वो कौन था (भाग-4) के आगे…
वो कौन था (अंतिम भाग)
“सर, यह आपको बहुत प्यार करती थीं, पर आपने इन्हें कभी तवज्जों ही नहीं दी। आपके medical world में डूब जाने के बाद यह धीरे-धीरे depression में चली गईं और एक दिन mental asylum में आ गईं।
“पर तुम्हें कैसे पता यह सब?”
“सर, मेरी बुआ जी यहां पर doctor हैं, तो उन्हीं से मिलने आया था। तभी मुझे तृषा दिखी, उसका पीछा किया तो वो इस कमरे में चली गई। मैंने बुआ जी से पूछा कि उस कमरे में कौन है, और तृषा वहां क्यों गयी है, तब पूरी बात पता चली। पर अब मैं जो आपको बताने जा रहा हूं, वो बात अविश्वसनीय है, और जिसके कारण ही आपके hospital को defame मिला।”
“ऐसा भी क्या बताने जा रहे हो? ज्यादा पहेली न पूछो, सीधा-सीधा बताओ।”
“सर, हमारे hospital में तृषा के साथ जो कुछ भी हुआ था, वो उसके साथ किसी और ने नहीं बल्कि खुद तृषा ने किया था, जिससे उस तमाशे के बाद hospital में resignation letter छोड़कर चली जाए और कुछ दिन बाद आपको और Srijan hospital को defame कर दें।”
यह सुनकर कुशल चौंक गया कि उसको बर्बाद करने के लिए तृषा इस हद तक गिर गयी। उससे रहा नहीं गया और वो सीधे रिया के कमरे में पहुंच गया।
कुशल को वहां आया देखकर तृषा सकपका गई और रिया खुशी से चहक उठी।
कुशल ने गुस्से से तमतमा कर तृषा की ओर देखा और कहा, “मुझे तुमसे इस तरह की उम्मीद बिल्कुल नहीं थी। मैं सोच ही नहीं सकता था कि कोई लड़की अपने को इस तरह से भी प्रताड़ित दिखा सकती है। क्यों, आखिर क्यों? क्या कसूर था मेरा!”
तृषा ने घृणा से कहा, “आप मेरी दीदी के, मेरे बचपन के खोने के दोषी हैं।”
“किस तरह से दोषी हो गया? मैंने तुम्हारी दीदी से कभी प्यार नहीं किया, तुम्हारी दीदी मुझसे प्यार करती थी, उसने कभी इज़हार नहीं किया, कि मैं जान पाता कि तुम्हारी दीदी मुझे चाहती है। तो मैं दोषी कैसे हो गया? मेरे doctor बनने की चाह हमेशा से मानवता की सेवा थी। क्या ऐसी सोच, ऐसी चाह गुनाह है? और तुमने मेरे hospital को defame करके न केवल मुझे नुकसान पहुंचाया है, बल्कि लाखों-करोड़ों उन मरीजों को भी नुकसान पहुंचाया है जिन्हें अच्छे treatment की आवश्यकता है। तुमने बदला लेने के जुनून में न केवल अपने स्त्री होने को, बल्कि अपने doctor होने को भी अपमानित और कलंकित किया है।”
कुशल की ऐसी बातों ने तृषा के साथ-साथ रिया को भी झकझोर दिया।
रिया अपनी छोटी बहन तृषा को बहुत चाहती थी, तृषा की इन हरकतों से क्रोधित होते हुए बोली, “तृषा, तूने मेरे देवता को अपमानित किया है, तूने गलत सोचा है कि मेरी तबीयत इनके कारण ख़राब हुई है। इन्हें तो पता ही नहीं था कि मैं इन्हें चाहती थी। मैं इनसे कभी अपने मन की बात बोल ही नहीं पाई।” कहकर रिया फूट-फूटकर कुशल के पैरों पर गिर गई।
“दीदी, मुझे माफ़ कर दो, आप ही मेरा सब कुछ थीं, आपकी ऐसी हालत देखकर मैं सिहर उठी थी, क्रोध से पागल हो गई थी और उसमें मैंने देवता तुल्य कुशल सर को और न जाने कितने मरीजों को नुक़सान पहुंचा दिया।”
“कुशल सर, मुझे माफ़ कर दीजिए, मैं आपकी स्त्री जाति की और doctor होने की गरिमा की गुनहगार हूं। मुझ नादान, नासमझ को माफ़ कर दीजिए।”
कुशल ने रिया के सिर पर प्यार से हाथ फेरा और उसके जल्दी ठीक होने की कामना कर तृषा से बिना कुछ बोले वहां से चला गया।
अगले दिन, बहुत से newspaper के front page पर तृषा का confession था कि सृजन hospital से सुरक्षित कोई जगह नहीं है। उसके साथ जो कुछ भी हुआ था, उसकी जिम्मेदार वो खुद है।
इसके कुछ दिनों बाद से ही वापस से सृजन hospital और doctor कुशल की fame हर जगह जगमगा उठी। जिस-जिस ने उल्टे-सीधे इल्ज़ाम लगाए थे, सबने माफी मांगी। सारे doctors लौट आए, including तृषा।
रिया का इलाज सृजन hospital में ही होने लगा, और वो बहुत तेजी से ठीक होने लगी…
