Wednesday, 25 June 2025

Story of Life : प्यार पर घात (भाग-3)

उसे श्लोक की jeans में एक गुलाबी, खूशबूदार काग़ज़ और एक दस का सिक्का मिला।

काग़ज़ को पढ़कर श्वेता के पैरों तले जमीन खिसक गई...


प्यार पर घात (भाग-1) और

प्यार पर घात (भाग-2) के आगे…

प्यार पर घात (भाग-3)


आह! यह क्या?

उसने बहुत बार उस कागज़ को पढ़ा, पर हर बार स्नेहा से प्रेम अनुरोध ही दिखा...


“प्रिय स्नेहा 

तुम इतनी सुन्दर हो, कि न चाहते हुए भी तुमसे स्नेह हो जाता है। श्वेता की बेडोल figure के आगे, तुम्हारी figure तो कमाल की है। उसके साथ रहते हुए मेरी जिंदगी नीरस हो गई है। उसके साथ कहीं बाहर निकलने का भी मन नहीं करता, कौन drum के साथ घूमने जाए। अगर तुम्हें ऐतराज़ न हो, तो ज्यादा नहीं, बस क्या शाम के कुछ घंटे मुझे दे सकती हो, मेरा प्रेम अनुरोध समझकर...

तुम्हारे स्नेह के प्रति उत्तर में श्लोक...”


आखिर कब और कैसे श्लोक स्नेहा से स्नेह करने लगा? 

तभी उसे याद आया कि एक दिन, जब वो सारे काम खत्म करके श्लोक के पास आई थी, तो उस ने कहा था कि सारे काम निपटा लो, बस मेरा ही मत सोचा करो, कि कभी मेरे पास भी जल्दी आ जाओ...

अरे इतने काम रहते हैं, खत्म ही नहीं होते, कितना भी जल्दी कर लूं। तुम्हारा क्या है, office से आकर खा-पीकर आराम से बिस्तर पर। श्वेता तुनककर बोली...

श्लोक भी भरा बैठा था, इंतजार करते हुए, तो चिढ़कर बोला - तुम भी वही हो, काम भी वही, पर जब अपना ही शरीर बोझ हो, तो काम कैसे जल्दी हो...

श्लोक! चीख पड़ी थी श्वेता।

फिर अपनी तकिया उठाकर सोफे पर जा धंसी थी, पूरी रात रोते-रोते कटी थी... पर श्लोक बेखबर सोता रहा।

ओह! श्लोक बाबू, स्नेहा से दिल लगा बैठे थे, तभी मुझे जलीकटी सुना रहे थे...

हाय! अब मेरा और मेरे बच्चों का क्या होगा, निर्मोही श्लोक पर सारी जवानी तबाह कर दी। अब जैसी वो दिखती है, ऐसे में कौन उसे पूछेगा?

उसने भारी मन से फोन करके office से तीन दिन की छुट्टी ले ली। 

वो पूरे दिन अनमनी सी रही... रो-रोकर उसकी आंखें लाल हो गई थीं...


आगे पढ़ें, प्यार पर घात (भाग-4) में…

Tuesday, 24 June 2025

Story of Life : प्यार पर घात (भाग-2)

वही लोग आज मेरे पास फटकना तो दूर, देख भी नहीं रहे थे...

कहीं तुम भी बदल तो नहीं जाओगे? मुझसे मुंह तो नहीं मोड़ लोगे?

आह! कैसी बात करती हो श्वेता?


प्यार पर घात (भाग-1) के आगे…

प्यार पर घात (भाग-2)


तुमने मेरे प्यार को खोखला समझ लिया है क्या? या खाली खूबसूरती पर टिका समझ लिया है।

मेरी पहली और आखिरी पसंद हो तुम... तुम जैसी हो, वैसी ही मेरी हो...

I love you, यह कहकर श्वेता, श्लोक के गले लग गई...

कुछ देर बाद श्लोक तो गहरी नींद में सो गया, पर श्वेता उसको देख-देखकर निहाल हुई जा रही थी, कि उसे कितना प्यार करने वाला मिला है।

शादी के दस साल बीत गए थे। उनका परिवार पूरा हो गया था, शौर्य और शिप्रा दो प्यारे बच्चों के साथ, पर श्वेता की व्यस्तता समय के साथ बढ़ती गई। 

श्वेता ने परिवार और काम में अपने आपको इतना डुबा दिया था कि अब वो अपना तनिक भी ध्यान नहीं देती थी। नतीजतन 30 की उम्र होने के बावजूद वो 45 साल की दिखने लगी थी। 

बेडोल शरीर, कच्चे-पक्के बाल, बिना glow का चेहरा... कोई कह नहीं सकता था कि यह वही श्वेता है, जो अपने college की miss fresher and farewell रही थी।

श्लोक भी श्वेता के प्यार की एक झलक पाने को तरस जाता था। घर से बाहर वो जाते नहीं थे, क्योंकि बच्चे बाहर निकलते ही restaurant, mall, खिलौने और dresses की ज़िद्द करने लगते थे।

मतलब जिंदगी को खूबसूरत कहने को कुछ नहीं रह गया था।

एक दिन श्वेता श्लोक के कपड़े धोने के लिए डाल रही थी तो हमेशा की तरह सब जेबें खंगालने लगी कि जरूरत का कुछ है तो नहीं..

उसे श्लोक की jeans में एक गुलाबी, खूशबूदार काग़ज़ और एक दस का सिक्का मिला।

काग़ज़ को पढ़कर श्वेता के पैरों तले जमीन खिसक गई...


आगे पढ़ें, प्यार पर घात (भाग-3) में...

Monday, 23 June 2025

Story of Life : प्यार पर घात (भाग-1)

प्यार पर घात (भाग-1)


श्लोक और श्वेता, अपने college के most popular students थे।‌ दोनों एक-दूसरे को compliment करते हुए, दोनों पढ़ाई में तेज, debate में expert, देखने में श्लोक बेहद smart और श्वेता गज़ब की खूबसूरत...

समय के साथ दोनों नजदीक आने लगे और एक दूसरे से बेइंतहा प्यार करने लगे।

ऐसी बातें छुपती तो है नहीं, तो उनके घर वालों को पता चल गई।

दोनों परिवार आपस में मिले और मिलकर बहुत खुश हुए। उन्होंने श्लोक और श्वेता को विवाह के अटूट बंधन में बांध दिया।

उन दोनों ने सोचा भी नहीं था कि सब इतनी आसानी से और जल्दी से हो जाएगा। 

पर वो खुश बहुत थे, कि उनके प्यार को उनके परिवार का साथ मिल गया।

एक दूसरे में खोए, उनकी जिंदगी सुखपूर्वक व्यतीत होने लगी।

कुछ सालों बाद ही, दोनों परिवारों से दबाव पड़ने लगा कि अब उन्हें अपने जीवन को संपूर्णता देने के लिए बच्चे की planning करनी चाहिए।

दोनों working थे तो इतनी जल्दी बच्चे की planning नहीं करना चाहते थे। पर परिवार की इच्छा को नकार देना भी नहीं चाहते थे, आखिर निर्विवाद उन्होंने उन दोनों को एक जो किया था।

Finally उन्होंने बच्चा plan कर ही लिया... 

पूरे नौ महीने श्वेता को problem रही, पर श्लोक ने जी-जान से सलीना का भरपूर ख्याल रखा।

आखिर वो दिन भी आया, जब उनके घर शौर्य ने जन्म लिया। उसके होने से हर ओर आनंद ही आनंद छा गया।

लेकिन शौर्य के होने के कुछ महीने बाद से ही उनकी जिंदगी ने करवट बदलनी शुरू कर दी।

श्वेता बच्चे में इतनी रम गयी कि उसे न श्लोक का ख्याल था, न अपना...

साथ ही pregnancy के कारण उसने गजब का weight put-on कर लिया था, जिसे वो चाहकर भी कम नहीं कर पा रही थी, या यूं कहें कि करना ही नहीं चाह रही थी।

शौर्य, जब 6 महीने का हो गया, तो श्वेता ने फिर से office join कर लिया। अब तो रहा-सहा समय भी जाता रहा। 

लेकिन एक बात श्वेता ने जरूर से notice की थी कि office में पहुंचने के बाद ही उसके पास, उसके दीवाने मंडराने लगते थे, जो अब उससे कन्नी काट रहे थे।

शायद उसके weight put-on करने से...

Office से लौटकर, उसी रात सारे काम खत्म करके वो जब श्लोक के नजदीक पहुंची तो श्लोक ने देखा कि श्वेता कुछ मुरझाई-सी हुई थी।

क्या हुआ, मेरी beautiful wife को, श्लोक ने बड़े प्यार से श्वेता की लंबी घनी जुल्फों में हाथ फेरते हुए कहा...

क्या beautiful wife, श्लोक... मैंने बहुत weight put-on कर लिया है, office में मौजूद मेरे सारे दीवाने, जो बात-बे-बात मेरे पास ही डोलते रहते थे। 

वही लोग आज मेरे पास फटकना तो दूर, देख भी नहीं रहे थे...

कहीं तुम भी बदल तो नहीं जाओगे? मुझसे मुंह तो नहीं मोड़ लोगे?

आह! कैसी बात करती हो श्वेता?


आगे पढ़ें, प्यार पर घात (भाग-2) में...