खुशी
चंदू प्यारा-सा, छोटा-सा, नटखट बच्चा था। वो इतना चंचल था कि दिनभर मस्ती करता, पर किसी के हाथ नहीं आता। उसकी माँ वसुधा उसे संभालते-संभालते थक जाती, पर मजाल है कि चंदू दो पल को भी थककर बैठता।
एक दिन परेशान होकर वसुधा ने अपनी माँ शक्ति देवी को अपने घर बुला लिया। शक्ति देवी अपने नामानुसार बहुत शक्तिशाली थीं, इस उम्र में भी उनमें बहुत दम-खम था।
शक्ति देवी को देखकर वसुधा ने चैन की सांस ली, कि चलो अब कुछ दिन सुकून से निकलेंगे। चंदू को शक्ति देवी ने उसके पैदा होने के समय संभाला था, पर अभी व्यस्तता के चलते शक्ति देवी अपनी बेटी से चार साल से मिलने नहीं आ पाई थीं।
दरअसल शक्ति देवी अपने गांव की बहुत सफल मुखिया थी, साथ ही उनके बहुत बड़े खेत-खलिहान भी थे, जिनके रखरखाव की जिम्मेदारी पूरी उन्होंने ही उठा रखी थी, और पूरा गांव उनको बहुत मानता था।
अभी खेत-खलिहान में बीज इत्यादि लगाकर उस तरफ से थोड़ी फुर्सत पाकर वो हफ्ते भर के लिए वसुधा और चंदू से मिलने आईं थीं। चंदू एक दिन तक तो शक्ति देवी से दूर-दूर रहा, पर जल्दी ही उनके साथ घुल-मिल गया।
क्योंकि शक्ति देवी ने उसके लिए बेहद स्वादिष्ट पकवान बनाए, उसे रात में बहुत अच्छी कहानियां सुनाईं और दिन में उसके साथ दुनियाभर के खेल खेले।
अब तो चंदू दिनभर अपनी नानी माँ के साथ ही रहता, उनके साथ खेलता, उनके हाथ से ही खाना खाता, उनके साथ ही सोता।
वसुधा, चंदू और शक्ति देवी सभी प्रसन्न थे। वसुधा चैन की सांस लेकर, चंदू अपनी नानी मांँ का साथ पाकर, और शक्ति देवी अपने नाती को लाड लड़ाकर।
एक हफ्ता कब गुजर गए, पता ही नहीं चला और शक्ति देवी के लौटने का दिन आ गया।
जब चंदू को पता चला कि नानी माँ जा रही हैं तो वो बहुत दुखी हो गया और भगवान से प्रार्थना करने लगा कि कुछ ऐसा हो जाए कि नानी माँ रुक जाएं। पर ऐसा हुआ नहीं, नानी माँ के लिए cab आ गई और वो station के लिए रवाना हो गईं।
चंदू बहुत ज़ोर-ज़ोर से रो रहा था कि नानी माँ लौट आइए।
वसुधा चंदू का रोना देखकर उसे भीतर ले गयी और चंदू को समझाने लगी, तभी खबर आई कि शक्ति देवी वापस आ रही हैं। सुनकर चंदू खुशी से चिल्ला-चिल्ला कर उछलने लगा, नानी माँ आ रही हैं।
जब शक्ति देवी आईं, तो पता चला कि cab से उतरते समय उनका balance गड़बड़ हुआ, जिससे वो काफी जोर से गिर गई और उनके पैर में बहुत तेज दर्द हो रहा है।
वसुधा माँ को लेकर तुरंत hospital पहुंच गई, वहां पता चला कि उनके पैर में fracture हुआ है और 3 महीने के bed rest की जरूरत है।
अब तो शक्ति देवी दिनभर bed पर रहतीं, वसुधा भी उनकी ही तिमारदारी में लगी रहती, इस तरह से नानी माँ लौट तो आईं पर दर्द से कराहते हुए और माँ से जो थोड़ा बहुत समय चंदू को मिलता था, वो भी अब नहीं मिल रहा था।
एक दिन नानी माँ के पास बैठकर चंदू रो रहा था, उन्होंने कारण पूछा, तो उसने रोते हुए कहा, “मैंने ही भगवान जी को बोला था, कैसे भी आप रुक जाओ और आपका accident हो गया। आप लौट तो आईं पर मेरा कोई फायदा नहीं हुआ, मुझे खुशी मिली ही नहीं।”
नानी माँ ने चंदू को चुप कराया और बोला कि “इसमें तुम्हारा कोई दोष नहीं, जो होना था हो गया। पर बेटा, आगे से अगर तुम्हारी खुशी किसी और से भी जुड़ी हुई है तो, अपनी कामना के लिए प्रार्थना करने के साथ यह भी कहो, कि उसमें उसका कोई अनिष्ट न हो, बल्कि उसे भी लाभ हो, और तुम्हारी कामना तब पूर्ण हो, जब उसकी भी वही कामना हो। अपनी खुशी को पाने के लिए अगर दूसरे को दुःख पहुंचता है तो फिर ऐसी ही ग्लानि होती है। इसलिए ऐसा मांगो कि आपका और उसका दोनों का शुभ हो, तभी सच्ची खुशी मिलेगी।”
सुनकर चंदू मंदिर की ओर दौड़ गया और भगवान जी से प्रार्थना करने लगा, और बोला “मेरी नानी माँ को जल्दी ठीक कर दीजिए और वो तब तक रहें, जब तक वो ख़ुशी से रह सकें, क्योंकि जब वो खुश रहेंगी, तभी मैं भी खुश रहूंगा।”

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