Wednesday, 6 November 2019

Story Of Life : सुहागन या कुँवारी (भाग -2 )

Story Of Life  :  सुहागन या कुँवारी (भाग- 1)  के आगे......  
Story Of Life  :  सुहागन या कुँवारी (भाग -2 )

अनंत बेटे के प्यार में, और सबको दिखाने के लिए normal रहने लगा, पर दिल उसका अभी भी आरती में ही अटका था।

अनंत के office में निकिता ने join किया, बेहद ज़िंदादिल, हंसमुख थी वो। कैसी भी विषम परिस्थिति हो, वो हमेशा positivity से लिया करती थी। उसके आने से पूरे office का माहौल ही बदल गया था।     

एक दिन office में family
get-together था, तो अनंत की family भी आई थी, वहाँ उनकी मुलाक़ात निकिता से हुई। उससे मिलके, सबको बहुत अच्छा लगा।

अनंत की माँ ने तो उसे, अपने घर में होने वाली कथा में भी बुला लिया, निकिता भी तुरंत मान गयी।

अनंत के घर में निकिता को भी बहुत अच्छा लगा, जाते समय वो 
अनंत की माँ से कहने लगी, मैं तो अनाथ हूँ, परिवार का प्यार क्या होता है, कभी जाना ही नहीं, पर आप सबसे मिलके बहुत अच्छा लगा।

अनंत की माँ बोली, तुम्हारा ही घर है, बिटिया आती रहना।

अब तो आए दिन निकिता का आना, जाना होने लगा। एक दिन अनंत की माँ भी अनंत के साथ आरती को देखने hospital गयीं। 
आज भी डॉक्टर नहीं बता पा रहे थे, कि और कितने दिन लगेंगे आरती को ठीक होने में। 

अनंत की माँ से रहा नहीं गया, वो अनंत से बोलीं, आज पूरे पाँच साल हो गए, पर आरती ठीक नहीं हुई, और भी ना जाने कितने दिन और लगेंगे।

बेटा कब तक उसके इंतज़ार में ऐसे ही घुलता रहेगा, मेरी मान, अपनी ज़िंदगी की दुबारा शुरुआत कर ले, निकिता कितनी प्यारी लड़की है। तेरी सूनी ज़िन्दगी में फिर बहार ले आएगी।

कैसी बात कर रहीं हैं, माँ? आप अच्छे से जानती हैं, मेरी ज़िन्दगी में आरती की जगह कोई नहीं ले सकता।

आगे पढ़ें, सुहागन या कुँवारी (भाग -3)में......

Tuesday, 5 November 2019

Story Of Life : सुहागन या कुँवारी

सुहागन या कुँवारी  


अनंत और आरती का जीवन सुख से चल रहा था, शादी के चार साल बाद आरव हुआ था। आरव के होने से पूरे ससुराल में सब आरती को और ज्यादा प्यार करने लगे थे।

आरती का बहुत दिनों से शिमला जाने का मन था, पर वो टल ही रहा था। आरव के एक साल के होने के बाद घर से भी घूमने जाने की permission मिल गयी।

अनंत train का reservation देखने लगा तो, आरती कहने लगी, इस बार कार से चलेंगे, फिर दिल्ली से शिमला दूर ही कितना है?

अनंत बोला, मुझ से पहाड़ों पर drive नहीं होगा।

आरती बोली, आप सिर्फ घबराते हैं, मेरी तो सारी दोस्त कार से जाती हैं। वो बोल भी रहीं थीं, अपनी कार से जाने का मज़ा ही अलग है।

अनंत ने आरती की बात मान ली, वो लोग कार से निकले।

शिमला में घूमते हुए भी अनंत comfortable नहीं था। 

जिसका नतीजा ये हुआ कि उन लोगों का बहुत बड़ा accident हो गया। जिसमें आरव को बिल्कुल चोट नहीं लगी, क्योंकि उस समय वो पीछे सो रहा था। अनंत को चोटें आयीं, पर आरती का बहुत बुरा हाल था। क्योंकि accident का impact उसकी तरफ ही था।

दोनों को hospital में admit किया गया। हफ्ते भर बाद ही अनंत को discharge मिल गया। पर आरती coma में चली गयी। इस बात से पूरा घर shock में आ गया।

अब अनंत दिन रात आरती के coma से लौट आने का इंतज़ार कर रहा था, उसकी तो मानो ज़िंदगी ही थम सी गयी थी। 

वो हर पल उस लम्हे को कोसता रहता, जब उसने आरती की बात मानी थी।

दिन महीने साल गुजरते जा रहे थे, पर आरती coma से वापस ही नहीं आ रही थी।

धीमें-धीमें सब वापस अपने काम में यथावत लग गए। आरव की 
खातिर सब अनंत को समझाने लगे, कि उसे अब ज़िंदगी में वापस लौटना होगा। आखिर उस बच्चे का क्या कसूर है, जो उसे माँ का प्यार नहीं मिल रहा है, और उसके इस रवैये से पिता के प्यार से भी वंचित रहना पड़ रहा है।

Monday, 4 November 2019

Article : क्यों कम हो गए chocolaty hero

क्यों कम हो गए Chocolaty Hero


आज कल पुरुषों में moustache and beard का fashion इस कदर बढ़ गया है, कि chocolaty heroes का तो जैसे अभाव ही हो गया है। जिस ओर देखो, पुरुष मूछे - दाढ़ी बढ़ाए हुए ही दिखेंगे।
फिर चाहे आप फिल्मों में देखें या serials में, cricket में या अपने आसपास, दाढ़ी - मुंछों वालों की ही अधिकता बढ़ती जा रही है।

अब हम ठहरे लेखिका, तो हमारा ध्यान तो समाज में होने वाली हर छोटी बड़ी बात खींचती है।

तो सोचा, इसका कारण क्या है? बहुत सोचा तो इसी नतीजे पर पहुँचे, कि इसका कारण भी नारी ही है।

अब आप बोलेंगे, वो भला कैसे? पुरुषों की हर बात नारी पर ही ख़त्म नहीं होती है।

नहीं होती होगी जनाब, नाराज़ ना होइए।

पर ये तो है ही, जानना चाहेंगे कैसे?

तो देखिये,

नारियां, पुरुषों से कंधा मिलाते - मिलाते अब इतना आगे निकल गयी हैं, कि उन्होंने पुरुषों से अपनी पहचान और अस्तित्व ही मिला लिया है।

अब ना वो सिन्दूर लगाती हैं, ना चूड़ियाँ पहनती हैं, अब ना करती हैं सोलह - श्रृंगार, ना अब वो पहले सी जुल्फें लहराती हैं, ना आंचल संभालती है।

वो तो अब पुरुषों की मानिंद ही jeans - shirt पहनती हैं, shorts पहनती हैं, या यूँ कहें, वो सब पहनती हैं, जो पुरुष पहनते हैं। बाल भी उनके छोटे होने लगे हैं।

पुरुषों कों जब अपनी पहचान और अस्तित्व पर खतरा मँडराता नज़र आने लगा। तब वो विचार करने लगे, कि ऐसा क्या किया जाए? जिसकी समानता करने पर स्त्री दो बार सोचे जरूर।

फिर उन्हें सूझा, कि अगर दाढ़ी - मूछ रखी जाए, तो उसमें स्त्री समानता नहीं करना चाहेगी, और एक बार फिर वो अलग दिखने लगेंगे।

बस फिर क्या था, आ गया दाढ़ी - मूछों वालों का दौर। जिससे chocolaty hero का दौर हमेशा के लिए जाता जा रहा है।
पुरुषों का सोचना सत्य साबित हुआ, अब वे अलग दिखने लगे हैं।

पर कितने दिन के लिए! भगवान ही जाने?

क्योंकि नारी शक्ति को कम मत आंकिएगा, कब आपकी ये पहचान भी छिन जाए।

मेरी मानिए, तो अभी से इस बारे में भी सोचना शुरू कर दीजिये।

किस बारे में?

अरे अगली पहचान के बारे में!

तब तक के लिए राधे राधे...

Disclaimer : यह सिर्फ एक व्यंग है, किसी को चोट पहुंचाने का कोई इरादा नहीं है।