Monday, 3 December 2018

Recipe : Dhaba Special Palak Paneer


On the demand of one of the reader of my blog “shadesoflife18”, I’ve posted this recipe. So you can enjoy another flavor of palak paneer.

Dhaba Special Palak  Paneer

Ingredients:

Spinach –  250 gm.
Cottage cheese (Paneer) –  200 gm.
Ghee - 1tbsp
Tomato – 3 medium
Onion – 2medium
Garlic – 4 to 6 pods
Ginger – ½ inch
Green chilly –as per your taste
Salt  - as per taste
Method:
  1. Clean & wash the spinach, thoroughly.
  2. Blanch (slightly boil) the leaves and make puree of it.
  3. Cut cottage cheese into small cubes.
  4. Heat up clarified butter in a wok.
  5. Now, add chopped onion, garlic and ginger into the wok. Sauté it.
  6. Add chopped tomato, salt. Stir it.
  7. When tomatoes get little bit soften, add the spinach puree, cottage cheese cubes. Mix it well.
  8. After a while, add water & allow it to boil, so that it attains desired consistency.
  9. Serve it with hot chapattis and rice.

Note

  • In place of chopped Tomato you can add tomato puree. It enhances the taste and avoid tomato peel. 
  • If you are not diet conscious, then you can add 2 tbsp butter. It increases the Creamy texture and enhance the taste too. 

Sunday, 2 December 2018

Article : शादी (The Marriage Season)


शादी (The Marriage Season) 


आज कल शादी का माहौल चल रहा है, कितने ही घरों में शादी की शुभ मंगल शहनाई बज रही होंगी। तो दिल में यूं ही ख्याल आया, कि शादी कौन से season में अच्छी होती है। तो बस लगे सारे if and but सोचने।

तो चलिये शरद का मस्त महिना है, तो पहले इसी में होने वाली शादियों की चर्चा कर लेते हैं।
पहले बात करते हैं, arrangements की – ठंड हो तो गद्दे, रज़ाई की आवश्यकता होती है। कमरे सब के अलग अलग नहीं भी हों तो भी चल जाएंगे। जगह थोड़ी कम भी हो तो भी लोग उतना उधम नहीं काटेंगे। और सभी साथ साथ रहेंगे, तो माहौल भी ऐसा होगा जैसे कुछ special है।
अब रही बात खाने-पीने की व्यवस्था की, तो इतनी variety की सब्जी, वो भी सस्ते में मिलेंगी, कि आपकी party का menu, खूब लंबा ready हो जाएगा और party में चार चाँद आपके बजट में ही लग जाएंगे।
चलिये अब जिनकी शादी हो रही है, उनके भी हाल ले लेते हैं,
दूल्हे राजा शान से शेरवानी, कोट पहन के आते हैं। 
बस दुल्हन के लिए थोड़ा समस्या रहती है, fashion में स्वेटर, शाल भी नहीं ओढ़ सकती हैं, फिर उस पर फूलों का बड़ा सा गजरा लग जाता है, तो मानो करेला नीम चढ़ गया हो।
लेकिन दूल्हा, दुल्हन दोनों को फेरे के समय जब हवन कुंड के सामने बैठना होता है, तब ठंडक की शादी होने का आनंद ही मिल जाता है।
अब जरा गर्मी की शादी की भी बात कर लेते हैं। बात arrangements से ही शुरू करते हैं, कोई भी AC रूम में रुकने से नीचे की बात ही नहीं करेगा। जहां AC की बात आई, तो बस सबका रूम भी अलग अलग होगा। जब सब अलग अलग ही रहेंगे, तो माहौल भी सूना-सूना सा ही लगेगा।
अब रही खान-पीने की व्यवस्था की बात, तो सब्जियाँ सब एक से एक आती हैं, कद्दू, लौकी, तोरई, करेला, आदि। बस ले दे के एक भिंडी ही है, जो party की शान बन पाती है, तो बस यही सोचते रहो, कि menu क्या बनाया जाए, तब भी कुछ कमी सी ही लगती रहेगी।
और जिनकी शादी हो रही होगी, उसमें दूल्हा भी सोचता रहेगा, क्या पहनूँ, कि अलग दिखूँ, और दुल्हन भी इसी बात के लिए डरती रहेगी, कि makeup कैसे टिका रहे, और रही सही कसर हवन कुंड के सामने पहुँच कर पूरी हो जाती है।
तो कुल मिला के यही समझ आता है, कि खर्चा तो बहुत हो जाता है, पर शादी तब भी फीकी सी ही रह जाती है।
शायद यही कारण है, कि शादियाँ winter season में ही ज्यादा होती है, क्योंकि तब व्यवस्था करने वाले, जिनकी शादी होती है वे, और जिन्हें शामिल होना होता है वो भी, सभी ज्यादा प्रसन्न रहते हैं।
पर जिसकी शादी का जब भी मूहर्त निकले शुभ ही है। अभी जितने भी जोड़े प्रणय सूत्र में बंध रहे हैं, वे सभी अपनी शादी का आनंद उठाएँ ।
उन सभी को शादी की हार्दिक शुभकामनायें

Saturday, 1 December 2018

Story Of Life : दो भाई

दो भाई

निखिल अखिल दो भाई थे, दोनों में अगाध प्रेम। एक ना हो तो दूसरा तब तक कुछ नहीं खाता था, जब तक पहला ना आ जाए। एक ने कुछ बोल दिया, तो दूसरे के लिए पत्थर की लकीर।
दोनों के प्यार की पूरा परिवार, नाते-रिश्तेदार मिसाल दिया करते थे। एक साथ खेलते-खाते, पढ़ते लिखते हुए उनका बचपन बीत रहा था
दोनों ही बड़े होनहार थे। दोनों को ही बहुत ही अच्छी job मिली, पर अलग अलग शहरों में
शहरों ने दोनों को अलग अलग भले ही कर दिया हो, पर दिल से वो अभी भी जुड़े हुए थे। जब भी मिलते, दूरी की कसर निकाल देते।  
कुछ दिन बाद दोनों का ही विवाह सम्पन्न हो गया। जैसे भाई थे, पत्नियाँ भी दोनों की ही अच्छी आयीं।
समय व्यतीत होता गया। व्यस्तता और जिम्मेदारियाँ भी बढ़ने लगी। अब वो पिता भी बन चुके थे, और बड़े अधिकारी भी।
आजकल के माहौल के अनुरूप जैसे ही, वो लोग भी अब कम मिलने लगे। अखिल निखिल के माँ पापा को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर वजह क्या हुई है, अब ये लोग कम क्यूँ मिलने लगे हैं?
उन्होंने ये निर्णय लिया कि वे उनके घर में जा कर पता करेंगे।
पहले वो लोग निखिल के घर गए। निखिल नीता सुबह 8 बजे office के लिए निकल जाते, और दोनों बच्चों को maid 8:30 बजे ready करके school छोड़ आती। सुबह का निकला पूरा घर रात 8 बजे ही घर लौटता। पूरे दिन घर खाली ही रहता। और 8 बजे ही जब सब आते तो maid भी आती। maid आते ही खाना बनाती, सब कपड़े बदल के खाने बैठ जाते, फिर थोड़ा TV, whatsapp और Facebook। और फिर सब अपने अपने बिस्तर पर।
कुछ दिन निखिल के साथ रह कर माँ पापा अखिल के घर चले गए। पर वहाँ भी जा कर उन्हें कुछ अच्छे हालात नहीं मिले।
अखिल सुबह 7 बजे निकलता, क्योंकि दिल्ली में rush भी ज्यादा था, और उसका office भी दूर था। आरती नन्हें अंकित को crèche  में छोड़ के अपने boutique के लिए निकल जाती। और शाम 6 बजे अंकित को लेते हुए ही लौटती, पर अखिल तो 10, 11 बजे से पहले लौटता ही नहीं था।
जिसका नतीजा ये था कि अखिल कभी भी अंकित के साथ खेल तक नहीं पाता था। और उस पर भी सोने पर सुहागा ये था की, उसके आए दिन tour हुआ करते थे। जो की 2 दिन से लेकर 10 दिन तक के होते थे।  
निखिल, अखिल लोगों का ऐसा routine देखकर, उसके माँ, पापा को बहुत दुख हुआ। वो सोचने लगे जब इन लोगों के पास एक दूसरे(पति-पत्नी)के लिए टाइम नहीं है। अपने बच्चों को भी ये समय नहीं दे पाते हैं। तो दोनों भाई एक दूसरे के लिए क्या समय निकालेंगे।
उन्होंने अखिल से पूछा, बेटा कभी भाई की याद नहीं आती है? क्यों पापा, आप ऐसा क्यों पूछ रहे हैं? भइया ने आपसे कुछ कहा क्या? उन्होंने बोला नहीं बेटा उसने तो कुछ नहीं बोला, पर अब तुम लोगों में वो प्यार नहीं दिखता है।
अरे पापा आप ऐसा क्यों बोल रहे हैं? मैं और भइया आज भी एक दूसरे से, social media  पर जुड़े हुए हैं, रोज़ ही chat होती है और हाँ पिछले साल ही आप लोगों की anniversary में मिलके सब ने कितना धमाल किया था।
अखिल पिछले साल ऐसे बोल रहा था, जैसे चार दिन पहले ही मिला हो।
माँ पापा दोनों वापस लौट आए थे, उनको उदास देखकर उनके दोस्त शर्मा जी ने पूछ ही लिया, क्या हुआ यार? दो दो होनहार बेटों के पास से लौट के आए हो, तब भी दुखी हो। उन्होंने शर्मा जी को अपने बेटों का रूटीन बताया, और बोला दोनों अब सिर्फ whatsapp पर ही बात करते हैं।
अरे यार तुम कौन से ज़माने में जी रहे हो? अखिल सही ही बोल रहा था, दोनों में अब भी बहुत प्यार है, तभी तो whatsapp में जुड़े हैं। अगर तुम्हें उनका प्यार देखने का बहुत मन है, तो पूरी family का एक group बना लो। सब सही सही पता चल जाएगा। अब माँ, पापा भी उन लोगों से जुड़ गए, और अब उन्हें संतोष था, कि आज भी दोनों भाई में पहले जैसा ही प्यार है, बस अब वो केवल स्क्रीन तक ही सिमट गया है। पर क्या ये वैसा ही है, जो दोनों में बचपन में था?