Sunday, 27 October 2019

Poem : शुभ दीपावली

शुभ दीपावली


दीपावली त्यौहार है शुभ सम्पन्नता का
हर ओर छाई प्रसन्नता का
मां लक्ष्मी व गणेशा की कृपा हो जाए
सब, सुख समृद्धि, मान सम्मान पाए

दीपावली त्यौहार है दीपों का
खुशियों के मधुर गीतों का
सब, दीप जलाकर रखना
धरा से अंधकार हटाकर रखना

दीपावली त्यौहार है मेवे और मिठाईयों का
प्रेम की गहराइयों का
सब, मिलजुल कर कहना
आज तन्हा ना किसी को रहना

दीपावली त्यौहार है पटाखों का
खुशियों के धूम धड़ाको का
आज ना बच्चों को इसमें रोक लगाना
यह है बच्चों की खुशियों का खजाना

दीपावली त्यौहार है उमंग का
अपनों के साथ-संग का
बुजुर्गों को भूल ना जाना
उनकी आशीष बिन त्यौहार ना मनाना

दीपावली त्यौहार है सौगातों का
सपने सच करने वाली रातों का
आप सब यूं ही साथ जुड़े रहना
आप सबको मुझे शुभ दीपावली है कहना

Saturday, 26 October 2019

Article : क्या है Happy Deepawali?


क्या है, Happy Deepawali?

हम हिन्दुओं का बड़ा त्यौहार दीपावली आ गया है।

सब एक दूसरे को happy deepawali wish करेंगे। पर अब क्या दीपावली happy वाली रह गयी है?

चलिये सोचते हैं, कौन happy है?

हम सब तो, सब कुछ बच्चों के लिए ही करते हैं ना? तो चलिये शुरुआत भी उन से ही करते हैं।

बच्चों के लिए तो दिवाली का मतलब ही है, खूब सारे पटाखे, और वो तो हम उन्हें चलाने नहीं देंगे, pollution के नाम पर। चाहे बाकी सब से कितना ही pollution हो वो चलेगा, हम अपना AC बंद नहीं करेंगे। Car में अकेले ही जाएंगे। ठंड हो या गर्मी, नहायेंगे तो गरम पानी से ही। Perfumes, deo खूब सारा लगाएंगे। Cigarette smoking बंद नहीं होंगी।

आज कल तो पटाखों की भी दो परिभाषा कर दी गयी है। यहाँ मैं green पटाखों की बात नहीं कर रही हूँ। अच्छे और बुरे पटाखों की बात कर रही हूँ, और जो सटीक ही जान पड़ती है।

अच्छे पटाखे वे पटाखे जो new year, Christmas आदि festival पर नेताओं की जीत पर फोड़े जाते हैं, अच्छे पटाखे कहलाते हैं। इन पटाखों को फोड़ने से भाईचारा, सौहार्द और अमन-चैन बढ़ता है और पर्यावरण शुद्ध होता है, और शांति का वातावरण निर्मित होता है।

बुरे पटाखे – यह पटाखे mainly दीपावली नामक त्यौहार में फोड़ते हैं, इनसे ध्वनि प्रदूषण के साथ अशांति बढ़ती है। साथ ही वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर बढ़ जाता है।

और आपको पता है, इस बात को फैलाने वाले और पटाखों को चलाने पर सर्वाधिक विरोध करने वाले हिन्दू ही होते है। वैसे विरोध करने वालों की जानकारी के लिए बता दें, पटाखे चलने से बारूद की जो महक आती है, उससे बहुत सारे जानलेवा कीड़े-मकोड़े, मच्छर, उनके अंडे लार्वा सब मर जाते हैं। तो "पटाखे अच्छे हैं"

तो बच्चे तो happy नहीं होंगे, इस दीपावली में।

अब आते हैं, बुजुर्गों पर...

सारे रीत रिवाजों को ताक पर रख कर दीपावली में घूमने निकल जाएंगे, तो भला वो कैसे खुश होंगे?

यह दीपावली है, सर्दियों या गर्मियों की छुट्टियाँ नहीं है, कि आप घूमने निकल गए। अपने सबसे बड़े त्यौहार का इतना तो मान रख लीजिये, कि उसे तो कम से कम विधि-विधान से मना लीजिये।

तो बुजुर्ग तो happy नहीं होंगे, इस दीपावली में।

दीपावली के सामान बेचने वाला भारतीय बाज़ार भी happy नहीं हैं, क्योंकि आपके घरों की सजावट और सामान तो चीनी बाज़ार को खुश कर रहा है।

भगवान जी, माता लक्ष्मी, वो भी तो happy नहीं हैं, क्योंकि घरों में तो ताले पड़े हैं। लोग घूमने निकल गए हैं, किसी को उनके आगमन का इंतज़ार नहीं है। 

वो पहले सी जगमगाती रौनक भी नहीं है, उमंग भी नहीं है। रह गयी है तो बस GIF वाली wishes

अब तो सिर्फ दीपावली ही रह गयी है, जब कोई happy नहीं है, तो क्या happy दीपावली कहेंगे?

क्यों हिन्दू त्यौहारों पर ही सारे ban लगते हैं, क्योंकि हम हिन्दू ही उसका साथ देते हैं। जबकि ईद या Christmas में अपने त्यौहारों से जुड़ी बातों का विरोध करते ना आपको मुसलमान मिलेंगे, ना ही Christian। यही वजह है, उनके त्यौहारों में आज भी खुशी है, ईद मुबारक है और ‘Christmas Merry’ है।

चलिये हम भी अपने त्यौहार को पहले सा मनाते हैं, सभी विधि-विधान पूरे करेंगे, घर को साफ-सुथरा कर के,

दीयों से घर जगमगाएंगे,
फूलों से घर को सजाएँगे,
ढेर पकवान बनाएँगे,
माता लक्ष्मी के स्वागत में
पलकों को हम बिछाएंगे।
और बच्चों के संग मिलकर
खूब पटाखे चलाएँगे,
क्योंकि ये त्यौहार ही है पटाखों का।

खूब पटाखे चलाये, दीपावली मनाएँ, किसी का अंतिम संस्कार नहीं है, जो मातम मनाएँ, 364 दिन हैं, पर्यावरण की रक्षा के लिए।

आइये दीपावली को Happy Deepwali बनाते हैं।

आप सभी को दीपावली की अग्रिम शुभकामनाएं।।

Friday, 25 October 2019

Poem : शायद तुम्हें याद होगा

शायद तुम्हें याद होगा




शायद तुम्हें याद होगा
मैं वही कुम्हार हूँ
जो मिट्टी के दीप बनाता था
उन दीपों से  दीपावली में
घर तुम्हारा जगमगाता था
आज भी मैं ढेर दीप
बनाए, बैठा हूँ
आओगे, तुम फिर द्वार मेरे
मैं यह आस लगाए बैठा हूँ
दीपावली तेरे घर में
सितारों सी जगमग होगी
मेरे घर में भी, उन पैसों से
टिमटिमाती सी चमक होगी

शायद तुम्हें याद होगा
मैं वही भड़भूजे वाला हूंँ
जिस दुकान से मां तेरी
लइया , बताशे, खील खिलौने
हर बार लाया करती थीं
जिससे दीपावली में तेरे घर
मिठास भर जाया करती थी
आज भी मैं उन सबका
कितना ढेर सजाए बैठा हूँ
तुम्हारे आने की फिर से
मैं आस लगाए बैठा हूँ
दीपावली में पकवानों, मिठाईयों से
तुम्हारा घर आंगन महकेगा
मेरे घर भी, उन पैसों से
बच्चों का मन चहकेगा

शायद तुम्हें याद होगा
मैं वही फूल वाला हूँ
जिससे फूलों को लेने
तुम बाबूजी के संग आते थे
उन फूलों की सुन्दरता से
दीपावली में घर को सजाते थे
आज भी मैं गेंदा,बेला,
 गुलाब  की लड़ बनाए बैठा हूंँ
तुम आओगे फिर  लेने मुझसे
आस लगाए रहता हूँ
दीपावली में,फूलों की सुगंध से
घर तेरा हरदम महकेगा
मेरे घर में भी, उन पैसों से
पूरा परिवार सुख से चहकेगा

शायद तुम्हें याद होगा
मैं वही आतिशबाजी वाला हूंँ
जिसको देखकर तुम्हारे मुख में
दीपावली की रौनक आती थी
जिसके कारण तुम को
 दीपावली कितनी भाती थी
आज़ भी मैं अनार, फुलझड़ी, 
चकरी की दुकान सजाए बैठा हूंँ
लेने आओगे, तुम अवश्य ही
यह आस लगाए बैठा हूंँ
दीपावली में घर तुम्हारे
खुशियों की महफ़िल सजेगी
मेरे घर में भी, उन पैसों से
दीपावली, दीपावली लगेगी

दीपों की जगमग हो घर घर  में 
फूलों से हर आँगन महके  
पकवानों की उड़े सुगंध 
पटाखों के हों धूम धड़ाके 
भूल ना जाना देखो तुम यह 
इस आधुनिकता की चकाचौंध में
भारतीयता के रंग में सजी दीपावली
सब को ही दीपावली लगेगी

धनतेरस के पवन दिवस पर सबके घर-आँगन धन ही धन बरसे, कोई धन को ना तरसे। आप सभी को धनतेरस की हार्दिक शुभकामनाएँ