Friday, 7 June 2024

Article : Congress vs BJP

इस बार का जो चुनाव परिणाम आया, उसको देखते हुए BJP वाले, उनके प्रचारक, उनके समर्थक, सभी थोड़ा सदमे में हैं, क्योंकि ऐसे परिणाम की किसी को भी कोई उम्मीद नहीं थी।

इन सबके साथ ही वो लोग भी दुखी हैं जो देश भक्त हैं या जिनके लिए देश सर्वोपरि है। 

पर आज कुछ ऐसा पता चला, जिससे हैरानी भी हुई और थोड़ी शांति भी मिली।

Congress vs BJP


जो कांग्रेस, भाजपा के बहुमत हासिल नहीं कर पाने से जश्न के रूप में बना रहा है…

आपको उसी कांग्रेस के 35 year के कार्यकाल के voting result के विषय में बताते हैं। 

विशेष रूप से पिछले तीन सालों की voting पर ज़रूर से ध्यान दीजिएगा। 

खैर बहरहाल आंकड़े की बात करते हैं।

हम 35 साल की बात इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि सिर्फ पिछले तीन साल की बात करते, तो सब कहते, 'अरे पप्पू की बात क्या करनी!'

लोकसभा चुनाव 2024 में 240 सीटें लाने पर भले ही विपक्ष बीजेपी के प्रदर्शन को खराब बता रहा हो लेकिन आंकड़े बताते हैं कि सत्‍ता में इतने लंबे period में रहने के बावजूद पिछले 43 साल में कांग्रेस पार्टी कभी भी अपने दम पर 240 सीटें नहीं ला पाई।

पिछले 35 साल में कई बार सत्‍ता में आने के बाद भी कांग्रेस 240 सीटें नहीं ला पाई थी। जितना इस बार बीजेपी, कम सीटें लाने के बावजूद है।

चलिए देख लेते हैं 35 year के आंकड़े।

साल 1989 से लेकर 2024 तक कांग्रेस पार्टी ने सर्वाधिक 232 सीटें हासिल की है।


1. Year 1989 :

नौवें आम चुनाव में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नेतृत्‍व में चुनाव लड़ी देश की सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस को सिर्फ 197 सीटें ही मिली थी।


2. Year 1991 :

राजीव गांधी की हत्‍या के बाद 1991 के हुए दसवें लोकसभा चुनाव में, कांग्रेस की लहर होने के बाद भी इस पार्टी को 521 में से सिर्फ 232 सीटें ही मिली थीं, जो बीजेपी की इस बार की 240 सीटों से भी 8 सीटें कम है। पर इतनी सीट ही कांग्रेस को अब तक की मिली सीटों में सर्वाधिक है।


3. Year 1996 :

इस चुनाव में कांग्रेस 140 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर आ गई थी, जबकि भाजपा को अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्‍व में 161 सीटें मिली थीं।


4. Year 1998 :

इसमें भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर 543 में से 182 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी। जबकि कांग्रेस इस बार भी 141 सीटों पर‍ सिमट गई।


5. Year 1999 :

इस चुनाव में बीजेपी को 182 सीटें मिलीं और कांग्रेस घटकर 114 पर पहुंच गई।


6. Year 2004 :

इस साल एक बार फिर कांग्रेस सत्‍ता में आई और सोनिया गांधी ने यूपीए गठबंधन कर सरकार बनाई. हालांकि इस बार भी कांग्रेस के पास सीटें सिर्फ 145 ही थीं।


7. Year 2009 :

इस साल भी कांग्रेस ही सत्‍ता में आई और 204 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। हालांकि यह आंकड़ा भी बीजेपी के 240 से काफी पीछे रहा।


8. Year 2014 :

इस साल भारतीय जनता पार्टी ने करिश्‍मा कर दिया और नरेंद्र मोदी की अगुवाई में हुए चुनाव में 282 सीटें बीजेपी के खाते में आईं, जबकि कांग्रेस बुरी तरह से लुढ़क गई और उसे मात्र 44 सीटें मिलीं।


9. Year 2019 :

यह साल BJP के लिए कमाल‌ का साल‌‌ था, मोदीजी की लहर पूर्ण भारत पर छाई हुई थी।

इसमें कांग्रेस 52 सीटों पर ही सिमट गई और मुख्‍य विपक्षी पार्टी भी बहुत मुश्किल से बन पाई, जबकि इस साल में बीजेपी ने record तोड़ 303 सीटें हासिल कीं।


10. Year 2024 :

इस साल के आंकड़े सभी के सामने हैं, जिससे बीजेपी को 240 सीटें मिली हैं, जबकि कांग्रेस के पास अपने दम पर 99 सीटें हैं।


BJP ने दम भरा था कि इस साल वो 400 पार होगी, उसको सोचते हुए 240 seats बहुत कम हैं, पर पिछले तीन सालों की कांग्रेस सरकार की voting की गणना की जाए तो 99 + 52 + 44 = 195…

मतलब कांग्रेस के तीन सालों का जोड़ भी 240 से बहुत पीछे है।

लोकसभा चुनाव परिणाम में भाजपा को उम्‍मीद से कम सीटें भले ही आई हैं, लेकिन स्‍पष्‍ट बहुमत मिलने से देश में एक बार फिर NDA की सरकार बन रही है (अर्थात BJP की गठबंधन सरकार)। पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्‍द ही, फिर से देश के अगले PM पद की शपथ लेने जा रहे हैं।

हालांकि चुनाव परिणामों पर मंथन और छींटाकशी अभी भी जारी है। विपक्षी पार्टियां बीजेपी, कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर अलग-अलग टिप्‍पणियां कर रही हैं।

यहां तक कि social media से लेकर आम चर्चाओं में भी बीजेपी के लिए third division pass, जैसे-तैसे नैया पार जैसे जुमले कहे जा रहे हैं, जबकि आंकड़ों को देखें तो हकीकत कुछ और ही है। 

कांग्रेस अध्‍यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनाव result के तुरंत बाद बीजेपी की 240 सीटों को लेकर मोदी की नैतिक हार, मोदी बनाम जनता की लड़ाई या मोदी के खिलाफ मेनडेट जैसे आरोप लगाए थे।

जबकि देश की सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा करने वाली कांग्रेस का पिछले 35 सालों का record बताता है कि पिछले 10 चुनावों में कांग्रेस कभी 240 सीट का आंकड़ा अपने दम पर नहीं छू पाई है।

भले ही कांग्रेस ने यूपीए गठबंधन के तहत सबसे ज्‍यादा समय तक देश में शासन किया है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि कांग्रेस पिछले 10 चुनावों में जनता की नजर में फिसड्डी ही साबित हुई है। जबकि बीजेपी ने 2014 से लेकर 2024 तक के चुनावों में अपने दम पर bumper सीटें जीती हैं।

यह serve, हम देशभक्तों के लिए सुखकारी है, फिर भी BJP से अनुरोध है कि वह बहुत अच्छे से मंथन करें, जिससे आगे उनकी जीत सदैव बहुमत से ही हो। 

साथ ही आगे आने वाले विधानसभा के चुनाव भी उनके लिए बड़ी जीत का पैगाम लेकर आए। 


फिर एक बार, मोदी सरकार 🇮🇳

Wednesday, 5 June 2024

Article : कहाँ चूके मोदी जी

कल का जो चुनाव परिणाम आया है, उसकी किसी को उम्मीद नहीं थी। ना BJP को, ना विपक्ष को और ना ही जनता को, यहाँ तक exit poll भी कुछ और कहानी कह रहे थे।

Exit poll के according BJP का पूर्ण बहुमत पक्का था, फिर कहाँ चूक गए मोदी जी?

कहाँ चूके मोदी जी


इतने अच्छे राजनीतिक विश्लेषकों के होने के बाद भी कहाँ चूक हो गई?

NDA ने तो पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया है, पर इस बार BJP को सत्तारूढ़ होने के लिए सहारा अवश्य लेना पड़ेगा...

देश में सर्वाधिक votes BJP को ही मिले हैं, इतने विपक्ष में सब मिलकर भी नहीं जुटा पाए। 

पर पूर्ण बहुमत नहीं जुटा पाने के कारण BJP खुशी के उस चरम तक नहीं पहुंच पाई, जो पिछले दो कार्यकाल में पहुंच रही थी।

और विपक्ष हार के भी ऐसे जश्न मना रहे हैं, जैसे सत्ता उन्हें मिल जाएगी। क्योंकि इस बार, उनका मुख्य उद्देश्य केवल BJP का बहुमत का विजय रथ रोकना था। और वो इस पर कुछ हद तक कामयाब भी रहे...

पूर्ण बहुमत नहीं मिलने के कारण कुछ बड़ी जीत कहीं गुम हो गई, जैसे दिल्ली और मध्य प्रदेश में, BJP को clean sweep मिला है, जो कि एक अच्छी खबर है।

पर चूक कहां गए? 

उत्तर प्रदेश में...

उत्तर प्रदेश seats के मामले में सबसे महत्वपूर्ण स्थान रहता है। इसकी लोकसभा चुनाव में पूरी 80 सीटें रहती हैं। उसके बाद महाराष्ट्र में 48 सीटें, बंगाल और आंध्र प्रदेश में 42 सीटें और बिहार में 40 सीटें।

इसका अर्थ है कि जब भी लोकसभा चुनाव हो, सबसे अधिक ध्यान उत्तरप्रदेश में केन्द्रित करना चाहिए, जो कि नहीं किया गया।

उत्तरप्रदेश को for granted ले लिया गया, या बहुत हल्के में ले लिया गया। यहाँ ना चुनाव प्रचार पर ध्यान दिया गया, और ना ही इस ओर ध्यान दिया गया कि जो public BJP को votes देना चाह रही है, उनके पास पर्ची भी पहुंची है कि नहीं?

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण करा दिया, पर उसके पूर्ण होने से पहले ही उद्घाटन कर दिया, दूसरा southern India को रिझाने के लिए मूर्ति south से लाकर लगवा दी। 

अयोध्या में राम मंदिर बनवाने का कार्य होते हुए भी यह BJP के कोई काम नहीं आ सका। अगर राममंदिर निर्माण के तुरंत बाद ही elections हो जाते तो, प्रभू श्री राम जी अवश्य ही विजय पताका फहरवा देते…

क्योंकि उस समय लोग राम मय थे। पर समय मिल जाने से लोगों को राममंदिर की अपूर्णता और काली मूर्ति खटकने लगी।

वैसे उनका तो क्या ही कहें, जिन्होंने निर्माण करने वालों को vote देने के बजाय विध्वंस करने वालों को vote दे दिया। 

अयोध्या और लक्षद्वीप में रहने वाले लोग तो एक बार सोचें जरुर, जिनके विकास के लिए किसी ने नहीं सोचा, उनके विषय में सोचने वालों को उन्होंने क्या सिला दिया?

दूसरा उत्तरप्रदेश को लेकर BJP over-confident थी, इसलिए वो अन्य राज्यों में ही अपना ध्यान केंद्रित करती रही...

नतीजा वहां से तो ज़्यादा कुछ मिला नहीं, यहाँ की पक्की seats भी हाथ से जाती रहीं... 

इसी तरह की छोटी-छोटी-सी नज़रंदाजी ही थी, जिसके कारण जो नहीं सोचा था, वो हो गया।

गनीमत इतनी है कि NDA के 292 votes आ गए हैं और एक बार फिर मोदी जी के नेतृत्व में देश आगे बढ़ेगा।

पर यह एक सबक है BJP के लिए, कि उन्हें public आंखें मूंद कर नहीं चुनेगी, भरोसा दिलाना पड़ेगा, कि वो ही देश को सुचारू रूप से चलाएंगे। 

और यह अगले साल होने वाले CM के election के लिए एक alarm है कि उन्हें अभी से सचेत हो जाना पड़ेगा, अन्यथा अभी तो कुछ seats ने सबक दिया है, उसमें कोताही बरती तो सीधा उत्तर प्रदेश हाथ से जाएगा।

अखिलेश यादव ने अपनी तरफ से कोशिश आरंभ कर दी है, जिसकी एक झलक दिखाई दे रही है, साथ ही BJP को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि कुछ समय पहले, बहुत लम्बे समयांतराल तक उत्तरप्रदेश पर सपा ही सत्तारूढ़ थी।  

जो प्रयासरत रहता है, फल भी उसे ही मिलता है।


फ़िर एक बार, मोदी सरकार 🙏🏻🇮🇳

Tuesday, 4 June 2024

Article : कौन संभालेगा देश

आज चुनाव का नतीज़ा निकलना है कि पूरे देश में किस political party का वर्चस्व है।

देश की जनता के लिए क्या priority है, उनकी निजी आवश्यकताएं या देश की सुरक्षा, विकास और संस्कृति? 

क्या फिर से BJP सत्तारढ़ होगी?

या INDIA alliance का दबदबा रहेगा?

कौन संभालेगा देश


अगर BJP जीतती है, जैसा कि रुझान से दिखाई भी दे रहा है, तो एक बार फिर देश मोदी जी के नेतृत्व में आगे बढ़ेगा। 

दो साल के अपने सफलतम कार्यकाल के पश्चात्, तीसरा सत्र उनका कैसा रहेगा?

हमारे देश के साथ-साथ, विदेशी देशों की भी नज़र चुनाव के नतीजों पर टिकी हुई है।

वह भी देख रहे हैं कि उन्हें भारत में निवेश करना है कि नहीं?

कल sensex बहुत तेजी के साथ खुला था और शेयर बाजार में एक बड़ी उछाल आई थी।

लेकिन आज के रूझान को देखते हुए, share market थोड़ा ठंडा हुआ है…

Share market के गर्म या ठंडे होने से क्या औचित्य है? तो आपको बता दें कि देश की अर्थव्यवस्था कैसी होगी, इसका पूरा link, share market के गर्म या ठंडे होने पर ही निर्भर करती है।

इसी से यह निर्धारित होता है कि विदेशी देश, कितना निवेश कर रहे हैं। और यह तो सीधा सा गणित है कि जिस देश में सबसे ज़्यादा निवेश होगा, वो देश उतना ही विकसित और उन्नत होगा। 

INDIA alliance के आने से एक बात सोचने वाली रहती है कि सत्ता कौन संभालेगा, क्योंकि जैसा कि saying है, 'Too many cooks spoil the broth…'

जब सब की सोच ही एक सी नहीं, तो देश किस सोच से चलेगा? 

लोकसभा चुनाव होने में दो states का महत्वपूर्ण स्थान है, पहला उत्तरप्रदेश और दूसरा महाराष्ट्र...

वो क्यों?

क्योंकि इन दोनों ही states में सबसे ज्यादा seats होती है। 

यह नेता लोग जो कि किसी भी परीक्षा के परिणामों को महत्वपूर्ण नहीं समझते हैं, उन्हें लोगों पर पड़ने वाले pressure की कोई चिंता नहीं रहती है।

वो आज के दिन सबसे ज़्यादा मानसिक तनाव में रहते हैं। पांच साल के कार्यकाल में उन्होंने क्या ऊपर-नीचे किया है? उन सब का परिणाम होता है, नतीजों का दिन...

पर साथ ही यह दिन यह भी निर्धारित करता है, आगे देश का कितना उत्थान होगा या पतन? 

एक देश पर सत्तारूढ़ हुई political party यह भी निर्धारित करती है कि उसका दूसरे देशों के साथ संबंध मधुर बनेंगे या खटास वाले?

इस तरह से देश का विकास, सुरक्षा और संस्कृति सब आज के नतीजे पर ही निर्धारित होगी। 

अब results तो वही आएंगे, जिस हिसाब से लोगों ने votes दिए हैं... 

बस ईश्वर से यही प्रार्थना है कि जो भी देश संभाले, वो देश का विकास करे ना कि अपना और अपने परिवार का..

उसके लिए देश की सुरक्षा प्रथम हो...

उसके लिए देश की सभ्यता और संस्कृति सर्वप्रिय हो...

बस वही बने जो देश को अखंड रख सके...