Monday, 19 July 2021

Memoirs : अंजाना

आज एक और विधा के साथ आप सबके समक्ष प्रस्तुत हुई हूँ ... संस्मरण (Memoirs)

यह संस्मरण हमारी जिंदगी का सबसे ‌खूबसूरत, सबसे डरावना, ईश्वर की कृपा और उपस्थिति को बताने वाला संस्मरण है। आज आप के साथ वही share कर रहे हैं।


अंजाना




बात उन दिनों की है, जब हमारी शादी हो चुकी थी, और बेटी भी। बेटी के होने पर पति ने कार ली थी।

बेटी साल भर की हो चुकी थी, वो बहुत ही शान्त बच्ची थी, कभी तंग नहीं करती थी।

शादी के बाद की, मेरे husband की दूसरी birthday थी।

नयी नयी शादी हुई थी, नयी ही कार थी, तो सोचा, पति को surprise देते हैं।

उन दिनों हम, दुर्गापुर (West Bengal का एक शहर) में रहते थे। सारे अपने बहुत दूर थे, तो जल्दी कोई आता जाता नहीं था।

सोचा, आस-पास कहीं का, कार से घूमने का program बनाया जाए।

तो Mukutmanipur जो कि वहाँ से निकट का scenic spot था। वहाँ का एक resort book कर लिया था।

दुर्गापुर ही छोटी जगह थी, Mukutmanipur उससे भी छोटी जगह थी।

वहाँ पहुंचने के लिए एक छोटा सा गांव पार करना था।

पति को बताया, तो वो चलने को तैयार हो गए, अपनों से दूर थे, तो अकेले रहते-रहते मन उकता जाता था। ऐसे में एक Nature walk program तरो-ताजा करने वाला था।

बस हम सुबह 5 बजे ही निकल लिए, कार में पानी और खाने-पीने के सामानों के साथ।

तीन दिन का हमारा program था।

पूरा रास्ता, हरियाली और सुंदरता से भरपूर था, बस एक कमी थी, वो एक गांव था, वो भी बंगाल का, तो हमारे स्वाद के अनुसार खाने- पीने की ज्यादा चीजें नहीं मिल रहीं थीं। पर हमने साथ में बहुत कुछ रखा था, तो problem भी नहीं हो रही थी।

हम लोग वहाँ पहुंच गए, resort बहुत ही खूबसूरत था।

उसी शाम से घूमने का प्रोग्राम था।

हम Dam, मंदिर, और पास के बाजार घूमने गए, टेराकोटा के बेहद बेहतरीन बहुत सस्ते सामान थे, वो लिए और लौट आए।

अगले दिन, हमें अयोध्या hills जाना था।

तब तक कोई hills नहीं देखे थे, तो अलग ही उत्साह था।

हम resort से नाश्ता कर के निकले।

जब निकले तो, पता चला, कुछ दूर पर ही hills है। 

हम चल दिए और बस फिर चलते रहे और चलते ही रहे, पर कोई hills नजर नहीं आ रहा था।

जिससे पूछते, hills कहाँ हैं?

बस थोड़ी दूर और, कहकर वो आगे चले जाते।

पर दूरी थी, कि खत्म होने का नाम नहीं ले रही थी।

सुबह से दोपहर हो चली, पर hills नहीं आया। अब तो एक-दो, लोग ही दिख रहे थे, और हमारा resort भी हमसे बहुत दूर हो गया था।

उस समय Google भी वहाँ काम नहीं कर रहा था।

अब बस हम आगे बढ़ते जा रहे थे। Hills को देखने की चाह में....

तभी कुछ लोग मिले, बोले, यहाँ कोई hills नहीं है, अयोध्या hills बस जगह का नाम भर है, और वो भी अब खण्डर हो चुकी है। सुनकर बड़ी हताशा हुई। 

Hills देखने की इच्छा पर वज्रपात हो चुका था। साथ ही इतना समय और मेहनत बर्बाद हो चुका था। उस समय क्रोध और दुःख के मिश्रित भाव से शरीर थकान से चूर होने लगा।

वो लोग बोले, आप लौट जाओ।

पर आपको लौटने के लिए बनते हुए पुल को cross करना होगा

पुल में बहुत बड़े-बड़े पत्थर पड़े थे। जिन पर car चलाना नामुमकिन लग रहा था।

लौटना था, पर लौटें कैसे? यह समझ नहीं आ रहा था। क्योंकि हमारी छोटी कार थी, और बस first gear पर चलना था, कार बंद होती और हम फंस जाते।

ईश्वर का नाम लेकर हम चल पड़े, जैसे-तैसे पुल पार किया।

उसके बाद तो लोग दिखना ही बन्द हो गये। दूर-दूर तक केवल रेतिला मैदान था। कहाँ जाना है, कैसे जाना है। कुछ पता नहीं था, बस एक अंदाजे से, हम बस बढ़ते जा रहे थे।

हम और आगे बढ़े, तो गाड़ी अचानक से रुक गई, उतर कर देखा तो पाया एक पत्थर से रुक गई थी।

पर अगर वहाँ, ना रुकती तो सामने इतनी बड़ी खाई थी, कि हम कार सहित उसमें समा जाते और किसी को हम कभी ना मिलते।

यह देखकर दिल दहल गया, शाम हो चुकी थी, खाने-पीने का सामान भी खत्म हो रहा था। रास्ता, लौटने-का दिख नहीं रहा था। हम पूरी तरह से भटक चुके थे।

सोच ही रहे थे कि क्या करें, तभी एक आदमी, Motorcycle के साथ सामने खड़ा था। वो लम्बा-चौड़ा, घनी मूंछों वाला, below middle class का पढ़ा-लिखा लग रहा था।

हमें देखकर बोला, मुसाफिर लगते हो, रास्ता भटक गए हो?

मेरे पीछे आओ, मंजिल पर पहुंचा दूंगा। 

रात हो गई, तो गांव पार करना मुश्किल हो जाएगा, क्योंकि यहाँ रात में बिजली नहीं रहती है, और गांव वालों का कोई भी जानवर गाड़ी के नीचे आ गया, तो यह लोग अनजानों को छोड़ते नहीं हैं, और आप बाहर के हो तो ना वो आपकी भाषा समझेंगे ना आप उनकी।

अनजान जगह, अंजाना इंसान! बहुत डर लग रहा था, ना जाने आगे क्या होगा?

पर हमारे पास, उसके पीछे जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं था।

वो आगे-आगे, हम पीछे-पीछे। हम जिस रास्ते से पहले आगे बढ़ रहे थे, यह रास्ता उसके बिल्कुल opposite था।

वो हमें main road तक ले आया, फिर वो बोला, मेरी बेटी बीमार है, इसलिए मुझे जल्दी घर जाना है, क्या अब आप अपने ठिकाने पहुंच जाएंगे? 

हमने उसे अपनी मदद करने के लिए, money offer किया, उसकी बेटी के treatment के लिए...

पर उसने इंकार कर दिया, वो बोला मैं आपको चाय पिलाने लें चलता, अगर मुझे जल्दी ना होती...

हमने उस देवदूत को बहुत सारा धन्यवाद दिया और अपने resort को चल दिए।

रात होने से पहले हम अपने resort में थे।

अगले दिन, हमने सारे घूमने के program cancel कर दिए और घर लौट आए।

वो adventurous सफ़र और वो देवदूत हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया। अगर वो अंजाना इंसान, उस दिन ना आता, तो शायद हम जीवित भी ना होते!!

पर जब ईश्वर आपके साथ हों तो वो ऐसे रूप में ही हमारे समक्ष प्रकट होते हैं, और हमारी रक्षा करते हैं।

बस यही सत्य है...

कितनी हो कठिन डगर

मुझको लगता नहीं है डर

है उनका आशीर्वाद तो

किस बात की फ़िक्र...


जय श्री चच्चा जी महाराज 🙏🏻🙏🏻


अगर आप के जीवन में भी ऐसी कोई घटना घटित हुई है, जिसने आप के मन में ईश्वर के प्रति अटूट आस्था बढ़ा दी हो तो, हम से share कीजिए... हम उसे blog में post करेंगे। 

Friday, 16 July 2021

Story of Life : जहाँ चाह, वहाँ राह

 जहाँ चाह, वहाँ राह 



कोरोना के कठिन दौर में राज के घर भी गाज गिर गई थी।

उसका पति महेश एक प्राइवेट कंपनी में helper की नौकरी कर रहा था।

कम्पनी से 12 से 15 हजार मिल जाते है, साथ ही राज, एक दर्जी से छोटी-मोटी सिलाई करने के काम लें आती, जैसे साड़ी में फाॅल लगाने, सूट fit करने और कुर्तों की तुरपाई का काम करके 6 से 8 हजार कमा लेती थी, जिससे घर ठीक-ठीक चल रहा था। 

पर कोरोना के कारण, प्राइवेट कंपनी बंद हो गई, तो महेश को बोल दिया गया कि अभी तुम्हारी छुट्टी, सब स्थिति सामान्य होने पर वापस बुला लेंगे। 

उधर दर्जी ने भी राज से कहा, बहन अभी कोई कपड़े नहीं आ रहे हैं तो कपड़े आने से बोलूंगा।

दोनों पति-पत्नी घर बैठ गये। अपनी जमा-पूंजी से काम चला रहे थे।

पर धीरे-धीरे जमा-पूंजी बहुत कम होने लगी, घर चलना दूभर होने लगा। 

महेश ने अपने परिवार से मदद मांगी, शुरू में तो परिवार वालों ने पैसे दिए, पर कुछ दिनों बाद उन्होंने भी पैसे की तंगी बता कर हाथ खींच लिए।

राज, महेश से बोली, कब तक दूसरों के सहारे जीवन काटोगे? मुझे तो अब शर्म आने लगी है।

अपनों से कैसी शर्म?

कुछ काम शुरू कर दो।

तुम करो, मुझे कोई शर्म नहीं है, अपनों से मांगने में।

राज बहुत खुद्दार थी, उसे यूं परिवार से पैसे मांगना अच्छा नहीं लगता था।

वो इसी उधेड़बुन में रहती कि कोई काम शुरू करे और सम्मान की जिंदगी जी सके।

एक दिन राज की बेटी, अपने दोस्तों के साथ उनके mobile में पुराने कपड़ों से आसनी, दरी आदि बनाना देख रही थी।

तभी राज, उसे घर बुलाने आई। वो भी उस video को देखने रुक गई।

अगले दिन वो दर्जी के पास गयी तो वो बोला बहन, अभी कपड़े आने तो शुरू हुए हैं, पर बहुत कम ही आ रहें हैं, उनसे मेरा ही खर्च नहीं चल रहा है तो तुम्हें क्या दूंगा।

वो बोली ठीक है जब ज्यादा काम आए तो बुला लेना।

अभी तो मैं यह पूछने आई हूँ कि तुम कपड़ों की कतरनों का क्या करते हो?

कतरनों का कुछ नहीं करता, ज्यादातर फेंक दिया करता हूँ। क्यों पूछ रही हो?

भैया, वो मुझे दे दोगे?

बिल्कुल, ले जाओ।

उसने उसे एक छोटी बोरी भरकर कतरनें दे दी।

राज उन्हें घर ले आती और उसने बड़ी मेहनत से 4 दिन में, एक पूजा की आसनी और दरी बना ली।

वो फिर दर्जी के पास उसे ले गयी।

दर्जी ने पूछा, यह क्या है?

वो बोली, कतरनों से बनाया है।

दर्जी अवाक रह गया। इतना सुन्दर! तुम कमाल हो बहन।

भैया मेरा एक काम करोगे?

क्या?

इसे अपनी दुकान पर लगा लो, और कोई खरीदे तो बेच देना। और साथ ही कोई पुराने कपड़ों से इसे बनाने का order दें तो ले लेना। 

मेरी बड़ी मदद हो जाएगी। तुम्हारे एक समान को बेचने या order लेने पर मैं 10% तुम्हें दे दूंगी।

दर्जी ने खुशी-खुशी उसे अपनी दुकान में टांग लिया।

चंद दिनों में उसके बनाए समान बिकने लगे और उसके order भी आने लगे।

घर में थोड़ा पैसा आने लगा, जिससे उसका घर चलने लगा। अब उसे किसी से पैसे मांगने की जरूरत खत्म हो गई।

जो जिंदगी में हार नहीं मानता है, उसे जिन्दगी में जीतने की राह मिल ही जाती है।

यह एक सच्ची कहानी है, इस कहानी में जो फोटो है, वो उसके द्वारा बनाई पूजा की आसनी हैं। अगर आप को पसंद आए तो आप भी खरीद सकते हैं, किसी खुद्दार का जीवन संवर जाएगा।

Thursday, 15 July 2021

Tips : Pressure cooker's whistle problem

 क्या आप भी परेशान हैं कि pressure cooker, चाहे जब ठीक से whistle नहीं देता है।

यह एक common problem हो गई है, आए दिन सबको ही यह problem होती है।

Viewers की demand है कि इस problem को solve करने की भी tip बता दीजिए।

बिल्कुल, जब आप Shades of Life से जुड़े हैं तो, आप problem में कैसे रह सकते हैं?

तो चलिए आज इसी का solution, share कर देते हैं। 

 Pressure cooker's whistle problem 



  1. आप pressure cooker की उस जगह(vent pipe) को समय-समय पर clean करते रहें, जहाँ पर whistle लगाई जाती है।
  2. इसके लिए, आप whistle निकाल कर vent pipe को tap के नीचे लगाकर, tap तेज़ खोल दीजिए।  water के तेज़ pressure से वो clean हो जाएगा।
  3. Vent pipe अच्छे से clean हो जाएगा, तो सभी छेदों से पानी निकलने लगेगा। 
  4. Pressure cooker के lid का orientation, body के orientation से मिलना चाहिए। 
  5. इस orientation को check करने के लिए, अगर आप के पास Haskins का या उसके जैसी design का pressure cooker है तो, ध्यान रखिएगा कि lid का handle, safety valve के ठीक ऊपर होना चाहिए।
  6. Handle अगर टेढ़ा है तो, whistle नहीं आएगी। उसको आप set कर के सीधा कर लीजिए।
  7. Gasket, slightly tight होनी चाहिए, जिससे proper pressure develop हो सके।
  8. इसके लिए समय-समय पर gasket change करते रहना चाहिए। 
  9. Safety valve का विशेष ध्यान रखना चाहिए। Pressure cooker की safety के लिए यह must होता है। 
  10. जब भी safety valve change करना हो, company का ही लगवाएं, local बिल्कुल नहीं लगवाएं।
  11. इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखिए, तो आप का pressure cooker हमेशा whistle देगा।
  12. अगर यह सब ठीक है, और फिर भी pressure cooker, whistle नहीं दे रहा है तो major problems हो सकती है, आप उसे repairing center पर दिखवा लीजिए।