Monday, 26 December 2022

Story of Life: बंटवारा प्रेम का

आज एक ऐसी कहानी post कर रहे हैं, जिससे हर एक लड़की जुड़ी हुई है। 

बंटवारा प्रेम का 



राजशेखर व मालती अपने भरे-पूरे परिवार के साथ रह रहे थे। शादी के दो साल बीत चुके थे। मालती मां बनने वाली थी।

दोनों परिवारों में रौनक छा गई। बच्चे के आने की जितनी तैयारी उसके दादा-दादी कर रहे थे, उतनी ही नाना-नानी भी।

जब बच्चा अपनी मां के पेट में था, तब से ही राजशेखर को तो मालती के लिए कुछ भी सोचना भी नहीं पड़ता था, क्योंकि  सब उसका बहुत ध्यान रखते थे। दोनों ही घरों से मालती के लिए खूब फल, दूध, मेवा मिठाई, सबकी भरमार थी। 

जब मालती को इतना लाड़ प्यार मिलता था, तो अड़ोसी-पड़ोसी सभी यही कहा करते थे, जरुर से इन लोगों ने पता कर लिया है कि बेटा होने वाला है। तभी सब तिमारदारी में पागल हुए जा रहे हैं।

बाकी इतना भी क्या बांवरा होना कि बहू को सिर पर चढ़ लो, ऐसा भी कौन सा बिरला काम कर रही है। सारी बहुएं ही, अपने सास-ससुर को वारिस देती हैं। 

सास, मालती पर वारी जाती और कहतीं, तुम सब जलनखोर हो। जब बहू, वारिस दे रही हो, तब तो सबसे ज्यादा बहू का ध्यान रखना ही चाहिए।

एक तो इसलिए कि बहू की कोख में हमारे खानदान का भविष्य होता है, दूसरा उस भविष्य को संवारने के लिए मां का स्वस्थ रहना भी जरूरी होता है।

कोई मालती की माँ से कहता, आप क्यों बांवरी हुई जा रही हैं, कौन आपके खानदान का वारिस आ रहा है तो मालती की माँ, गुस्से से आग-बबूला होती हुई कहती कि, जब बेटी मेरी हैं, तो उसका बच्चा पराया कैसे हो गया, भला... 

इन ही सब में नौ महीने कब निकल गए, पता ही नहीं चला और वो दिन आ गया, जिसका सबको बेसब्री से इंतजार था।

दोनों ही परिवार, एक ही शहर में थे, अतः जब मालती अस्पताल में पहुंचीं तो दोनों ही तरफ से सब पहुंचे हुए थे।

सबको पहले से आया देखकर, मालती और राजशेखर प्रसन्न हो गए। 

बच्चे के रूदन की आवाज सुनाई दी तो, सब एक दूसरे को बधाई देने लगे। जब नर्स बच्चे को लेकर सबके सामने पहुंची तो....
 

Sunday, 25 December 2022

India's Heritage : तुलसी पूजन दिवस

तुलसी पूजन दिवस 


सदियों से हम 25 December में Christmas festival को celebrate करते आ रहे हैं।

इसके पीछे बहुत बड़ा कारण, अंग्रेजों का हम पर शासन करना और उनके जाने के बाद भी उन का प्रभाव हम पर रहना है।

पर 2014 से भारत में विदधमान बहुत से साधु-संतों ने यह विचार विमर्श किया कि, भारत में भारतीय संस्कृति को बढ़ावा मिलना चाहिए।

एक ऐसी संस्कृति जो मानवता की प्रतीक है, जो सृजनात्मकता की द्योतक है। एक ऐसी संस्कृति, जहाँ प्रकृति ही सर्वश्रेष्ठ है, परमात्मा है, परमेश्वर है। हमारी संस्कृति जो भारतीयता की प्रतीक है।

अब यह सोचा गया कि इस दिन में ऐसा क्या विशेष किया जाए, जो सर्वसम्मत हों। जिसे अमीर, गरीब हर कोई श्रृद्धा विश्वास से व आसानी से कर सके। 

तब यह विचार किया गया कि, हिन्दू धर्म में तुलसी के पौधे का विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है कि जिन घरों में तुलसी की पूजा नियमित होती है, उस घर में मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु का वास होता है, उनकी विशेष कृपा बनी रहती है और उस घर में कभी किसी चीज की कमी नहीं होती है। 

अतः तुलसी के पौधे की महत्ता को मान देते हुए यह निर्धारित किया कि 25 December को तुलसी पूजन दिवस के रूप में स्थापित किया जाए। 

आइए जानते हैं तुलसी पूजन पर कैसे करें पूजा और क्या है उसका महत्व? 

तुलसी पूजा का महत्व

हिंदू धर्म में तुलसी पूजा का कितना महत्व है, यह इसी बात से सिद्ध होता है कि कोई भी शुभ कार्य बिना तुलसी पूजा के अधूरा माना जाता है। 

आप सोच रहे होंगे कि, तुलसी पूजा? वो तो हर बार नहीं की जाती है... 

की जाती है...

बताते हैं कैसे...

कोई भी शुभ कार्य में सत्यनारायण कथा अवश्य कराई जाती है... 

सत्यनारायण कथा में किसकी कथा की जाती है? इस सृष्टि के पालनकर्ता,  भगवान विष्णु जी की।

तुलसी भगवान विष्णु को अतिप्रिय हैं,  इसलिए भगवान विष्णु को भोग लगाते समय तुलसी पत्ते का प्रयोग अवश्य किया जाता है। आप छप्पन भोग तैयार करा लीजिए, पर जब तक उसमें तुलसी का पत्ता नहीं होगा, भोग अधूरा होगा।

तो करते हैं ना तुलसी पूजा..

यह कहा जाता है कि जिन घरों में तुलसी का पौधा होता है, वहां कभी भी नकारात्मक ऊर्जा हावी नहीं होती है. 

तुलसी पूजा विधि

तुलसी पूजन दिवस यानी 25 दिसंबर के दिन सुबह स्नान करने के बाद तुलसी के पौधे को जल अर्पित करें, इसके बाद इन्हें नारंगी सिंदूर लगांए, चुनरी ओढ़ाकर विधि विधान से पूजा करें। 

इस दिन शाम को तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाएं और तुलसी की माला से जाप करें।  ऐसी मान्यता है कि जो लोग सच्चे मन से तुलसी जी की पूजा करते हैं उनके ऊपर मां लक्ष्मी की विशेष कृपा बरसती है और कभी रुपए पैसे की कमी नहीं होती है। 

कोई भी शुभ कार्य किया जाए, तो उसका एक विशेष स्थान भी होता है। अगर आप चाहते हैं कि आप के घर में सकारात्मक ऊर्जा रहे, तो उसके लिए आवश्यक है कि आप तुलसी जी का पौधा सही दिशा में रखें।

तो चलिए सही दिशा भी जान लेते हैं, तुलसा जी के पौधे को रखने की।

इस दिशा में लगाएं तुलसी का पौधा

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के तुलसी का पौधा घर के उत्तर-पूर्व या पूर्व दिशा में लगाना चाहिए. इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।

तुलसी के पौधे की नियमित देखभाल करनी चाहिए। इस बात का विशेष ख्याल रखें की तुलसी का पौधा सूखे नहीं, क्योंकि तुलसी का पौधा सूखना दुर्भाग्य का सूचक है।

पर शीत ऋतु और धूप के अभाव में पौधे के सूखने की प्रक्रिया बढ़ जाती है। आप के घर, शीत ऋतु और धूप के अभाव के कारण यदि तुलसी का पौधा सूख रहा है, और अगर संभव हो सके तो उसे धूप के लिए कुछ दिन किसी दूसरे के निवास स्थान पर पहुंचा दें। जिससे पौधा सूखने से बच जाए।

यदि ऐसा संभव ना हो सके और पौधा सूख जाए, तो विचार ना करें। कभी भी निर्दोष होने पर आप पाप के भागी नहीं बनेंगे। 

तुलसी पूजा के लाभ

यदि आप नौकरी या कारोबार को लेकर परेशान हैं तो तुलसी पूजन के दिन पीले रंग के कपड़े में तुलसी का पौधा बांधकर उसे दुकान या ऑफिस में रख दें। यदि पौधा ना रख सकें तो पीले कपड़े में दो-चार पत्ते भी प्रतिदिन रखने का नियम बना सकते हैं, जिसमें दूसरे दिन पत्तों को बदलते समय, पहले वाले पत्तों को प्रसाद के रूप में ग्रहण कर लें। ऐसा करने से आपके नौकरी व कारोबार में तरक्की मिलना शुरू हो जाती है। पर ऐसा कुछ तभी करें, जब आप पूर्ण विश्वास के साथ कर सकें। क्योंकि ईश्वर प्राप्ति का सबसे सरल और सटीक उपाय, ईश्वर पर श्रृद्धा और विश्वास रखना ही है। 

चलिए हम सब अपनी भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ाएं, तुलसी पूजन दिवस को विश्वव्यापी त्यौहार बनाएं 🙏🏻

जय तुलसी माता 🌿🙏🏻

Thursday, 22 December 2022

Article: कोरोना का डर, क्या फिर छाएगा कहर ??l

 करोना का डर, क्या फिर छाएगा कहर ?


आप सबको ही पता होगा कि कोरोना, फिर से दस्तक देने को तैयार खड़ा है। 

क्या कहा?

ऐसी बात ना बोलें

जी नहीं बोलेंगे, बिल्कुल नहीं बोलेंगे...

पर क्या बोलने, नहीं बोलने से कुछ फर्क पड़ता है?

नहीं पड़ता है। क्योंकि फर्क तो इस बात से पड़ता है कि हम करते क्या हैं...

अभी कल ही news देखी, चीन में कोरोना का कहर देखकर दिल दहल गया। 

मौत का ऐसा भंयकर मंजर देखकर, ईश्वर से यही प्रार्थना की कि हे प्रभु,  अब और नहीं। भारत में तो बिल्कुल भी नहीं...

पिछली बार से मिले दुःख से ही मन उबरा नहीं है, ना ही हम अपने जाने वालों के दुःख से कभी उबर सकते हैं।

पर वो मंज़र दोबारा ना देखना पड़े, इसके लिए प्रयास हमें ही करने होंगे।

आपको शायद याद हो, चीन zero percent corona को लेकर चल रहा था। उसने अपने देश में बहुत सारी चीजों पर ban भी लगा रखा था। 

पर ban को लेकर, लोग बहुत उकता गए था, इस कारण ban का बहुत ज्यादा विरोध हो रहा था, सरकार को इसके लिए, मजबूर किया जा रहा था कि इतना ज्यादा ban अब हटा दिया जाए।

चीन में 29 November को सरकार ने 15 cities से ban हटा लिया। नतीजा आप के सामने है। 

इस ban को हटे महीना भर भी नहीं हुआ और चीन पर तांडव नृत्य आरंभ हो चुका है। कोरोना का कहर, वहां पर गांवों तक पहुंच गया है। रोज़ लाखों संक्रमित हो रहे हैं और हजारो मृत्यु की शैय्या पर चले जा रहे हैं।

वहां पर लाशों को दफनाने के लिए, waiting लग रही है। जो medical practitioner हैं, वो over stress के कारण थक कर चूर हो गए हैं, जिससे वो खुद भी बीमार पड़ रहे हैं।

पर ऐसी स्थिति हमारे देश भारत पर ना आए, इसके लिए हमें बहुत सचेत रहना होगा। 

भारत में तो बहुत दिन पहले ही कोरोना से जुड़े सभी ban खत्म हो चुके थे, ना Mask पहना जा रहा था, ना social distancing, ना हफ्ता- दस दिन समानों को quarantine करना, ना ही sanitization, फिर भी ईश्वर की कृपा से भारत में सब ठीक है। 

पर अब अगर, भारत में सुरक्षा के लिए ban लगाया जाए, Mask पहनने के लिए कहा जाए, sanitization, social distancing, quarantine etc. तो उसे खुशी खुशी कर लीजिएगा। सरकार का विरोध करने और धरने देने का कार्य मत कीजिए।

क्योंकि यह सब हम करें कि ना करें, इससे सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ेगा, पर उन सब नियमो को मानने से हमें व हमारे परिवार पर फर्क अवश्य पड़ेगा।

इसलिए हम सब ईश्वर से प्रार्थना करेंगे कि हम सब की रक्षा करें, और प्रयास करेंगे, अपने देश को अपने परिवार को सुरक्षित रखने की...

जय हिन्द जय भारत 🇮🇳 🙏🏻