Thursday, 9 July 2026

Poem : जन्मदिवस पर स्नेहाशीष

एक माँ का अपने बेटे के लिए स्नेहाशीष…

जन्मदिवस पर स्नेहाशीष


मनुष्य जन्म को तब,

आधार मिलता है।

जब मां-पापा बनने का,

अधिकार मिलता है।

जीवन की बगिया में, 

वो जो पुष्प खिलता है।

सम्पूर्णता मिल गई हो जैसे, 

यह एहसास मिलता है।

अपने अस्तित्व को भूल,

मां-बाप उसमें ही खो जाते हैं। 

उसके इर्द-गिर्द ही अपनी, 

दुनिया सजाते हैं।

पर यह बच्चे पर भी,

निर्भर करता है।

सुखद जीवन मिले उन्हें,

वो अपने कर्मों से तय करता है।

फिर अगर मिल जाए,

अद्वय-सा बच्चा।

सुखद जीवन का स्वप्न,

हो जाए सच्चा।

कुशाग्र बुद्धि, बेहद सरल,

जैसे बहता अविरल जल।

जितना चंचल, उतना कोमल,

डिगे नहीं, चाहे हो जो पल।

संस्कृति, विज्ञान का वो संगम,

उजला तन उजला ही मन।

उसकी हर एक को कामना,

सुखद रहे जीवन उसका, 

यही है ईश्वर से मेरी प्रार्थना। 


हे ईश्वर, कोटि-कोटि आभार आपको, जैसे बच्चे की कामना होती है सबको, वैसा ही बच्चा आपने दे दिया हमको।

जन्मदिवस पर विशेष शुभकामनाएँ हमारे प्यारे बेटे अद्वय!