Tuesday, 16 July 2019

Poem : कोटि-कोटि नमन

कोटि-कोटि नमन




गोविन्द ने तो बता दिया,
जीवन में गुरु सबसे बड़ा
बांवरा मन तब से ही,
इस सोच में है पड़ा। 
कौन है सबसे महान,
कौन है सबसे बड़ा?
प्रथम गुरु मां, जिसने
नौ माह कोख में रखकर,
मुझको जीवन दिया। 
या पिता, जिनकी शिक्षाओं ने
जीने के काबिल बना दिया। 
या वो अध्यापक, जिन्होंने
जीवन का लक्ष्य दिखला दिया। 
या वो जीवनसाथी, जिसने
हर पल हौसला बढ़ा दिया। 
या वो असफलता, जिसने
सफल होना सीखा दिया। 
या वो गुरु, जिसने हमको
पुनः ईश्वर से, मिलवा दिया। 
हर एक गुरु को है, मेरा
कोटि-कोटि नमन। 
उनसे ही रोशन है दुनिया,
उनसे ही महका चमन। 
  

आप सभी को गुरु पूर्णिमा की अनेकानेक शुभकामनायें 

Monday, 15 July 2019

Story Of Life : Story Of Life : भला मानुष (भाग - 3)




Story Of Life : भला मानुष ( भाग - 2 ) के आगे....... 

Story Of Life : भला मानुष (भाग - 3)



राका ने जब छगन को देखा, तो वो उसकी ओर आकर्षित हो गया।उसने छगन को धर- दबोचा, और उसी के साथ कुकर्म करके उसे मौत के घाट उतार दिया।

मगन आधे रास्ते गया था, तभी उसे छगन की याद आई, वो उल्टे पाँव दौड़ गया। जब वो राका के पास पहुँचा वो नशे में धुत्त पड़ा था, और छगन अपनी आखिरी सांस ले रहा था। उसने मगन की आँखों के सामने दम तोड़ दिया।

वो राका की तरफ मुड़ा, और इससे पहले कि वो पूछता, कि लड़के को क्यों....? राका कहने लगा, आज कुछ अलग करके मज़ा आ गया, तुम कभी कभी इन्हें भी ला सकते हो।

नीच! वो मेरा बेटा था......  

कह कर मगन ने वहाँ पड़ी हथौड़ी से राका के सिर पर ताबड़-तोड़ हमला कर दिया। राका नशे में धुत था, अपने को संभाल नहीं पाया, और वहीं ढेर हो गया।

फिर वो छगन को चुनिया के पास ले गया, और उसके सामने डाल कर बोला, तेरे लालच ने हमारे एकलौते बेटे को खा लिया। 

तुझे बड़ा घमंड था, कि बेटा है, तो कोई बुरी नज़र नहीं रखेगा। दूसरे की बेटियों को भेजने से, तुम्हें उनका दुख समझ नहीं आता था। आज ऊपर वाले ने, तेरे कर्मो का हिसाब चुका दिया।  

अब तुझे भी समझ आएगा, उन बेटियों को कैसा लगता था? और उनके माँ- बाप को कैसा लगता होगा?

चुनिया के ज़ोर ज़ोर से रोने से काफी गाँव वाले आ गए, धीरे धीरे सबको पता चल गया, कि राका को मगन ने मार दिया है।

सारे गाँव वाले बहुत खुश हो गए, सबने मगन के नाम के नारे लगाने शुरू कर दिये, साथ ही सब उसे भला मानुष, भला मानुष कहने लगे।

पर मगन अंदर ही अंदर रो रहा था, कि अगर वो अपनी बीवी की बातों में ना आता, तो गाँव की कितनी भोली-भली लड़कियाँ आज बच जाती। और उसका बेटा भी उसके आँगन में खेल रहा होता। 

उसका गाँव हमेशा खुशहाल होता। काश! वो दूसरों के साथ बुरा होने पर ही सचेत हो जाता, काश! वो सच में भला मानुष होता।

जो किसी के साथ कुछ बुरा करे, वो महादुष्ट, जो साथ दे, वो दुष्ट, पर जो सब कुछ देखते, समझते हुए भी बुरा होने से ना रोके, वो भी भला मानुष नहीं होता है 

क्या आप हैं भले मानुष?

Friday, 12 July 2019

Story Of Life : भला मानुष (भाग -2)

Story Of Life : भला मानुष (भाग -1) के आगे....

Story Of Life : भला मानुष ( भाग - 2 )


गाँव वाले बहुत परेशान थे, आए दिन किसी न किसी की मासूम बेटी लापता  हो रही थी। चंद दिनों में लोगों को समझ आने लगा था, कि हो ना हो ये काम उस राका का है, जिसके आने के बाद से ही ये घटना घटित हो रही हैं। 

एक दो लोगों ने उस तक पहुँचने की कोशिश भी की, पर नाकाम रहे, क्योंकि वो अपने घर के बाहर सख्त पहरा रखता था। 

केवल मगन को पता था, कैसे राका के घर जा सकते थे। गाँव वालों ने बेटियों का घर से निकलना बन्द कर दिया, पर अभी भी कुछ मासूम शिकार हो रहीं थीं।

गाँव वालों को समझ नहीं आ रहा था, कि आखिर कैसे लड़कियाँ वहाँ पहुँच जाती हैं, और कैसे इस अत्याचार को रोका जाए। उन लोगों ने अब पहरा भी देना शुरू कर दिया।

अब मगन अपना काम नहीं कर पा रहा था, इससे राका बहुत क्रोधित रहने लगा। एक दिन मगन जब राका को मना करने जा रहा था, कि अब वो और मासूमों को नहीं ला पाएगा। 

तब छगन भी साथ जाने की जिद करने लगा, कि वो भी चलेगा उस बड़े वाले घर में। चुनिया बोली ले जाओ, घूम आएगा। चुनिया को छगन के जाने से कोई चिंता नहीं थी, उसका बेटा जो था।

मगन राका से बात कर रहा था, तब छगन वहीं खड़ा aquarium में रंग बिरंगी मछलियाँ देख रहा था। राका गुस्से से आग बबूला हो रहा था, उसने मगन को अपने घर से बाहर निकाल दिया। मगन वहाँ से निकलते समय छगन को साथ ले जाना भूल गया।

छगन साँवली काया का मोहक नैन-नक़्श का लड़का था, चुनिया उसे बहुत सजा के रखती थी, इसलिए साँवला होने के बाद भी छगन गाँव का सबसे खूबसूरत लड़का लगता था।

राका ने जब छगन को देखा, तो वो.......

क्या राका, छगन को पकड़ लेगा? और मगन को छगन के एवज में गलत काम करते रहने होंगे? जानिये: भला मानुष (भाग-3) में