Thursday, 15 August 2019

Poem : राखी का यही तोहफा होगा

भारत की सभी बहनों की सरहद पर तैनात फौजी भाइयों से बस यही कामना है।

राखी का यही तोहफा होगा

चन्दन की सुगंध,
नेह का धागा
राखी संग भेजा है प्यार
प्यारे प्यारे भैया मेरे
करना उसको स्वीकार
साल भर में आता है
यह मधुर त्यौहार
मिलने की थी आस
जो मैं ना पहुंच सकी
राखी ही पहुंचे पास
गर तुम होते साथ मेरे
चन्दन का तिलक लगाती
बांध हाथ में नेह का धागा
केसर का घेवर खिलाती
पर वीरा तुम तो हो
सरहद पर तैनात
रक्षा मां भारती की करने को
दिया है तुमने सब त्याग
एक बात मेरी रखना याद
बहुत हो चुके अमर शहीद
तुमको हरपल जीना होगा
दुश्मन का सीना चीर कर
जीते जी, युद्ध जीत लेना होगा
जीत हमारी तभी जीत ‌है
जब सेना का हर सैनिक साथ हो
जश्न  पूर्ण तभी होगा
जब तिरंगा लहराता वीर के हाथ हो
बहुत बह चुका रक्त वीर का
अब आगे से यह ना होगा
मुझको तुम्हारा दिया हुआ
राखी का यही तोहफा होगा‌।

जय हिन्द जय भारत

Wednesday, 14 August 2019

Story Of Life : अब और नहीं (भाग- 2)



अब और नहीं (भाग- 2) 


कुछ नहीं माँ जी, सोते हुए हाथ दब गया था, तो दर्द कर रहा है।

जब अमर चला गया, तो माँ जी रीना के पास गईं और पूछने लगीं, कहाँ दर्द हो रहा है? दिखा, मैं तेल गरम करके लाई हूँ।

अरे नहीं माँ जी, अभी ठीक हो जाएगा। पर माँ नहीं मानीं, बोली मुझे खूब पता है, कहाँ, और कैसे दर्द है। कहते हुए जब उन्होंने sleeves हटाई, तो रीना की बाहें सूजी हुईं थीं, जैसे किसी ने मरोड़ दी हो।

मुझसे कुछ छिपा नहीं है लाडो। कहते हुए माँ ने गर्म तेल 
लगाना शुरू कर दिया। 

मेरे आए दिन तेरे जैसा दर्द हुआ करता था। अमर के पिता 
भी अमर के जैसे ही जब पीकर आते थे, तो ऐसे ही मार-पीट किया करते थे, और मैं घर में सबसे झूठ बोला करती थी, सोते में दुख गया, टकरा गई थी, गिर गयी थी।

जिससे घर में कलेश ना हो। ना जाने अमर ने कब देख लिया, अपने पिता को ये सब करते हुए, जो ये भी हैवान हो गया।

बेटा, मुझे माँ ने ये शिक्षा दे कर भेजा था, चाहे पति कुछ भी करे, सहन करना, मायके लौट के ना आना। शादी करके बेटी पराई हो जाती है। मैं सहन करती गयी, सबसे छुपाती रही और तेरे ससुर के अत्याचार बढ़ते गए।

पर तेरे साथ ऐसा नहीं होगा, तू अकेली नहीं है। मैं तेरे साथ हूँ, आज ही अमर से बात करूंगी।

शाम को अमर आया, तो माँ क्रोध से भरी हुई थीं। आते से ही बोलीं, तुझे अपनी माँ पर कभी तरस नहीं आया, जो तू भी, अपने पिता की तरह हैवान बन गया।

अमर, रीना की तरफ देखने लगा। माँ बोलीं, उसे ना घूर! उसने मुझे कुछ नहीं बताया।

आज नारी उतनी असहाय नहीं है, अकेली नहीं है, मैं हूँ इसके साथ। तू इसके साथ ठीक से रहेगा, तो ठीक।  नहीं तो मैं तेरे खिलाफ पुलिस में complain कर दूँगी। और इसे अपने साथ ले जाऊँगी।    

माँ का ऐसा रूप देखकर अमर डर गया, बोला आगे से आपको 
कभी ऐसी शिकायत नहीं होगी।

आज रीना को समझ आ रहा था, माँ जी दुखी क्यों नहीं थीं, शांत क्यों थीं। वो पापा जी के अत्याचार से मुक्त जो हो गईं थीं।

रीना सोच रही थी, जो काम मेरी माँ ने करने की नहीं सोची थी, वो मेरे लिए मेरी सास ने कर दिया था, माँ जी के डांटने के बाद से अमर ने फिर ना कभी शराब पी, ना कभी हाथ ही उठाया।

कुछ दिन और रुक कर वो बोलीं, मैं यहाँ यही देखने आई थी, कि 
अमर का व्यहवार तेरे साथ कैसा है? जब सब ठीक हो गया है, तो अब मुझे अपने घर जाने दे। अब ही तो मैं अपने घर को सही मायने में अपना महसूस कर पाऊँगी। 

जाते जाते माँ जी कह कर गईं थीं, अगर मेरे जाने के बाद अमर परेशान करे, तो मेरी बाट जोहती मत बैठना, सहन करने से अत्याचार कम नहीं होते हैं। सशक्त बन, अत्याचार अब और नहीं!

Tuesday, 13 August 2019

Story Of Life : अब और नहीं


अब और नहीं


रीना के ससुर जी की आज ही अर्थी उठी थी, पूरे घर में गम का माहौल था। रीना को सबसे ज्यादा अपनी सास नन्दा की चिन्ता सता रही थी। 

उसकी सास बहुत ही भली औरत थीं। पूरे घर की ज़िम्मेदारी वो हँसते हुए उठाए हुए थीं। घर में ससुर जी का कहा चलता था। उसकी सास का पूरा समय ससुर की सेवा में जाया करता था। दिन उनके काम से शुरू और रात उनके काम के साथ ही खत्म हुआ करती थी।

रीना ने अपने पति अमर से कहा, हम माँ जी को यहाँ छोड़ कर कैसे जाएंगे। उन्हें भी अपने साथ ले चलते हैं।

13 वीं होने के दूसरे दिन ही से सब जाने लगे। रीना ने कहा, माँ 
जी अमर की और छुट्टी नहीं हैं, हमें भी जाना होगा। आप भी साथ चलिये।

नहीं रीना मैं यहीं रहूँगी, माँ जी ने आहिस्ते से कहा। क्यों माँ जी? अब तो पापा जी भी नहीं हैं, किसका साथ रहेगा आपको?
नहीं चाहिए किसी का साथ। रीना ने गौर किया, जब से पापा जी गए थे। माँ, दुखी नहीं थीं, बल्कि बिल्कुल शांत-सी रह रहीं थी।

रीना ने आकर अमर को बताया, माँ जी ने साथ चलने से मना कर दिया है।

अमर ने कहा, मैं बात करूंगा।

ना जाने उसने माँ जी से क्या कहा? माँ जी ने packing शुरू कर दी थी, आखिर बेटे की बात कैसे टालतीं।

एक दिन रीना सुबह उठ कर आई, तो उसने full sleeves का कुर्ता डाला हुआ था। और एक हाथ से ही नाश्ता बना रही थी।

माँ जी ने पूछा, क्या हुआ रीना, एक ही हाथ से क्यों काम कर रही हो?