Friday, 10 November 2023

Article : धनतेरस में क्यों खरीदते (बर्तन, सोना और झाड़ू )

आज से सबसे बड़ा त्यौहार दीपावली का प्रारंभ हो रहा है। यह पंच दिवसीय त्यौहार धनतेरस से प्रारंभ होकर भाईदूज पर पूर्ण होता है। हालांकि इस बार यह त्यौहार छः दिन में पूर्ण होता है।

कार्तिक माह (पूर्णिमान्त) की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन समुद्र-मन्थन के समय भगवान धन्वन्तरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए इस तिथि को धनतेरस या धनत्रयोदशी के नाम से जाना जाता है। भारत सरकार ने धनतेरस को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है।  


धनतेरस में क्‍यों खरीदते (बर्तन, सोना-चांदी, झाड़ू) 


हम सब लोग, दीपावली में बर्तन, सोना-चांदी के आभूषण और झाड़ू सदियों से खरीदते आ रहे हैं। पर क्यों? आपने कभी सोचा? 

चलिए आज यही साझा करते हैं...


बर्तन खरीदने का कारण :

कहा जाता है कि समुद्र मंथन के दौरान जब भगवान धन्‍वं‍तरि प्रकट हुए तब उनके हाथ में पीतल का कलश था। ये दिन भगवान धन्‍वंतरि की पूजा करने का दिन है, उन्हें खुश करने का दिन होता है, इसलिए लोग उनकी कृपा का पात्र बनने के लिए इस दिन पीतल के बर्तन खरीदते थे। लेकिन समय के साथ पीतल के बर्तनों का चलन बंद सा हो गया और स्‍टील के बर्तन का चलन शुरू हो गया। इसलिए आज के समय में लोग बर्तन खरीदने की प्रथा तो निभाते हैं, लेकिन वे ज्‍यादातर स्‍टील के बर्तन खरीदते हैं।


क्‍यों खरीदा जाता है सोना-चांदी :

सोना-चांदी को धन माना जाता है और माता लक्ष्‍मी को धन की देवी कहा जाता है। मान्‍यता है कि धनतेरस के दिन अगर सोना-चांदी खरीदा जाए तो माता लक्ष्‍मी प्रसन्‍न होती हैं और घर में समृद्धि बनी रहती है। इसलिए लोग इस दिन सोने-चांदी के आभूषण खरीदते हैं‌।


झाड़ू खरीदने की वजह :

झाड़ू को लक्ष्‍मी का स्‍वरूप कहा जाता है क्‍योंकि ये घर की गंदगी को साफ करती है। गंदगी को दरिद्र माना गया है और जहां गंदगी होती है, वहां कभी लक्ष्‍मी नहीं रहतीं। इसलिए लोग धनतेरस के दिन झाडू लेकर आते हैं। दीपावली से एक दिन पहले यानी नरक चौदस को झाड़ू से घर की सफाई करते हैं और दरिद्र को दूर करते हैं। इसके बाद घर को बहुत सुंदर सा सजाकर माता लक्ष्‍मी के आगमन की तैयारी करते हैं और दीपावली के दिन विधिवत उनकी पूजा करते हैं।

तो चलिए आज के शुभ दिन में आप भी यह सब लाएं। माता लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि का आशीर्वाद प्राप्त करें 🙏🏻 

शुभ धनतेरस 🙏🏻

Thursday, 9 November 2023

Article: So called sophisticated

So called sophisticated 



Diwali आ रही है और इसके आते ही एक वर्ग बहुत ज्यादा सक्रिय हो जाता है। 

इस वर्ग में विभिन्न धर्मों के लोग शामिल होते हैं। बाकी धर्म के लोग शामिल हों तो कौन बड़ी बात है, जब इसमें बहुतायत से वो लोग भी शामिल होते हैं, जिस धर्म के लोगों का यह सबसे बड़ा त्यौहार है। 

बाकी धर्म के लोग दीपावली को मद्धम करें या धूमिल करें तो उन्हें भी नहीं करने देना चाहिए। पर उन हिन्दूओं को क्या समझायें जो अपने आपको बहुत ही hi-fi समझते हैं और हिन्दू त्यौहारों को कैसे मद्धम किया जाए, यही सोचते हैं। यह होते हैं so called sophisticated लोग...

जो बच्चों को हर साल यही समझाते हैं कि, पटाखे बिल्कुल ना चलाएं, वो हमारे पर्यावरण को बहुत नुक्सान पहुंचाते हैं, और इस मुहिम में वो भी शामिल हैं, जिन्होंने अपने बचपन में खूब पटाखे चलाए हैं। तब उसी खुशी की अहमियत जानते थे, पर अब सब भूल गए।

मुर्गी, मछली, बकरा, सबकी हड्डियां तक चबा जाने वालों को तब इन जानवरों पर इन्हें कोई दया नहीं आती है, लेकिन पटाखे चलाने से पशु-पक्षियों को परेशानी होती है, यह तुरन्त समझ आ जाता है। रोक जो लगानी बच्चों की खुशियों पर... 

AC चलाएं, एक अकेला कार चलाए, बारहों मासी गीज़र चले, तो उससे बढ़ता प्रदूषण भी नहीं दिखेगा, पर पटाखे... अरे बाप रे... एक चला नहीं कि पूरी दुनिया धुएं से भर जाएगी...

Cigarette smoking, use liquor and tobacco are injurious to health. शरीर के लिए हानिकारक होती है, यह चेतावनी लिखी रहती है, लेकिन इससे होता क्या है? तब भी साल भर यह सब धड़ल्ले से बिकता है और लोग इस्तेमाल करते हैं। जबकि cigarette smoking से तो passive smoker को भी बहुत ज्यादा नुकसान करती है। पर वो सब चल सकता है, पूरे साल भर... नहीं चल सकते हैं तो पटाखे, वो भी सिर्फ एक दिन, दीपावली में.... क्योंकि बाकी त्यौहारों में तो पटाखे कोई प्रदूषण नहीं फैलाते हैं।

Christmas, New year, किसी की शादी हो, मैच जीता हो, कोई भी बड़ा event हो तब... नहीं नहीं, तब पटाखे, पर्यावरण को कोई नुक्सान नहीं पहुंचाते हैं, उस समय तो वो खुशी और status के पर्याय हो जाते हैं। 

सोचिए, कितना भेदभाव है हमारे सबसे बड़े त्यौहार के साथ.... वो भी हमारे हिन्दू बाहुल्य देश में.. जब यहां ऐसा है तो बाकी जगह क्या होगा...

Ban हमेशा हिन्दुओं के त्यौहारों पर ही क्यों लगता है?

क्योंकि हम खुद उसके लिए तैयार रहते हैं.... 

क्यों?...

आखिर हम खुद क्यों अपने ही धर्म को मद्धम करते जा रहे हैं? और कब तक करेंगे?  क्या तब तक, जब तक सब खत्म ना हो जाए?...

कुछ सालों से हम इस topic पर लिख रहे हैं और तब तक लिखते रहेंगे, जब तक लोग, हिन्दुओं के त्यौहारों को मद्धम करते रहेंगे। फिर चाहे वो बात दीपावली की हो, होली की हो या अन्य त्यौहारों की हो... 

बंद कीजिए त्यौहारों को मद्धम करना, यह चंद दिन ही जिन्दगी है, बाकी दिन तो बस कट जाते हैं ऐसे ही...

जीवन खूबसूरत तभी तक है, जब तक उसमें जिंदगी शामिल है... और पूरे जीवन में बचपन सबसे ज्यादा जिंदगी से भरपूर रहता है। 

तो जीने दीजिए अपने बच्चों को जीवन के सबसे खूबसूरत जिंदगी के पल.. त्यौहारों को वैसे ही रहने दीजिए, जैसे हमारे बचपन में थे।

उत्साह, उमंग और मस्ती से भरे हुए... 

पर्यावरण रक्षा के लिए पेड़ लगाए, शहरों को कांक्रीट की दुनिया बनने से रोकें, बाकी जिन कारणों से पर्यावरण प्रदूषित होता है आपके सुख के लिए, उस पर रोक लगाएं...

हम सब हमेशा यही कहते हैं, हम इतना सब कुछ किसके लिए कर रहे हैं, बच्चों के लिए ही ना....

तो कीजिए बच्चों के लिए...

लाइए, वैसे ही खुशियों भरे पल त्यौहार के, जैसे हमने जीए थे बचपन में... तब हमारे मां-पापा के पास संसाधन कम थे, पर वो जानते थे कि बच्चों के लिए खुशियां कैसे लाई जाती है।

बहुत कुछ सीखा है, मां-पापा से, तो यह करना क्यों भूल गए? 

उत्साह उमंग और मस्ती से भरे हुए दीपावली के पंच दिवसीय त्यौहार को मनाएं...

ईश्वर सब पर सदैव अपनी कृपा दृष्टि बनाएं रखें 🙏🏻

Tuesday, 7 November 2023

Article: दीपावली में इस बार

दीपावली में इस बार  



हम हिन्दुओं का सबसे बड़ा त्यौहार है दीपावली... इसमें घरों के अलावा बाजारों में भी खूब रौनक रहती है। 

दीपावली की जगमगाहट को बरकरार रखने का बहुत बड़ा योगदान दुकानदारों का ही होता है।

हर साल, दुकानदार कुछ ऐसा लाने की कोशिश करते हैं कि so called sophisticated लोगों के प्रयासों द्वारा मद्धम पड़ती दीपावली फिर से जगमगा उठे। 

जिसमें पिछले कुछ सालों से green cracker लाकर, इन्होंने बच्चों के बचपन को सुरक्षित रखा है। वहीं इस साल दीपावली की सजावट और जगमगाहट को बढ़ाने के लिए कुछ नये और स्वदेशी product लाए हैं। तो चलिए जान लेते हैं उन special चीजों को.. 

पानी से जलने वाला दिया

इस बार पानी से जलने वाले दीयों से भी दिपावली रोशन होगी। पारंपरिक दीपक की तरह इन्हें जलाने के लिए तेल नहीं, पानी की जरूरत पड़ेगी। पानी की थोड़ी मात्रा से ही ये पूरी रात रोशन रह सकते हैं। यह उनके लिए भी अच्छा है, जो pollution के चलते दिया जलाना भी avoid करते हैं। उनके लिए तो यह वरदान स

इनके अलावा पानी में तैराने वाले दीपक भी आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं। ये सभी भारतीय product हैं। बाजार में चीनी सामान भी बिक रहा है, लेकिन अब वो लोगों को आकर्षित नहीं कर रहा है, उन्हें वो महंगा लग रहा है, और अगर सस्ता भी है तो भी लोग स्वदेशी product की तरफ रुझान दिखा रहे हैं।

जगमगाते दीयों के साथ झालर व लड़ियों की जुगलबंदी दीपावली पर घर को एक अलग ही रूप देती है। 

इस बार बाजार में made in india सामान की अधिक मांग है। Electronic market में 20 रुपये से 850 रुपये तक की Indian LED लड़ियां मौजूद हैं। 

इस बार सबसे ज्यादा धूम electric Indian lamp,  , दीपक, lazer lights, लड़ियां, लट्टू, लटकन और झूमर की है। 

व्यापारियों ने बताया कि कुछ साल से Chinese products के बहिष्कार की मुहिम, WhatsApp, Facebook, Instagram, etc. से चलती आ रही है। इसके चलते स्वदेशी products की बाजार में मांग बढ़ी है।


बाजार में LED लड़ियों की सैकड़ों varieties :

यदि तेज लाइट से परहेज है तो रंग-बिरंगी लडिय़ां भी विकल्प के रूप में मौजूद हैं। Electronic market में artificial flowers की लड़ियों से लेकर मिट्टी के छोटे-छोटे खिलौने भी आए हैं। दस मीटर से लेकर 100 मीटर तक की लड़ी उपलब्ध है, जिनके दाम 20 रुपये से शुरू होकर 600 रुपये तक है।

जो लोग बिजली के बिल को लेकर चिंतित रहते हैं, उनके लिए इस बार खास light LED लड़ी भी बाजार में आई है, जिनकी रोशनी तो ज्यादा है लेकिन बिजली की खपत कम है।


इनसे घर को सजाइए खास :

Electronic market में घर को सजाने के लिए बहुत कुछ है। बाजार में सुंदर decorative items और artificial flowers की लड़ियों के साथ ही घरों के द्वार को सजाने के लिए आकर्षक light, LED शुभ-लाभ, जय माता दी light आपका मन मोह लेगी। रंग-बिरंगी लाइट के showpiece भी इस बार बाजार में आए हैं, जिन्हें घर के किसी भी कोने में रखकर सजावट को पूरा किया जा सकता है। यह सब made in india होने के साथ किफायती भी हैं। इनकी कीमत 100 रुपये से 500 रुपये तक है। 

दुकानदारों का कहना है कि कोरोना काल के बाद बाजार में पहले सी तेजी आ रही है। 

वहीं जो दुकानदार गांवों के नज़दीक हैं, उनका कहना है कि इस बार दिवाली 15 दिन पहले आ गई है। लोग धान के सीजन व चुनाव में व्यस्त है। जिस कारण लोग market में नहीं पहुंच रह हैं।

खैर कहीं मंदी तो कहीं तेजी तो market में होती ही रहती है। 

लेकिन जो अनुकरणीय है, वो यह कि इस बार दीपावली में हम, मिटटी के दीए और स्वदेशी सामानों को खरीद कर ही दीपावली मनाएंगे। उससे होगा यह, कि देश का पैसा देश में रहेगा और हमारा देश का राजकोष बढ़ेगा।

राजकोष बढ़ेगा तो देश विकास करेगा और सुदृढ़ बनेगा। हमारे देश की जिम्मेदारी हम सब पर है, किसी एक पर नहीं...

जय हिन्द जय भारत 🇮🇳