Tuesday, 14 August 2018

Poem : भारत (The unity)

भारत  (The unity)



देश को आज़ाद कराने में
कोई एक दो का हाथ नहीं
वो भी संभव ना हो पाता
गर मिल जाते सब साथ नहीं

धरा को मुक्त करा कर के
उन्होंने सबको दिखलाया
संभव सबकुछ हो सकता है
पाठ एकता का सिखलाया

आज हमें भी भारत को
फिर मिलकर एक बनाना है
आज़ादी के मतवालों का
हर सपना सच कर जाना है

हर जात-धर्म के झगड़े से
देश को ऊँचा उठाना है
था सर्वश्रेष्ठ, है सर्वश्रेष्ठ
पूरे विश्व को बतलाना है


कल मैं स्वतंत्रता दिवस पर एक लेख post करूंगी। उसे भी अवश्य पढ़ें और अपने विचार एवं भाव व्यक्त करें।

Monday, 13 August 2018

Story Of Life : रत्ना भाग -२


रत्ना और राजन की किस तरह मुलाकात हुई, और वो उसे घर, अपने दादा जी के पास ले गयी अब आगे.....

रत्ना भाग -२ 


पर राजन की हालत उसके एहसान के आगे दादा जी कुछ नहीं बोले।
राजन बहुत ही ज़िंदादिल इंसान था। पूरे घर से घुलने-मिलने में उसे ज्यादा समय नहीं लगा। वो भी बड़ा ही निडर, जोशीला था, तो उसकी सबसे ज्यादा तो दादा जी और रत्ना से ही पटने लगी।
खुशवंत जी का अपना बेटा राजीव S.P. था। और एक दंगे में Prime minister  अरुण देव और public की जान बचाते हुए देश पर शहीद हो चुका था। उनके खेतों को संभालने वाला कोई नहीं था, और वो बूढ़े भी हो चुके थे।
राजन उन्हें बहुत पसंद आने लगा था। राजन और रत्ना भी दिन भर साथ रहा करते थे। अत: उन्होंने राजन और रत्ना का विवाह तय कर दिया।
रत्ना और राजन दोनों बहुत खुश थे।

विवाह की सारी तैयारी शुरू हो गयी। रत्ना के हाथों में मेहंदी लग गयी थी।

जब P.M. अरुण देव जी को पता चला की S.P. राजीव की बेटी की शादी का invitation आया है, तो उन्होंने आने को हां कर दिया।
रत्ना को जब पता चला कि P.M. अरुण देव  जी भी आ रहे हैं, तो वो इसकी खुशखबरी देने राजन के पास चली गयी।
वो guest house जहां राजन के रुकने की व्यवस्था की गयी थी, वहाँ पंहुची ही थी, कि उसे.....


जहाँ राजन रुका हुआ था, वहाँ क्या हुआ.... जानते हैं रत्ना (भाग -3) में 

Sunday, 12 August 2018

Story Of Life : रत्ना

रत्ना


रत्ना retired  मेजर खुशवंत सिंह की लाली पोती थी। चुलबुली, मनमोहिनी मासूम सी रत्ना को देशभक्ति तो दादा जी से विरासत में मिली थी। दादा जी की तरह रत्ना में भी देश के लिए मर मिटने का जज्बा कूट-कूट के भरा था और उन्हीं की तरह वो भी बहुत ही जोशीली और हिम्मत वाली थी।
एक दिन अपनी दोस्तों के साथ वो पहड़ियों में घूमने गयी थी, सभी photo ले रहीं थी
जोश जोश में रत्ना ज्यादा ही ऊंची पहाड़ियों की तरफ चली गयी। वो selfy ले रही थी, कि अचानक उसका पैर imbalance हो गया, और वो नीचे गिरने लगी, उसकी सारी दोस्तें चिल्लाने लगीं। तभी एक मजबूत हाथों ने रत्ना को थाम लिया।
वो एक गठीला नौजवान था, बिखरे हुए बाल, सूखे होंठ और फटे हुए कपड़ों में।
रत्ना ने उसको धन्यवाद दिया। और पूछा वो कौन है? यहाँ इस हालत में कैसे है?
जी, आप ने तो सवालों कि बौछार ही कर दी है। मैं राजन हूँ। मुसाफिर हूँ, थोड़ी दूर से आया हूँ। मेरा सारा समान किसी ने चुरा लिया है, दो दिन से कुछ खाने को नहीं मिला है।
रत्ना को उसकी बातें सुन कर तरस आ गया, फिर राजन ने उसकी जान भी बचाई थी, तो वो अपने आपको, राजन से साथ चलने को कहने से नहीं रोक पायी। राजन भी तुरंत मान गया, वैसे भी उसके पास कोई ठिकाना भी तो नहीं था।
रत्ना उसे अपने साथ घर ले गयी, और उसने दादा जी को बताया, कि कैसे राजन ने उसकी जान बचाई। और वो भी बताया, जो आपबीती राजन ने उसे बताई थी। फिर वो दादा जी से बोली, दादा जी मैंने ठीक किया ना, इन्हें अपने साथ ला कर?
दादा जी को अनजाने व्यक्ति पर एतबार नहीं था,....


क्या दादा जी रत्ना के इस तरह से राजन को घर ले आने से क्रोध से आग बबूला हो गए या उन्हे ठीक लगा?जानने के लिए पढ़ें रत्ना (भाग -2)