Tuesday, 21 July 2026

Story of Life : वो कौन था (अंतिम भाग)

वो कौन था (भाग-1),

वो कौन था (भाग-2),

वो कौन था (भाग-3)

वो कौन था (भाग-4) के आगे…

वो कौन था (अंतिम भाग)


“सर, यह आपको बहुत प्यार करती थीं, पर आपने इन्हें कभी तवज्जों ही नहीं दी। आपके medical world में डूब जाने के बाद यह धीरे-धीरे depression में चली गईं और एक दिन mental asylum में आ गईं।

“पर तुम्हें कैसे पता यह सब?”

“सर, मेरी बुआ जी यहां पर doctor हैं, तो उन्हीं से मिलने आया था। तभी मुझे तृषा दिखी, उसका पीछा किया तो वो इस कमरे में चली गई। मैंने बुआ जी से पूछा कि उस कमरे में कौन है, और तृषा वहां क्यों गयी है, तब पूरी बात पता चली। पर अब मैं जो आपको बताने जा रहा हूं, वो बात अविश्वसनीय है, और जिसके कारण ही आपके hospital को defame मिला।”

“ऐसा भी क्या बताने जा रहे हो? ज्यादा पहेली न पूछो, सीधा-सीधा बताओ।”

“सर, हमारे hospital में तृषा के साथ जो कुछ भी हुआ था, वो उसके साथ किसी और ने नहीं बल्कि खुद तृषा ने किया था, जिससे उस तमाशे के बाद hospital में resignation letter छोड़कर चली जाए और कुछ दिन बाद आपको और Srijan hospital को defame कर दें।”

यह सुनकर कुशल चौंक गया कि उसको बर्बाद करने के लिए तृषा इस हद तक गिर गयी। उससे रहा नहीं गया और वो सीधे रिया के कमरे में पहुंच गया।

कुशल को वहां आया देखकर तृषा सकपका गई और रिया खुशी से चहक उठी।

कुशल ने गुस्से से तमतमा कर तृषा की ओर देखा और कहा, “मुझे तुमसे इस तरह की उम्मीद बिल्कुल नहीं थी। मैं सोच ही नहीं सकता था कि कोई लड़की अपने को इस तरह से भी प्रताड़ित दिखा सकती है। क्यों, आखिर क्यों? क्या कसूर था मेरा!”

तृषा ने घृणा से कहा, “आप मेरी दीदी के, मेरे बचपन के खोने के दोषी हैं।”

“किस तरह से दोषी हो गया? मैंने तुम्हारी दीदी से कभी प्यार नहीं किया, तुम्हारी दीदी मुझसे प्यार करती थी, उसने कभी इज़हार नहीं किया, कि मैं जान पाता कि तुम्हारी दीदी मुझे चाहती है। तो मैं दोषी कैसे हो गया? मेरे doctor बनने की चाह हमेशा से मानवता की सेवा थी। क्या ऐसी सोच, ऐसी चाह गुनाह है? और तुमने मेरे hospital को defame करके न केवल मुझे नुकसान पहुंचाया है, बल्कि लाखों-करोड़ों उन मरीजों को भी नुकसान पहुंचाया है जिन्हें अच्छे treatment की आवश्यकता है। तुमने बदला लेने के जुनून में न केवल अपने स्त्री होने को, बल्कि अपने doctor होने को भी अपमानित और कलंकित किया है।”

कुशल की ऐसी बातों ने तृषा के साथ-साथ रिया को भी झकझोर दिया।

रिया अपनी छोटी बहन तृषा को बहुत चाहती थी, तृषा की इन हरकतों से क्रोधित होते हुए बोली, “तृषा, तूने मेरे देवता को अपमानित किया है, तूने गलत सोचा है कि मेरी तबीयत इनके कारण ख़राब हुई है। इन्हें तो पता ही नहीं था कि मैं इन्हें चाहती थी। मैं इनसे कभी अपने मन की बात बोल ही नहीं पाई।” कहकर रिया फूट-फूटकर कुशल के पैरों पर गिर गई।

“दीदी, मुझे माफ़ कर दो, आप ही मेरा सब कुछ थीं, आपकी ऐसी हालत देखकर मैं सिहर उठी थी, क्रोध से पागल हो गई थी और उसमें मैंने देवता तुल्य कुशल सर को और न जाने कितने मरीजों को नुक़सान पहुंचा दिया।”

“कुशल सर, मुझे माफ़ कर दीजिए, मैं आपकी स्त्री जाति की और doctor होने की गरिमा की गुनहगार हूं। मुझ नादान, नासमझ को माफ़ कर दीजिए।”

कुशल ने रिया के सिर पर प्यार से हाथ फेरा और उसके जल्दी ठीक होने की कामना कर तृषा से बिना कुछ बोले वहां से चला गया।

अगले दिन, बहुत से newspaper के front page पर तृषा का confession था कि सृजन hospital से सुरक्षित कोई जगह नहीं है। उसके साथ जो कुछ भी हुआ था, उसकी जिम्मेदार वो खुद है।

इसके कुछ दिनों बाद से ही वापस से सृजन hospital और doctor कुशल की fame हर जगह जगमगा उठी। जिस-जिस ने उल्टे-सीधे इल्ज़ाम लगाए थे, सबने माफी मांगी। सारे doctors लौट आए, including तृषा।

रिया का इलाज सृजन hospital में ही होने लगा, और वो बहुत तेजी से ठीक होने लगी…

Monday, 20 July 2026

Story of Life : वो कौन था (भाग-4)

वो कौन था (भाग-1),

वो कौन था (भाग-2)

वो कौन था (भाग-3) के आगे…

वो कौन था (भाग-4)


एक दिन राघव ने कुशल को आकर जो बताया, वो अविश्वसनीय था, ऐसा भी हो सकता है, वो सोच ही नहीं सकता था।

वो सीधा राघव के साथ वहाँ पहुंच गया, जहाँ से राघव को यह अविश्वसनीय खबर मिली थी। वो एक mental asylum था।

“राघव, यह मुझे कहाँ लाए हो?”

“Sir, उस जगह, जहाँ आपको अनबुझ पहेली का जवाब मिलेगा। आप बस चुपचाप मेरे पीछे-पीछे आइए।”

राघव के साथ कुशल चुपचाप चलता गया और finally राघव एक कमरे की खिड़की के सामने जाकर रुक गये। कमरे में मद्धम रोशनी थी, जो कि वहाँ एक लेटी हुई पर पड़ रही थी।

जब कुशल ने गौर से देखा तो चौंक गया, “अरे! यह तो रिया है।”

“हाँ Sir, यह रिया जी ही हैं।” राघव ने स्वीकृति में सिर हिला दिया।

“मेरी classmate, मेरी ही तरह बहुत होनहार, पर यह यहां कैसे पहुंच गई?” कुशल पुरानी यादों में खो गया...

“आपके कारण सर।”

“मेरे कारण! यह तुम क्या कह रहे हो? मैंने ऐसा क्या किया? मैंने इसके साथ कुछ बुरा किया था, ऐसा तो मुझे कुछ याद नहीं।”

“सर…

आगे पढ़ें, वो कौन था (अंतिम भाग) में…

Sunday, 19 July 2026

Story of Life : वो कौन था (भाग-3)

वो कौन था (भाग-1)

वो कौन था (भाग-2) के आगे…

वो कौन था (भाग-3)


उसने hospital में CCTV cameras और बढ़ा दिए, जिससे यह काम और मुस्तैदी से किया जा सके।

पर दो दिन बाद ही यह क्या हुआ, जिसे देखकर सब हतप्रभ रह गए।

तृषा का पूरा room गुलाब के फूलों से सजा हुआ था, और उसकी table पर खून से लिखा हुआ था, “तृषा, तुम्हें मेरी होने से कोई नहीं रोक सकता है!”

और वहीं एकदम गुमसुम-सी पीली पड़ चुकी तृषा खड़ी हुई थी, जिसकी आंसूओं से भरी आंखें मानो सबसे कह रही हों, ‘Please मुझे जाने दो, वरना मैं नहीं बचूंगी।’

कुशल ने आगे बढ़कर जब तृषा को थामा, तो तृषा बेहोश होकर उसकी बाहों में झूल गयी।

जब तृषा को होश आया तो वो बस एक ही रट लगाए हुए थी कि अब वो नहीं रुकेगी और चली जाएगी। 

कुशल ने CCTV footage देखी तो हैरान रह गया, तृषा के room के पास के सारे CCTV cameras बर्बाद किए जा चुके थे। अतः कुछ भी नहीं पता चला।

अगले दिन सुबह ही तृषा ने कुशल की table पर अपना resignation letter रख दिया और hospital छोड़कर चली गई।

एक अनबुझ पहेली-सी तृषा आई थी और चली गई।

दो दिन बाद ही हर newspaper की headline थी कि सृजन hospital में ladies staff safe नहीं हैं, इसलिए ही एक होनहार doctor तृषा ने तंग आकर hospital छोड़ दिया।

News का आना था कि हर ओर कुशल की चर्चा होने लगी कि कुशल ने ऐसा hospital खोलकर लोगों की भावनाओं से खेला है।

इस बदनामी के साथ hospital में आने वाले patients की संख्या घटने लगी और कुछ और male and female staff ने resign कर दिया।

अचानक से हुई इस घटना ने कुशल की बरसों की मेहनत तबाह करनी शुरू कर दी।

एक दिन राघव ने कुशल को आकर जो बताया, वो अविश्वसनीय था, ऐसा भी हो सकता है वो सोच ही नहीं सकता था।

वो सीधा राघव के साथ वहां पहुंच गया, जहां से राघव को यह अविश्वसनीय खबर मिली थी…

आगे पढ़ें, वो कौन था (भाग-4) में…

Saturday, 18 July 2026

Story of Life : वो कौन था (भाग-2)

वो कौन था (भाग-1) के आगे…

वो कौन था (भाग-2)


सबने सुना पर कोई सामने नहीं आया, और तृषा को परेशान करने का सिलसिला पुरजोर चलता रहा। एक दिन तृषा ने तंग आकर hospital से resign करने का मन बना लिया और सीधे पहुंच गई कुशल के पास।

कुशल ने एक बार फिर सबको बुला लिया।

ऐसा क्या है जो एक lady हमारे यहां safe नहीं रह सकती है। धिक्कार है कि हम doctors के बीच भी कोई अपने आप को असुरक्षित महसूस कर रहा है।

रोहित, विनय, समीर पहले से ही hospital में appointed थे। तृषा की joining के साथ राघव, दीपक, सुगंधा और निशा ने join किया था।

सारे doctor एक से एक शरीफ़ थे, कि किसी पर भी इल्ज़ाम लगाना उनकी dignity को चोट पहुंचाना था।

फिर ‌‌तृषा के अलावा बाकी भी जो lady doctors थीं, उन्हें कोई problem नहीं थी। ऐसा नहीं था कि वो साधारण नयन नक्श की हों।

सबसे सुंदर तृषा थी, पर बाकी भी लगभग उसकी टक्कर की थीं। पर तृषा के साथ होनी वाली घटनाओं के कारण सब तृषा के लिए चिंतित रहते थे। 

ऐसा इसलिए भी था, क्योंकि hospital का माहौल बहुत friendly और homely था। सब एक-दूसरे को लेकर बहुत concerned रहते थे।

इन सबके बावजूद कोई उस stalker को पकड़ नहीं पा रहा था। वो इतना ज्यादा शातिर था कि सबकी मौजूदगी में भी अपने काम को बखूबी अंजाम दे रहा था।

“कुशल सर, मैं तंग आ चुकी हूं इन सब हरकतों से, please मेरा resignation स्वीकार करें और मुझे जाने दें।”

तृषा का resignation, सबके लिए यह खबर shocking थी, वैसे भी शहर के सबसे अच्छे hospital से किसी doctor का resign करना अपने आप में बड़ी news थी।सब उससे रुकने को कहने लगे।

कुशल ने हाथ जोड़कर तृषा से request की, कि बस एक हफ्ते का समय और दे, वो जरूर से उस imposter को ढूंढ निकालेगा।

फिर वो सबकी तरफ मुखातिब होते हुए बोला, मुझे आप सबका साथ चाहिए इस काम में....

उसने hospital में CCTV cameras और बढ़ा दिए, जिससे यह काम और मुस्तैदी से किया जा सके।

पर दो दिन बाद ही यह क्या हुआ, जिसे देखकर सब हतप्रभ रह गए...

आगे पढ़ें, वो कौन था (भाग-3) में…

Friday, 17 July 2026

Story of Life : वो कौन था (भाग-1)

वो कौन था (भाग-1)


कुशल अपने नाम-सा हर काम में कुशल था, वो बहुत नामी doctor था। कारण?

उसका diagnostics बहुत कमाल का था, उसे बीमारियां समझने के लिए किसी भी तरह के test की आवश्यकता नहीं होती थी।

बस patient का सामने होना उसके लिए काफी था, patient की condition और symptoms से वो बहुत जल्दी समझ जाता था कि बीमारी क्या है।

उसे genius doctor कहा जाता था और उसके patients ने उसे भगवान का दर्जा दिया हुआ था। 

इन सबके बाद भी वो बेहद सरल और शालीन इंसान था। उसने अपनी fees हद की बढ़ाकर नहीं रखी थी।

उसका genius doctor होना और nominal fees होने के कारण उसके यहां patients का तांता लगा रहता था।

उसने अपने लिए कभी समय ही नहीं निकाला और अपना जीवन medical को समर्पित कर दिया।

अपनी मेहनत और अथक प्रयास से उसने एक बड़ा hospital खोल लिया और उसमें अपने जैसे ही capable और dedicated doctors appoint किए। 

कुशल का hospital दो buildings में बंटा हुआ था, जहां अमीर-गरीब हर तरह के patients का उनकी हैसियत के अनुसार arrangements था।

Hospital बहुत अच्छे से चल रहा था, जब तक वहां तृषा नहीं आई थी। नहीं, तृषा में कोई कमी नहीं थी, बहुत अच्छी और सरल लड़की थी, और साथ में बेहद खूबसूरत।

उसके आने के कुछ दिन बाद से ही अजीब-अजीब सी हरकतें होने लगी। तृषा के locker से कुछ भी सामान गायब होने लगे, उसके सामान दूसरे locker में मिलने लगे।

कभी कोई उसके room में I love you का card रख जाता, तो कभी bathroom में I love you Trisha लिख जाता, यह सब देखकर तृषा पत्ते-सी कांपने लगती।

एक दिन कुशल ने सारे staff को बुलाया और कहा कि जो कुछ हो रहा है, वो कोई staff वाला ही कर रहा है, क्योंकि तृषा के room and locker तक कोई और नहीं पहुंच सकता है।

इसलिए आज से सब शक के घेरे में रहेंगे और जो कोई भी निकला, उसके साथ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अच्छा होगा कि कोई सामने से आकर बता दे, या मुझे भी आकर बता सकता है, मैं उसकी पहचान किसी को नहीं बताऊंगा। और तब शायद उसकी सज़ा कम कर दी जाए।

सबने सुना, पर कोई सामने नहीं आया, और तृषा को परेशान करने का सिलसिला पुरजोर चलता रहा। एक दिन तृषा ने तंग आकर…

आगे पढ़ें, वो कौन था (भाग-2) में…

Thursday, 16 July 2026

Article : जिंदगी Tier-2 Cities में

छूटा तेरा दर,

तो तेरी बहुत याद आई।

न लौट पा रहा तेरे दर पर,

कटती नहीं है तन्हाई।।

न जाना था कि कितने अच्छी जगह रहते थे, न जाना था कि बिछड़ कर याद करेंगे इतना, पर जनाब सच कहते हैं, जिंदगी महानगरों में नहीं नगरों में ही जिंदा है आज भी।

यह शहर इतने advanced हैं कि आप सब पा जाओगे और ऐसे भी नहीं हैं कि जिसमें आप खो जाओगे।

आज बात कर रहे हैं उन शहरों की जो महानगर , जैसे Delhi, Mumbai, Kolkata, Chennai आदि नहीं हैं, अभी भी नगर ही हैं, जैसे Lucknow, Agra, Prayagraj, Kanpur आदि, कुछ इनसे भी थोड़े‌ छोटे नगर जैसे Mathura, Vrindavan, Ayodhya, Haridwar, Rishikesh आदि…

जिंदगी Tier-2 Cities में


यह नगर जिन्हें tier-2 cities भी कहते हैं, जिंदगी आज भी यहीं बसती है, महानगरों में नहीं।

महानगरों में लोग सिर्फ और सिर्फ भाग रहे हैं, कुछ बन जाने के लिए, कुछ पाने के लिए, इस बात से बेखबर कि उसके कारण ही वो दूर होते चले जा रहे हैं, अपनों से, सुकून भरे पलों से।

महानगरों में कितने ही लोग ऐसे होंगे, जो यह तक नहीं जानते हैं कि उनका पड़ोसी कौन है? और कितने तो ऐसे भी होंगे, जिन्होंने अपने पड़ोसी से कभी बात भी नहीं की होगी। 

वैसे पड़ोसियों की बात छोड़ दें तो कितनों ने अपनों से ही न जाने कब से बात नहीं की है।

वहीं बात करें अगर tier-2 cities की, तो आज भी वहां रिश्ते-नाते, दोस्ती-यारी, पास-पड़ोस निभाया जा रहा है। एक की परेशानी सबके लिए दुःख का कारण होता है और एक की खुशी सबका उत्सव।

अगर दूरी की बात करें तो न तो सड़कों पर इतनी दूरी है, न दिलों में कि एक साथ वक्त न बिताया जाए।

अगर महंगाई की बात करें तो हो सकता है वहां दो पैसे कम कमा रहे हों लोग, पर खर्चा भी 4 पैसे कम ही होगा। फिर वो चाहे रोज़मर्रा की जिंदगी का हो, जैसे किराया, साग-सब्जी, कपड़ा, आदि या पढ़ाई-लिखाई, महरी, घूमना-फिरना, hotel इत्यादि।

In short बोलें तो सुकून से जिंदगी व्यतीत की जा सकती है, प्यार-मोहब्बत, जिम्मेदारी और मस्ती के साथ।

और सचमुच में जिंदगी यही है, तो जब तक आपकी मजबूरी न हो, अपने प्यारे से शहर को मत छोड़िए। महानगर, सिर्फ मृग मरीचिका है, छलावा है, इसके लिए लालायित होना अपने हिस्से में केवल अंतहीन दौड़ लाना और अपनों से दूर होना है। अपनों के बीच रहिए, ख़ुश रहिए…

Tuesday, 14 July 2026

Recipe : Taste out of Waste

आज तक आपने best out of waste सुना होगा, जिसमें waste हो चुकी useless चीजों से कुछ बहुत सुंदर artpiece or useful चीजें बनाते हैं।

आज की recipe कुछ ऐसी ही है, इसलिए हमने इसका नाम दिया है, taste out of waste.

आज हम आपके लिए ऐसी recipe लेकर आए हैं, जिसके main ingredient को mostly फेंक देते हैं, और हम उसी से बहुत tasty snack or starter बनाएंगे…

Taste out of Waste


Ingredients :

  • Potatoes - 2 (big-sized)
  • Corn flour - 1½ tbsp.
  • Salt - as per taste 
  • Mix herbs - 2 tbsp.
  • Kashmiri Lal Mirch powder - 1 tsp.
  • Turmeric powder - ½ tsp.
  • Olive Oil - for frying 


Method :

  1. आलू को अच्छे से धो लीजिए। अब इनको ऐसे peel करें कि आलू का छिलका मोटा और लम्बा रहे।
  2. एक wok लीजिए, उसमें oil डालकर गर्म कीजिए।
  3. Cornflour में नमक, हल्दी, कश्मीरी लाल मिर्च powder, mixed herbs व पानी डालकर अच्छे से mix करके pouring consistency का solution ready कर लीजिए।
  4. अब इस solution में आलू के छिलके को dip करके गर्म oil में डालकर दोनों तरफ़ से सुनहरा होने तक तल लें।

Crispy and Crunchy Taste out of Waste, scrumptious snacks from potato peels are ready! Enjoy them with your favourite dip, sauce, or chutney.


Tips and Tricks :

  • इसके लिए ऐसे आलू चुनें, जिनका छिलका चिकना और साफ सुथरा हो।
  • आलूओं को अच्छे से रगड़-रगड़ कर धो लीजिए, जिससे आलूओं में बिल्कुल भी मिट्टी न रहे।
  • आलू के छिलके peel करते समय चौड़े और लम्बे छिलके निकालने से अच्छा texture आता है।
  • आलू बड़े लीजिए, इससे छिलके ज्यादा अच्छा texture लेंगे।
  • अगर आप के पास cornflour न हो तो आप चावल का आटा भी ले सकते हैं।
  • Mixed herbs की जगह लहसुन और अदरक का paste भी डाल सकते हैं।
  • अगर आप को ज्यादा spicy flavour चाहिए तो आप इसमें हरी मिर्च का paste भी डाल सकते हैं। 
  • अगर आप के पास olive oil नहीं है, तो आप कोई भी refined oil ले सकते हैं।
  • इसमें हल्दी और कश्मीरी लाल मिर्च powder एक अच्छा-सा रंग आए इसलिए ही डाला है, आप चाहें तो इसे discard कर सकते हैं। 

इसका main ingredient आलू का छिलका है, यह सोच कर लगता है न जाने कैसा होगा? पर यकीन मानिए कि बहुत tasty होगा और of course healthy version तो है ही।

तो आप ने देखा, जिस आलू के छिलके को हम फेंक देते थे, उससे कितना tasty नाश्ता बन सकता है, जो आपकी party में चार चांद लगा सकता है।

इसलिए ही इसका नाम taste out of waste रखा है। 

आप इसे crispy potato skin or crispy potato peel भी बोल सकते हैं।

इसे बनाएं और वाहवाही पाएं…


Monday, 13 July 2026

Article : Carry-Men Service

आज एक नयी रोचक जानकारी मिली, जो थोड़ी-सी विचित्र लगी, शायद आप में से कुछ लोग जानते भी होंगे। यह service April 26 से शुरू हो गई है और सुचारू रूप से चल भी रही है।

तो सोचा, आपको भी इससे अवगत करा दिया जाए। यह service आखिर है क्या? और कहां शुरू हुई है?

दिल्ली में यह service शुरू हुई है, जो कि अपने आप में एक नई तरह की service है। यह ladies के लिए बहुत कारगर साबित हो रही है, ख़ासतौर से shopping lovers के लिए।

Carry-Men Service


Shopping करने का शौक तो बहुत लोगों को होता है, पर भारी-भारी shopping bags याद आते ही सारा शौक छू-मंतर हो जाता है।

पर आप को मन मारने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि आपके इसी शौक को किसी ने अपना startup बना लिया है। जानते हैं, क्या service है, क्या-क्या facilities हैं और क्या fares (rates) हैं।

  • Service- यदि आप लाजपत नगर market में भारी-भारी shopping bags (upto 12 kg) उठाने or shopping partner के रूप में किसी लड़के को किराए पर लेना चाहते हैं, तो बाजार में इसकी विशेष व्यवस्था है। लाजपत नगर market में hit होने के बाद अब चांदनी चौक या सरोजिनी नगर में भी आपको यह service मिल सकती है।
  • Facilities- यह लड़के आपके साथ market में घूमेंगे, आपके shopping bags उठाएंगे और आपके shopping अनुभव को आसान बनाएंगे। Carry men न केवल आपके bag उठाते हैं, बल्कि आपके लिए खाने की line में लगना, metro तक सामान छोड़ना और ज़रूरत पड़ने पर foldable chair, छाता या baby pram जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराते हैं।
  • Booking- लाजपत नगर market में इसके लिए special booth बने हुए हैं, जहां जाकर आप इस service को सीधे book कर सकते हैं।
  • Base Fare- अगर आप को 30 minutes के लिए चाहिए तो ₹79, और 1 hour के लिए ₹149 हैं। Pram etc. की service के अलग से charge लगते हैं।

आप online भी app द्वारा carry men service को book कर सकते हैं। इस service के बारे में जानकर यही लगा, जो काम करना चाहता है, unemployed नहीं रहता है।

कहते हैं न, जो काम करना चाहता है, वो काम करने के उपाय सोचता है और जो काम नहीं करना चाहता है, वो कामचोरी के बहाने ढूंढता है। साहब, जिन्हें आपदा को अवसर में तलाशना आता है, उन्हें सफलता के शीर्ष पर बैठने से कोई नहीं रोक सकता है।

काम बहुत हैं दुनिया में, 

सर उठाकर तो देखो।

नाम कमा सकते हो तुम भी,

काम में मन लगाकर तो देखो… 

Saturday, 11 July 2026

Recipe : Cheese Dips

कल Potato Paneer Twister की recipe share की थी, जिसे काफ़ी पसंद किया गया था, साथ ही cheese dips की recipe share करने की demand भी की। तो आज वही share कर रहे हैं।

Cheese dips आप जिसके साथ भी serve करेंगे, उस dish में चार चांद लग जाएंगे, और आप इसे बहुत easily आप घर पर बना सकते हैं…

Cheese Dips


Ingredients :

  • Cheese slices - 2
  • Milk - ½ bowl (dessert-sized bowls)


Method :

  1. एक bowl में दूध लीजिए, उसमें cheese slices को तोड़कर डाल दीजिए।
  2. 1 minute के लिए microwave कर लीजिए।
  3. अब इस mix को तब तक मिलाते जाइए, जब तक एक uniform solution बनकर cheese dip ready हो जाए।

अब इस cheese dip को different flavours के लिए-

  • Mild-Spicy Flavour: Pizza seasoning mix कर दीजिए।
  • Tangy Flavour: Tomato ketchup add करके mix कीजिए (for tangy flavour)।
  • Garlic Flavour: अगर आप को garlic cheese dip बनाना है तो garlic cloves को mince करके bowl में तभी डाल दीजिए, जब दूध में cheese melt कर रहे हैं, इससे garlic हल्का-सा roast हो जाता है, इससे काफी अच्छा flavour आता है।
  • Spicy Flavour: Schezwan sauce mix कर दीजिए।

तो आप अपने accordingly flavour create कर सकते हैं। फिर अब आप जब भी continental dishes बनाएँ, cheese dips जरूर बनाएँ, यह आपकी dishes में चार चांद लगा देगा…

Friday, 10 July 2026

Recipe : Potato Paneer Twisters

बेटे का कल जन्मदिन था, तो सोचा कुछ ऐसा try किया जाए कि वो खाते ही बोल उठे, “Wow! मज़ा आ गया।”

तो आजकल जो cafeteria में hot favourite recipe है, उसी को try किया, और आज वही recipe share भी कर रहे हैं।

यह जितनी easily, instantly prepare होने वाली recipe है, उतनी ही healthy and tasty भी है।

Healthy बच्चों के reference में लिखा है।

आलू और पनीर बच्चों को बहुत पसंद होता है, हमने उसे ही लिया है, और उसे prepare करके इतना interesting बनाया है कि बच्चे उसे देखकर रुक ही नहीं पाएंगे। 

ऐसा इसलिए क्योंकि यह देखने में जितना interesting है खाने में भी उतना ही yummy. तो झटपट देख लेते हैं इसकी recipe…

Potato Paneer Twisters


Ingredients :

  • Potatoes - 2 (large-sized)
  • Paneer - 250 gm. 
  • Fresh Malai - 2 tbsp.
  • Cornflour - 2 tbsp.
  • Mixed Herbs - as per taste
  • Salt - as per taste 
  • Kashmiri Mirch Powder - 1 tsp. 
  • Turmeric powder - ½ tsp. 
  • Toothpick - for binding 
  • Ghee/oil - for frying 


Method :

  1. आलूओं को peel करके अच्छे से wash कर लीजिए, फिर इनके पतले पतले chips निकाल लीजिए।इन्हें पानी में डाल दीजिए।
  2. पनीर के rectangular shape के pieces काट लीजिए।
  3. एक bowl में मलाई, mixed herbs, salt, chilli powder, turmeric powder, और 2 tsp cornflour छोड़कर बाकी सभी ingredients डालकर अच्छे से mix कीजिए।
  4. अब पनीर के pieces पर इस mix की coating करके marination के लिए रख दीजिए।
  5. आलू के chips को strainer में रख दीजिए जिससे excess water निकल जाए।
  6. एक bowl लेकर उसमें 2 tsp. cornflour लें व पानी डालकर पतली slurry बना लीजिए।
  7. आलू के chips को slurry में डुबाकर उसमें marinated paneer piece रखें, फिर उसमें एक toothpick लगाकर आलू में पनीर को bind कर दीजिए। 
  8. इसी तरह से सारे आलू chips में पनीर bind कर लीजिए।
  9. एक wok लीजिए, उसमें घी डालकर गर्म कर लीजिए। गर्म घी में इन bound pieces को डालकर सुनहरा होने तक fry कर लीजिए।

Crunchy and Soft Potato Paneer Twisters are ready to serve, enjoy them with your favourite sauce or dip.


Tips and Tricks :

  • आलू बड़े ही लीजिए, क्योंकि आलू के chips बड़े होने से पनीर के साथ binding easy होगी।
  • अगर आप के पास mixed herbs नहीं हैं या आप डालना नहीं चाहते हैं, या आपको spicy flavour चाहिए, तो उसकी जगह आप ginger garlic and chilli paste भी ले सकते हैं।
  • अगर आप के पास cornflour नहीं है तो आप मैदा और चावल का आटा भी ले सकते हैं। वैसे authentically cornflour ही लेते हैं, जो इसे crispy taste देता है।
  • Potato chips and cornflour इसे crunchy and crispy taste देता है, वहीं पनीर juicyy and soft taste देता है। दोनों का combination, next level का flavour देता है।
  • Turmeric powder और kashmiri lal mirch powder completely optional है। इससे presentation में एक bright colour मिलता है, जो कि attraction में help करता है।
  • वैसे आप इसे अपनी पसंद के किसी भी sauce से खा सकते हैं, इनमें different types के cheesy dips से चार चांद लग जाते हैं।
  • इसे आप tea time, birthday party, kitty party etc. में बनाकर आप अपनी party में चार चांद लगा सकते हैं।

If you interested to know how to make cheese dips within minutes, so stay with us…

Thursday, 9 July 2026

Poem : जन्मदिवस पर स्नेहाशीष

एक माँ का अपने बेटे के लिए स्नेहाशीष…

जन्मदिवस पर स्नेहाशीष


मनुष्य जन्म को तब,

आधार मिलता है।

जब मां-पापा बनने का,

अधिकार मिलता है।

जीवन की बगिया में, 

वो जो पुष्प खिलता है।

सम्पूर्णता मिल गई हो जैसे, 

यह एहसास मिलता है।

अपने अस्तित्व को भूल,

मां-बाप उसमें ही खो जाते हैं। 

उसके इर्द-गिर्द ही अपनी, 

दुनिया सजाते हैं।

पर यह बच्चे पर भी,

निर्भर करता है।

सुखद जीवन मिले उन्हें,

वो अपने कर्मों से तय करता है।

फिर अगर मिल जाए,

अद्वय-सा बच्चा।

सुखद जीवन का स्वप्न,

हो जाए सच्चा।

कुशाग्र बुद्धि, बेहद सरल,

जैसे बहता अविरल जल।

जितना चंचल, उतना कोमल,

डिगे नहीं, चाहे हो जो पल।

संस्कृति, विज्ञान का वो संगम,

उजला तन उजला ही मन।

उसकी हर एक को कामना,

सुखद रहे जीवन उसका, 

यही है ईश्वर से मेरी प्रार्थना। 


हे ईश्वर, कोटि-कोटि आभार आपको, जैसे बच्चे की कामना होती है सबको, वैसा ही बच्चा आपने दे दिया हमको।

जन्मदिवस पर विशेष शुभकामनाएँ हमारे प्यारे बेटे अद्वय!

Wednesday, 8 July 2026

Article : सितारे superstar क्यों नहीं?

आज एक अलग ही बात मन में आई तो सोचा कि उसी पर लेखनी चलाई जाए, तो आज का topic है सितारे, stars.

आपने कभी सोचा कि यह stars हमें इतना लुभाते क्यों हैं, क्योंकि इनकी जगमगाहट हमें अपनी तरफ सम्मोहित करती है।

पर हमारा इनके प्रति इतना attraction का main reason है इनसे हमारी दूरी, इन तक हमारी न पहुंच पाने की क्षमता।

यह दूरी और हमारी यह अक्षमता इन्हें और भी special बनाती है। हमें इन्हें पाने की चाहत, इनके नजदीक जाने की, इन्हें छूने की इच्छा, हमारी छटपटाहट बढ़ाती है 

सोचिए, अगर यह हमारी range में होते, इन्हें छूना, इन्हें पाना, बहुत आसान होता तो? 

तो शायद यह attraction भी नहीं होता, star होना कुछ बड़ा नहीं होता…

सितारे superstar क्यों नहीं?


Stars की इस quality के कारण ही movies and serials के कलाकारों को star के नाम का दर्जा दिया गया।

कोशिश की गई कि जैसे ही कोई कलाकार limelight में आ जाए, मतलब hit or superhit हो जाए, वो आम इंसान से दूर हो जाए।

उनको मिलना, उनको देखना, next to impossible हो जाए।

रूपहले पर्दे पर उनका आना उन्हें जगमगाहट देता है और लोगों की पहुंच से दूर हो जाना, लोगों का उन्हें न देखना पाना, उन्हें न छू पाना, उनसे न मिल पाना, उनके fans में छटपटाहट बढ़ाता है। 

लोग उनकी एक झलक पाने के लिए घंटों इंतज़ार करते, उनके लिए अपने खून से पत्र लिखते, अपनी दीवानगी दिखाने के लिए उन्हें रिझाने के हर संभव असंभव प्रयास करते।

और जो जितने बड़े superstar or legend, उनसे दूरी उतनी अधिक और लोग उनके लिए उतने ही पागल।

लेकिन ऐसा उस समय में ज्यादा होता था, जब लोगों को अपने favourite stars को देखने का जरिया सिर्फ cinema halls हुआ करते थे।

पर आज जब movies देखना कोई बड़ी बात नहीं है, लोग घरों में बैठकर जब और जो चाहे वो movie देख सकते हैं। 

आज उन्हें बड़े पर्दे और special sound effects के लिए theatre नहीं जाना पड़ता है, सब कुछ घर में मौजूद है।

रही सही कसर Netflix, OTT cinema और social media पर stars की availability ने कर दिया।

अब stars की reaches बहुत easy कर हो गई है, जिसके कारण अब यह stars, superstar नहीं बन पा रहे हैं।

बाकी उनको star बनाना भी क्यों है जो हमसे दूरी बनाने के अलावा कुछ नहीं करते?

उन्हें star बनाना भी क्यों है जिनका दायरा केवल अभिनय तक सीमित है?

Star or superstar उन्हें बनाएं जिन्होंने देश के लिए कुछ किया हो, या उन्हें बनाएं जिन्होंने आपकी जिंदगी संवार दी। 

जिनके लिए आप सर्वोपरि हैं, जो आपके लिए हर दूरी मिटा दें। उन्हें star नहीं, अपना superstar बनाएं और जिंदगी को सरल और सफल बनाएं…

Tuesday, 7 July 2026

Story of Life : खुशी

खुशी


चंदू प्यारा-सा, छोटा-सा, नटखट बच्चा था। वो इतना चंचल था कि दिनभर मस्ती करता, पर किसी के हाथ नहीं आता। उसकी माँ वसुधा उसे संभालते-संभालते थक जाती, पर मजाल है कि चंदू दो पल को भी थककर बैठता।

एक दिन परेशान होकर वसुधा ने अपनी माँ शक्ति देवी को अपने घर बुला लिया। शक्ति देवी अपने नामानुसार बहुत शक्तिशाली थीं, इस उम्र में भी उनमें बहुत दम-खम था।

शक्ति देवी को देखकर वसुधा ने चैन की सांस ली, कि चलो अब कुछ दिन सुकून से निकलेंगे। चंदू को शक्ति देवी ने उसके पैदा होने के समय संभाला था, पर अभी व्यस्तता के चलते शक्ति देवी अपनी बेटी से चार साल से मिलने नहीं आ पाई थीं।

दरअसल शक्ति देवी अपने गांव की बहुत सफल मुखिया थी, साथ ही उनके बहुत बड़े खेत-खलिहान भी थे, जिनके रखरखाव की जिम्मेदारी पूरी उन्होंने ही उठा रखी थी, और पूरा गांव उनको बहुत मानता था। 

अभी खेत-खलिहान में बीज इत्यादि लगाकर उस तरफ से थोड़ी फुर्सत पाकर वो हफ्ते भर के लिए वसुधा और चंदू से मिलने आईं थीं। चंदू एक दिन तक तो शक्ति देवी से दूर-दूर रहा, पर जल्दी ही उनके साथ घुल-मिल गया।

क्योंकि शक्ति देवी ने उसके लिए बेहद स्वादिष्ट पकवान बनाए, उसे रात में बहुत अच्छी कहानियां सुनाईं और दिन में उसके साथ दुनियाभर के खेल खेले।

अब तो चंदू दिनभर अपनी नानी माँ के साथ ही रहता, उनके साथ खेलता, उनके हाथ से ही खाना खाता, उनके साथ ही सोता।

वसुधा, चंदू और शक्ति देवी सभी प्रसन्न थे। वसुधा चैन की सांस लेकर, चंदू अपनी नानी मांँ का साथ पाकर, और शक्ति देवी अपने नाती को लाड लड़ाकर।

एक हफ्ता कब गुजर गए, पता ही नहीं चला और शक्ति देवी के लौटने का दिन आ गया।

जब चंदू को पता चला कि नानी माँ जा रही हैं तो वो बहुत दुखी हो गया और भगवान से प्रार्थना करने लगा कि कुछ ऐसा हो जाए कि नानी माँ रुक जाएं। पर ऐसा हुआ नहीं, नानी माँ के लिए cab आ गई और वो station के लिए रवाना हो गईं।

चंदू बहुत ज़ोर-ज़ोर से रो रहा था कि नानी माँ लौट आइए।

वसुधा चंदू का रोना देखकर उसे भीतर ले गयी और चंदू को समझाने लगी, तभी खबर आई कि शक्ति देवी वापस आ रही हैं। सुनकर चंदू खुशी से चिल्ला-चिल्ला कर उछलने लगा, नानी माँ आ रही हैं।

जब शक्ति देवी आईं, तो पता चला कि cab से उतरते समय उनका balance गड़बड़ हुआ, जिससे वो काफी जोर से गिर गई और उनके पैर में बहुत तेज दर्द हो रहा है।

वसुधा माँ को लेकर तुरंत hospital पहुंच गई, वहां पता चला कि उनके पैर में fracture हुआ है और 3 महीने के bed rest की जरूरत है।

अब तो शक्ति देवी दिनभर bed पर रहतीं, वसुधा भी उनकी ही तिमारदारी में लगी रहती, इस तरह से नानी माँ लौट तो आईं पर दर्द से कराहते हुए और माँ से जो थोड़ा बहुत समय चंदू को मिलता था, वो भी अब नहीं मिल रहा था।

एक दिन नानी माँ के पास बैठकर चंदू रो रहा था, उन्होंने कारण पूछा, तो उसने रोते हुए कहा, “मैंने ही भगवान जी को बोला था, कैसे भी आप रुक जाओ और आपका accident हो गया। आप लौट तो आईं पर मेरा कोई फायदा नहीं हुआ, मुझे खुशी मिली ही नहीं।”

नानी माँ ने चंदू को चुप कराया और बोला कि “इसमें तुम्हारा कोई दोष नहीं, जो‌ होना था हो गया। पर बेटा, आगे से अगर तुम्हारी खुशी किसी और से भी जुड़ी हुई है तो, अपनी कामना के लिए प्रार्थना करने के साथ यह भी कहो, कि उसमें उसका कोई अनिष्ट न हो, बल्कि उसे भी लाभ हो, और तुम्हारी कामना तब पूर्ण हो, जब उसकी भी वही कामना हो। अपनी खुशी को पाने के लिए अगर दूसरे को दुःख पहुंचता है तो फिर ऐसी ही ग्लानि होती है। इसलिए ऐसा मांगो कि आपका और उसका दोनों का शुभ हो, तभी सच्ची खुशी मिलेगी।”

सुनकर चंदू मंदिर की ओर दौड़ गया और भगवान जी से प्रार्थना करने लगा, और बोला “मेरी नानी माँ को जल्दी ठीक कर दीजिए और वो तब तक रहें, जब तक वो ख़ुशी से रह सकें, क्योंकि जब वो खुश रहेंगी, तभी मैं भी खुश रहूंगा।”

Monday, 6 July 2026

Story of Life : आ जिंदगी जी लें

आज की यह कहानी हर एक की जिंदगी से जुड़ी हुई कहानी है, एक बार पूरी अवश्य पढ़ें, शाय़द आपकी भी सोच बदल जाए और आप भी जिंदगी जीने लगें…

आ जिंदगी जी लें


संजना ने ऋतिक से कहा, “सुनो ना, आटा खत्म हो गया है, लेकर आते हैं।”

“क्या लेकर आते हैं संजना, वो भी online marketing के जमाने में? कौन खड़ा होगा घंटों bill की line में?”

“जाकर लाएं या order करें, आएगा तो एक ही चीज़।”

“अरे order कर दो। साथ में और भी जो कुछ मंगाना हो, उन सबका भी order कर दो।”

“ऋतिक bedroom की ओर बढ़ गया, और संजना याद कर करके सामान के order की list prepare करने लगी।”

शाम के समय संजना फिर बोली, “आज बहुत दिनों बाद Sunday free मिला है, चलो न movie देखकर आते हैं।”

“अरे यार! एक Sunday मिला है, आराम कर लो, फिर रात में Netflix में movie देखेंगे, तुम कुछ चटपटा-सा बना लेना। वहां जाकर 4 गुना दाम का popcorn खाने से अच्छा है घर में ही देख लें।”

“कौन-सी देखें? संजना ने उत्सुकता से पूछा।”

“अरे कोई भी लगा लो, सब एक-सी ही लगती हैं। उसने बेरुखी के साथ जवाब दिया।”

“यह कहकर ऋतिक नींद के आगोश में चला गया और संजना अकेली बैठी ढूंढती रही कि कौन-सी movie देखें।”

कुछ दिनों बाद संजना ने ऋतिक से कहा, “चलो न कहीं घूम कर आते हैं।”

“अरे यार, अभी कुछ दो-तीन साल पहले गये तो थे। इस साल मेरे पास बिल्कुल समय नहीं है।”

ऋतिक ने बड़ी तल्खी से जवाब दिया और फिर laptop में काम करने लगा और पिछली बार की photo को देखकर संजना मन बहलाने लगी।

दिन महीने साल बदलते रहे, और संजना और ऋतिक की जिंदगी जिम्मेदारियां निभाने और इसी तरह से घर में रहकर ही सब करने में व्यतीत होती गई।

बच्चों की ज़िम्मेदारियों से free होकर job से retire होने के बाद एक दिन ऋतिक ने संजना से कहा, “बहुत दिन हो गए, चलो कहीं घूम कर आते हैं।”

संजना की प्रसन्नता से बाछें खिल गईं, वो तुरंत मान गई।

दोनों घर से निकलकर कुछ दूर ही चले थे और थककर चूर हो गए और घर लौट आए।

कुछ देर बाद, ऋतिक bedroom से बाहर आ गया, संजना अभी भी सामान order करने की list बना रही थी।

“संजना, चलो आटा लेकर आते हैं।”

“अरे क्या हुआ? मैं list बना रही हूं online order करने के लिए।”

“नहीं, चलो लेकर आते हैं। थोड़ा समय मिल जाएगा साथ में, फिर चलेंगे movie देखने, बहुत दिन हो गए हैं।”

संजना चलने को तैयार हुई तो ऋतिक ने उसे गले से लगा लिया और बोला, “वक्त बहुत तेजी से निकल रहा है। पर हम हर पल को जीएंगे, जितना हो सकेगा, उतना अधिक समय एक-दूसरे के साथ बिताएंगे।”

संजना कुछ समझ नहीं पा रही थी, पर ऋतिक जब bedroom में चला गया था, तब सपने में वो retire होने तक के दिन जी आया था और अच्छे से समझ गया था, कि ज़िन्दगी को समय से साथ में बिताने में ही सुख है।

एक बार वक्त गुजर जाता है, तो फिर वो पल नहीं जी पाएंगे, जो जिंदगी है। जिंदगी सिर्फ भागमभाग नहीं है, बल्कि कुछ पल ठहर कर जी लेना ही जिंदगी है, समय से कुछ बेहतरीन और यादगार पल चुरा लेना ही जिंदगी है।

“आ संजना, जिंदगी जी लें, एक साथ हर जगह...”

अगर आप भी जिंदगी में साथ न रहकर ऐसे ही जिंदगी बिता रहे हैं तो मत रहिए ऐसे, अपने जीवनसाथी को खूब समय दें और जी लें जिंदगी। क्योंकि काम तो जिंदगी-भर रहेगा, पर यह वक्त पलट कर नहीं आएगा, जिसमें एक-दूजे को समय दे सकते थे और सही मायने में जिंदगी जी सकते थे…