Tuesday, 30 June 2026

India's Heritage : चरण स्पर्श का औचित्य

आज हम India's Heritage segment में भारतीय संस्कृति से जुड़ी अत्यंत महत्वपूर्ण परंपरा को discuss करेंगे। 

भारतीय परंपरा में बड़ों से मिलने के लिए विशेष भंगिमाएं हैं, जिन्हें शिष्टाचार का प्रतीक मानते हैं।

पर कभी सोचा है कि यह विशेष भंगिमाएं क्यों? क्या इसके पीछे कोई वजह है? क्या वो वजहें scientific भी हैं?

तो सबसे पहले आप को बता दें कि भारतीय संस्कृति सनातन है, और इसमें किए जाने वाले प्रत्येक कार्य के पीछे जितना आध्यात्मिक कारण है, उतना ही scientific भी।

आज बात करेंगे चरण स्पर्श की...

चरण स्पर्श का औचित्य


हमारी संस्कृति में बड़े-छोटों सभी को Hi-Hello कहकर नहीं मिला जाता है।

भारतीय संस्कृति में अपने से बड़े (उम्र में या पद में) या शिक्षक हों, उनसे मिलकर अभिवादन का तरीका यह है कि उनके चरणों को स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लिया जाए। 

आशीर्वाद, किस लिए? उससे क्या हो जाएगा? क्या आशीर्वाद कुछ होता भी है? और क्यों जरूरी है आशीर्वाद लेना?

देखिए, हर बात विश्वास पर टिकी है, मानों तो भगवान, न मानो तो पत्थर। पर सच यह है कि ईश्वर हैं, उनका अस्तित्व है, उनकी supreme power है। संसार को वही चला रहे हैं।

उसी तरह आशीर्वाद है, उसमें असीम divine power है, और जिनके पास अपने बड़ों का आशीर्वाद रहता है, वह अधिक सुखी और संतुष्ट रहते हैं।

भारतीय संस्कृति में सृष्टि में व्याप्त हर एक को एक विशेष स्थान दिया गया है।

फिर हमसे जुड़े रिश्ते तो सर्वोपरि हैं, फिर वो चाहे मां-पापा का हो, गुरु का हो, या हमसे जुड़ें किसी भी बड़े का, उन सबका स्थान ईश्वर के बाद, सर्वाधिक वंदनीय माना गया है।

अब जान लेते हैं कि चरण स्पर्श करने का scientific effect क्या होता है।

भारतीय संस्कृति में बड़ों के ‘चरण स्पर्श’ (पैर छूने) की परंपरा केवल संस्कार या शिष्टाचार नहीं है, बल्कि इसके पीछे deep physical, mental और scientific importance भी है। यह प्रक्रिया energy level को balance करने और विनम्रता विकसित करने में मदद करती है।


Scientific Effects :

  • Energy Flow and Circuits- Scientifically, human body में neuro-electric energy का flow लगातार होता रहता है। इसमें brain को North Pole और पैरों को South Pole माना जाता है। जब कोई व्यक्ति बड़ों के चरण छूता है, तो उसके हाथ और सामने वाले के पैर मिलकर एक Energy Circuit complete करते हैं, जिससे positive energy का flow होता है। Positive energy मतलब सब कुछ अच्छा।
  • Blood Circulation- जब चरण स्पर्श किया जाता है, तो जिस posture में झुककर आशीर्वाद लेते हैं, उससे (जैसे घुटनों के बल बैठकर या झुककर) blood flow सिर और चेहरे की ओर तेजी से बढ़ता है। इससे brain function बेहतर होता है और आंखों की रोशनी भी बढ़ती है।
  • Mental Peace and Balance- जब चरण स्पर्श किया जाता है, तो जिस posture में झुककर आशीर्वाद लेते हैं, उससे झुकने की मुद्रा हमारे अहंकार को कम करती है। Psychological perspective से, यह अभ्यास, हमें mental peace और emotional balance प्रदान करता है, जो overall mental health के लिए लाभदायक है।
  • Pressing of Accupressure Points- पैरों के अंगूठे और तलवों में ऊर्जा केंद्र होते हैं। हाथों से पैर छूने पर ये accupressure points active हो जाते हैं, जो nervous system को आराम देने में सहायक होते हैं। अर्थात् आप के चरण स्पर्श से आपके बड़े को शारीरिक रूप से आराम मिलता है। 

और इन सबसे प्रसन्न होकर उनके मन के भीतर से आपको आशीर्वाद मिलता है, जिसमें आपके शुभ की, आपकी सफलता की, आपकी सुख, समृद्धि, शांति और सुकून की कामना होती है, और जब कामना मन के प्रसन्न होने से की जाती है, तो वो शत-प्रतिशत पूर्ण होती है।

पर यह परंपरा कुछ-कुछ भारतीय घरों से विलुप्त होने लगी है, जो कि नहीं होनी चाहिए। 

जो उचित न हो, अत्यंत कष्टकारी हो, और जिससे कोई लाभ न हो, उसे discard किया जाए, समझ आता है। पर जो सरलतापूर्वक हो जाए, उससे scientifically, psychologically, emotionally और spiritually लाभ मिलता हो, उस परंपरा को कायम रखने का औचित्य है।

चरण स्पर्श का औचित्य है। यह परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी बनी रहे, इसकी जिम्मेदारी हमारी है, कि जो सुख और संतोष हमें मिला, वो हमारे बच्चों को भी मिले।

जय सनातन संस्कृति!