हिन्दू धर्म में सभी को सर्वश्रेष्ठ और पूजनीय स्थान दिया गया है, फिर वो चाहे देवी-देवता, प्रकृति, सूर्य, चन्द्र, शनिदेव, आकाश, पृथ्वी, गाय, या नागदेवता हों, सबकी पूजा-अर्चना के दिन निर्धारित हैं।
इन दिनों में से नागपंचमी नागदेवता के लिए निर्धारित किया गया है।
नाग पंचमी का पावन पर्व इस साल 17 अगस्त 2026 (सोमवार) को है।
इस दिन सावन का तीसरा सोमवार होने के कारण एक अत्यंत दुर्लभ और शुभ संयोग बन रहा है, क्योंकि भगवान शिव और नाग देवता की पूजा एक साथ की जाएगी।
महादेव को नाग अत्यंत प्रिय हैं, इसलिए ही उन्होंने नाग को अपनी ग्रीवा में स्थान दिया हुआ है।
महादेव की गर्दन में नाग इस तरह से लिपटे हुए रहता है, मानो वह उनके श्रृंगार का अभिन्न अंग हो, उनके गले का हार हो।
पर क्यों है ऐसा और क्यों मनाते हैं नागपंचमी? आज India's Heritage segment में यही देखेंगे…
नागपंचमी व सावन का सोमवार
महादेव के गले में नाग क्यों :
भगवान शिव के गले में जो सांप लिपटा रहता है, उसका नाम वासुकी नाग है, जो नागों के राजा हैं।
शिव जी ने उन्हें समुद्र मंथन के दौरान उनकी सेवा, समर्पण और कष्ट सहन करने के भाव से प्रसन्न होकर अपने गले का आभूषण बनाया था।
पौराणिक व आध्यात्मिक कारण :
इसके पीछे कई पौराणिक और आध्यात्मिक कारण हैं।
- समुद्र मंथन- समुद्र मंथन के समय वासुकी नाग ने मंदराचल पर्वत को मथने के लिए रस्सी की भूमिका निभाई थी। घर्षण से घायल होने और विष का प्रभाव सहने के उनके समर्पण को देखकर शिव जी ने उन्हें अपने गले में स्थान दिया।
- भक्त की इच्छा- नागराज वासुकी भगवान शिव के परम भक्त थे और हमेशा उनके समीप रहना चाहते थे, इसलिए शिव ने उनकी मनोकामना पूरी की।
- मृत्यु पर विजय- सांप को मृत्यु और काल का प्रतीक माना जाता है। गले में नाग धारण कर शिव यह दर्शाते हैं कि वे महाकाल हैं और मृत्यु तथा भय से परे हैं।
- कुंडलिनी शक्ति- योग और तंत्र साधना में सांप को कुंडलिनी शक्ति का प्रतीक माना जाता है, जो मनुष्य के भीतर जागृत होने वाली चेतना का संकेत है।
- संतुलन और शांति- एक अत्यंत विषैला और हिंसक जीव होने के बावजूद सांप शिव के गले में शांत रहता है, जो यह सिखाता है कि भयंकर ऊर्जा या क्रोध पर भी संयम रखा जा सकता है।
अब जान लेते हैं कि क्यों मनाते हैं नागपंचमी।
नाग पंचमी का त्योहार सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग देवता के प्रति सम्मान और उनकी रक्षा के लिए मनाया जाता है। इस दिन सांपों को दूध व फूल चढ़ाकर सर्पदंश से रक्षा, पारिवारिक समृद्धि और कालसर्प दोष की शांति के लिए पूजा की जाती है।
पौराणिक कथाएं और मान्यताएं :
- आस्तिक मुनि की कथा- राजा जन्मेजय ने अपने पिता की मौत का बदला लेने के लिए विशाल सर्प यज्ञ किया था। आस्तिक मुनि ने श्रावण शुक्ल पंचमी के दिन उस यज्ञ को रोककर नागों के प्राण बचाए थे, तभी से यह पर्व मनाया जाता है।
- कालिया नाग का वध- भगवान श्रीकृष्ण ने इसी दिन कालिया नाग को हराकर यमुना नदी को जहर से मुक्त किया था।
- शिव व विष्णु का संबंध- भगवान शिव अपने गले में नाग रखते हैं और विष्णु जी शेषनाग पर सोते हैं, इसलिए नागों की पूजा का विशेष महत्व है।
तिथि व शुभ मुहूर्त :
- पंचमी तिथि प्रारम्भ- 16 अगस्त 2026 को शाम 04:52 बजे।
- पंचमी तिथि समाप्त- 17 अगस्त 2026 को शाम 05:00 बजे।
- पूजा का शुभ मुहूर्त- सुबह 05:51 बजे से सुबह 08:29 बजे तक (कुल अवधि= 2 घंटे 37 मिनट)।
- पूजा विधि और महत्व- सुबह स्नान करके साफ वस्त्र पहनें। घर के मंदिर या पूजास्थल पर शिव परिवार के साथ नाग देवता का ध्यान करें। शिवलिंग पर जल, दूध, और बेलपत्र अर्पित करें तथा नाग देवता को दूध, खीर, चंदन व पुष्प चढ़ाएं।
इस दिन नाग देवता की पूजा करने से सर्प भय से मुक्ति मिलती है और कालसर्प दोष का निवारण होता है।
देवाधिदेव भगवान महादेव और उनके परम भक्त नागदेवता की कृपा हम सब पर सदैव बनी रहे, जिससे हम सभी दुःख-कष्ट से मुक्त होकर उनकी भक्ति में लीन रहें।
हर हर महादेव!
