छूटा तेरा दर,
तो तेरी बहुत याद आई।
न लौट पा रहा तेरे दर पर,
कटती नहीं है तन्हाई।।
न जाना था कि कितने अच्छी जगह रहते थे, न जाना था कि बिछड़ कर याद करेंगे इतना, पर जनाब सच कहते हैं, जिंदगी महानगरों में नहीं नगरों में ही जिंदा है आज भी।
यह शहर इतने advanced हैं कि आप सब पा जाओगे और ऐसे भी नहीं हैं कि जिसमें आप खो जाओगे।
आज बात कर रहे हैं उन शहरों की जो महानगर , जैसे Delhi, Mumbai, Kolkata, Chennai आदि नहीं हैं, अभी भी नगर ही हैं, जैसे Lucknow, Agra, Prayagraj, Kanpur आदि, कुछ इनसे भी थोड़े छोटे नगर जैसे Mathura, Vrindavan, Ayodhya, Haridwar, Rishikesh आदि…
जिंदगी Tier-2 Cities में
यह नगर जिन्हें tier-2 cities भी कहते हैं, जिंदगी आज भी यहीं बसती है, महानगरों में नहीं।
महानगरों में लोग सिर्फ और सिर्फ भाग रहे हैं, कुछ बन जाने के लिए, कुछ पाने के लिए, इस बात से बेखबर कि उसके कारण ही वो दूर होते चले जा रहे हैं, अपनों से, सुकून भरे पलों से।
महानगरों में कितने ही लोग ऐसे होंगे, जो यह तक नहीं जानते हैं कि उनका पड़ोसी कौन है? और कितने तो ऐसे भी होंगे, जिन्होंने अपने पड़ोसी से कभी बात भी नहीं की होगी।
वैसे पड़ोसियों की बात छोड़ दें तो कितनों ने अपनों से ही न जाने कब से बात नहीं की है।
वहीं बात करें अगर tier-2 cities की, तो आज भी वहां रिश्ते-नाते, दोस्ती-यारी, पास-पड़ोस निभाया जा रहा है। एक की परेशानी सबके लिए दुःख का कारण होता है और एक की खुशी सबका उत्सव।
अगर दूरी की बात करें तो न तो सड़कों पर इतनी दूरी है, न दिलों में कि एक साथ वक्त न बिताया जाए।
अगर महंगाई की बात करें तो हो सकता है वहां दो पैसे कम कमा रहे हों लोग, पर खर्चा भी 4 पैसे कम ही होगा। फिर वो चाहे रोज़मर्रा की जिंदगी का हो, जैसे किराया, साग-सब्जी, कपड़ा, आदि या पढ़ाई-लिखाई, महरी, घूमना-फिरना, hotel इत्यादि।
In short बोलें तो सुकून से जिंदगी व्यतीत की जा सकती है, प्यार-मोहब्बत, जिम्मेदारी और मस्ती के साथ।
और सचमुच में जिंदगी यही है, तो जब तक आपकी मजबूरी न हो, अपने प्यारे से शहर को मत छोड़िए। महानगर, सिर्फ मृग मरीचिका है, छलावा है, इसके लिए लालायित होना अपने हिस्से में केवल अंतहीन दौड़ लाना और अपनों से दूर होना है। अपनों के बीच रहिए, ख़ुश रहिए…

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