Friday, 11 October 2019

Article : अमित से अमिट तक.........


अमित से अमिट तक...

हम लोगों में से बहुत लोग ऐसे हैं, जो अमिताभ जी से साक्षात नहीं मिले हैं, पर शायद कोई भी भारतीय ऐसा नहीं होगा, जो उनको शक्ल से या नाम से जानता नहीं हो। Amitabh Bachchan को Big B के नाम से जाना जाता है।

पिछले पचास सालों से इस शहँशाह की बादशाहत अनवरत चल रही है, जिसे धाकड़ से धाकड़ भी हिला नहीं पाये।

फिल्मों की कहानियाँ, अमिताभ जी की image को ध्यान में रख कर लिखी जाती है। पर ये सब तो आप सब ही जानते हैं, फिर बताने वाली क्या बात है?

नहीं आज मैंने उनके बारे में इसलिए नहीं लिखा है, क्योंकि आज उनकी birthday है, ना ही इसलिए कि उन्हें दादा साहब फालके award मिला है।

मेरे लिखने का उद्देश्य ये है, कि ऐसे कौन से कारण हैं, जो इन्हें विशेष बनाते हैं।

कारण 1. ईश्वर में आस्था और संस्कार, वो सर्वोपरि हैं, जो उनमें कूट-कूट कर भरे हैं। जिसके कारण उनकी सफलता का रथ स्वंय ईश्वर ने थामा हुआ है।   

कारण 2 . अमित जी अपने माँ और बाबू जी का बहुत आदर करते थे। उन्हें सम्मान देते थे, उन्हें पूजते थे। माता पिता की सेवा बहुत बड़ा कारण है, किसी भी इंसान की सफलता का।

कारण 3 . अमित जी बहुत सरल हैं, उनमें कभी घमंड नहीं रहा, जब उनके पिता जी महान साहित्यकार थे, तब भी नहीं, और जब वो खुद महानायक बन गए थे, तब भी नहीं। सरल होना व घमंड ना करना ऐसा गुण है, जो सफल व्यक्ति को सफल ही बने रहने देता है।

कारण 4 . असफलता अमित जी ने भी देखी, फिर चाहे वो उनका film shoot में हुआ accident हो, ABCL कंपनी का डूबना हो, राजनीति  छोड़ देना हो, बोफोर्स मामले में फँसना हो, या कुछ फिल्मों का flop होना हो। सबका डटकर सामना किया, और अपना मुकाम बरकरार रखा। जो इंसान जुझारू हो, उसका साथ तो ईश्वर भी देते हैं।

कारण 5. अमित जी अपने काम को साधना मानते हैं, shooting 
पर समय से पहुँचते हैं, या कभी कुछ देर पहले भी, किसी भी तरह के situation में अपने को ढाल लेते हैं, काम के समय सर्दी, गर्मी, सुविधा- असुविधा किसी का ध्यान नही देते हैं।
जो अपने काम का साधक हो, जो लगन का पक्का हो, उसका साथ तो पूरी कायनात देती है।

कारण 6 . आज जब वो 77 साल के हैं, तब भी अपनी आत्म बल के कारण बहुत सी बीमारियों के बावजूद वो हम बहुत से युवा लोगों से, ज्यादा active हैं। young हैं। आत्म बल ही है, जो सब जीतने का हौसला देती है।

कारण 7 . वक़्त के साथ चलते हैं, सन 2010 से twitter join किया, अब तक उन्होंने 65 हज़ार से ज्यादा ट्वीट कर लिए, साथ ही 38 मिलियन से ज्यादा उनके followers हैं, और इसमें वो शाहरुख और सलमान को टक्कर दे रहे हैं। वहीं blog में भी 4000 दिनों से ज्यादा दिनों से लिख रहे हैं।

आमतौर पर celebrity के social account देखने के लिए उनकी टीम होती है। पर अमित जी अपना account ना केवल खुद handle करते हैं, बल्कि उसके reply भी खुद ही देते हैं।
जो वक़्त के साथ अपने आपको ढलता जाता है, उसका वक़्त रुकता नहीं है चलता जाता है।

कारण 8. अमित जी अपने साथ वालों की प्रशंसा भी खूब करते हैं। साथ ही लोगों के विशेष दिनों का ध्यान भी रखते हैं। सब की आगे बढ़ने में खूब मदद भी करते हैं जो उन्हें सब से जोड़े रखता है।
सबको साथ लेकर चलने वाला कभी अकेला नहीं रहता।

और भी बहुत से गुण हैं, किन किन को लिखूँ। ऐसी गुणों के खान, वाले व्यक्तित्व को कोई क्यों ना प्यार दे, सम्मान दे। शायद यही सब कारण हैं, जिन्होंने उन्हें सदियों से नायक बना रखा हैं, दादा से पोते तक सबको अपना दीवाना बना रखा है।

ऐसी महान शख्सियत अनुकरणीय हैं। 

अमिताभ बच्चन जी आपको आप के जन्म दिवस की अनेकानेक बधाइयाँ

Thursday, 10 October 2019

Story Of Life : हमने घर बदल लिए (भाग -2 )


हमने घर बदल लिए (भाग -2 ) 


कीर्ति का room बगल वाला ही था, इसलिए उसे सब बात सुनाई पड़ रही थी। रैना दी की सास ने पूछा, बिटिया कुसुम को राखी post कर दी?

हाँ, मम्मी जी, कुसुम दी के पास राखी पहुँच भी गयी। और हाँ मम्मी जी, आपकी और पापा जी की सारी दवाई भी कल ही ले आयी थी।

क्योंकि आज नितिन भी आ रहा है, तो सारा समय उसके साथ ही गुजरेगा।

नितिन! तब तो तुम आज, उसी की पसंद का pasta, burger ही बनाओगी।

वो तो बनाऊँगी ही, वो मेरा सबसे बड़ा बेटा जो है।

हाँ, हाँ लाड लड़ा, तभी तो वो भी, मेरी चाची सबसे best कहता फिरता है।

तभी एक phone बजा, रैना दी बात कर रहीं थीं, हाँ भाभी, आपको नितिन की चिंता करने की जरूरत नहीं है, मैंने उसके interview में जाने के लिए सारे समान ready कर दिये हैं। 

और हाँ अबकी बार फिर आप लोगों के लिए आचार और बड़िया भी भिजवा दूँगी। पिछले साल भेजी थी, तो भैया को बड़ी पसंद आई थी, अब तक तो खत्म भी हो गयी होंगी।

रैना दी की सास ने भी बात की, phone रखने के बाद वो बोलीं, आह री मेरी प्यारी बिटिया, जब से तुम आई हो, मुझे घर, रिश्तेदार किसी की भी चिंता नहीं रहती है, कहकर रैना दी की सास ने उन्हें गले लगा लिया।    

कीर्ति तैयार हो कर आ गयी, नितिन भी आ गया था। नाश्ते में white sauce pasta और नमकीन दलिया बना था। सब अपनी अपनी पसंद का नाश्ता कर रहे थे, पर कीर्ति ने दोनों चीज़ें खाईं, दोनों बहुत ही tasty थे।

कीर्ति, जीजू और नितिन एक साथ निकल गए। जब वो घर वापस पहुंचे, तो रैना दी physiotherapist का payment कर रहीं थीं।
जब वो चला गया, तो जीजू ने रैना दी से पूछा, उसे payment क्यों कर रही थीं? 

तो रैना दी बोलीं, आज last day था। अच्छा चलो, बढ़िया है, कहकर जीजू तो अपने कमरे में चले गए। पर कीर्ति को सवालों के घेरे में छोड़ गए।

रात का खाना भी रैना दी ने दो तरह का बनाया था, burger भी और रोटी सब्जी भी। अब भी कीर्ति ने दोनों खाये थे, दोनों ही बहुत tasty था।

कीर्ति ने रैना दी से कहा, आज आप मेरे साथ सो जाएँगी, मुझे आप से बहुत कुछ पूछना है, कल मेरी train भी है....... 

आगे पढ़ें-  हमने घर बदल लिए (भाग-3) में....... 

Wednesday, 9 October 2019

Story Of Life : हमने घर बदल लिए

हमने घर बदल लिए

रिया की आज सगाई थी, वो सजधज कर तैयार बैठी थी, पर उसकी नज़रें दरवाज़े पर ही लगी थी। तभी रिया की दोस्त कीर्ति ने उसे छेड़ा, आय-हाय, देखो तो रिया को, कैसे कार्तिक का इंतज़ार कर रही है? इन madam जी की तो नज़र दरवाज़े से हट ही नहीं रही है, अपने would be के दीदार के लिए।  

तभी रिया खुशी से खिल गयी, पर ये तो कार्तिक नहीं था, बल्कि बहुत ही handsome and beautiful couple था।

कीर्ति से रहा नहीं गया, ये कौन हैं रिया? तुझे इनका इंतज़ार था? हाँ, ये मेरी मौसी की बेटी रैना दी और राज जीजू हैं।

उन दोनों के आने से महफिल में चार चाँद लग गए। राज सबमें इतने घुले-मिले थे, कि समझ ही नहीं आ रहा था, वो दामाद हैं। सभी important decision के लिए उन्हें आवाज़ लगाई जा रही थी, उनके आते ही कुछ महत्वपूर्ण काम भी उन्हें सौंप दिये गए। कीर्ति देख रही थी, सारे काम वो बखूबी कर भी रहे थे।

कीर्ति ने रिया से कहा, तेरे जीजू तो बड़े expert हैं, हर काम बखूबी कर रहे हैं। साथ ही उनके आने से महफिल में रंग भी जम गया है। 

रिया बोली, वो हैं ही इतने अच्छे कि सभी को उनका बहुत इंतज़ार रहता है। 

सच ऐसे लोगों की चाह सबको रहती है, काश मेरे पति भी ऐसे हीं हों। कीर्ति मन ही मन सोचने लगी।

सगाई बहुत अच्छे से हो गयी। कीर्ति की रैना दी और राज जीजू से अच्छी पहचान हो गयी। रैना दी बोली, कीर्ति अगर कभी दिल्ली में काम पड़े तो हमारे घर भी जरूर आना।

कीर्ति बोली दी, मुझे दिल्ली में एक exam के सिलसिले में जाना था, सोच रही थी, कहाँ रुकूँगी? पर अब tension नहीं है, आपके घर ही आऊँगी।

चंद दिनों बाद ही कीर्ति दिल्ली आई, राज जीजू उसे लेने station पहुँच गए। जब वो रैना दी के घर पहुंची तो उसने पाया, कि रैना दी अपने सास-ससुर के साथ रहती हैं।

रैना दी बोलीं, कीर्ति fresh हो जाओ, फिर साथ में breakfast करेंगे। तब तक मैं मम्मी जी, पापा जी को juice और दवाई दे कर आती हूँ।

ये कह कर वो जूस के दो ग्लास लेकर अपने सास के room में चली गईं। कीर्ति का room बगल वाला ही था, इसलिए उसे सब बात सुनाई पड़ रही थी......

आगे पढ़े हमने घर बदल लिए (भाग- 2)  में....