Tuesday, 29 January 2019

Story Of Life : छोटी सी बात


छोटी सी बात


सुधा अपनी ससुराल में बहुत खुश थी। वो सब का बहुत ध्यान रखती थी। ससुराल में वो सबकी बहुत लाडली थी। और उसका देवर नितिन वो... वो तो भाभी का पूरा भक्त था। एक बार सुधा कुछ बोल देती, तो बस नितिन उसको जब तक पूरा ना कर देता, कुछ और ना करता।
नितिन की शादी योग्य उम्र हो गयी थी। माँ ने सुधा को बुलाया, बोली बेटा अब तू नितिन की शादी की ज़िम्मेदारी भी ले ले। और अपनी जैसी ही कोई ला दे मेरे नितिन के लिए, तो मेरी ये ज़िम्मेदारी भी खत्म हो जाए। वैसे तेरे आ जाने से भी मेरी ज़िम्मेदारी पूरी हो गयी है, तेरे आने के बाद से किसी को भी मेरी याद कहाँ आती है। तुम आई तो थी बहू बन के, पर घुलमिल के कब इस घर की बेटी बन गयी पता ही नहीं चला। और मेरे नितिन की तो तुम माँ, बहन, भाभी, सहेली सब बन गयी, उसको को तो तेरे सिवा कोई सूझता ही नहीं है।
माँ, मैं ये ज़िम्मेदारी लेने को तैयार हूँ, पर एक बार नितिन भैया से भी तो पूछ लेते हैं, उनकी पसंद क्या है?
ठीक कह रही हो बेटा, पर वो भी तुम ही पूछ लेना, तुझे ही अपने दिल की बात बताएगा। माँ सुधा से ये बात कर ही रहीं थी, कि नितिन कमरे में आ गया।
अरे माँ जब नितिन भैया आ ही गए हैं, तो अभी ही जान लेते हैं। हाँ बेटा पूछ ले इससे। आप लोग क्या पूछना चाह रहे हैं॰ नितिन ने पूछा? यही कि आपको कैसी लड़की पसंद है? भाभी आपको जो लड़की पसंद हो, मैं उसी से शादी कर लूँगा। देखा, सुधा मैंने क्या कहा था, नितिन को तुम जिसे कहोगी, ये उसी से शादी कर लेगा। सब ज़ोर ज़ोर से हंसने लगे।
सुधा ने अपनी ज़िम्मेदारी पूरा करने की तरफ सोचना शुरू कर दिया। उसने अपने पति सचिन से कहा, माँ ने मुझे नितिन की बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी सौंप दी है। आपको क्या लगता है, सरिता कैसी रहेगी अपने नितिन के लिए?
कौन सरिता? तुम उसके विषय में माँ से ही बात कर लो। वैसे भी तुम ladies इस मामले में expert होते हो। मैंने भी माँ की पसंद से ही तुमसे शादी की थी। देखो ना माँ का निर्णय कितना सही था। जान हो तुम इस घर की, सचिन ने सुधा के गालों को सहलाते हुए बोला।
हाँ, हाँ, आप दोनों भाई एक से ही हैं, सारी जिम्मेदारी हम ladies पर छोड़ के ऐश कीजिये। मैं माँ से ही पूछ लूँगी, सुधा गुस्साते हुए बोली।
अगले दिन वो माँ से पूछने लगी, माँ मेरे मायके में पड़ोस में निशा आंटी रहती हैं, उनकी बेटी सरिता बहुत ही सुंदर और अच्छे संस्कारों वाली लड़की है। पर उसके पापा नहीं हैं, तो वो लोग दहेज़ नहीं दे पाएंगे। अगर आपको ठीक लगे तो, मैं बात कर लूँ?.....

क्या सुधा, अपनी जिम्मेदारी ठीक से निभा पाई, जानने के लिए पढ़ते हैं छोटी सी बात (भाग -२) में

Saturday, 26 January 2019

Poem : अब देश की बारी है

आप सभी को गणतन्त्र दिवस की हार्दिक शुभकमनाएं, आइए इस गणतन्त्र दिवस पर हम देश के विकास की शपथ लेते हैं। वही देश को आज़ाद कराने वाले शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। 

अब देश की बारी है



देश विकास करे ना तो
आज़ादी के मतवालों की
व्यर्थ हो जाए कुर्बानी है
उन शहादतों की खातिर
क्या सबने विकास की ठानी है
बहुत सोच चुके 
अपनी खातिर
अब देश की बारी है
केवल नेताओं की नहीं
देश का विकास करने की 
हम सबकी ज़िम्मेदारी है
कालाबाज़ारी,बेईमानी,अत्याचार
हैं ये सब 
बर्बादी के हथियार
गर ठान ले 
हर भारतवासी
इन सबका होगा, 
भारत से बहिष्कार  
तो, समझो भारत को
विकसित देशों में
सर्वप्रथम पहुँचने 
की तैयारी है

Thursday, 24 January 2019

Article : संकष्टि चतुर्थी


संकष्टि चतुर्थी


सकट चौथ संकटों से उबरने का दिन होता है। वैसे तो साल में 12 सकट चौथ आती है, मगर माघ मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी का विशेष महत्व है। सकट चौथ को संकष्टि चतुर्थी, तिलकुटा चौथ, संकटा चौथ, माघी चतुर्थी भी कहा जाता है।

संकष्टि चतुर्थी का मतलब होता है संकटों का नाश करने वाली चतुर्थी। महिलाएं आज अपने बच्चों की सलामती की कामना करते हुए पूरे दिन निर्जला उपवास करती हैं। शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद इस व्रत का पारण किया जाता है।

माताएं सकट चौथ का व्रत अपने संतान की दीर्घायु और सुखद भविष्य संतान की तरक्की, अच्छी सेहत और खुशहाली के लिए करती हैं।
इस दिन रात में चंद्र देव को अर्ध्य देने के बाद भोजन किया जाता है।

इस दिन संकट हरण गणपति का पूजन होता है। इस दिन विद्या, बुद्धि, वारिधि गणेश तथा चंद्रमा की पूजा की जाती है। सकट चौथ पर गणेश जी के भालचंद्र स्वरूप के पूजन का विधान है। भालचन्द्र का अर्थ है जिसेक भाल अर्थात मस्तक पर चंद्रमा सुशोभित हो।

इस दिन गणेश जी पर प्रसाद के रुप में तिल-गुड़ का बना लड्डु और शकरकंदी चढ़ाई जाती है।
शास्त्रों में सकट चौथ पर मिट्टी से बने गौरी, गणेश और चंद्रमा की पूजा की जाती है।

इस व्रत पर तिल को भूनकर गुड़ के साथ कूटकर तिलकुटा अर्थात तिलकुट का पहाड़ बनाया जाता है। अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग प्रकार के तिल और गुड़ के लड्डु बनायें जाते हैं।

तिल के लड्डु बनाने हेतु तिल को भूनकर, गुड़ की चाशनी में मिलाया जाता है, फिर तिलकूट का पहाड़ बनाया जाता है, कहीं-कहीं पर तिलकूट का बकरा भी बनाते हैं। तत्पश्चात् गणेश पूजा करके तिलकूट के बकरे की गर्दन घर का कोई बच्चा काट देता है।

गणेश पूजन के बाद चंद्रमा को कलश से अर्घ्य अर्पित करें। धूप-दीप दिखायें। चंद्र देव से अपने घर-परिवार की सुख और शांति के लिये प्रार्थना करें। इसके बाद एकाग्रचित होकर कथा सुनें। सभी उपस्थित जनों में प्रसाद बांट दें।
सकट चौथ की पूजा में गौरी गणेश व चंद्रमा को तिल, ईख, गंजी, भांटा, अमरूद, गुड़, घी से भोग लगाया जाता है।

इस मंत्र से करें पूजा

गजाननं भूत गणादि सेवितं, कपित्थ जम्बू फल चारू भक्षणम्।

उमासुतं शोक विनाशकारकम्, नमामि विघ्नेश्वर पाद पंकजम्॥