Monday, 6 May 2019

Story Of Life : मजबूरी का सौदा


मजबूरी का सौदा


कांता बहुत ही गरीब औरत थी, वो लोगों के घर बर्तन धोने, व साफ-सफाई करने का काम करती थी। उसके दो बेटे थे, पर पैसे की तंगी के कारण अच्छा पोषण व दवा का अक्सर आभाव ही रहता था। अतः आए दिन वो बीमार रहते थे।

एक दिन कांता के बड़े बेटे की तबीयत बहुत ज्यादा खराब हो गयी।
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वो इधर- उधर सब जगह इलाज़ करवाती फिर रही थी, पर कहीं भी लाभ नहीं मिल रहा था। तब किसी ने बताया, डॉ. समीर बहुत ही अच्छे doctor हैं, वो जिसको देख लेते हैं, उसे भगवान का आशीर्वाद मिल जाता है। वो फिर यमराज के घर से भी लौट आता है।

डॉ. समीर की ऐसी तारीफ सुनकर कांता उनके clinic भागी चली गयी। जब वो वहाँ पहुंची, तो देखा, डॉ. समीर का clinic बंद है। ये देखकर कांता के मन में अपने बेटे को बचाने की उम्मीद भी जाती रही। वो बेहद थके पाँव से घर लौटने लगी। तभी पीछे से किसी ने कहा, dr. समीर को दिखाने आई थीं?

जी, आप जानते हैं, कहाँ मिलेंगे?

हाँ, आज Sunday है ना। आज वो केवल अपने घर में ही patient देखते हैं।

अपने उम्मीदों को बंधते देख वो बोली, आप मुझे बता देंगे, वो कहाँ रहते हैं?

वो आदमी कांता को रास्ता बता कर चला गया। घर बहुत दूर था, 
और कांता के पास जाने का कोई साधन नहीं था। वो खुद तो जैसे-तैसे चली जाती, पर बीमार बेटे को कैसे ले जाती?

अभी वो इसी उधेड़बुन में थी, कि तभी सरजू अपना रिक्शा ले कर वहाँ से निकल रहा था। कांता को देखते ही बोला, ऐ भौजी, मंगलू को लेकर क्या कर रही हो, डॉ. बाबू के clinic के आगे?

तुमसे क्या छुपा है सरजू भैया, मंगलू बहुत ही बीमार हो गया है, उसी को दिखाने के लिए आए थे, पर आज तो डॉ. बाबू सिर्फ अपने घर में ही देखते हैं। तो कैसे जाएँ? वही सोच रही थी।

क्या सरजू कांता की मजबूरी का सौदा करेगा? या उसको दुख से उबरने में साथ देगा।जानते हैं- मजबूरी का सौदा (भाग 2) 

Friday, 3 May 2019

Fusion Cuisine : Instant Cheesy Khandvi Bite


From today onwards I would be posting the recipes on Fridays, so that you can try them out in the weekends.

We try everything to please our child’s tongue. But this delicacy - Khandvi - that comes all the way from Gujarat, in India, is not liked by some of them. So keeping their taste and choices in mind, here’s my first Friday recipe. Also, many people think that making khandvi is really difficult. But this way is really easy. The dish is easy to digest, too. So give it a try this weekend and let me know in the comments about it.


Instant Cheesy Khandvi Bite





Ingredients:

For khandvi:-

1 cup besan(gram flour)
1 glass(300ml) lassi(made of sweet creamy curd)
¼ tsp salt
¼ tsp ghee
¼ tsp turmeric

For filling:-

Amul creamy cheese
Fresh coriander leaves

Method:
  • In a small steel container(that can fit in your cooker), mix flour, lassi, turmeric and salt, to make a lump-free mixture.
  • In a cooker take 1¼ cup of water.
  • When, the water starts boiling, keep a steel bowl in the cooker.
  • Now, keep the steel container (containing khandvi mixture) in the cooker at medium flame, and allow five whistles.
  • Meanwhile, grease a plate or tray with ghee.
  • After 5 whistles, take out the container & stir the mixture vigourously, till it becomes like a thick lump-free paste.
  • Once the batter gets ready, quickly spread it on the tray & let it cool down for 5 minutes.
  • Then, spread creamy cheese onto the khandvi sheet, in considerable amounts.
  • Sprinkle finely chopped coriander leaves on the cheese.
  • Cut the sheet into straps of 1-1½ inches.
  • Roll the straps with light hands, as applying pressure would result into the breaking of the straps.
  • Your silky and smooth Cheesy  Khandvi  Bite  is ready.


Note:

  1. Don't season Cheesy  Khandvi Bite, as cheese won't taste good when seasoned.
  2. For an authentic Gujarati Khandvi taste, replace cheese with grated coconut and a pinch of grated ginger seasoned with mustard seeds and curry leaves. You may also change the fillings as per your taste.
  3. While taking out the container from the cooker & whipping the batter, Be Cautious. They will be steaming hot.

Thursday, 2 May 2019

Kids Story : Advay the hero- गुल्लक


Advay the hero- गुल्लक


एक दिन घर से जाते समय नानी ने 500 रूपये दिये, तो दीदी ने अपनी गुल्लक में पैसे रख लिए। दीदी को ऐसा करते देख advay माँ से पूछने लगा, mumma दीदी ने किस में रूपये रखे हैं।

माँ बोली, उसे गुल्लक कहते हैं। अगर हम हमेशा रूपये मिलते ही छोटी छोटी चीजों पर खर्च नहीं करते हैं, गुल्लक में रख देते हैं। तो धीरे धीरे जमा होते होते, ज्यादा रूपये हो जाते हैं। तब हम ज्यादा बड़ी चीज खरीद सकते हैं।

अच्छा mumma मुझे भी एक गुल्लक दे दीजिये, नानी तो मुझे भी 500 रूपये दे गईं हैं। अभी तो तुम nursery में ही हो, मैं रख लेती हूँ। नहीं mumma मैं अब बड़ा हो गया हूँ। मैं ठीक से रखूँगा। 

Advay की ऐसी बात सुनकर पापा उसके लिए, बहुत सुंदर सी गुल्लक ले आए।
Courtesy: AliExpress
पापा ने जब वो गुल्लक
advay को दी, तो वो खुशी से नाचने लगा।

सबसे पहले उसने गुल्लक दीदी को दिखाई, दीदी अब मेरे पास भी गुल्लक है। और फिर सीधा माँ के पास गया, mumma मेरे रूपये दे दीजिये। मैं अपने रूपये अपने पास रखूँगा। माँ ने रूपये दे दिये। 

नानी को भी फोन करके उसने thank you कहा, और बोला नानी आप ने जो रूपये मुझे दिये थे, मैंने गुल्लक में रख दिये हैं। आप आएंगी ना, तब दिखाऊँगा।

अब तो advay 2ndclass में आ गया था, और सबके दिये हुए रूपये उसी में डालता जाता था। अब तक उसके पास 8-10 हज़ार रूपये इकठ्ठा हो चुके थे।

एक दिन घर का काम करने वाली बसंती’, माँ से 5000 रूपये उधार मांग रही थी। माँ ने कहा, महीने का अंत चल रहा है, मैं उधार नहीं दे पाऊँगी। वो बोली आप से नहीं तो किससे मांगू? माँ बोली, ठीक है, मैं 2000 रूपये दे सकती हूँ। वो उतने ही लेकर चली गई। ठीक है भाभी 15 दिन में दे दूँगी, नहीं तो तंख्वाह से काट लेना।

15 दिन बाद वो पूरे 7 हज़ार रूपये ले कर आई, और आते से ही पूछी, भाभी छोटा बाबू(advay)कहाँ है? वो तो school गया है। तो वो सारे रूपये माँ को देने लगी। माँ बोलीं, अरे बसंती मैंने 2 हज़ार दिये थे, तुम 7 हज़ार क्यों दे रही हो?

छोटा बाबू ने मुझे 3 हज़ार और दे दिये थे। और मेरी बहुत डांट भी लगाई थी, कि गुल्लक में रूपये क्यों नहीं रखती हूँ। तो 5000 आप लोगों के हैं, और 2000 हज़ार मेरे भी गुल्लक में रख दीजिये। ऐसे ही थोड़े थोड़े दे दिया करूंगी। क्योंकि छोटा बाबू बोला है, अगर रूपये नहीं जमा करूंगी, तो वो फिर नहीं देगा, और अपने घर काम भी नहीं करने देगा। आप का काम तो मैं कभी छोड़ूँगी नहीं, छोटा बाबू मेरी जान है।

दोपहर में जब advay आया तो, माँ ने उसके 3 हज़ार रूपये उसे वापिस कर दिये। उसने छूटते ही पूछा, बसंती aunty ने अपने रूपये भी जमा किए? माँ ने कहा हाँ-हाँ कर दिये।

तब से बसंती ने हर महीने 2-4 हज़ार रूपये जमा करना शुरू कर दिया। अब बसंती बहुत खुश रहा करती थी, क्योंकि advay के कारण वो भी बचत करना सीख गयी थी। अब उसे जरूरत पर रूपये उधार नहीं मांगने पड़ते थे।