Friday, 1 November 2019

Kids Story : Advay the hero : Self-dependent


Advay the hero : Self-dependent

दिवाली का पाँच दिवसीय त्यौहार पूरा हो गया था। advay अपनी बस का इंतज़ार कर रहा था। तभी एक गरीब सी लड़की आई, उसके एक हाथ में बोतल और दूसरे हाथ में बोरी थी।

वो लड़की जले हुए दीयों से तेल निकाल कर बोतल में भर रही थी, साथ ही रुई व दिया बोरे में भरती जा रही थी। वहाँ कुछ जले हुए पटाखे भी पड़े थे, उन्हें वो एक पन्नी में भर रही थी।

Advay से रहा नहीं गया, वो उसके पास गया। उससे उसका नाम पूछा। लड़की बोली मेरा नाम सोनी है।

सोनी तुम यह क्यों कर रही है? वो बोली तेल को छान कर मेरी माँ, उससे सब्जी बनाएगी। तेल से भीगी रुई से चूल्हा जलाएगी। पता है ऐसी रुई से चूल्हा बहुत जल्दी जलता है।

अच्छा! पर तुम दिये और पटाखे क्यों उठा रही हो? Advay ने उत्सुकता से पूछा?

मेरी माँ दिये को तोड़कर और चिपकाकर बहुत ही सुन्दर सुन्दर घर सजाने वाले सामान बनती है, उसके लिए ही ले जा रही हूँ।

और पटाखे? वो.... वो, तो उनमें से कोई अगर जले नहीं होंगे, तो मैं उन्हें जलाकर खुश हो लूँगी।

सोनी सब सामान बीनती रही, advay की बस आ गयी, और वो school चला गया।

जब advay घर आया, तो उसने अपनी mumma से सोनी की सारी बात बताई, फिर पूछा, mumma क्या हमको दिये नहीं जलाने चाहिए, या पटाखे नहीं फोड़ने चाहिए? इसमें कितने पैसे बर्बाद हो गए। अगर हम ऐसा नहीं करते, तो वही पैसे हम सोनी को दे देते, तो उसे यूँ तेल, रुई दिया बीनना नहीं पड़ता।

माँ बोली, तुम खाना खा लो, फिर मैं बताऊँगी क्या करना चाहिए।

उस दिन advay ने बहुत जल्दी खाना finish कर लिया, अब बताइये माँ?

माँ बोली, त्यौहार मनाना कभी भी पैसे की बर्बादी नहीं है। दिये भी जलाने चाहिए, पटाखे भी चलाने चाहिए। क्योंकि त्यौहार ही जीवन में खुशियों के रंग भरते हैं।

किसी को भीख देकर या दान देकर आप उस को हमेशा के लिए खुश नहीं कर सकते हो, क्योंकि पैसा देने की एक limit होती है।

तब क्या करना चाहिए?

अब जो करने वाली बात है, वो यह है, कि आप उसे self-dependent बना दें। क्योंकि self-dependency ही खुश रहने की key है।

अच्छा, तो उसके लिए मैं क्या करूँ?

सोनी को कोई नहीं जानता, पर तुम्हें apartment और school में सब जानते हैं। तुम उसकी माँ के बनाए सामानों को बेचने में उसकी मदद कर दो, अगर सामान अच्छा होगा, तो सब खरीद लेंगे, और उसे पहचान भी लेंगे।

तब आगे से तुम नहीं जाओगे, तब भी उसके सामान बिक जाएंगे, क्योंकि सब उसे जानते होंगे, और उसके सामान को पसंद भी करने लगे होंगे।

Advay ने अगले दिन सोनी को mumma वाली बात बता दी, और कहा- तुम अपना सामान ले आना, मैं तुम्हें अपने साथ apartment और school ले जाऊंगा।

सोनी सब ले आई, सामान सच में बहुत सुन्दर थे, हाथों हाथ बिक गए, और बहुत लोगों ने और सामान के order भी कर दिये। अगले पाँच दिन तक सोनी अपना सामान बेचती रही। उसकी बहुत अच्छी आमदनी हो गयी। सब ने उसे आगे भी आते रहने को कहा।

सोनी advay के घर गयी, और बोली, advay मुझ गरीब पर तरस खाकर बहुत लोगों ने कई बार पैसे, मिठाई, खाना, तेल, पटाखे, खिलौने दिये, पर वो सब बस कुछ ही दिन चलते थे। पर तुमने माँ की दुकान चलवा कर हम लोगों को हमेशा के लिए गरीब बने रहने से बचा लिया।

अब मेरी माँ की दुकान चल निकली है, तो मुझे तेल, रुई, दिया, पटाखे नहीं बीनने पड़ेंगे।

Advay की मेहनत रंग लायी, आज सोनी self-dependent हो गयी थी।   

Thursday, 31 October 2019

Tip : Preserving Leafy Vegetables

The winters bring various leafy vegetables with them, like 
methi, soya, palak, sarson, bathua, etc.

The problem of their storage comes with these vegetables, as they get spoiled or dry up very quickly. 

On the request of some of my reader – who appreciated the tip on preserving coriander leaves  - I’m here with a tip for the storage of such leafy vegetables, that increase their shelf life by 3-5 days.

Preserving Leafy Vegetables


  1. Remember, that they should not be washed before storing. Wash them only before use
  2. Clean them.
  3. Chop them finely.
  4. Wrap them in a set of 3-4 newspaper sheets.
  5. After wrapping, store them in poly bags.
  6. Don't tie the mouth of the poly bag. This will allow air circulation.
  7. Now store it as usual.
  8. The leaves may wither(कुम्हला), but would neither rot, nor get dried up. Also, it's fragrance will remain for a longer period.
N.B.:

  • Do not keep 2  packets in a single polybag, else one may spoil another.
  • Change wrapping if storage crosses 3 days.
  • You can even store them without chopping.
  • Using this tip on fresh vegetables gives better results.
Wrapping them in paper will absorb excess water, this doesn’t allows them to rot down. While the paper will remain moist, not allowing it to dry up.
If you have been using kasuri methi in veggies give a try to fresh methi leaves and you will love it.

Wednesday, 30 October 2019

Story Of Life : माँ ही करती हैं!


माँ ही करती हैं!

रोहित के office में अहना नई नई आई थी। खुले ख़यालों वाली स्वछंद लड़की, अपने में ही मस्त, दुनिया की कोई परवाह नहीं। जल्दी वो office के दिल की धड़कन बन गयी।

Office में सब उसके इर्द गिर्द मँडराते थे, पर अहना को सबसे ज्यादा रोहित भाया था। रोहित बहुत ही सीधा-सच्चा और मासूम था। अहना हमेशा से ऐसा ही जीवनसाथी चाहती थी, जो उसके इशारों पर नाचे।

उसने रोहित से नज़दीकियाँ बढ़ानी शुरू कर दी, दोनों में प्यार हो गया। चंद दिनों में प्यार परवान चढ़ने लगा, अब तो आलम ये था कि रोहित एक पल भी अहना के बिन नहीं रह सकता था।

एक दिन रोहित अहना को माँ से मिलवाने ले गया। वहाँ अहना ने देखा रोहित की माँ बहुत काम करती थीं, उन्होंने किसी काम के लिए कोई maid नहीं रखी थी।

बर्तन, झाड़ू-पोछा, कपड़े धोना, खाना बनाना, साफ-सफाई सब वो अपने हाथ से ही करती थीं। वो भी सब बहुत ही अच्छा, घर एकदम शीशे सा चमक रहा था।

फिर नाश्ता लगाया तो, उसमें भी बहुत सारी verity, और सब एक से बढ़ कर एक tasty, market में मिलने वाले नाश्तों को मात कर देने वाला।

और साथ ही वो देख रही थी, कि उसमें भी कुछ खाने की चीजों में रोहित नुक्स निकाल रहा था। पर माँ बड़े ही लाड़ से रोहित के according उसे ठीक कर दे रहीं थी।

अहना को ये सब देखकर चक्कर आने लगे, उसे घर के काम करने के नाम से बुखार आने लगता था। फिर यहाँ तो इतने सारे काम वो भी इतने perfection के साथ, वो तो उसकी कल्पना से ही परे था।

अगले दिन जब वो लोग office में मिले , तो अहना ने रोहित को देखते ही कहा, रोहित, कहना तो नहीं चाहती, पर मैं तुमसे शादी नहीं कर सकती हूँ।

ये सुनकर, रोहित का तो दिल ही बैठ गया। उसे समझ नहीं आ रहा था, आखिर एकाएक ऐसा क्या हो गया? जो अहना ने मिलते ही उससे ऐसा कह दिया।

वो अहना से पूछने लगा, पर क्यों?

तुम्हारे घर एक भी maid नहीं हैं, माँ ही सब काम करती हैं ना, इसलिए।

तो उससे क्या मतलब? शादी नहीं करने का फैसला क्यों?

क्योंकि मैं इतना सारा काम नहीं कर सकती, और वो भी इतने perfection के साथ, वो तो सोच भी नहीं सकती, अहना ने बहुत ही सहजता से कह दिया।

अरे....... बुद्धू !, बस इतनी सी बात, तो उसमें क्या है? हमेशा से तो माँ ही करती हैं। वो आगे भी कर लेंगी, तुमने बेकार ही मुझे डरा दिया।

अहना ये सुनकर खुश हो गयी, दोनों की शादी हो गयी।

ना जाने क्यों, रोहित ने ऐसा कहा था? अपनी मासूमियत में या इश्क़ की दीवानगी में?

आज माँ 70 साल की हो गईं हैं, पर आज भी घर का सारा काम माँ ही कर रही हैं। मजाल है कि, कभी अहना उनके किसी भी काम में मदद भी कर दे।

क्या ये सही है, कि वृद्धा अवस्था में भी माँ- पापा सारी जिम्मेदारियों का वहन करते रहें?

या हमे उनका हाथ बटाते बटाते, सारी ज़िम्मेदारी अपने ऊपर ले लेनी चाहिए?