Tuesday, 8 October 2019

Poem : थोड़ा राम बन जाते हैं

थोड़ा राम बन जाते हैं

आया शुभ दशहरा,
क्या हम इतना कर पाएंगे?
भीतर के रावण को जलाकर
मन में राम जगाएंगे?

मन के भीतर बसा है रावण,
हम पुतले को जलाते हैं
धनुष मात्र उठा लेने से,
क्या हम राम बन जाते हैं?

राम गुणों की खान हैं,

हिंदूत्व की शान हैं,
बहुत ना अपना सकें तो,
कुछ ही हम अपनाते हैं

पिता के वचन की खातिर,

वो राजसुख छोड़ आए
मात-पिता की सेवा से,
हम भी मुख ना चुराएं

भ्रातृ-प्रेम की अमरता के,

अमिट मिसाल वो कहलाएं
अपनों को एक में जोड़ कर,
कुछ राम-गुण लें आएं

गुरुओं को दें अनन्त सम्मान,

वो परम शिष्य  थे कहलाए
गुरु को वो ही मान,
पुनः हम सब दिलवाएं

पर-स्त्री सम्माननीय है,

उनका कथन महान कहलाए
रक्षा करें हर स्त्री की,
किसी का हनन ना होने पाए

आओ इस दशहरे में,

कुछ उनके गुणों को अपनाते हैं
पूरा तो नहीं बन सकते,
पर थोड़ा राम बन जाते हैं। 

दशहरे के पावन दिवस पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ।।।

Sunday, 6 October 2019

Article : वो दिन......


वो दिन......



भारत ऐसा देश है जहाँ धर्म-कर्म का विश्व में सर्वाधिक बोल बाला है, पर कुछ दूसरे पहलू भी हैं, जिनमें विचार की आवश्यकता भी है, जैसे सबसे ज्यादा कर्मकांड भी, और दुनिया भर के नियम कानून भी।

आज का मेरा ये article कुछ अलग सोच पर है, पर पूरा article पढ़कर एक बार सोचिएगा जरूर।

आज कल नवरात्रि अर्थात- माता रानी के दिन चल रहे है। भारत ऐसा देश है, जहाँ स्त्री को देवी रूप में पूजा जाता है।

माता रानी अर्थात स्त्री का माँ रूप।

माँ को ईश्वर रूप में माना जाता है। आप ने कभी सोचा है, क्यों स्त्री को ईश्वर तुल्य माना जाता है? क्योंकि ईश्वर का एक गुण सृजन कर्ता भी है। सृजन कर्ता अर्थात जन्म देने वाला। और ये शक्ति ईश्वर ने स्त्री को भी प्रदान की है।

स्त्री जब संतानोत्पत्ति करती है, माँ बन जाती है। सम्पूर्ण हो जाती है, तब वह ईश्वर तुल्य हो जाती है। तो अगर माँ होना, इतना पवित्र है, तो उससे जुड़ी process अपवित्र कैसे हो सकता है।

माँ बनने के ही process की ही एक कड़ी हैं- वो दिन(Periods)....... 

इस कड़ी के फलस्वरूप ही स्त्री माँ बन सकती है, यदि किसी के यह ना हो तो, वो माँ भी नहीं बन सकती है।

अगर आप scientifically देखेंगे, तब भी आपको यही पता चलेगा, कि period, माँ बनाने की natural process है, उसके बिना माँ नहीं बना जा सकता।

फिर जब स्त्री इस process में होती है, तो उस समय उसके साथ अछूतों जैसा भेदभाव क्यों? उसे उस समय मंदिर जाने, ईश्वर को छूने देने की सख्त मनाही कर दी जाती है। 

अगर इसका कारण रक्त स्त्राव है, तो रक्त स्त्राव तो चोट लग जाने से भी होता है, तो क्या किसी को लगी छोटी सी चोट भी उसे पूजा के लिए अयोग्य कर देती है?

जब स्त्री माँ बनती है, तब वो तो मंदिर नहीं जा सकती, यहाँ तक कि उस घर में पूजा करना तक निषेध कर दिया जाता है।

जब मेरी बेटी हुई थी, तब उसे मंदिर ले जाया गया था, पर मेरा जाना निषेध कर दिया था। जब मेरे पति को इसका कारण पता चला, तो वह बोले यदि उसके माँ बनने से वो अपवित्र है, तो पिता तो मैं भी बना हूँ। तब तो मुझे भी नहीं जाना चाहिए। सब के लाख कहने पर भी कि पुरुष को दोष नहीं लगता है, वो भीतर नहीं गए, मेरे साथ बाहर ही खड़े रहे।

जब पुत्र हुआ, सावन का महीना चल रहा था, सब ने कहा, इस सावन घर में पूजा निषेध है। तब वह बोले, जिस समय हमें ईश्वर को सर्वाधिक धन्यवाद देना चाहिए, कि उन्होंने हमें सन्तान प्रदान की है। तब ही पूजा ना की जाए, मैं ऐसा नहीं करूंगा। शिव जी मेरे आराध्य हैं, और मैं सावन में ही उनकी पूजा ना करूँ, ये असंभव है, और वह नियम से पूजा करते रहे।

उनका मानना है, कि ईश्वर प्रेम से पाये जा सकते हैं, कर्म कांड से नहीं। धन्य हूँ, जो मुझे ऐसे पति मिले हैं, जिनके लिए कर्मकांड से ज्यादा प्रेम सर्वोपरि है।

मुझे मेरे पिता ने भी सदैव यही कहा था, आप कर्मकांड कितना करते हैं, यह महत्वपूर्ण नहीं होता है, ईश्वर के लिए। ईश्वर यह देखते हैं, कि आप कितना मन से उनकी पूजा अर्चना करते हैं। अर्थात जब आप ईश्वर की पूजा कर रहे हैं, तब सारा ध्यान सिर्फ ईश्वर आराधना में ही होना चाहिए।

हे ईश्वर, आपका कोटि कोटि धन्यवाद, आप ने मुझे ऐसे पिता व पति प्रदान किए।  

क्या आप को लगता है, ईश्वर यह चाहते हैं? कि उन दिनों उनकी पूजा अर्चना ना हो, उन्हें छुआ ना जाए, कदापि नहीं। अगर ऐसा होता तो, ना तो उन्होंने periods बनाए होते, ना स्त्री को सृजनकारी बनाया होता।

ईश्वर कभी भी कर्म कांड से नहीं प्राप्त होते हैं, अगर ऐसा होता तो सारे कर्म कांडियों को ईश्वर की प्राप्ति हो जाती। ईश्वर की प्राप्ति का सरल व सुगम मार्ग सिर्फ प्रेम है, उन पर श्रद्धा है, विश्वास है।

इसका सीधा और सच्चा उदाहरण है, प्रभू श्री राम का शबरी के झूठे बेर खाना, मीरा का भगवान श्री कृष्ण को पाना, और सबसे बड़ा उदाहरण है, कृष्ण जी को  राधा जी के साथ पूजा जाता है।

ईश्वर को प्रेम से पाने की कोशिश कीजिये, आप कब उनकी शरण में आ जाएंगे, आपको पता भी नहीं चलेगा।

Friday, 4 October 2019

Recipe: Sabudane ki Khichdi


One of my viewers had the problem of lumpy Sabudane ki Khichdi. So, today I'm sharing with you a traditional recipe for fasts, that we make regularly.

If you also face the same problem, then try this recipe, once.

Sabudane ki Khichdi





Ingredients:
  • Sago (or साबूदाना) 250gm
  • Tomato 1 big-sized
  • Boiled Potatoes 2 medium-sized
  • Cumin 1 tsp
  • Ghee 100gm
  • Rock salt according to taste
  • Green chillies acording to taste
  • Coriander leaves
  • Clove 1

Method:
  1. Soak sabudana overnight, so that they swell up till the morning.
  2. Drain out all the water. Let it stand for 5-6 hours.
  3. In a non-stick pan, heat 50gm of ghee.
  4. After the ghee gets heated up, turn the flame to low.
  5. Add cumin and clove to it. Let them crackle.
  6. Add chopped tomato and salt to it. Stir the mixture. Let  the tomato soften.
  7. Add sabudana and thickly mashed potatoes to it.
  8. Mix the mixture well. cover it for 5 minutes.
  9. Stir the mixture and cover it again for another 5 minutes.
  10. Now, slowly keep adding ghee to it.
  11. Roast the khichdi.
  12. You may serve the Khichdi after garnishing it with roasted peanuts and finely chopped coriander.