Thursday, 18 January 2024

Article: क्या करें निमंत्रण में मिले अक्षत (चावल) का

क्या करें निमंत्रण में मिले अक्षत(चावल )का?


जैसा कि आप सभी को विदित है कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण पूर्ण हो गया है। साथ ही अब उस शुभ दिन जब, "रामलला में प्राण प्रतिष्ठा" की जाएगी, उसमें एक हफ्ता भी बाकी नहीं है। 

इस शुभ पवित्र दिन से हर कोई जुड़ना चाह रहा है, चाहे वो अमीर हो या गरीब, शहर का या गांव का... हर कोई अपनी सामर्थ्य के अनुसार इसकी कड़ी बनना चाहता है।

ऐसे में राम भक्तों का तो कहना ही क्या? 

रामलला के प्राण प्रतिष्ठा के लिए रामभक्त देशभर में एक खास मुहिम चला रहे हैं, जिसके अंतर्गत घर-घर जाकर बहुत ही खास अंदाज में निमंत्रण भेजा जा रहा है। 

500 सालों के लंबे इंतजार के बाद अयोध्या में राम जन्मभूमि पर मंदिर का निर्माण हो गया है, जहां 22 जनवरी 2024 को रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। देश ही नहीं, बल्कि दुनियाभर के लोग इस दिन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं और इसके साक्षी बनने के लिए अयोध्या नगरी पहुंच रहे हैं। 

देशभर में इस दिन को पर्व की तरह मनाने की तैयारी की जा रही है, जिसके लिए हर गांव, गली और घर में खास अंदाज में निमंत्रण भेजा जा रहा है। रामलला के प्राण प्रतिष्ठा के लिए रामभक्त घर-घर जाकर निमंत्रण दे रहे हैं। इस निमंत्रण में अक्षत यानि चावल का उपयोग किया गया है जो कि बेहद ही पुरानी भारतीय परंपरा है।


पर क्यों दिए जा रहे हैं अक्षत?

भारतीय परंपरा के अनुसार प्राचीन काल में लोग एक-दूसरे को किसी उत्सव या कार्यक्रम का निमंत्रण देने के लिए अक्षत का उपयोग करते थे।

अक्षत यानि चावल देकर लोगों को निमंत्रण भेजा जाता था। इसके लिए पहले चावल धोए जाते हैं, फिर हल्दी से रंगे जाते हैं। इस तरह से पीले हुए चावलों का उपयोग, निमंत्रण में भेजने के लिए किया जाता था।

हिंदू धर्म में अक्षत का विशेष स्थान है और कोई भी पूजा-पाठ, अनुष्ठान या धार्मिक कार्य अक्षत के बिना पूरा नहीं होता।


चावलों का धार्मिक महत्व :

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कोई भी पूजा पाठ का कार्य हो उसमें चावल का उपयोग जरूर किया जाता है। हिंदू धर्म में धार्मिक व शुभ कार्यों के दौरान तिलक लगाया जाता है, तो उसमें भी चावल लगाया जाता है।

कहा जाता है पीले चावल का उपयोग करने से देवी – देवता जल्दी प्रसन्न होते हैं। इसलिए रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के शुभ मौके पर आमंत्रण पत्र के साथ पीले चावल को भी दिया जा रहा है। 

मान्यता है पीले चावल से किसी भी शुभ कार्य में सफलता जरूर मिलती है, इसलिए रामलला प्राण प्रतिष्ठा के शुभ मौके पर भी अक्षत यानी पीले चावलों का उपयोग किया जा रहा है।

हमने आपको अपने कुछ दिन पहले के इस article  निमंत्रण प्रभू श्रीराम का में बताया था कि हमें भी वो सौभाग्य प्राप्त हुआ था और हमारे घर पर भी प्रभू श्रीराम जी का निमंत्रण और अक्षत प्राप्त हुए थे। 

अब जिन घरों में अक्षत यानी चावल आए हैं, उनके मन में, इन अक्षत के मिलने से एक और महत्वपूर्ण प्रश्न उठ रहा कि क्या करें निमंत्रण में मिले अक्षत का? 

जिन के घर बड़े बुजुर्ग है या वो खुद परिपक्व उम्र में पहुंच गए हैं कि उन्हें ज्ञात हैं कि इन अक्षत का क्या किया जाए, वो तो समझ गए होंगे कि उनका क्या करना है, पर जो अभी युवावस्था में हैं उनको हम इस चावल के सदुपयोग बता देते हैं। आप को जो सर्वोचित लगे, अपना लीजिए।

क्या करें निमंत्रण में मिले अक्षत का?

आइए जानते हैं कि क्या क्या कर सकते हैं हम, इन चावलों का...

तिजोरी में रखे अक्षत: 

ज्योतिषाचार्य लोग बताते हैं कि, चावल शुक्र ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है और शुक्र ग्रह से धन वैभव लक्ष्मी समस्त भौतिक सुख सुविधाएं प्राप्त होती है। इसका लाभ लेने के लिए चावल को लाल रेशमी कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी में रखना चाहिए, ऐसा करने से मंगल और चंद्र दोनों सक्रिए होकर लक्ष्मी योग का निर्माण करेंगे, इससे घर में खुशियां आएंगी।


खीर का प्रसाद बनाएं: 

ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, राम मंदिर से मिले चावलों का बहुत महत्व होता है। इसलिए रामलला के प्राण प्रतिष्ठा के दिन खीर बनाई जा सकती है, जिसमें इन चावलों को मिला दें। इसके बाद इस खीर को परिवार के साथ प्रसाद के रूप में ग्रहण करें और दूसरों में भी बांटें। ऐसा करने से घर में समृद्धि बनी रहेगी। वैसे भी प्रसाद में खीर का भोग सर्वोत्तम माना जाता है।


मस्तक पर तिलक करें:  

रामलला के प्राण प्रतिष्ठा के लिए निमंत्रण में मिले चावलों का विशेष महत्व है। ये शुभता के भी निशानी माने जाते हैं, इसलिए जब भी आप शुभ कार्य के लिए घर से निकल रहे हैं तो इन चावलों को तिलक के रूप में मस्तक पर लगा सकते हैं। ऐसा करने से कोई भी कार्य आसानी से बन जाएगा। ऐसा सच में होगा? यह आपकी प्रभू श्रीराम पर आस्था पर निर्भर करेगा...


अपनी रसोई में प्रयोग करें:

आप इसे अपने भंडार घर में रख सकते हैं,  इससे घर में बरक्कत रहेगी। जिन लोगों की हाल में शादियां होंगी तो उनकी दुल्हन अपनी पहली रसोई में इन चावलों का प्रयोग कर सकती हैं। ऐसा करने से घर में खुशहाली आएगी है और घर में मेल-मिलाप बना रहेगा।


बेटी का कन्या दान करें: 

ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, धार्मिक दृष्टिकोण से अक्षत का विशेष महत्व होता है। इसलिए इन चावलों को पूजा-पाठ में उपयोग किया जाता है। इसके अलावा जिन लड़कियों की हाल में शादी होनी है उनके पिता उन्हें सौभाग्य के रूप में राम मंदिर से आए चावलों से कन्या दान कर सकते हैं। ऐसा करने से जिस घर में बेटी जाएगी, वहां बरक्कत होने लगेगी। 

सोचिए, हम सब में से जिस किसी के भी घर में निमंत्रण के अक्षत (चावल) आए हैं, उनको सौभाग्य तो प्रभू श्रीराम ने वैसे ही दे दिया है। तो जब सौभाग्य प्राप्त हो ही गया है तो उसको सहेजने का कार्य तो हमारा ही है, अब आपको उसे सहेजना, ऊपर दिए किस उपाय से है, यह आपकी इच्छा..

साथ ही 22 जनवरी को दीपोत्सव भी अवश्य करें 🙏🏻😊

जय श्री राम 🚩

Tuesday, 16 January 2024

Article: रामलला की मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा

रामलला की मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा 


 

आज कल शीतकाल चल रहा है, फिर भी हवाओं में एक गर्माहट की अनुभूति बढ़ चली है, शायद इसलिए, कि शीत लहर से ज्यादा राम लहर चल रही है।

जी हां, जो ईश्वर के सानिध्य को परम सुख मानते हैं, उनके लिए यह अमृत काल चल रहा है। क्योंकि जिसका वो बहुत दिनों से इंतजार कर रहे थे, वो स्वर्णिम पल आ गया है।

अयोध्या में रामलला की मूर्ति स्थापित होने का पावन समय... 

पर वो तो 22 जनवरी को घोषित किया गया था, तो अभी से कैसे?

बिल्कुल 22 जनवरी को ही प्राण प्रतिष्ठा समारोह आयोजित किया जाएगा। पर इतना बड़ा आयोजन एक दिन और चंद घंटों में समाप्त नहीं हो जाएगा। बल्कि इस का प्रारम्भ तो सूर्यदेव के उत्तरायण में प्रवेश करने के साथ ही प्रारंभ हो गया है। 

आप पहले पूरे कार्यक्रम की रुपरेखा देख लीजिए, फिर इससे संबंधित और विषय में भी विचार-विमर्श कर लेते हैं।

जब आयोजन बड़ा है तो कार्यक्रम भी एक सप्ताह तो चलना ही है, अतः 15 जनवरी से शुरू होकर 22 जनवरी तक चलने वाले कार्यक्रमों का विधिवत लेखा-जोखा इस प्रकार है।

राम मंदिर में 15-22 जनवरी 2024 तक के कार्यक्रम की रुपरेखा: 

1. 15 जनवरी 2024: रामलला के विग्रह यानी श्रीराम के बालरूप की मूर्ति को गर्भगृह में स्थापित किया जाएगा।

2. 16 जनवरी 2024: इस दिन से रामलला के विग्रह के अधिवास का अनुष्ठान शुरू हो जाएगा।

3. 17 जनवरी 2024: इस दिन से रामलला की प्रतिमा नगर भ्रमण के लिए निकाली जाएगी।

4. 18 जनवरी 2024: इस दिन से प्राण-प्रतिष्ठा की विधि आरंभ होगी। मंडप प्रवेश पूजन, वास्तु पूजन वरुण पूजन, विघ्नहर्ता गणेश पूजन और मूर्तिका पूजन होगा।

5. 19 जनवरी 2024: राम मंदिर में यज्ञ अग्नि कुंड की स्थापना की जाएगी। खास विधि द्वारा अग्नि का प्रज्वलन होगा।

6. 20 जनवरी 2024: राम मंदिर के गर्भगृह को 81 कलश, जिसमें अलग-अलग नदियों के जल इकठ्ठा किए हैं, उनसे पवित्र किया जाएगा। वास्तु शांति अनुष्ठान होगा।

7. 21 जनवरी 2024: यज्ञ विधि में विशेष पूजन और हवन के बीच रामलला का 125 कलशों से दिव्य स्नान होगा।

8. 22 जनवरी 2024: इस दिन मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होगी। मध्यकाल में मृगशिरा नक्षत्र में रामलला की महापूजा होगी। अर्थात रामलला की मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। 

मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा का क्या अर्थ है और यह क्यों की जाती है, आपके मन-मस्तिष्क में भी इस तरह से प्रश्न उमड़-घुमड़ रहे होंगे। चलिए यह भी जान लेते हैं। 

मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा: वैदिक काल से देवी-देवताओं की मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा की परंपरा चली आ रही है।

जैसे प्राण के बिना किसी भी चीज का अस्तित्व नहीं है, वैसे ही मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के बिना उसका धार्मिक महत्व नहीं है।

किसी भी मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा बेहद खास अनुष्ठान होता है। किसी भी मूर्ति में जब वैदिक मत्रों के उच्चारण और खास विधि द्वारा उसमें प्राण को प्रतिष्ठित (स्थापित) किया जाता है तो उसे प्राण प्रतिष्ठा कहते हैं। 

क्या प्राण प्रतिष्ठा के बिना नहीं है मूर्ति का अस्तित्व :

कहा जाता है कि यदि किसी मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा नहीं होगी तब तक उसका अस्तित्व नहीं है। 

यानी जब विधिवत पूजा अर्चना द्वारा मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा की जाती है तभी उसकी पूजा से लाभ प्राप्त होता है। 

यही वजह है कि मंदिरों में मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा का विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। 

धार्मिक जानकर कहते हैं कि मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा नहीं होने पर उसमें भूत, प्रेत, पिशाच जैसी नकारात्मक शक्तियों का वास हो जाएगा। 

ऐसे में पत्थर की मूर्ति की पूजा करने से कुछ भी प्राप्त नहीं किया जा सकता है। मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा शुभ नक्षत्र-ग्रह, तिथि, वार, समय, मंत्र, पुरोहित (पंडित), यजमान को ध्यान में रखकर किया जाता है।

बिना प्राण प्रतिष्ठा के पूजन अधूरी मानी जाती है। हिन्दू धर्म में किसी भी शुभ कार्य करने के लिए शुभ मुहूर्त होना आवश्यक होता है।

रामलाल की मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा का शुभ मुहूर्त: 

अयोध्या में भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा का समय 12 बजकर 29 मिनट 08 सेकंड से लेकर 12 बजकर 30 मिनट 32 सेकंड तक रहने वाला है। यह 84 सेकंड का मुहूर्त बहुत ही खास है।

आप सोच रहे होंगे कि यही समय क्यों निर्धारित किया गया है?

उसका दो कारण है

1.  इसी समय मुहूर्त में प्रभू श्रीराम जी का जन्म हुआ था। 

2. भगवान श्री रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा योग का शुभ मुहूर्त, पौष शुक्ल, कूर्म द्वादशी, विक्रम संवत 2080, यानी सोमवार, 22 जनवरी, 2024 को आ रहा है।

हमने आपको पूरे कार्यक्रम की रुपरेखा, शुभ मुहूर्त का दिन व समय, सब से अवगत करा दिया है।‌ 

हम सब बहुत सौभाग्यशाली है जो इस स्वर्णिम पल के साक्ष्य हैं। ध्यान रखिएगा बहुत बड़ा शुभ कार्य है, कहीं व्यस्तता के कारण आप इससे वंचित ना रह जाए। 


प्रभू श्रीराम जी हम सब पर अपनी विशेष कृपा बनाएं रखें 🙏🏻😊 

जय श्री राम 🚩

Monday, 15 January 2024

Poem: मकर संक्रान्ति

मकर संक्रान्ति  




उत्तरायण का सूरज 

पतंग की डोर

ले चली सबको

सुख की ओर 


घने कोहरे के

छंट गए बादल 

धूप ही धूप 

फैली हर ओर


मकरसंक्रांति हो 

खिचड़ी या पोंगल

भांति भांति के नाम

सब जुड़े एक ही छोर

 

जनवरी से दिसंबर 

त्यौहारों की बहार 

मस्ती ही मस्ती

छाई हर ओर 


मकरसंक्रांति हो

चाहे होली, दीवाली 

भारत में फैली रहे 

सुख शान्ति हर ओर 


आप सभी को सूर्य देव के उत्तरायण में प्रवेश की हार्दिक शुभकामनाएं 💐

मकरसंक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं 💐🙏🏻