Monday, 1 January 2024

Poem: कुछ पल निकाल लें

कुछ पल निकाल लें 




इस दौड़ती-भागती ज़िंदगी से,

चलो कुछ पल निकाल लें,

आ फिर से ज़िन्दगी को,

पहले सा संवार लें।

पापा के प्यार को बटोर ले,

कसकर अपनी बाहों में,

मांँ के असीम लाड़ को

बंद कर लें निगाहों में

उस अल्हड़ सी जवानी को

आ फिर से जी लें

चलो लौट चलें फिर से

उस हसीन सी ज़िन्दगी में

दोस्तों के संग मिलकर

लगा लें कहकहे

बिन बात के साथ उनके

बस झूमते ही रहें

साल का क्या है

वो तो बदलेगा हर बरस 

बदलते साल को अपनी

बेफिक्री से रोक लें

कह दें साल से

नहीं फर्क पड़ता हमें

तेरे आने-जाने से 

हमने सीख लिया खुश रहना 

बदलते ज़माने में 

मज़ा तो जिंदगी का 

अपनों के साथ है

भागदौड़ से कुछ भी

आता ना हाथ है 

इस दौड़ती-भागती ज़िंदगी से

चलो कुछ पल निकाल लें

आ फिर से ज़िन्दगी को

पहले सा संवार लें 


आप सभी को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं 💐

नव वर्ष हम सब के लिए मंगलमय हो, सब प्रेम के अटूट बंधन में बंधे रहें, एक दूसरे के साथ खुशहाल जीवन जीते रहें। 

Sunday, 31 December 2023

Article: Online की दुनिया

साल 2023 भी जा रहा है और आ रहा है नया साल 2024...

2023 ने हमें बहुत कुछ दिया, कुछ नया और कुछ पुराना...

जी हां, एक ऐसा पुराना, जिस में हम अटक कर रह गए हैं, या यूं कहें कि भटक कर रह गए हैं। 

Online की दुनिया 


जी बिल्कुल, सही समझे। आप online के जंजाल में अटक गए हैं या कहें कि हमारी दुनिया ही online हो गई है।

2019 जाते-जाते online की नई दुनिया से अवगत करा गया था, कोरोनावायरस की चपेट के कारण...

तब उसकी आवश्यकताएं भी थीं, पर अब तक भी इतना ज़्यादा क्यों online?

कोरोना वायरस तो चला गया, पर हम online के गुलाम बन गए, वैसे ही जैसे अंग्रेज तो चले गए, पर अंग्रेजी को पकड़ कर हम आज भी उनके गुलाम ही बने हुए हैं।

आज तो सब्जी चाहिए, online मंगा लो, वो छांटना, मोलभाव करना सब खत्म। सब्जी लेने जाने से सिर्फ सब्जी ही घर नहीं आती है, बल्कि उसके संग एक ताजगी भी आती है ज़िन्दगी में, और सुकून भी कि हम अपनी मनपसंद की सब्जियां लेकर आए। 

कपड़े चाहिए, online है ना varieties के कपड़े लेने के लिए, फिर दुकान-दुकान घूम कर, हाथों से छूकर, निगाहों से टटोल कर, थककर अपनी पसंद के कपड़े पाने की खुशी कोसों दूर हो गई। आप कितना ही online से कपड़े खरीद लें, पर वो बात नहीं आती है जो दुकान पर जाकर लेने से आती है।

कुछ भी खाने के लिए मन को टटोलने की कवायद ख़त्म, लाइन लगी है, online में खाने-पीने की चीजों की। हर प्रांत के हर देश के...घर बैठे, सब सामान हाजिर... पर गोलगप्पे के ठेले पर खड़े होकर खाना, ना जाने कब unhygienic हो गया...खाने की गर्माहट ही उसका स्वाद है, उसकी खासियत है, वो कहीं गुम हो गई। 

Dry items मंगाना और बात है, लेकिन prepared food, उसमें मंगाने से कभी वो बात नहीं आती है।

Railway की टिकट के लिए, लगने वाली line तो बहुत तेजी से कब online में तब्दील हो गई, पता ही नहीं चला। हाँ पहले सा bookings window पर खड़े होकर घंटों के इंतजार में आस-पास के लोगों से पहचान हो जाने की बात ना जाने कहां लुप्त हो गई। पहले कितने लोग यहां आते थे और ऐसे ही कुछ रिश्ते बन जाते थे।

कुछ भी books-copy चाहिए, दुकानदार से निकलवाने के लिए लम्बी लाइन की ज़रूरत नहीं है, बस एक online purchase और books and copies का ढेर, आपके घर की table पर। लेकिन ऐसे आप सिर्फ उन्हीं books से जुड़ते हैं, जो आप मंगाते हैं, जबकि दुकान पर आकर चार books देखकर सही चुनाव करते हैं।

शादी, ब्याह के लिए भी कुछ घूमना भटकना नहीं है, बस online marriage app पर जाएं, खूब लम्बी लाइन मिल जाएगी, लड़के-लड़कियों... साथ ही wedding planner की भी। पर ऐसी शादियों में जोश, उत्साह, उमंग कहीं पीछे छूट जाता है।

ना जाने कितने ही office अब online चल रहे हैं, और कितनी सारी meeting and VC, सबके लिए वही online... 

छोटे-छोटे बच्चों से लेकर बड़े बच्चों तक सब की online classes मतलब अब ज्ञानार्जन के लिए घर से बाहर निकलने की ज़रूरत ही नहीं, सब online है ना। जब बाहर ही नहीं निकलेंगे तो सर्वांगीण विकास कैसे संभव होगा, कभी सोचा है आपने? 

खेल भी सारे online चल रहे हैं, नतीजन आंखें खराब, चिड़चिड़ापन, depression, साथ ही physical health एकदम zero। सोचिए इतना ज़्यादा online करा के हम लोग, बच्चों के भविष्य को कहां ले जा रहे हैं?

Online, online... सब online...

इस online से गांव-शहर, देश-विदेश सबकी दूरियां घट गई है पर इंसानों की आपस की दूरी बहुत बढ़ गई। 

पूरी दुनिया कंक्रीट और online हो गई, जिससे रिश्तों में मिठास ना जाने कहां लुप्त हो गई है? पर आखिर यह कब तक चलेगा?

क्या हम लोग, फिर से offline होना नहीं बढ़ाएंगे। क्या इस नए साल में फिर से पहले सा, सब से जुड़ जाएंगे? क्या रिश्ता और प्यार का सुखद नववर्ष मनाएंगे?

सोचिएगा ज़रूर...

नववर्ष सबके लिए मंगलमय हो, शुभ हो, सुखद हो।

Tuesday, 26 December 2023

Article : बहू को कैसे लगे ससुराल अपना घर

बहू को कैसे लगे ससुराल अपना घर  

आज कल शादियों का season चल रहा है। शादी होने के साथ ही होता है, नई बहू का गृह-प्रवेश... 

गृह प्रवेश, यह केवल घर में प्रवेश करनी की रस्म नहीं होती है, बल्कि इस का सही अर्थ होता है कि क्या आपकी बहू, बेटी बनेगी और इस घर को अपना समझेगी? या हमेशा के लिए उसके लिए यह एक ससुराल ही बना रहेगा, जहां वो कभी अपने आप को comfortable नहीं समझेगी? 

यह सब निर्भर करता है बहुत सी छोटी-छोटी बातों पर, जिनके नज़रअंदाज़ से ही आपकी अपनी बहू, कभी बेटी नहीं बन पाती है। 

आइए उन छोटी-छोटी बातों पर ध्यान केंद्रित करते हैं।




Physically harassment :

यदि आप की बहू के कान या नाक नहीं छिदे हैं, तो उन्हें सामाजिक मान्यताओं के कारण या अपनी जिद्द के कारण मत छिदवाएं। कभी भी किसी को कष्ट देकर आप उसके नजदीक नहीं जा सकते हैं, बल्कि उसकी परेशानियां को समझ कर उसके निदान से उसके बन सकते हैं।


Financial support :

अगर आप के एक से अधिक बेटे हैं तो, जिस बहू के मायके से जो आया हो, उसे वो दे दीजिए। उससे तीन फायदे होंगे;

पहला, वो उन सामानों में कोई मीन-मेख नहीं निकालेगी, बाकी निकाल सकते हैं।

दूसरा, उसके मायके का दिया पैसा और सामान उसके ही गृहस्थ जीवन को संवारने के लिए दिया गया था।

सबसे बड़ी बात, उसकी अपनी ससुराल से bonding अच्छी होगी कि उसका उसे देकर ससुराल वालों ने अपनापन दिखाया।


Attachment :

बहू-बेटा, चाहे किसी दूसरे शहर में रहते हों, पर ससुराल में उनका भी एक कमरा होना चाहिए। जिसमें उनका सामान होना चाहिए और वो सब सुख-सुविधाएं जो बाकी कमरों में हो। जिससे जब भी वो आएं, सीधे उसी कमरे में आकर रहें। उन्हें आकर हर बार यह ना सोचना पड़े कि हम कहां रहेंगे और हमारा सामान कहां रहेगा। 

अपना fix कमरा होने से उन्हें लगेगा कि यह घर उनका भी है, यहां उनके लिए जगह, उनकी अनुपस्थिति में भी है।


Detachment :

जब लड़की ससुराल आती है तो पीछे सबको छोड़ कर नहीं आती है, उनके साथ ही नए लोगों को भी अपनाने आती है। तो अपनी बहू को उसके मायके से अलग करके नहीं बल्कि उसे अपने आप से जोड़ कर, उसे अपनी बेटी बना सकते हैं।

उसके मायके वालों की तरह, अगर आप उसकी hobby, उसकी खुशी, उसकी परेशानियां और बेचैनी को समझ गए, तब वो आपकी बन जाएगी।


Patience :

बहू आते से आपसे नहीं जुड़ जाएगी, उसे थोड़ा समय चाहिए होगा, आप से जुड़ने में... वो समय कितना लगेगा, यह आप दोनों की compatibility से होगा। तो धैर्य से काम लीजिए, सब वही होगा, जैसा आप चाहते हैं, क्योंकि हर बहू, धीरे-धीरे अपने ससुराल में रम ही जाती है। कुछ जल्दी, कुछ थोड़ा देर से।


Allegation :

बहू के बेटा हो या बेटी, उसकी तोहमत उस पर ना लगाएं, बेटा-बेटी दोनों एक समान हैं। जो भी है वो आपका है, उसे पूरे मन से अपनाएं। अगर किसी भी माँ के बच्चे को कोई प्यार करता है तो वो उसके लिए हमेशा प्रेम भाव में ही रहती है। तो बस अगर आप अपने पोते-पोतियों को प्यार देंगे तो बहू तो अपने आप ही आपकी हो जाएगी।

वैसे आपकी information के लिए बता दें, scientifically बच्चे का gender, पिता से ही decide होता है, माँ से ही नहीं... 

बस इन जैसी ही और भी छोटी-छोटी बातें हैं, जिस पर ध्यान देने से आपकी बहू कब आपकी बेटी बन जाएगी, यह ना आपको पता चलेगा ना उसको... 

क्योंकि सच तो यही है कि ससुराल ही बहू का अपना घर होता है तो जल्दी या देर से वो रम ही जाती है अपने ससुराल में... 

उसके मुंह से बहुत जल्दी निकलने लगता है, ऐसा हमारे यहां होता है और ऐसा हमारे यहां नहीं होता है, और ऐसा वो अपने ससुराल के reference में उसके नियम कानून के संदर्भ में बोलती है। 


हर घर में

खुशियों का वास हो

रिश्तों में मिठास का 

एहसास हो 

हर घर में बेटी सी बहू

और माँ सी सास हो  

अगर आप को लगता है और भी कुछ ऐसी ही छोटी बातें हैं तो उन्हें comment box में जरूर लिखें..


सबके सुख की कामना 🙏🏻