जब से भारत में BJP government आयी है, हर क्षेत्र में विभिन्न परिवर्तन किए जा रहे हैं।
अब उसी परिवर्तन का असर education पर भी दिख रहा है, और सबसे अधिक परिवर्तन class 9 में दिखाई दे रहा है।
या यूं कहा जाए कि class 9 का तो लगभग पूरा syllabus ही change किया जा रहा है, तब वो भी अतिशयोक्ति नहीं होगी।
इसके कारण बच्चे, teachers और parents, सभी परेशान हैं। इसका एक बहुत बड़ा कारण है कि अभी तक बहुत कुछ निर्धारित ही नहीं है कि क्या नियम पूरी तरह लागू किया जाएगा।
NEP 2020 के लागू होने से कक्षा 9 में पढ़ने का तरीका पूरी तरह बदल गया है। अब रटने की बजाय समझ पर जोर है, तीन भाषाएं अनिवार्य हो गई हैं, और छात्रों को vocational courses और अन्य विषयों को चुनने की अधिक लचीली सुविधा मिल गई है।
NEP 2020 के तहत कक्षा 9 पर पड़ने वाले मुख्य प्रभाव इस प्रकार हैं…
NEP के फ़ायदे और नुकसान
Three-language Rule :
कक्षा 9 से 10 तक के छात्रों के लिए तीन भाषाएँ (R1, R2, R3) पढ़ना अनिवार्य कर दिया गया है। इनमें से कम से कम दो भाषाएं भारतीय होनी चाहिए। हालांकि तीसरी भाषा की अनिवार्यता इसी वर्ष से की जा रही है, इसलिए तीसरी भाषा पढ़ना तो अनिवार्य है, किन्तु इसकी परीक्षा को class 10 board exams में शामिल नहीं किया जाएगा।
लेकिन इस साल के बाद के बच्चों के लिए परीक्षा की अनिवार्यता भी लागू की जा सकती है। और एक बात, तीसरी भाषा को पढ़ने की अनिवार्यता इस वर्ष जो class 10th में हैं, उनके साथ भी है, बिना परीक्षा की अनिवार्यता के साथ।
Importance of Sanskrit (R3)-
संस्कृत हमारे देश भारत की मुख्य भाषा के रूप में मानी जाती है, जो कि बहुत scientific language है। इसके ज्ञान से हम अपने वेद-पुराणों से जुड़ते हैं, जिसमें सार है जिंदगी का।
उसके साथ ही अगर कोई संस्कृत भाषा में निपुण हो गया, तो विश्व की कोई भी भाषा को समझना अत्यधिक आसान हो जाता है।
फिर क्या हम अपने धर्म और देश से जुड़ने के लिए अपने बच्चों को संस्कृत भाषा खुशी-खुशी नहीं पढ़ा सकते हैं?
End of Rote Learning :
अब curriculum को rote learning से हटाकर experiential और application-based में लागू करने योग्य बनाया गया है।
Competency-Based :
Exams में सीधे प्रश्न पूछने के बजाय case-based, analytical और MCQ (multiple-choice questions) ज्यादा पूछे जाते है।
Flexibility of Subjects :
अब arts, science और vocational courses के बीच कोई सख्त दीवार नहीं है। छात्र अपने मुख्य विषयों के साथ-साथ vocational course या अपनी पसंद के कौशल चुन सकते है।
Change of Books :
NCERT ने नए pattern के अनुसार कक्षा 9 के curriculum में भी संशोधन किए हैं, ताकि इसे NCFSE 2023 और NEP के अनुकूल बनाया जा सके।
- Advantages- जो सोच है, अगर वो पूरी तरह से applicable हो सके, तो सचमुच भारत में education next level पर पहुंच सकती है। बच्चे और अधिक confident होंगे अपने भविष्य को लेकर, और अधिक सशक्त होंगे अपने भविष्य में, साथ ही वो वही पढ़ेंगे जो वो पढ़ना चाहते हैं, अतिरिक्त विषयों का बोझ उन पर नहीं होगा।
- Disadvantages- CBSE board की तरफ से हर रोज़ कोई नया नियम सुनाया जा रहा है, और वो लागू होगा कि नहीं, इसकी कोई guarantee नहीं है। अभी तक सभी पुस्तकों का न आना बच्चों को सटीक रूप से पढ़ने में बाधा डाल रहा है। Process बदलने के कारण education का level समझ नहीं आ रहा है कि गिर जाएगा या उठेगा। अत्यधिक सरलता लाने के ऊहापोह में education का स्तर नहीं गिरने देना चाहिए।
जो भी निर्धारित करना है, वो July से पहले हो जाना चाहिए। निर्णय में दृढ़ नहीं होने से बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बच्चों को यह बिल्कुल नहीं लगना चाहिए कि उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इससे बच्चे अपने उज्जवल भविष्य के सपने से भटक जाते हैं, जो किसी भी तरह से देश के विकास में बाधा उत्पन्न होता है
Class 9 भविष्य की नींव रखी जाने वाली class है, इसके सभी निर्णय बहुत सोच-समझकर और समय-सीमा के अनुसार लेने चाहिए।
सही निर्णय देश के विकास और ग़लत निर्णय देश के पतन की ओर ले जाएगा।
BJP government से करबद्ध प्रार्थना है कि जो भी निर्णय लेना है, सोच-समझकर लें और समय-सीमा के अंदर लीजिए, तभी जो आपने सोचा है, वो सही रूप से applicable होगा।
जय हिन्द, जय भारत!
