Wednesday, 3 October 2018

Story Of Life : स्वाभिमान (भाग -२)

अब तक आपने पढ़ारीना, बहुत ही हंसमुख, ज़िंदादिल व्यक्तित्व की स्वामिनी थी। साथ ही बहुत ज्यादा helpful भी थी।फिर भी उसकी कोई कद्र नहीं थी, अब आगे....... 

स्वाभिमान (भाग -२)

Diamond ring की बात सुनते ही वो बोली मैं, उसको जाने के लिए बोल देती हूँ।
अरे उसे खराब लगेगा, अपना काम छोड़ के आई होगी। नीरज बोला।
अरे कोई नहीं, उसे कुछ बुरा नहीं लगेगा। वो तो हमेशा ही मुस्कुराती रहती है।
निशा ने बड़े ही रूखे तरीके से रीना को बोल दिया, कि तुम अब चली जाओ, नीरज आ गए हैं। पर तुम तो laptop देने वाली थी, मेरे computer job के लिए....... रीना ने कहा
अरे पर अब तुम्हें laptop की क्या जरूरत है, office ही तो जाओगी, वहीं कर लेना अपना काम। निशा ने रीना से बड़ी ही बदतमीजी से बोल दिया।
रीना office जाने के लिए auto लेने के लिए मुड़ी भी ना थी, कि निशा नीरज के साथ अंदर hospital में चली गयी।
Office लौटने में उसे इतना traffic मिला कि उसके 2 घंटे रास्ते में ही बर्बाद हो गए।
Office पहुँच कर उसने अपना काम निपटाने की बहुत कोशिश की, पर उसका काम खत्म नहीं हुआ। काम खत्म करने के लिए उसे अगले दिन सुबह जल्दी आना पड़ा।  
आज office में सुबह से ही कुछ अलग सी चहल-पहल थी। उसने निशा से पूछा, आज क्या है?
वो बड़े ही आश्चर्य भरी आवाज़ में बोली, तुम्हें नहीं पता,? आज तेरे मसीहा का retirement  है।
क्या .... आज बॉस retire हो रहे हैं? लो जी बड़ी भोली हैं, ये। इन्हें कुछ पता ही नहीं रहता है। फिर वो बाकी साथियों से खुसफुसाने लगी। अच्छा है जा रहे हैं, इसके तो बहुत ही हिमायती बने रहते थे।
boss की farewell party खत्म हुई तो उन्होंने रीना को अंदर बुलाया, और कहा- बेटा मुझे अपने retirement का अफसोस नहीं है, वो तो होना ही था। पर तुम जैसी अच्छी लड़की का साथ छूट जायेगा। मेरे जाने के बाद, तुम ऐसी ना रहना। सोच-समझ कर ही किसी की मदद करना। उसमे अपने काम को और अपने आप को suffer मत कराना, वरना जब तुम्हें जरूरत होगी, कोई भी साथ नहीं देगा। सब मतलबी हैं, तुमसे अपना कहा करवा लेंगें। पर जब तुम्हारे लिए करने की बारी आएगी, तो साफ मुकर जाएंगे।

नए boss आए, वो नहीं जानते थे कि रीना कैसी है? रीना का स्वभाव अभी भी दूसरों कि मदद का बना रहा। जिस के चलते आए दिन रीना का काम incomplete  रह जाता था। और आए दिन रीना अपने boss से डांट खाया करती। आखिरकार तंग आकर boss ने उसे inefficient worker के allegation के साथ job से निकाल दिया। जब boss उसको terminate कर रहे थे, तब एक भी उसकी सफाई देने के लिए आगे नहीं आया। बल्कि सब ने boss की ही हाँ में हाँ मिला दी।
जब ये बात उसके पुराने boss को पता चली, तो वे रीना के घर आ गए।. 

रीना के पुराने बॉस ने आकर क्या किया, जानते हैं...... स्वाभिमान (भाग -३)

Tuesday, 2 October 2018

Poem : क्यों भूल गए



आज गांधी जयंती के पावन अवसर पर हमारे राष्ट्रपिता बापू जी को मेरा सादर प्रणाम,साथ ही आज शास्त्री जी का भी जन्म दिवस है। उन्हें भी मेरा सादर नमन
आज के इस पावन दिवस पर मेरी यह कविता दोनों महापुरुषों को समर्पित

क्यों भूल गए



बापू तो सबको याद रहे
क्यों,शास्त्री जी को भूल गये

भारत को सफल बनाने में
दोनों का ही  है योगदान
एक ने दिलाई आजादी
दूजे ने दिलाया था सम्मान

बापू तो सबको याद रहे
क्यों,शास्त्री जी को भूल गये

बापू, अंग्रेजों संग डटे रहे
भारत छोड़ो का नारा था
तो, शास्त्री जी के इस नारे
जय जवान जय किसान
से ही, पकिस्तान हारा था

बापू तो सबको याद रहे
क्यों,शास्त्री जी को भूल गये

दोनों ही थे महापुरुष
दोनों ने ही दिये बलिदान
कोई किसी से कम नहीं
दोनों ही थे बड़े महान

फिर होता है क्यों भेदभाव
बापू तो सबको याद रहे
क्यों,शास्त्री जी को भूल गये

Monday, 1 October 2018

Story Of Life : स्वाभिमान

स्वाभिमान  


रीना, बहुत ही हंसमुख, ज़िंदादिल व्यक्तित्व की स्वामिनी थी। साथ ही बहुत ज्यादा helpful भी थी। जिसके कारण office में जब भी किसी को कोई भी परेशानी होती, सबको उसका नाम ही सबसे पहले याद आता।
एक दिन निशा के सिर में बहुत तेज़ दर्द हो रहा था। उसने रीना से बोला, मेरे सिर में बहुत तेज़ दर्द हो रहा है, शायद computer में बहुत ज्यादा work  का असर हो। मेरा आज Dr. से appointment  है, तुम चलोगी साथ में?
आज रीना को office में बहुत सारा computer  job था, वो सोचने लगी क्या कहूँ, इसके पहले वो कुछ बोलती, निशा बोल दी, हाँ मुझे पता है, तुम्हारा computer job  है, तुम ये काम Dr. के clinic में रहते हुए, मेरे laptop में भी कर सकती हो। तभी रीना को याद आया कि दो घंटे  पहले जब कुछ data उसे चाहिए था, तब निशा ने ये कह कर उसे देने से साफ इंकार कर दिया था कि, उसका laptop out of order है। अभी अपना काम है, तो laptop एकदम ठीक हो गया था।
रीना बोली ठीक है, boss को बोल के आती हूँ। जब रीना boss के पास गयी, तो वो उसके पहुँचते ही बोले, बताओ आज किसके दुख-दर्द को कम करवाने जा रही हो?
सर, वो निशा के साथ जाना था। अच्छा और तुम्हारे काम के लिए अब उसका laptop भी ठीक हो गया होगा, है ना? जी।
तुम कब तक ये जानते हुए भी कि, दुनिया बहुत मतलबी है, सबका साथ देती रहोगी?  
सर, मैं क्या करूँ? सब मेरे ही पास आते हैं।
सब जानते हैं, तुम्हें अपने से ज्यादा दूसरों की फिक्र रहती है। और कोई तुम्हारी मदद नहीं भी करेगा, तब भी तुम सब के लिए खड़ी रहोगी। जाओ, तुम जाए बिना मानोगी भी तो नहीं, उसके boss उसे समझते हुए बोले।
जब रीना और निशा Dr. के clinic पर पहुँचे, वहाँ पर निशा का पति नीरज भी पहुंचा हुआ था।
उसको देखकर निशा बोली, आपको मिल गयी छुट्टी? हाँ लेनी ही पड़ी, ना आता तो तुम नाराज़ जो हो जातीं, dear । रीना उन दोनों का वार्तालाप दूर खड़ी सुन रही थी।

अरे यार, तुम रीना को क्यों ले आई, मैंने तो पूरे दिन की छुट्टी ले ली है। सोचा था इसके बाद तुम्हें jeweler  के पास ले जा कर, तुम्हें diamond  की ring दिलवा दूंगा। तुम कब से जिद्द कर रही थी। 

नीरज को आया देखकर, निशा का रीना के प्रति क्या व्यवहार रहेगा जानते हैं- स्वाभिमान(भाग -२) में