Wednesday, 1 July 2020

Poem: चिकित्सक दिवस (Doctors Day)

चिकित्सक दिवस
(Doctors Day)



भगवान तुम्हें सब कहते थे,
अभी वैसा रूपा धरा तुमने।
ना की तुमने अपनी, ना ही
अपनों की तनिक भी चिंता;
सब रहें स्वस्थ, इस खातिर
हम सबका ध्यान धरा तुमने।
जब डर कर बैठे थे घर में सब
उस पल में तुम निर्भीक रहे;
डटे रहे तुम, साहसी बनकर
अपने कर्तव्य पर अडिग रहे।
कोरोना जितना रौद्र हुआ
तुम उतने ही दृढ़ निश्चय हुए;
अतिशय ताडंव को रोकने में
तुम उतने ही सफल हुए।
आज नहीं तो कल उसको
जाना होगा भारत से;
कोरोना मानेगा निश्चय हार
हमारे स्वास्थ्य योद्धा से।
तुम्हारी इस कर्त्तव्य निष्ठा पर
हम नतमस्तक हो जाते हैं;
धन्यवाद दे सकें हम तुमको
हम चिकित्सक दिवस मनाते हैं।

Tuesday, 30 June 2020

Short Stories : सागर

आज आप सब के साथ मुझे रायपुर छत्तीसगढ़ की मंझी हुई साहित्यकार मंजू सरावगी मंजरी जी की लघुकथा को share करते हुए अपार प्रसन्नता हो रही है।

उन्होंने अपनी कहानी के द्वारा आजकल के युवाओं के मनःस्थिति को दर्शाने का बहुत अच्छा प्रयास किया है।

*सागर*



       वह निरर्थक ही रेतिले समुद्र तट पर घूम रहा था घूमते घूमते थक गया तो वही सागर किनारे रेत पर बैठ गया.
हर आने जाने वाली लहरों को गिनने का बेवजह प्रयास कर रहा था.पर लहरों पे लहरें आती जाती और निशांत की हर कोशिश को बेकार कर रही थी. तभी वहाँ पर एक छोटी सी लकड़ी नजर आई और निशांत उस लकड़ी से लहरों पर लिखने का असफल प्रयास करने लगा. बार बार कोशिश करता और शब्द पूरा होने के पहले ही लहरें लौट जाती थी. उसकी इस कोशिश को पीछे खडी़  लड़की ध्यान से देख रही थी वह खिलखिला कर हँसने लगी. और बोली *"जनाब क्या कोई मजनूँ हो क्या ????जो दिल टूटने का गम बयां कर रहे हो"*
         .. उसकी आवाज सुन कर निशांत ने देखा और हँसते हुए बोला *"अरे !!!! आपको तो दिल टूटने के दुख का बड़ा अनुभव है "*
          . हाँ, हाँ, क्यूँ नहीं *" जब आप जैसे मजनूँ होगे दुनिया में जो जरा से संघर्ष से भाग जायेगें, तो हम हसीना का दिल टूटेगा ही "* कहते हुए वह निशांत के करीब बैठ गई. और पूछा क्या मै आपके दुख का कारण जान सकती हूँ. निशांत बोला बेकार इंसान को न काम मिलता है तो फिर आज की दुनिया में प्यार कहाँ मिलेगा. उसपर गरीब अनाथालय में पलने वाले को.
            निशांत का हाथ अपने हाथ में लेकर लड़की बोली, *मुझे शोभना साहय*   
कहते हैं मैं तुम जैसे युवक और युवती को समन्दर के किनारे से ढूँढती हूँ मुझे आप जैसे बहुत से दोस्त मिल जाते हैं और  सारे लोगों के समूह को *सागर* नाम दिया  है और इस समूह में सागर की तरह सब कुछ डूबा दो, और खुद को सागर सा विशाल बनाओं आओ मेरे साथ सागर का रूप लेने.और निशांत लहरों से पूछ रहा है तुम मे मैं भी समा रहा हूँ बनके सागर की लहर ,,,,,,,,,,,,,,,,,.

Disclaimer:
इस पोस्ट में व्यक्त की गई राय लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं। जरूरी नहीं कि वे विचार या राय इस blog (Shades of Life) के विचारों को प्रतिबिंबित करते हों। कोई भी चूक या त्रुटियां लेखक की हैं और यह blog उसके लिए कोई दायित्व या जिम्मेदारी नहीं रखता है।

Monday, 29 June 2020

Article : Corona हारेगा। लेकिन किस से?

Corona हारेगा। लेकिन किस से?


भारत, एक बार फिर champion.......
image courtesy: Zee news  

बाबा रामदेव ने कोरोना को ठीक करने के लिए आयुर्वेद शास्त्र से अध्धयन कर, अचूक  दवा discover कर ली है।

क्या, सच में discover कर ली है?

कितनों के मन में यह सवाल है।

जबकि Glenmark ने जब यही बात कही थी, तब किसी ने कोई सवाल नहीं उठाया।

कोई बाहर की company discover करती, तब भी सवाल नहीं उठाए जाते।

सही कह रहे हैं ना?

यहाँ, सही है, इसको तो पूछने का सवाल ही नहीं है, कितनी सारी company ने ना जाने कितने दावे किए, पर उन पर कभी सवाल नहीं उठाए गए।

तो बाबा रामदेव पर क्यों?

क्योंकि वो भारतीय हैं?

क्योंकि उनकी discovery का आधार, भारतीय मूल के विज्ञान, आयुर्वेद पर है?

क्योंकि उनकी दवा का नाम विशुद्ध भारतीय है?

क्योंकि उन्होंने अपनी दवा का मूल्य उतना ज्यादा नहीं रखा,  जितना लोगों ने सोचा था।

क्या यही सब कारण हैं?

तो क्यों हैं?

ऐसा नहीं है कि मैं, बाबा रामदेव की पक्षधर हूँ, ना मैं यह कह रही हूँ कि यह दवा सटीक है, ना ही मैं  पतंजलि
के  products का promotion कर रही हैं।

पर बात अगर भारत की है, भारतीयता की है, तो हाँ मैं हूँ पक्षधर।

जब भी भारत और भारतीयता की बात होगी, मैं सदैव उसका support करुंगी।

हम लोगों को तो प्रसन्न होना चाहिए कि भारत, कोरोना को हराने की क्षमता रखता है।

अगर बाबा रामदेव सफल हुए हैं तो यह सफलता सिर्फ उनकी नहीं है, हम सब भारतीयों की है। 
  • हम सब जो इतने दिनों से घरों में कैद हैं, उससे आजादी मिल जाएगी।
  • जो इस तरह से डर डर कर जी रहे हैं, उससे मुक्ति मिल जाएगी।
  • Economy जो down हो रही है, वो फिर से progress करने लगेगी।
  • और सबसे बड़ी बात, हम चीन की मक्कारियों का मुंह तोड़ जवाब दे सकेंगे।

तो क्यों यह शक और सवाल हैं?

हमें तो प्रसन्न होना चाहिए कि, उन्होंने दवा खोजने का प्रयास किया है।

हमें उनका support करना चाहिए, ना कि oppose.

अगर उन्होंने दवा ख़ोज ली है, तो सफलता पर प्रसन्न हों।

और अगर वो सफल नहीं हुए हैं तो भी हमें उनकी discovery में हर संभव मदद करनी चाहिए।

Oppose तो किसी भी सूरत में नहीं।

वरना यही कहना होगा कि 

अच्छा हुआ रामायण काल में इतनी राजनीति नहीं थी, इतना विरोध नहीं था, नहीं तो सुषेण वैद्य के लाइसेंस लेने तक लक्ष्मण जी के प्राण निकल जाते।

अगर आप भी चाहते हैं कि हम सब सदैव सुरक्षित रहें, जीवित रहें, तो भारतीयता का साथ दें, भारतीयों का साथ दें।
Image courtesy : pngtree.com

जिसने हम सब को क़ैद किया था, आज उस corona के कैद होने का समय आ गया है। उसके हारने का समय आ गया है।

भारत ही जीतेगा, पर उसके लिए भारत को साथ होना जरूरी है, उसका विकास होना जरूरी है, और हमारा विश्वास होना जरूरी है।

जय हिन्द, जय भारत 🇮🇳