Wednesday, 21 August 2019

Article : ईश्वर हमारी नहीं सुनते


ईश्वर हमारी नहीं सुनते  


कितनी ही बार हमको शिकायत होती है, ईश्वर हमारी नहीं सुनते हैं। ना जाने लोग ऐसा क्या करते हैं, कि ईश्वर इसकी, उसकी सब की सुन लेते हैं। पर जब हमारी बारी आती है, तब सुनते ही नहीं हैं।

पर आप ने कभी ठीक से ध्यान दिया है, ईश्वर सबकी सुनते हैं।क्योंकि उनके हम सभी बच्चे हैं, और कौन ऐसे माता-पिता होते हैं, जो बच्चों की नहीं सुनते हैं?

अब आप कहेंगे, आपकी सुनते होंगे, हमारी तो नहीं सुनते हैं। तो जनाब! गलती उनके देने में नहीं है, गलती तो आपके मांगने में है। 

क्या मतलब?

तो थोड़ा सब्र के साथ पूरा article पढ़ें, और साथ ही साथ ये भी सोचते चलिएगा, ऐसा ही होता है ना?

जब हम exam देने जाते हैं, तो ईश्वर से क्या कामना करते हैं?

हे ईश्वर! सब easy दीजिएगा, या वही exam में आए, जो हम पढ़ कर आए हैं, या exam दे चुके होंगे तो मनाएंगे, easy marking हो।

क्यों यही मांगते हैं ना ईश्वर से?

और कितनी बार, हमारा सोचा सच भी हो जाता है। पर हमे success तब भी नहीं मिलती है।

पता है क्यों?

क्योंकि हमने ये तो ईश्वर से मांगा ही नहीं था, कि exam में top करें।

क्या फ़र्क पड़ता है, exam easy आए या tough, पढ़ा आए या बिना पढ़ा, marking easy हो या tough। फ़र्क पड़ता है, कि आप सफल हुए या असफल। तो सफल होने की ही प्रार्थना करें।

कई दिनों से बारिश हो रही होगी, तो हम ये मनाएंगे, जिस दिन हमारा काम है, उस दिन बारिश ना हो। जबकि हमारा काम, सिर्फ बारिश रुकने से सिद्ध नहीं होगा। बल्कि कोई भी काम पूर्ण होने के पीछे कई factors शामिल होते हैं। तो ये मनाइए, कि मेरा ये काम पूर्ण हो, तब सारे factors सही होंगे।

इसी तरह के और भी कई उदाहरण मिलेंगे, आपको जिंदगी में।

शायद आपने सती सावित्री की कहानी सुनी होगी? जब यमराज सत्यवान को ले जा रहे थे, तब उन्होंने सावित्री से कहा था, सत्यवान का जीवन छोड़ कर कुछ भी मांग लो। तब सावित्री ने कहा, मेरे सास ससुर के पोते उनके राजमहल में खेलें।

यमराज के तथास्तु बोलते ही, सावित्री के ससुर रंक से राजा बन गए, क्योंकि राजमहल तो तब होगा, जब ससुर राजा होंगे। और यमराज को सत्यवान को जीवित भी करना पड़ा, क्योंकि पोते तो तब होते, जब पुत्र जीवित होता। और इस तरह से सावित्री, यमराज से अपने पति का जीवन पुनः प्राप्त कर सकी।

कहने का तात्पर्य ये है, कि मांगते समय सही तो मांगिए, जिससे जब ईश्वर आपको आपकी कामना के अनुरूप दें, तो आप पूरी तरह संतुष्ट हो सकें।

हम अपने बच्चों द्वारा मांगें जाने पर सब कुछ नहीं दे देते हैं, वही देते हैं, जो उनके लिए उचित हो। उसी तरह हमारी कामना के पश्चात, ईश्वर ने हमें जो दिया, उसका धन्यवाद करें। क्योंकि ईश्वर हमे सदैव वही देते हैं, जो हमारे लिए उचित है।

Tuesday, 20 August 2019

Kids Story : Advay the Hero: Matches

Advay the hero : Matches


Advay जिस apartment में रहता था, उस apartment और बगल वाले apartment, दोनों के बीच में एक ही playground था। अतः दोनों apartment के बच्चों को उसे share करना पड़ता था।

जब जहाँ के बच्चे पहले आते, वही वहाँ खेलते थे। Advay की team के बच्चे छोटे थे, इसलिए आए दिन वो ही playground में नहीं खेल पाते थे।

इससे advay की team bore होने लगी। एक दिन advay बहुत 
उदास बैठा था। उसकी mumma ने पूछा, क्या हुआ? आज बड़े चुप-चुप बैठे हो, खेलने भी नहीं गए।

Advay: Mumma मेरी पूरी team बोर हो रही है।

Mumma: क्यों?

Advay: Playground में दूसरे apartment के बच्चे खेलते हैं, तो हम नहीं खेल पाते हैं।

Mumma: तो तुम लोग उनके साथ ही खेल लो।

Advay: साथ में कैसे mumma? वो तो दूसरे apartment के हैं।
Mumma: तो क्या हो गया? सब साथ में खेलोगे, तो ज्यादा मज़ा आएगा। पर उसके लिए तुम्हें interesting game सोचने होंगे।

Advay: अच्छा वो कैसे होगा?

Mumma: तुम उन लोगों के साथ matches plan करो।

Advay: हम लोग छोटे हैं, हार जाएंगे, advay दुखी होते हुए बोला।

Mumma: Matches age से नहीं practices से जीतते हैं, अगर तुम्हारी तरह सचिन भी सोचता तो, उसका कभी इतना नाम ना होता। फिर खेल है, कोई जीतेगा, कोई हारेगा। पर मज़ा तो आएगा। Advay को idea जंच गया।

Advay: Love you mumma कह कर वो खेलने चला गया।

उसने अपने दोस्तों से दूसरे apartment वालों के साथ cricket match रखने की बात की।

सब बोले हम हार जाएंगे। तो mumma ने जो बात बोली थी, advay ने अपने दोस्तों से कह दी, खेल है, कोई जीतेगा, कोई हारेगा। पर मज़ा तो आएगा। पर हम जीत कर दिखाएंगे, बहुत practice करेंगे, हम सचिन बन कर दिखाएंगे।

उन्होंने जब दूसरे apartment से बात की, वो तुरंत मान गए, उन्हें पता था, वही जीतेंगे।

Advay बोला,week बाद match होगा, हम अपने mumma-papa को भी match देखने बुलाएँगे।

बात final हो गयी। Advay की टीम ने बहुत मेहनत से practice शुरू कर दी। जबकि दूसरे apartment के बच्चे बिल्कुल भी practice नहीं कर रहे थे, वो जानते थे कि बिना practice के भी वही जीतेंगे।

आखिर वो दिन भी आ गया......





Monday, 19 August 2019

Recipe: Chiwda Vada

Ain’t you bored of the regular evening snacks? So, today I’m sharing with you a recipe of chiwda. No, it’s not poha! It’s a new innovative recipe, with a delicate taste. it is soft from inside and crispy from outside. Hence, presenting

Chiwda Vada



Ingredients (for 16 small vade):
  • Thin flattened rice {maheen chiwda/poha} 50gm
  • Boiled potato 4 small-sized
  • Salt to taste
  • Coriander leaves 10gm
  • Green chilies 2-3
  • Clarified butter {Ghee} 2tbsp


Method:
  1. Clean and wash chiwda, thoroughly. Let it stand for 15 minutes.
  2. Mash the potatoes.
  3. Add finely chopped coriander leaves, chilies, salt and chiwda. Mix it well.
  4. Now, make small balls out of this mixture. Flatten them to give a vada shape.
  5. Heat a frying pan and add ghee to it.
  6. Place the vade onto the pan and shallow fry them from both the sides till they become golden.
Your Chiwda Vade are ready. You may serve it with tomato ketchup, mint chutney, etc.


Note:- You may also add chopped onion in the 3rd step. It would make the vade juicy.