रोधित हूं। 

पर आज भी मैं यहीं कहूंगा कि, अच्छा हो या बुरा... होनी होकर ही रहती है, उसके होने के विधान अपने आप बन जाते हैं। 

जैसे राजकुमार की मृत्यु सत्य थी, वैसे ही उसका जन्म होना भी सत्य था, तुम्हारा सुख और दुःख भी सत्य था। इसलिए मेरे अगाह करने के बाद भी सब घटना घटित हुई...

इसलिए सत्य को स्वीकार करो और आगे की सुधि लो, यह कहकर साधु महाराज अपने आश्रम की ओर प्रस्थान कर गए।

Tuesday, 31 January 2023

Story of Life : होनी होकर रहती है

आज की कहानी का मेरे जीवन में अलग ही महत्व है, क्योंकि यह कहानी मेरी दादी मां सुनाती थीं। वो कहती थीं, जब भी सवालों के घेरे में घिर जाना, तो यह कहानी तुम्हें उस चक्र से कुछ हद तक निकाल देगी।

तो आज उसी कहानी को share कर रहे हैं.. 

होनी होकर रहती है




कहानी तब की है, जब राजे-रजवाड़ों का समय था।

एक राजा था, अत्यंत शक्तिशाली व धन-धान्य से परिपूर्ण, अपनी प्रजा का बहुत ध्यान रखने वाला, उसकी प्रजा भी उसे बहुत मान-सम्मान देती थी। हर दृष्टि से वह सुयोग्य शासक था। उसकी रानी भी बहुत सुन्दर और नेक दिल थी।

सब था, राजा के पास.. कमी थी तो बस एक कि कोई संतान नहीं थी।

एक दिन उसके राज्य में एक बहुत सिद्ध साधू महाराज आए... 

राजा ने अपनी रानी के साथ, उनकी खूब सेवा की, जब साधू महाराज प्रसन्न हो गए तो, दोनों ने विनती की कि उन्हें इस राज्य का राजकुमार प्रदान करें..

साधू महाराज बोले, कि मुझे इसके लिए तप करना पड़ेगा, उसके बाद ही मैं बता पाऊंगा कि क्या होगा?

तप के बाद, साधू महाराज बोले कि राजकुमार तो मैं तुम्हें दे सकता हूं, पर उसकी अल्प आयु है और उसकी मृत्यु सर्प दंश से होना अवश्यंभावी है। 

सुनकर, राजा बोला, आप इस बात की किंचित मात्र भी चिंता ना करें,अगर हम अपने राज्य से सारे सांप ही समाप्त कर देंगे तो, राजकुमार मृत्यु नहीं होगी और वह चिरायु हो जाएगा... आप हमें पुत्र प्रदान करें।

साधू महाराज बोले कि होनी होकर रहती है, फिर भी अगर तुम्हारी यही इच्छा है तो, तुम्हारी सेवा से खुश होकर, मैं तुम्हें आशीर्वाद देता हूं कि अगले वर्ष यहां का राजकुमार जन्म ले लेगा। 

साधू महाराज का कथन सही सिद्ध हुआ, बहुत ही खूबसूरत राजकुमार का जन्म हुआ।

सभी बहुत प्रसन्न थे, पूरे राज्य में उत्सव मनाया गया...

राजा तो राजा था, वर्चस्व का स्वामी, उसने राजकुमार की सुरक्षा हेतु, पूरे राज्य में, साधू महाराज की भविष्यवाणी बता दी। 

राजकुमार पर खतरा जानकर, आनन-फानन सभी सांपों को खत्म कर दिया गया।

हर पल राजकुमार की रखवाली के लिए 10 सपेरे तैनात कर दिए गए, कि आस-पास कोई सांप ना फटके और अगर कोई दिख भर जाए तो उसका वहीं अंत कर दें।

उनके अलावा और भी बहुत से पहरेदार दिन रात पहर देते साथ ही पूरी प्रजा भी इस बात का ध्यान रखती कि सांप तो क्या, कोई कीड़ा-मकौड़ा भी राजकुमार के ईर्द-गिर्द ना फटके..

राजकुमार दिन-दूनी, रात-चौगुनी वृद्धि से बड़ा होने लगा। अब वो बीस साल का बांका जवान हो गया था। 

राजकुमार भी राजा के समान, हष्ट-पुष्ट वीर और साहसी था। और उनकी ही भांति सहृदय था तो सबका प्रिय भी था।

राजा-रानी अब बूढ़े हो चुके थे। राजकुमार को हर तरह से सुयोग्य देखकर राजा ने सोचा कि अब राजकुमार का राजतिलक कर दिया जाए।

पूरे राज्य में राजकुमार के राज्यतिलक की मुनादी करा दी गई। 

जिस साधू महाराज की कृपा से राजकुमार हुआ था, उन्हें भी आमंत्रण पत्र भेजा गया। पर वो महाराज तपस्या पर गये थे, तो उनके शिष्यों ने कहा आप आयोजन करें, गुरुवर तपस्या कर के आ जाएंगे तो आप के आयोजन के विषय में जानकारी दें देंगे।

बड़े धूमधाम से उत्सव की तैयारियां शुरू कर दी गई। बहुत ही भव्य आयोजन किया गया। पूरे सिंहासन को फूलों से सजाया गया। सिंहासन के पीछे बेहद खूबसूरत कलाकारी की गई। बहुत तरह की कलाकृतियां भी लगाई गई...

मुहूर्त के अनुसार राजपुरोहित व अनेक मंदिरों से पंडित, साधू संत सब पधारे... 

मंत्रोच्चारण के साथ, पूजा पाठ आरंभ हो गया। पूरे प्रांगण में धूप-दीप, पुष्प इत्यादि की सुगंध आ रही थी।

पूजा पाठ समाप्त करके राजपुरोहित जी ने राजकुमार को, राजतिलक के लिए बुलाया। 

राजतिलक होने के पश्चात्, राजकुमार को सिंहासन पर विराजमान होने को कहा गया।

राजकुमार जब सिंहासन पर बैठा, सब ओर से पुष्प की वर्षा होने लगी और राजकुमार की जय-जयकार होने लगी।

सभी तरफ प्रसन्नता छाई हुई थी कि अचानक से राजकुमार की चीख निकल गई और वो वहीं फर्श पर गिर पड़ा।

सब तरफ अफ़रा-तफ़री मच गई। 

राजकुमार को तुरंत, राजमहल ले जाया गया। राजवैद्य जी तत्परता से दवाई करने लगे, पर सब व्यर्थ था, वो राजकुमार को नहीं बचा पाए। 

सम्पूर्ण वातावरण शोकाकुल हो गया।

उसी समय वो साधू महाराज आए और देखकर बोले, राजन मैंने तुम्हें पहले ही अगाह किया था।

पर महाराज आपने तो कहा था कि राजकुमार की मृत्यु सर्पदंश से होगी, पर यहां तो कोई सांप नहीं है, फिर ऐसा कैसे हुआ? क्या आप का कहा, मित्थया था।

नहीं! राजन मेरा कथन कभी ग़लत नहीं जाता। तुम वहां मुझे ले चलो, जहां यह घटना हुई थी।

सब उस जगह पहुंचें, जहां ऐसा हुआ था, और जो उन्होंने वहां देखा, उसे देखकर सब हैरान रह गए...

आगे जाने...

होनी होकर रहती है (भाग - 2) में...