Saturday, 14 September 2019

Poem : हिन्दी दिवस में ही क्यूँ ?

हिन्दी दिवस में ही क्यूँ ?


हिन्दी, हिन्दी, हिन्दी,
इसकी गूंज, क्यों,
केवल हिन्दी दिवस,
में ही आती है?

बाकी दिन तो,
हिन्दी बोलने में भी,
किसी को रास,
नहीं आती है।

हिन्दी शब्दकोश का,
प्रचुर भंडार है,
अलंकार, मुहावरे, रस, छंद
इसमें अपार  हैं।

तो सोचिए ज़रा,
आखिर हिन्दी,
बोलने में, इतनी
शर्म क्यों आती है?

हिन्दी हर रिश्ते को,
एक अलग पहचान,
एक अलग अस्तित्व,
एक अलग ही मान,
दिलाती है। 

फिर क्या कारण है,
हमारी जिह्वा,
हिन्दी बोलने से,
कतराती है?

 विदेशी भाषाएं,
हमें खूब भाती है,
हिन्दी बोलते ही,
प्रतिष्ठा घट जाती है। 

आखिर क्यों हिन्दी,
अपने ही देश में,
मां भारती सा,
सम्मान नहीं पाती है?

हिन्दी पहचान है,
भारत की,
हिन्दी मान  है,
भारत की। 

तब हमें क्यों,
हिन्दी केवल,
हिंदी दिवस में ही,
याद आती है?

राष्ट्रीय हिन्दी दिवस के पावन  अवसर पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ।

आज मैं  कविता के माध्यम से आप सब के समक्ष एक प्रश्न रख रहीं हूँ। 

कृपया एक बार सोचिएगा जरूर, अगर हम अपनी भाषा का सम्मान करेंगे, तभी दूसरे भी करेंगे।   

Friday, 13 September 2019

Story of life : एहसास (भाग 3)

एहसास (भाग 1) और एहसास (भाग 2) के आगे...

एहसास (भाग 3)

मालिनी ने तुरंत ही action लेने start कर दिये। तुरंत policy बना दी, कि चाहे कोई patient हो, staff हो या डॉक्टर, किसी का भी bill hospital में free नहीं होगा। जो pay करेगा, उसी का hospital में treatment होगा।

उसके बाद उसने डॉ नितीश के लिए अपने सबसे बेकार, लापरवाह, rude डॉ और staff को appoint किया, अपने hospital के बेकार room को book किया, जहाँ का ना AC ढंग से work करता था, और वहाँ का bed भी बहुत झूल चुका था।

उसने सब को कह दिया था, जो उसके instruction follow नहीं करेगा, या उसकी डॉ नितीश से शिकायत करेगा, तो उसके 1 month की salary काट ली जाएगी। 

डॉ नितीश को ठीक हो कर join करने में कम से कम 6 month लगेंगे। तब तक वो ही head होगी। सारे instruction मालिनी के according follow होने लगे।

डॉ मालिनी ने डॉ नितीश के आनप-शनाप test करवाए। जिससे समय और पैसे दोनों बर्बाद हो रहे थे। साथ ही डॉ नितीश का दर्द भी बढ़ने लगा था।

फिर जब treatment start हुआ, तो बेकार डॉ और staff, तो treatment भी सही से नहीं हो रहा था। room में shift हुए तो बेकार room में एक रात गुजारने के बाद डॉ नितीश का patience जवाब दे गया।

डॉ नितीश ने डॉ मालिनी को बुलाने को कहा, तो दो दिन बाद मालिनी आई। अब तक तो डॉ नितीश गुस्से की आग में जलने लगे।

वो डॉ मालिनी को देखते ही बुरी तरह से चिल्लाने लगे। डॉ मालिनी ये क्या तमाशा लगा रखा है, आप किस तरह की head हैं? कि hospital में एक भी facility ठीक नहीं है।

जो test मेरे treatment के लिए जरूरी नहीं थे, उन्हें खाली समय और पैसा बर्बाद करने के लिए क्यों करवाए गए? उसके कारण मुझे व्यर्थ ही दर्द सहन करना पड़ा। उसके बाद इतने बेकार डॉ, staff, जिन्हें ना तो treatment की अक्ल है, ना बोलते ढंग से हैं, और लापरवाह भी हैं। और रही-सही कसर इस सड़े से कमरे ने पूरी कर दी है, कि कोई भी family member साथ रुकने को तैयार नहीं है।

मालिनी बोली, Sorry Sir...

आगे पढ़िए एहसास (भाग - 4) में...

Thursday, 12 September 2019

Story of life : एहसास (भाग-2)

Story of life :  एहसास(भाग- 1)के आगे..... 

Story of life :  एहसास(भाग-2)

सोचा ना, ये तो मेरा पहला प्यार है, और ये बहुत ही काबिल हाथों में है। मुझे आप दोनों पर पूर्ण विश्वास है, आप इसे ऐसे ही सुचारु रूप से चलाते रहेंगे।

डॉ. नितीश ने ज़ोर से हुंकार भरते हुए, डॉ अमर की हाँ में हाँ मिला दी। हाँ डॉ अमर आप ठीक कह रहे हैं, ये तो हम तीनों का सपना था। और हम इसका हमेशा ध्यान रखेंगे।

अब त्रिवेणी के head डॉ नितीश थे, तो सारे decision उनके according होते थे। 

जिसके कारण जो “hospital कभी patient का मन्दिर हुआ करता था, जिसकी सीढ़ी एक बार चढ़ने से सब स्वस्थ हो कर ही निकलते थे”, साथ ही “पूरे शहर में famous था, कि अगर ईमानदारी सीखनी हो तो त्रिवेणी hospital जाओ”। उसका स्वरूप पूरी तरह बदल चुका था। 

डॉ नितीश का सख्त instruction था, कोई भीं patient आए, तो उसके पहले  अनाप-शनाप test किए जाएँ, फिर treatment शुरू हो। गरीबों पर कोई दया नहीं की जाए, जो मोटी रकम चुकाए, उसी को देखें।

एक तरफ hospital की fees बढ़ा दी गयी, दूसरी तरफ doctors भी थोड़े लापरवाह हो गए, और hospital का maintenance भी लचर होने लगा।   जिससे hospital की शाख गिरने लगी।

इससे डॉ मालिनी बहुत दुखी हो गईं। पर नितीश मालिनी की एक ना चलने देते थे।

एक दिन डॉ नितीश का road accident हो गया, जिसमें उनके जगह जगह चोट लग गयी। जितने दिन नितीश bed पर थे मालिनी head हो गयी।

मालिनी ने तुरंत ही action लेने start कर दिये...... 

आगे पढ़ें एहसास(भाग- 3 ) में ....