Friday, 22 January 2021

Story of Life : यह कैसा प्यार (भाग -8)

यह कैसा प्यार (भाग-1), 

यह कैसा प्यार (भाग -2),

यह कैसा प्यार (भाग - 3),

यह कैसा प्यार ( भाग -4) ,

यह कैसा प्यार (भाग-5), 

यह कैसा प्यार (भाग -6) और

यह कैसा प्यार (भाग -7) के आगे .....

यह कैसा प्यार (भाग-8)


ऋषि ने देखा, रोहित उसके bed पर लेटा हुआ था और तान्या उस पर झुकी हुई थी।

वो रोहित से कह रही थी कि, आज ऋषि के आते ही उसे सबसे high dose की drugs दे दूंगी। तब तुम एक बार फिर अपने बंगले के चोर दरवाजे से अपने आदमी को बुलाकर उसकी अजीब सी आवाज़ और उसका साया दिखाकर, ऋषि को भ्रम में डाल देना। जब वो भ्रम से परेशान हो तभी तुम उससे पूरे business को मेरे नाम कर देना।

अच्छा! पर यह बताओ, उसके बाद मुझे क्या मिलेगा? रोहित ने तान्या को अपनी तरफ खींचते हुए पूछा, क्या हमेशा के लिए तुम मेरी हो जाओगी?

तान्या छिटक कर हटते हुए बोली, ज्यादा होशियार बनने की जरूरत नहीं है, तुम्हें यह तुम्हारा बंगला वापस कर दूंगी, इसी बात से खुश रहो।

पूरा business मेरा हो जाने के बाद तुम्हें अपनी एक रात तोहफे में दे दूंगी, इसके बाद मुझे जिंदगी में कभी मिलना मत।

ऋषि यह सब सुनकर टूट गया, drugs...... ओह तो मेरी मानसिक स्थिति ख़राब होने का कारण यह लोग हैं।

ना महबूबा अपनी थी ना दोस्त। 

आह ! कितनी निर्लज्ज स्त्री से मैंने प्यार किया...... जिसके लिए ना तो प्यार का मोल है ना अपनी इज्जत का। और एक दोस्त मिला था, वो भी दगाबाज।

ऋषि अन्दर आ गया। तभी बहुत तेज से table गिरने की आवाज़ आई।

तान्या और रोहित, आवाज़ की दिशा में भागे तो देखा ऋषि पंखे से लटक रहा था......

रोहित ने तुरंत उसे सम्भालते हुए नीचे उतारा, पर तब तक ऋषि दुनिया छोड़ चुका था।

यह जानते ही, तान्या खुश होते हुए बोली,  वाह! मुझे ऋषि से छुटकारा मिल गया। वो खुशी से रोहित की बाहों में झूल गई। रोहित की आंखों में आंसू थे। ना जाने खुशी के या ऋषि की जुदाई के।

तान्या ने उसी समय मीडिया को बुलाया और सब अखबारों में यह खबर छप गई कि ऋषि ने suicide कर लिया है।

जब ऋषि के घर वालों को पता चला तो उन पर गाज गिर गई, उसके पिता जी, को यकीन नहीं हुआ कि अचानक ऐसा क्या हुआ, जो ऋषि ने suicide कर लिया।

वो, अपने आप को कोस रहे थे कि वो उसे अपने साथ ही क्यों नहीं लाए?

आनन-फानन सब वहाँ पहुंचे तो उन्हें पता चला कि यह सच था, ऋषि का अंतिम संस्कार कर के सब वापस आ गए।

इस घटना के चंद दिन बाद,  तान्या ने रोहित से कहा, आज मैं तुम्हारे साथ आखिरी बार खाना खा रही हूँ, फिर तुम अपने रास्ते, और मैं अपने।

अभी खाना शुरू किया ही था कि, तान्या को ऋषि की आवाज़ सुनाई दी।

ऋषि की आवाज़ सुनकर तान्या बुरी तरह डर गई, फिर अपने को सम्भालते हुए रोहित पर बिफर गई, रोहित यह क्या हरकत है, तुम मुझे ऋषि की आवाज़ से क्यों डरा रहे हो?.....

कैसी आवाज़, मुझे तो कोई आवाज़ नहीं आ रही.....

अंतिम भाग पढ़ें, यह कैसा प्यार (भाग-9) में... 

Thursday, 21 January 2021

Story of Life : यह कैसा प्यार (भाग-7)

यह कैसा प्यार (भाग-1), 

यह कैसा प्यार (भाग -2),

यह कैसा प्यार (भाग - 3),

यह कैसा प्यार ( भाग -4) ,

यह कैसा प्यार (भाग-5) और

यह कैसा प्यार (भाग -6) के आगे.....


यह कैसा प्यार (भाग-7)




अब तो ऋषि को भी लगने लगा कि उसको भ्रम रहने लगा है। क्योंकि जो उसे दिखता है, वो ना तान्या को दिखता है ना रोहित को। 

उसे भी सिर्फ साया दिखाई देता है और आवाजें सुनाई दे रही थी, पर साक्षात् कुछ नज़र नहीं आता था।

इन सब के चलते ऋषि धीरे-धीरे मानसिक रूप से बीमार होता जा रहा था जिसके कारण वह business पर ठीक से ध्यान नहीं दे पा रहा था, तो वो धीरे-धीरे रोहित की partnership बढ़ाता गया।

अब partnership ऐसी थी कि, ऋषि 30% और रोहित 70% का partner हो गया था।

ऋषि ने ठीक होने के लिए दवाइयाँ भी लेनी शुरू कर दी।

पर उन दवाइयों का नशा ऐसा था कि वो 24 घंटे में से 16 ‌घंटे पूरी तरह झूमता ही रहता है। क्योंकि उसे पता ही नहीं चला था कि कब तान्या ने उसे दवाइयों के साथ drugs भी देनी शुरू कर दी।

ऋषि के पापा जी का एक दिन फोन आया, तो उन्हें ऋषि की तबीयत का पता लगा, वो फ़ौरन ऋषि से मिलने पहुँच गए।

जब ऋषि के पिता घर में आए, उस समय ऋषि रोहित के साथ doctor के पास गया था। 

तान्या नहीं चाहती थी कि वो ऋषि से मिलें, तो उसने पिता जी को यह कहकर वापस जाने को बोल दिया कि ऋषि business के सिलसिले में abroad गया है।

वो जाने लगे, तब तक ऋषि doctor के पास से लौट आया था। अपने पिता जी को देखकर वो बहुत खुश हुआ।

उसके पिता जी दो दिन रुके। इन दो दिनों में उसे कोई साया नहीं दिखा और कोई आवाज़ भी नहीं सुनाई दी। इसलिए उसने कोई दवा नहीं खाई। 

फिर भी उसकी स्थिति में सुधार आने लगा। ऋषि की स्थिति में सुधार देखकर पिता जी बोले बेटा, मेरे पेंशन लेने जाने का दिन आ गया है। तो मुझे जाना होगा, तू भी साथ चल। 

अब तो रोहित business संभाल रहा है तो तुझे उसकी भी कोई चिंता नहीं है।

ऋषि बोला, पिता जी आप चलिए। मैं दो दिन में आता हूँ। अबकी जब आऊंगा तो बहुत दिनों के लिए आऊंगा। माँ जी और भाभी से बोल दीजिएगा कि खूब सारे पकवान बनाकर रखें, अपने लाडले के लिए।

पिता जी को छोड़कर जब वो लौट कर आया, तो उसे अपने bedroom से आवाजें आती सुनाई दी।

उसने घर के बाहर से ही झांक कर देखा, तो अन्दर का दृश्य देखकर वो हैरान रह गया......

आगे पढ़ें यह कैसा प्यार (भाग - 8) में.....

Wednesday, 20 January 2021

Story of Life : यह कैसा प्यार (भाग-6)

यह कैसा प्यार (भाग-1), 

यह कैसा प्यार (भाग -2),

यह कैसा प्यार (भाग - 3),

यह कैसा प्यार ( भाग -4) और 

यह कैसा प्यार (भाग-5) के आगे.....

यह कैसा प्यार (भाग-6)



तान्या, मैंने रोहित को अपने बंगले में रहने को बोल दिया है ।

ओफ्फो ऋषि तुम्हें कभी अक्ल नहीं आएगी, क्यों कहा तुमने उससे? हम दोनों के बीच वो भी आ जाएगा।

अरे यार वो अकेला feel कर रहा था, फिर हमारा इतना बड़ा बंगला है, उसके outhouse में ही रह लेगा। 

Outhouse में?.....

क्यों तुम्हें अब उसमें भी परेशानी है?

नहीं, कोई परेशानी नहीं है, outhouse में शायद उसे बुरा लगे।

अब जब बोल ही दिया है, तो उसे हमारा तीसरा bedroom ही दे देना।

शाम को रोहित अपने सामानों के साथ बंगले पर पहुंच गया। रोहित पूरे बंगले को ऐसे देख रहा था, जैसे कुछ समझने या याद करने की कोशिश कर रहा हो।

तान्या ने बहुत ख़राब मन से रोहित को तीसरा bedroom दे दिया‌।

अब तो ऋषि और रोहित का साथ, दिन रात का रहने लगा।

सब कुछ अच्छे से चल रहा था, हाँ तान्या जरुर चिढ़ती रहती थी।

एक शाम को ऋषि को बंगले पर कुछ साया सा दिखा, ऋषि ने पीछा किया पर कोई नहीं दिखा।

फिर जब वो तान्या और रोहित के संग खाना खा रहा था,  उसने साफ़ साफ़ देखा, पर्दे के पीछे कोई है।

पर रोहित और तान्या ने कहा, वहांँ कोई नहीं है।

ऋषि ने उठकर देखा, पर वहाँ, सच में कोई नहीं था।

अब तो आए दिन, ऋषि को कभी आवाजें आती, कभी कोई दिखता। 

पर रोहित और तान्या, हमेशा यही कहते, उसका भ्रम है। और देखने पर ऋषि को कुछ दिखता भी नहीं।

ऋषि को भी अब......

आगे पढ़ें, यह कैसा प्यार (भाग-7) में.......