Saturday, 22 August 2026

India's Heritage : पार्वती जी को भी भाए सावन

सावन का पावन माह चल रहा है, शिव जी को प्रसन्न करने वाला, उनकी भक्ति में लीन होने का।

पर क्या आपको पता है, न केवल शिव जी को, बल्कि शक्ति स्वरूपा पार्वती जी को भी सावन माह में पूजा-अर्चना करते हुए प्रसन्न किया जा सकता है?

पर जैसे सावन के सोमवार में पूजा-अर्चना करने से महादेव प्रसन्न होते हैं, वैसे ही पार्वती माता की सावन माह के मंगलवार को पूजा-अर्चना की जाती है, जिसे मंगलागौरी व्रत भी कहते हैं?

पार्वती जी को भी भाए सावन


सावन (श्रावण) मास के प्रत्येक मंगलवार को माता पार्वती के मंगला गौरी स्वरूप की पूजा की जाती है और मंगला गौरी व्रत रखा जाता है। यह व्रत सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य के लिए करती हैं।

  • व्रत का महत्व और नियमसमर्पण- यह दिन भगवान शिव की शक्ति और माता पार्वती को समर्पित होता है।
  • सौभाग्य प्राप्ति- विवाहित महिलाएं सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं।
  • शीघ्र विवाह- अविवाहित युवतियां मनचाहा वर पाने के लिए यह व्रत रखती हैं।
  • सोलह की संख्या- पूजा में सभी सामग्री (जैसे दीपक, चूड़ियां और प्रसाद) सोलह (16) की मात्रा या संख्या में अर्पित की जाती है।

हर-हर महादेव, माता पार्वती की जय।

Friday, 21 August 2026

Story of Life : सावन के झूले (अंतिम भाग)

सावन के झूले (भाग-1)

सावन के झूले (भाग-2) के आगे…

सावन के झूले (अंतिम भाग)


आखिर ऐसा भी क्या बिगाड़ा था उन्होंने किसी का, जो ऐसा हुआ, एक-दूसरे की धड़कन और दिल थे दोनों, आखिर एक-दूजे से दूर रहकर कैसे जिएंगे?

कुछ दिनों बाद ही कजरी तीज आ गई। सब ओर सावन के झूले पड़ गये।

सारे apartments में ladies में ग़ज़ब का उत्साह था। उसके apartment में ladies and gents दोनों मिलकर सावन का त्योहार मनाया करते थे। पति अपनी पत्नी को प्यार से झूला झूलाते।

ऐसा करते देख अनिका के मन में सिर्फ एक गाना गूंज रहा था-

“सावन के झूले पड़े 

तुम चले आओ

तुम चले आओ” 

अभी वो सोच में डूबी हुई थी कि doorbell बज उठी। अनिका ने दरवाजा खोला तो सामने सुहास खड़ा था।

“अरे तुम!” कहकर अनिका खुशी से सुहास के गले लग गई। थोड़ी देर बाद, “पर तुम तो आने वाले नहीं थे, फिर!”

“सब दरवाजे पर ही जान लोगी या अंदर भी चलोगी?” सुहास ने कहा, “तुम से बिछड़ कर मैं जी ही नहीं पा रहा था। 

हमेशा उदास और दुखी रहता, एक दिन मेरे boss ने मुझे बुलाया और कारण पूछा। मैंने बता दिया कि हमारी नयी शादी हुई है, अभी तो अपनी पत्नी के साथ चंद पल ही बिताए थे कि work from home खत्म हो गया।

वो बोले- अच्छा एक काम करो, finance का काम सीखना शुरू कर दो, अगर तुम्हारी performance मुझे अच्छी लगी, तो तुम्हारे शहर में तुम्हारी fix job कर दूंगा, लेकिन हाँ, काम में कोई कोताही नहीं चलेगी।

बस मैंने बहुत तेजी से दिन-रात काम सीखना शुरू कर दिया। जब boss ने check किया, तो मैं उसमें खरा उतरा।

बस क्या, अब से तुम्हारे पास हमेशा के लिए”

बाहर गाना बज रहा था-

“मोहब्बत बरसा देना तू

सावन आया है”

और अंदर अनिका सुहास की बाहों में खो गई, अपने सुहाने पलों को समेटते हुए…

Thursday, 20 August 2026

Story of Life : सावन के झूले (भाग-2)

सावन के झूले (भाग-1) के आगे…

सावन के झूले (भाग-2)


सुहास को ऐसा देखकर अनिका सहम गई कि न जाने phone पर ऐसी क्या बात हुई, जिसने चहकते हुए सुहास को यूं खामोश कर दिया।

“क्या हुआ सुहास? तुम इतने उदास क्यों हो गए?”

“मेरा work from home खत्म हो गया है और मुझे दो दिन में ही join करना है।”

“अरे! तो क्या हो गया? कर लो join, उसमें दुःखी होने जैसा क्या है?”

“अब हम साथ में नहीं रह पाएंगे,” कहते-कहते सुहास का गला सूखने लगा।

“साथ नहीं रह पाएंगे, मतलब?” अनिका ने परेशान होते हुए पूछा।

“मुझे हर दूसरे हफ्ते अलग-अलग शहरों में जाना होगा, साथ ही बीच-बीच में abroad भी जाना होगा। तो हर जगह तुम्हें नहीं ले जा सकता हूं।”

सुनकर अनिका की आंखों से अश्रु की अविरल धारा बह निकली। 

“यह क्या हुआ, कैसे हुआ 

कब हुआ, क्यों हुआ 

अरे छोड़ो यह न सोचो”

सुहास थोड़ी देर में उठा और अपना सब सामान pack करने लगा। दो दिन कब निकल गये, packing की आपाधापी में समझ ही नहीं आए।

और सुहास अनिका को छोड़कर, joining के लिए चला गया।

अनिका का एक-एक दिन पहाड़ सा बीतने लगा। बारिश की झड़ी देखकर उसे बस यही लगता-

“हाय-हाय ये मजबूरी 

ये मौसम और ये दूरी 

मुझे पल-पल है तड़पाए 

तेरी दो टकिया की नौकरी में 

मेरा लाखों का सावन जाए”

Join करने के बाद सुहास का phone आया, अनिका ने उठाया भी, दोनों बहुत बातें करते थे, पर आज दोनों तरफ शांति थी, उन्हें समझ ही नहीं आ रहा था कि बात क्या करें। 

“चुप तुम रहो चुप हम रहें

चुप तुम रहो चुप हम रहें

खामोशी को खामोशी से

ज़िंदगी को ज़िंदगी से बात करने दो”

थोड़ी देर बाद दोनों ने phone रख दिया, और दोनों सोच रहे थे कि आखिर उनकी हंसती-मुस्कुराती जिंदगी को किसकी नज़र लग गई।

आखिर ऐसा भी क्या बिगाड़ा था, उन्होंने किसी का, जो ऐसा हुआ, एक-दूसरे की धड़कन और दिल थे दोनों, आखिर एक-दूजे से दूर रहकर कैसे जिएंगे…

आगे पढ़ें, सावन के झूले (अंतिम भाग) में…

Wednesday, 19 August 2026

Story of Life : सावन के झूले (भाग-1)

सावन का मस्त महीना चल रहा है, पिछले 8 सालों से सावन में गीतों से सजी कहानियाँ प्रस्तुत कर रहे हैं, जो कि लोगों को बहुत पसंद आती है।

तो इस सावन में एक बार फिर गीतों से सजी कहानी प्रस्तुत है, इसके भी सभी अंग का आनंद लेकर मुझे कृतार्थ करें… 

सावन के झूले (भाग-1)


अनिका की नई-नई शादी हुई थी, अनिका जितनी बला की खूबसूरत थी, सुहास उतना ही handsome and romantic था।

जैसी सोची थी अनिका ने जिंदगी, यह उससे भी बहुत बेहतरीन थी। सुहास अनिका को हद से ज्यादा प्यार करता था। और हमेशा यही गुनगुनाता रहता-

“तेरे चेहरे से नज़र नहीं हटती 

नज़ारे हम क्या देखें”

अनिका के लिए दिन सोना और रात चांदी सी गुज़र रही थी, हर पल सुहास के साथ से उसे ऐसा लगता था, मानो उससे सुखी इस जहां में दूसरा नहीं।

सावन का romantic मौसम भी आ गया।

अनिका सुबह ही उठकर नहा-धोकर, बन-ठन कर शिव आराधना करने चली गई।

जब वो लौटी, तब तक सुहास भी उठ चुका था और अनिका के रूप को देखकर मोहित हो गया और गाने लगा-

“यह मौसम का जादू है मितवा

न अब दिल पर काबू है मितवा”

अनिका अपनी खूबसूरती पर इतरा कर सुहास की बाहों में समा गई। अभी दोनों प्रेमालाप में ही थे कि फोन घनघना उठा।

जब सुहास ने phone उठाया, तो उस बात को सुनकर वो धम्म से सोफे पर बैठ गया, उसके चेहरे पर उदासी साफ़ झलक रही थी।

सुहास को ऐसा देखकर अनिका सहम गई कि न जाने phone पर ऐसी क्या बात हुई, जिसने चहकते हुए सुहास को यूं खामोश कर दिया…

आगे पढ़ें, सावन के झूले (भाग-2) में…

Tuesday, 18 August 2026

India's Heritage : Vande Mataram after 80 Years

15 August 2026 एक ऐसा ऐतिहासिक दिन बनकर आया, जिसमें हम सब भारतवासियों के साथ आजादी के मतवाले शहीद भी शामिल हो गए।

ऐसा हम क्यों कह रहे हैं? तो उसका कारण है, स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर पर वंदे मातरम् के सम्पूर्ण गीत का गायन।

क्या आप जानते हैं, लाल किले की जान रहा यह राष्ट्रगीत 80 साल बाद मंच पर गाया गया?

“वन्दे मातरम्, सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम् शस्यश्यामलां मातरम्, वन्दे मातरम्!”

आइए, इस राष्ट्रगीत का निर्माण और इसके महत्व को समझते हैं…

Vande Mataram after 80 Years


यह हमारे देश भारत का राष्ट्रीय गीत है, जिसे बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय ने 150 साल पहले 1875 में बनाया था।

1882 में अपनी किताब आनंदमठ में यह गीत प्रकाशित किया, उसके बाद यह घर-घर की आवाज बन गया और 1896 को इसे मंच पर रविन्द्रनाथ टैगोर ने गाया।

आजादी के पूर्व आज़ादी के मतवालों के लिए यह आजादी का गीत बन गया।

जिसने अंग्रेज़ो को हिलाकर रख दिया था, उस समय इस गीत को गाना जुर्म माना जाता था, उन पर लाठीचार्ज होती थी, जेल हो जाती थी, जो यह गीत गाते थे। 

पर इसे जितना रोका गया, आजादी के मतवालों ने उतना ही अधिक गाया।

सभाओं में, गली-गली में, जुलूसों में, भीड़ में, जेल में, यहां तक कि फांसी लगते समय भी, हर पल, हर क्षण, इस एक गीत ने अंग्रेजों की नाम पर दम कर दिया था।

1905 में अंग्रेजों ने बंगाल के दो टुकड़े कर दिए, इससे पूरा देश हिल गया। तब यही गीत, गीत के साथ-साथ नारा और देश को आजादी दिलाने का हथियार भी बन गया। 

हर ओर से, हर छोर से, जोर-जोर से पूरे देश में दो नारे सर्वत्र गूंज रहे थे। वंदे मातरम् और इंकलाब जिंदाबाद। इन दो नारों से ऐसा जनसैलाब उमड़ा कि अंग्रेज भारत को आजाद करने को मजबूर हो गए। 

और तब मिली हमारे देश को आजादी, अविस्मर्णीय दिन आया, अथक प्रयासों, व अनेकानेक बलिदानों के बाद। वंदे मातरम् गीत को पूरा गाने पर पहले अंग्रजों को फिर मुस्लिम league को परेशानी थी। 

क्योंकि गीत के आखिरी stanza में भारत माता की तुलना दुर्गा माता से की, तो कुछ विशेष लोगों ने कहा कि उनके धर्म में ऐसे देवी अर्चना नहीं की जाती है। अतः यह निर्धारित किया गया कि वंदे मातरम् गीत के आखिरी stanza न गाएँ जाएँ। 

24 January 1950 में पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद जी ने यह ऐलान कर दिया था कि “जन-गण-मन अधिनायक जय हे” राष्ट्र गान है, जबकि “वन्दे मातरम्” राष्ट्रगीत निर्धारित होगा।

और जितने भी सरकारी कार्यालय, विद्यालय आदि हैं, उनमें देश से जुड़े पर्व में और किसी भी ऐसी जगह जाने में देश को represent किया जा रहा है, तो पहले वहाँ राष्ट्रगान गाया जाएगा, राष्ट्रगान के पश्चात राष्ट्रीय गीत गाया जाएगा।

पर यह बहुत अफसोस की बात है कि हममें से बहुत कम ही भारतीय हैं, जिन्हें यह राष्ट्रीय गीत आता हो, कितनों को तो यह भी पता नहीं होगा कि भारत का राष्ट्रीय गीत कौन सा है।

लेकिन इस वर्ष लाल किले की प्राचीर से राष्ट्रीय गीत गाया और पूरा गाया गया, जिसकी यह सोच थी उसे शत-शत नमन।

क्योंकि यह गीत गाए जाने से देश ने सभी आजादी के मतवालों को उनके बलिदान को शत-शत नमन किया है, उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दी है, उन्हें हृदय से आभार व्यक्त किया है।

आशा है आने वाले समय में वंदे मातरम् गीत को हर राष्ट्रीय पर्व पर विशेष रूप से गाया जाएगा, जिससे बच्चों-बच्चों को यह कंठस्थ हो जाए। और हम हर वर्ष आजादी दिलाने वाले वीर सपूतों को आभार प्रकट कर सकें, सच्ची श्रद्धांजलि दे सकें।

वंदे मातरम्! जय हिन्द, जय भारत!

Monday, 17 August 2026

India's Heritage : नागपंचमी व सावन का सोमवार

हिन्दू धर्म में सभी को सर्वश्रेष्ठ और पूजनीय स्थान दिया गया है, फिर वो चाहे देवी-देवता, प्रकृति, सूर्य, चन्द्र, शनिदेव, आकाश, पृथ्वी, गाय, या नागदेवता हों, सबकी पूजा-अर्चना के दिन निर्धारित हैं। 

इन दिनों में से नागपंचमी नागदेवता के लिए निर्धारित किया गया है।

नाग पंचमी का पावन पर्व इस साल 17 अगस्त 2026 (सोमवार) को है। 

इस दिन सावन का तीसरा सोमवार होने के कारण एक अत्यंत दुर्लभ और शुभ संयोग बन रहा है, क्योंकि भगवान शिव और नाग देवता की पूजा एक साथ की जाएगी।

महादेव को नाग अत्यंत प्रिय हैं, इसलिए ही उन्होंने नाग को अपनी ग्रीवा में स्थान दिया हुआ है। 

महादेव की गर्दन में नाग इस तरह से लिपटे हुए रहता है, मानो वह उनके श्रृंगार का अभिन्न अंग हो, उनके गले का हार हो।

पर क्यों है ऐसा और क्यों मनाते हैं नागपंचमी? आज India's Heritage segment में यही देखेंगे…

नागपंचमी व सावन का सोमवार


महादेव के गले में नाग क्यों :

भगवान शिव के गले में जो सांप लिपटा रहता है, उसका नाम वासुकी नाग है, जो नागों के राजा हैं। 

शिव जी ने उन्हें समुद्र मंथन के दौरान उनकी सेवा, समर्पण और कष्ट सहन करने के भाव से प्रसन्न होकर अपने गले का आभूषण बनाया था।


पौराणिक व आध्यात्मिक कारण :

इसके पीछे कई पौराणिक और आध्यात्मिक कारण हैं।

  • समुद्र मंथन- समुद्र मंथन के समय वासुकी नाग ने मंदराचल पर्वत को मथने के लिए रस्सी की भूमिका निभाई थी। घर्षण से घायल होने और विष का प्रभाव सहने के उनके समर्पण को देखकर शिव जी ने उन्हें अपने गले में स्थान दिया।
  • भक्त की इच्छा- नागराज वासुकी भगवान शिव के परम भक्त थे और हमेशा उनके समीप रहना चाहते थे, इसलिए शिव ने उनकी मनोकामना पूरी की।
  • मृत्यु पर विजय- सांप को मृत्यु और काल का प्रतीक माना जाता है। गले में नाग धारण कर शिव यह दर्शाते हैं कि वे महाकाल हैं और मृत्यु तथा भय से परे हैं।
  • कुंडलिनी शक्ति- योग और तंत्र साधना में सांप को कुंडलिनी शक्ति का प्रतीक माना जाता है, जो मनुष्य के भीतर जागृत होने वाली चेतना का संकेत है।
  • संतुलन और शांति- एक अत्यंत विषैला और हिंसक जीव होने के बावजूद सांप शिव के गले में शांत रहता है, जो यह सिखाता है कि भयंकर ऊर्जा या क्रोध पर भी संयम रखा जा सकता है।

नागपंचमी का कारण :

अब जान लेते हैं कि क्यों मनाते हैं नागपंचमी।

नाग पंचमी का त्योहार सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग देवता के प्रति सम्मान और उनकी रक्षा के लिए मनाया जाता है। इस दिन सांपों को दूध व फूल चढ़ाकर सर्पदंश से रक्षा, पारिवारिक समृद्धि और कालसर्प दोष की शांति के लिए पूजा की जाती है।


पौराणिक कथाएं और मान्यताएं :

  • आस्तिक मुनि की कथा- राजा जन्मेजय ने अपने पिता की मौत का बदला लेने के लिए विशाल सर्प यज्ञ किया था। आस्तिक मुनि ने श्रावण शुक्ल पंचमी के दिन उस यज्ञ को रोककर नागों के प्राण बचाए थे, तभी से यह पर्व मनाया जाता है।
  • कालिया नाग का वध- भगवान श्रीकृष्ण ने इसी दिन कालिया नाग को हराकर यमुना नदी को जहर से मुक्त किया था।
  • शिव व विष्णु का संबंध- भगवान शिव अपने गले में नाग रखते हैं और विष्णु जी शेषनाग पर सोते हैं, इसलिए नागों की पूजा का विशेष महत्व है।


तिथि व शुभ मुहूर्त :

  • पंचमी तिथि प्रारम्भ- 16 अगस्त 2026 को शाम 04:52 बजे।
  • पंचमी तिथि समाप्त- 17 अगस्त 2026 को शाम 05:00 बजे।
  • पूजा का शुभ मुहूर्त- सुबह 05:51 बजे से सुबह 08:29 बजे तक (कुल अवधि= 2 घंटे 37 मिनट)।
  • पूजा विधि और महत्व- सुबह स्नान करके साफ वस्त्र पहनें। घर के मंदिर या पूजास्थल पर शिव परिवार के साथ नाग देवता का ध्यान करें। शिवलिंग पर जल, दूध, और बेलपत्र अर्पित करें तथा नाग देवता को दूध, खीर, चंदन व पुष्प चढ़ाएं।

इस दिन नाग देवता की पूजा करने से सर्प भय से मुक्ति मिलती है और कालसर्प दोष का निवारण होता है। 

देवाधिदेव भगवान महादेव और उनके परम भक्त नागदेवता की कृपा हम सब पर सदैव बनी रहे, जिससे हम सभी दुःख-कष्ट से मुक्त होकर उनकी भक्ति में लीन रहें।

हर हर महादेव!

Sunday, 16 August 2026

Recipe : Bhutte ka Kees

बरसात का भीगा-भीगा सुहाना-सा मौसम है, इस मौसम में पकौड़े, cutlet, भुट्टा आदि का आनन्द ही अलग आता है।

इसमें भुट्टा (corn) एक healthy option है। आपने बरसात में भूने हुए भुट्टे पर नींबू और काला नमक लगाकर बहुत बार खाया होगा, और उसे खाने में बहुत आनंद आया होगा।

Sweet Corn chaat के तो कहने ही क्या- mall, cinema halls इन सब की शान है sweet corn chaat.

इसमें कोई doubt नहीं है कि भुट्टा healthy option है, तो आज हम आपके लिए भुट्टे की एक बेहद tasty और healthy dish share कर रहे हैं। यह बहुत easily and instantly prepare हो जाती है।

इसे खाकर आप को इसे बार-बार बनाने का मन करेगा। यह है इंदौर का famous street food, भुट्टे का कीस

यह ताजे और नर्म मक्के (भुट्टे) से बनता है। इसलिए आप इसे बरसात में बनाएंगे तो बहुत अच्छा बनता है, क्योंकि बरसात में ताज़े और नर्म भुट्टे मिलते हैं, जो कि बहुत juicy और मीठे होते हैं…

भुट्टे का कीस


Ingredients :

  • Soft corn on the cob - 3 to 4 cobs
  • Roasted gram flour - 2 tbsp.
  • Clarified butter (ghee) - 2 tbsp.
  • Rai (small mustard seeds) - ¼ tsp.
  • Cumin seeds - ½ tsp.
  • Asafoetida - Pinchful
  • Green chilli (finely chopped) - as per taste 
  • Ginger (grated) - 1 tsp.
  • Turmeric powder - ¼ tsp.
  • Milk - 1 cup 
  • Salt - as per taste 
  • Sugar - 1 tsp./as per taste 
  • Lemon juice - 1 tsp. 
  • Fresh coriander leaves (finely chopped) - for garnishing 


Method : 

  1. भुट्टों के छिलके उतारकर grater से कद्दूकस कर लें ताकि उसका pulp और juice निकल आए।
  2. Wok लीजिए, उसमें 1 tbsp. घी गर्म करें।
  3. अब इसमें राई, जीरा और हींग डालकर चटकाएं।
  4. फिर इसमें कटी हरी मिर्च और अदरक डालकर कुछ second भूनें।
  5. कद्दूकस किया हुआ भुट्टा और हल्दी डालकर 3-5 मिनट तक मध्यम आंच पर भूनें।
  6. फिर इसमें भूना हुआ बेसन मिलाकर थोड़ा-सा और भून लें।
  7. अब इसमें दूध और नमक डालकर अच्छी तरह मिलाएं। 
  8. Slow flame पर ढककर 5 to 7 minutes तक पकाएं जब तक मिश्रण गाढ़ा और मलाईदार न हो जाए।
  9. Gas off करने के बाद नींबू का रस 1 tbsp. घी और चीनी अच्छे से मिलाएं।
  10. अब इसे finely chopped fresh coriander leaves से garnish करके गरमागरम serve करें।

Your nutritious and delicious Bhutte ka Kees is ready to be relished with this melodious monsoons!


Tips and Tricks :

  • इसको perfect बनाने के लिए भुट्टा लेते समय ध्यान रखें कि भुट्टा ताजा और नर्म हो।
  • ताज़े और नर्म भुट्टे की पहचान यह है कि यह हल्के रंग के होंगे, साथ ही अगर आप दबाकर देखेंगे तो यह बहुत juicy भी होंगे।
  • Authentically इसमें भूना हुआ बेसन पड़ता है, उससे सौंधा स्वाद आता है। पर अगर आप को creamy कीस ज्यादा अच्छा लगता है, तो बेसन discard कर सकते हैं।
  • Authentically इसमें कद्दूकस कर के ताजा नारियल डाला जाता है, पर मेरे बेटे को नारियल का taste ज्यादा पसंद नहीं है तो हमने ताज़े नारियल को garnishing में नहीं डाला है। आपको नारियल का स्वाद पसंद है तो उसे garnishing में अवश्य डालें।
  • अगर आप के पास ताजा भुट्टा नहीं है या आप किसी भी मौसम में कीस का मजा लेना चाहते हैं तो आप 1 bowl frozen American sweet corn भी use कर सकते हैं, यह नर्म भी होते हैं और मीठे भी। इससे बनाने के लिए sweet corn ½ hour के लिए भिगा दें, जिससे यह thaw होकर soft हो जाए। फिर सारा पानी निकालकर इसे हल्का coarse पीस लें। आगे का method कद्दूकस किए हुए भुट्टे जैसा ही होगी।
  • याद रखियेगा कि जब भुट्टा कद्दूकस करते हैं, तब corn का fibrous part ऊपर रह जाता है, और केवल juicy और creamy part (pulp और juice) ही plate में आता है।
  • Sweet corn को grind करने में fibrous flavour रहता है, वैसे तब भी वो स्वादिष्ट ही लगता है। And fibrous है तो health के point of view से healthier है।
  • भुट्टे की कीस बनाने से पहले भुट्टा चख लें, जिससे आप को idea रहे कि कितना sugar डालनी है।
  • Authentically भुट्टे की कीस का स्वाद खट्टा-मीठा और चटपटा होता है, पर अगर आप sugar discard करना चाहें तो कर सकते हैं।
  • Chilli और ginger भी discard कर सकते हैं, अगर spicy flavour न पसंद हो।
  • दूध अवश्य डालें, दूध के साथ taste enhance हो जाता है।
  • हमने घी लिया है, आप oil भी ले सकते हैं, वैसे घी से इसका स्वाद बहुत बढ़ जाता है।

अब रिमझिम बारिश का लुत्फ उठाएं इस इंदौरी चाट की recipe भुट्टे का कीस के साथ…

Saturday, 15 August 2026

Poem : स्वतंत्रता और हरियाली

मिट्टी की खुशबू और चारों तरफ हरियाली से जुड़े दो बड़े पर्वो का मेल हुआ है इस वर्ष, स्वतंत्रता दिवस और हरियाली तीज का।

तो आइए, यह देखते हैं, कि किस प्रकार से ये दोनों ही त्यौहार हमारे जीवन में बहुत अहम हिस्सा निभाते हैं…

स्वतंत्रता और हरियाली


दोनों ही महत्वपूर्ण, दोनों ही सुखद,

जैसे ज़िन्दगी को मिल गई हो हद।

बिन आजादी जीवन था असंभव,

हरियाली के संग ही जीवन संभव।

दोनों तो हैं एक-दूजे के ही मेल,

दोनों के बिन जीवन हो जाए अझेल। 

आओ मिलकर सभी उत्सव मनाएं,

झंडा फहराकर, गीत तीज के गाएं।

तिरंगे की आन-बान-शान को शीश झुकाएं,

झूले में बैठ, हवा संग आसमान को छू आएं।

झंडों से सजे देश की है छटा निराली, 

संगत दे रही उसको तीज़ मतवाली।


आप सभी को स्वतंत्रता दिवस और हरियाली तीज पर विशेष शुभकामनाएँ!

Friday, 14 August 2026

Recipe : Mawa Sandwich

Bread Poha, Bread Pudla और Choco Sandwich के बाद एक और bread की dessert recipe share कर रहे हैं।

आपने शाही toast तो बहुत बार खाया होगा, एक बार इसे भी try कीजिए। इसका taste next level है। 

यह आपकी kitty party में तो चार चांद लगाएगा ही, साथ ही बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सबको बहुत पसंद आएगा। बच्चे भी खुशी-खुशी tiffin में ले जाएंगे…

Mawa Sandwich


Ingredients :

  • Bread - 6 to 8 slices 
  • Mawa - 3 to 4 tbsp.
  • Sugar - as per taste
  • Clarified butter (ghee) - for greasing


Method :

  1. Bread slices में मावा filling (mawa and sugar) भरकर इसको sandwich maker में रखकर दोनों तरफ़ घी लगाकर crispy and golden brown होने तक सेक लें।

And that is it, just one step and the instantly prepared appetizing and delish Mawa Sandwiches are ready!


Tips and Tricks :

  • हम mawa filling घर पर घी निकलने में जो खोया निकलता है उससे ही बनाते हैं, वो बहुत tasty and healthy होता है। आपको उसकी recipe चाहिए हो तो comment box में डाल दीजिएगा।
  • आप चाहें तो आप इस sandwich को डोडा बर्फी से या milk cake मिठाई से भी बना सकते हैं। अगर आप milk cake मिठाई ले रहे हों तो उसे mash करके उसमें थोड़ा-सा दूध add करके अच्छे से mix कर लें।  फिर इसे fill कर के sandwich बनाएं। ऐसा इसलिए कि milk cake dry मिठाई होती है और sandwich बनाने में और dry हो जाएगी।
  • Sandwich juicy नहीं होने से अच्छा नहीं लगेगा।
  • Mawa filling even भरें, उसी से ही perfect result आएगा।

एक बार इसे भी try कीजिए, फिर जब भी आप घी बनाएंगे तो उसके खोया से इसे भी ज़रूर बनाएंगे…

Thursday, 13 August 2026

Recipe : Choco Sandwich

Bread Poha and Bread Pudla की recipe के बाद बारी आती है bread की ऐसी recipe की, जो जितना चार चांद आपकी kitty party में लगाएगी, उससे ज्यादा इसे खाकर बच्चे झूम उठेंगे और tiffin में ले जाने को हमेशा ready रहेंगे।

यह dish जितनी tasty है, उससे भी ज्यादा easily prepare हो जाती है। मतलब guest भी खुश, बच्चे भी खुश और आप? आप तो जरूर से खुश होंगे, सबकी वाहवाही बटोरकर…

Choco Sandwich


Ingredients :

  • Bread - 6 to 8 slices
  • Chocolate slab - 250 gm.
  • Clarified butter (ghee) - for sandwich making


Method :

  • Chocolate slab को finely chop कर लीजिए।
  • Bread slice में chopped chocolate रखकर उस पर दूसरी slice रखें।
  • दोनों bread slices में घी लगाकर, sandwich maker में crispy होने तक सेक लें।
  • Triangle shape में या चार टुकड़े कर के serve करें।
  • चाहें तो melted chocolate की lining से इसे garnish कर सकते हैं।

Your melt-in-mouth Choco Sandwiches are ready to be the icing on the cake for your Teej Kitty Parties, as well as your children's tiffin boxes!


Tips and Tricks :

  • Bread slices fresh ही लीजिए।
  • Chocolate slab न होने पर Dairy Milk chocolate ले सकते हैं।
  • Chocolate finely chop नहीं करना है, थोड़ा coarsely chop करें, वरना sandwich बनने से पहले ही chocolate melt होकर sandwich maker में आ जाएगी।
  • Sandwich ghee or butter से ही सेंके। Oil से उतना अच्छा taste नहीं आएगा। 

तो इसे as a starter or dessert serve करें और छा जाएं…

Wednesday, 12 August 2026

Recipe : Bread Pudla

Bread Poha को बहुत पसंद किया गया, उसका link यह है अगर आप देखना चाहें- https://shadesoflife18.blogspot.com/2026/08/recipe-bread-poha.html?m=1

कल की recipe का main ingredient bread था, आज भी bread की ही एक और dish share कर रहे हैं।

आज की यह dish Mumbai का famous street food है, easily prepare होने वाला tasty snack है। इसे हि आप अपनी kitty party or बच्चों के tiffin box में रख सकते हैं…

Bread Pudla


Ingredients :

  • Bread - 4 to 5 slices 
  • Gram flour - 2 tbsp.
  • Rice flour - ½ tbsp. 
  • Onion - 1 (medium)
  • Capcicum - 1 (medium)
  • Tomato - 1 (medium)
  • Coriander leaves - handful 
  • Salt - as per taste 
  • Oil - for shallow fry 


Method :

  1. बेसन में चावल का आटा और नमक डालकर pouring consistency का solution बना लें।
  2. प्याज़, टमाटर, शिमला मिर्च और हरा धनिया को finely chop कर लें। 
  3. इन सबको बेसन-चावल के घोल में डालकर अच्छे से mix कर लें।
  4. अब bread slices को इस घोल में dip करके तवे पर दोनों तरफ से crispy and golden brown होने तक shallow fry कर लें।

Your mouth-watering Bread Pudla is ready! Savour the flavour without the hassle of going to the streets of Mumbai!


Tips and Tricks :

  • इसके लिए bread slices fresh नहीं होने से ज्यादा अच्छी बनेगी। मतलब अगर आप के पास bread रखी है और वो fresh नहीं है, तो यह recipe आपके लिए perfect result देगी।
  • जब आप bread slice को dip करके तवे पर डालें तो ध्यान रखें कि bread में प्याज़, टमाटर, शिमला मिर्च को ऊपर से load कीजिए और नीचे उसमें सिर्फ बेसन-चावल के‌ आटे को घोल लगे।
  • जिस तरफ सिर्फ घोल लगा है, वो side तवे पर पहले सेंके।इससे bread slice में strength आ जाती है और वो सेंकने से टूटती नहीं है‌। Bread Pudla एक तरफ से crispy और दूसरी तरफ से juicy बनता है।
  • इसमें bread पकौड़े के comparatively कम oil use होता है, साथ ही यह ज्यादा easily perfect बन जाता है।

इसे बनाएं और अपनी kitty party में चार चांद लगाएं…

Tuesday, 11 August 2026

Recipe : Bread Poha

हरियाली तीज आने वाली है और ladies के लिए kitty का सबसे बड़ा event. Event बड़ा तो tension भी बड़ी कि क्या बनाया जाए, जो झटपट बन भी जाए और tasty भी हो। 

तो आप tension free हो जाइए, क्योंकि Shades of Life लाया है आपके लिए 4 snacks, जिसमें दो नमकीन हैं और दो मीठे।

सारे ही स्वाद में एक से बढ़कर एक, और main ingredient same होने के बावजूद सब के सब स्वाद में एक दूसरे से पूरी तरह अलग, पर tasty सारे।

एक और बात, कि आप इन dishes को tiffin में भी रख सकते हैं…

Bread Poha


Ingredients :

  • Bread - 4 to 5 slices
  • Onion - 1 (medium)
  • Tomato - 1 (big(
  • Potato - 1 (small, optional)
  • Fresh coriander leaves - handful 
  • Green chilli - as per taste 
  • Oil - 1 tbsp.
  • Salt - as per taste 
  • Sugar - 1-2 tsp. (as per taste)
  • Mustard seeds - 1 tsp.
  • Curry leaves - 5 to 6


Method :

  1. Bread के roughly छोटे-छोटे टुकड़े कर लें।
  2. प्याज़, टमाटर, धनिया पत्ती और हरी मिर्च को बारीक काट लें।
  3. Wok में oil डालकर गर्म करें। अब इस में सरसों दाने और करी पत्ता डालकर चटका लें।
  4. इसमें बारीक कटा हुआ प्याज और नमक डालकर saute कर लें। फिर इसमें sugar, बारीक कटा हुआ टमाटर, और हरी मिर्च डालकर तब तक भूनें, जब तक टमाटर हल्का-सा गल जाए।
  5. अब इसमें bread के टुकड़े डालकर अच्छे से चला दीजिए और उस पर थोड़ा-सा पानी छींट दें। 
  6. फिर ढक्कन लगाकर 2 to 5 minutes तक slow flame पर छोड़ दें।
  7. एक बार फिर अच्छे से चलाएं, जिससे bread में सब अच्छे से चिपक जाए और bread moist भी रहे।
  8. अब इसे finely chopped fresh coriander leaves से garnish कर दीजिए।

Your flavoursome and tempting Bread Poha is ready to be savoured. Enjoy it as it is, or with your favourite chutney, dip, or ketchup.


Tips and Tricks :

  • Bread fresh और रखी हुई दोनों लें सकते हैं, बस ध्यान रखिएगा कि bread अगर fresh नहीं है तो पानी का छींटा ज्यादा पड़ेगा।
  • अगर आप आलू भी डाल रहे हैं, तो उसे प्याज़ भूनने के बाद और टमाटर डालने से पहले डालना है। आलू डालने से juicy ज्यादा हो जाता है और बच्चों को ज्यादा पसंद आता है।
  • यह गर्म और ठंडा दोनों तरह से अच्छा लगता है, इसलिए आप इसे बच्चों के tiffin (lunch) में भी रख सकते हैं।
  • इसमें टमाटर थोड़ा ज्यादा डालते हैं, इसके दो कारण हैं- (I) टमाटर ज्यादा होने से bread में moisture अच्छा आता है। (II) Tangy flavour Bread Poha का taste enhance कर देता है।
  • Sugar थोड़ी तो जरूर से डालिए, इससे taste balance हो जाता है। वैसे 2 tsp. तक भी अच्छी लगती है, खट्टा-मीठा और चटपटा स्वाद बहुत अच्छा लगता है।
  • Mustard seeds, coriander leaves और curry leaves डालने से इसका taste दोगुना हो जाता है, नहीं होने से discard भी कर सकते हैं। 
  • अगर आप प्याज नहीं खाते हैं, तो उसे discard कर सकते हैं।

तो बनाइए यह झटपट से बनने वाली स्वादिष्ट dish…

Monday, 10 August 2026

India's Heritage : सावन शिव को क्यों मनभावन?

एक प्रश्न मन में उठता है कि आखिर सावन माह ही इतना विशेष क्यों? और यह माह ही शिव जी इतना प्रिय क्यों है, क्या है इसका कारण?

शिव जी का प्रिय माह और समर्पित दिन है आज, सावन का दूसरा सोमवार। तो इससे अच्छा कौन-सा दिन हो सकता है, इस जानकारी के लिए। फिर आज आपके समक्ष इसे ही प्रस्तुत कर रहे हैं…

सावन शिव को क्यों मनभावन?


धार्मिक व पौराणिक कारण :

इस के कुछ धार्मिक व पौराणिक कारण हैं, तो चलिए उन्हें जान लेते हैं।


(1) समुद्र मंथन -

हिन्दू धर्म का एक बहुत बड़ा प्रसंग है, समुद्र मंथन, जिसमें बहुत से देवताओं व राक्षसों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था।समुद्र मंथन के दौरान कुल 14 दिव्य रत्न (मूल्यवान वस्तुएं) निकले थे। इनमें कालकूट (हलाहल) विष, कामधेनु गाय, उच्चैःश्रवा घोड़ा, ऐरावत हाथी, कौस्तुभ मणि, कल्पवृक्ष, रंभा अप्सरा, माता लक्ष्मी, वारुणी (मदिरा), चंद्रमा, पारिजात वृक्ष, पांचजन्य शंख, भगवान धन्वंतरि और अमृत कलश शामिल हैं।

इसमें सबसे पहले निकला था कालकूट (हलाहल) विष, जिसे कोई धारना नहीं करना चाहता था। उस प्रसंग का विस्तार इस प्रकार है।

  • विष पान- सावन मास में ही समुद्र मंथन हुआ था। संसार की रक्षा के लिए शिव जी ने हलाहल विष पिया और नीलकंठ कहलाए। विष की गर्मी शांत करने के लिए देवताओं ने उन पर जल चढ़ाया। तभी से शिवलिंग पर जल अभिषेक की परंपरा शुरू हुई। 
  • माता पार्वती का तप- पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए सावन (श्रावण) महीने में सोमवार का व्रत और निराहार रहकर कठोर नियमित तपस्या की थी। उन्होंने बालू (रेत) का शिवलिंग बनाकर उसकी विधिवत पूजा की और अपना यह व्रत पूरा किया था, जिससे प्रसन्न होकर भोलेनाथ ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया था।

एक और पौराणिक कथा इस प्रकार है, जिसके कारण शिव जी सावन माह पसंद है।


(2) ससुराल आगमन -

  • शिव का ससुराल आगमन- मान्यता है कि सावन में शिव जी अपने ससुराल आते हैं, जहां उनका स्वागत जलाभिषेक से होता है।


यह सब कारण हैं, कि क्यों शिव जी को सावन का महीना सर्वप्रिय है।

भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा हम सब पर सदैव बनी रहे!

हर हर महादेव!

Sunday, 9 August 2026

India's Heritage : Kanwar Yatra

सावन का पावन माह और कांवड़ यात्रा एक-दूसरे के पूरक हैं। पर क्या महत्व है सावन माह में कांवड़ यात्रा का, उसके क्या नियम हैं, किसने आरंभ की थी और भक्त को क्या लाभ मिलता है इस कठिन यात्रा को कर के?

आज India's Heritage segment में इसी पर चर्चा करते हैं। कांवड़ यात्रा महादेव के अनन्य भक्त निकालते हैं। यह बहुत ही कठिन यात्रा या कहें बेहद कठोर तप है।

कांवड़ यात्रा के दौरान यात्री कांवड़ (लकड़ी का पलड़ा) में कलश रखकर घर से निकलता है, फिर हरिद्वार या बैद्यनाथ धाम पहुंच कर गंगा मैय्या का जल कलश में भरकर महादेव पर जल अर्पित करता है, तत्पश्चात गंगा मैय्या से पुनः जल भरकर अपने घर की ओर आ जाते हैं और जिस शहर में रहते हैं, वहां के शिव मंदिर में जाकर लाया हुआ कुछ जल अर्पित कर देते हैं, शेष अपने घर पर रख लेते हैं। जब अपने शहर के मंदिर में जलाभिषेक करते हैं, उस समय उनके परिवार के सदस्य व बन्धु बांधव भी जुड़कर इस यात्रा का कुछ हिस्सा पुन्य अर्जित कर लेते हैं।

इस यात्रा को वह पैदल चलकर पूर्ण करता है, बहुत से कांवड़ यात्री चप्पल-जूते इत्यादि भी नहीं पहनते हैं, वहीं कुछ कांवड़िए लोग गाड़ियों में भरकर नाचते-गाते हुए भी जाते हैं…

कांवड़ यात्रा


I. कांवड़ यात्रा का कारण :

कांवड़ यात्रा भगवान शिव के प्रति अटूट भक्ति, तपस्या और मनोकामना पूर्ति के लिए की जाती है। इसमें भक्त पवित्र नदियों (विशेषकर गंगा) से जल लाकर सावन मास में शिवजी का जलाभिषेक करते हैं, जिससे शिव जी प्रसन्न होते हैं और भक्तों के कष्ट दूर होते हैं।


II. धार्मिक व पौराणिक मान्यताएं :

  • समुद्र मंथन- कथा है कि समुद्र मंथन के समय निकले हलाहल विष को शिवजी ने पिया था। उस विष की उष्णता/गर्मी को शांत करने के लिए देवताओं ने उनपर गंगाजल अर्पित किया था।
  • भगवान परशुराम- मान्यता है कि उन्होंने गढ़मुक्तेश्वर से गंगाजल लाकर उत्तर प्रदेश के बागपत (पुरा महादेव) में शिवजी का जलाभिषेक किया था।
  • लंकापति रावण- शिव भक्त रावण को भी पहला कांवड़िया माना जाता है, जो कावड़ में गंगाजल भरकर ले गया था। 
  • श्रवण कुमार- इन्होंने अपने अंधे माता-पिता को कावड़ में बैठाकर तीर्थ यात्रा कराई थी। 


III. यात्रा के मुख्य नियम :

इस यात्रा के कुछ मुख्य नियम भी हैं, जो इस प्रकार हैं।

  • शुचिता- यात्रा के दौरान पूरी तरह शाकाहारी भोजन, संयम और पवित्रता का पालन किया जाता है।
  • कठिन तप- अधिकांश भक्त नंगे पांव यात्रा करते हैं और कांवड़ को जमीन पर नहीं रखते।
  • शिव आराधना- पूरे मार्ग में 'बोल बम' के जयकारे गूंजते रहते हैं और भक्त शिवमय हो जाते हैं। 


IV. आध्यात्मिक व धार्मिक लाभ :

अंत मे यह भी जान लेते हैं कि इसका क्या लाभ है? जब इतना कठोर तप है तो इसके धार्मिक लाभ का भी विशेष महत्व है।

  • पापों से मुक्ति- ऐसा विश्वास है कि कांवड़ यात्रा के दौरान उठाए गए हर एक कदम से व्यक्ति के पिछले और वर्तमान जन्म के पाप कट जाते हैं। 
  • मनोकामना पूर्ति- भक्त अपनी किसी विशेष मन्नत या संकल्प के पूरा होने पर यह यात्रा करते हैं और जलाभिषेक के बाद उनकी इच्छाएं पूर्ण होती हैं। 
  • वंश-कुल का कल्याण- इस कठिन तपस्या से न केवल कांवड़िया बल्कि उसके पूरे परिवार और कुल की उन्नति व सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।


V. मानसिक व शारीरिक लाभ :

  • संयम और अनुशासन- लंबी पदयात्रा करने से शरीर में सहनशक्ति, मानसिक दृढ़ता और अनुशासन की भावना विकसित होती है।
  • नकारात्मकता का अंत- यात्रा के दौरान निरंतर शिव मंत्रों (ॐ नमः शिवाय, बोल बम) के जाप से मन एकाग्र और शांत रहता है।
तो बोलो, हर हर महादेव!

Friday, 7 August 2026

Short Story : कोशिश

कोशिश 


संजना तकिया पर मुंह छिपाए लेटी थी। 

नहीं किसी से नाराज़गी के कारण नहीं, बल्कि इसलिए कि वो जीवन की परिक्षाओं को दे देकर थकने लगी थी।

यह वही संजना थी, जो कभी किसी भी situation से थकी नहीं थी, हारी नहीं थी। 

हर कठिनाइयों को दृढ़ता के साथ हराती थी। पर आखिर वो भी कब तक परेशानियों का सुदृढ़ और प्रसन्नता से सामना करें।

उसके चेहरे पर छाई मायूसी को देख कर सब ने मान लिया, कि अब संजना वो संजना नहीं रही।

पर संजना अब भी वही थी, लेकिन अब उसे इंतजार था कि उसके अपने उसे थामें, जिसकी कोशिश उसने जिंदगी भर की, अब वो कोशिश उसके अपने करें।

वो कोशिश करें, उसके दिल को समझने की। क्या वो कोशिश करेंगे? क्या रिश्तों की अहमियत है लोगों में, आज भी? 

या आधुनिकता के नाम पर रिश्तों को यूं ही तिलांजलि दी जाती रहेगी...

Monday, 3 August 2026

Bhajan (Devotional Song) : सब कुछ ही है तेरे हाथ

आज सावन का पहला सोमवार है, शिव-शंभू को प्रसन्न करने का पर्व।

अपना सर्वस्व समर्पित करते हुए उनसे प्रार्थना है कि मझधार में फंसी हुई नाव को पार लगा दें।

वो सर्वशक्तिमान है, सर्वज्ञ हैं, उनकी कृपा से सब संभव है।

हे प्रभु, हम सब पर कृपादृष्टि बनाएं…

सब कुछ ही तेरे हाथ


 मैं तो मैं हूँ,

मैं क्या जानूं,

तू तो जाने सारी बात।

जानूं मैं इतना ही जानूं,

सब कुछ ही है तेरे हाथ।


मैं तो मैं हूँ, 

मैं क्या जानूं,

मेरी हस्ती तेरे हाथों,

तेरे हाथों हैं जज़्बात।

जानूं मैं इतना ही जानूं,

सब कुछ ही है तेरे हाथ। 


मैं तो मैं हूँ,

मैं क्या जानूं,

दुःख मेरे कटते तेरे हाथों,

सुख मुझे मिलता तेरे साथ।

जानूं मैं इतना ही जानूं,

सब कुछ ही है तेरे हाथ।


मैं तो मैं हूँ,

मैं क्या जानूं, 

मझधार में नाव जो अटकी,

उसको लगा दो तुम तो पार।

जानूं मैं इतना ही जानूं,

सब कुछ ही है तेरे हाथ। 



हर हर महादेव!

To listen to this song through YouTube, click here…

Sunday, 2 August 2026

Poem : Friendship - An Asset

Friendship is a precious asset. A true friend is someone who makes life worth it. Advay has inculcated and elaborated the same feeling in this poem of his. Let's enjoy and celebrate this friendship day…

Friendship - An Asset


For humans, friendship is the greatest quality.

It is capable enough, to surpass even the biggest polity.

Friendship is an institution which always stays strong.

Friends shape your future, be it right or wrong.


If this world's a garden, friendship is the flowers.

In which, the friends kept chattering for hours.

There were times when the weather was unfavorable.

Yet, the flowers bloomed, because the stem was stable. 


If this universe is a sea, friendship is the boat.

The only structure on which people can float.

Without it, the sea becomes a major threat.

But with it, we can use the sea as an asset.


If this earth is a sky, friendship is the sun.

It can be irritating, but is usually the source of fun.

Though we might think that the sun is always not required.

But without the sun, the earth can no longer be admired.


We celebrate it this day, with colourful wrist bands.

We give it to those, who were our helping hands.

Friendship are not the pillars, it is the entire building.

On an ordinary iron statue, it is the valuable gilding.


Happy Friendship Day!!