सावन का मस्त महीना चल रहा है, पिछले 8 सालों से सावन में गीतों से सजी कहानियाँ प्रस्तुत कर रहे हैं, जो कि लोगों को बहुत पसंद आती है।
तो इस सावन में एक बार फिर गीतों से सजी कहानी प्रस्तुत है, इसके भी सभी अंग का आनंद लेकर मुझे कृतार्थ करें…
सावन के झूले (भाग-1)
अनिका की नई-नई शादी हुई थी, अनिका जितनी बला की खूबसूरत थी, सुहास उतना ही handsome and romantic था।
जैसी सोची थी अनिका ने जिंदगी, यह उससे भी बहुत बेहतरीन थी। सुहास अनिका को हद से ज्यादा प्यार करता था। और हमेशा यही गुनगुनाता रहता-
“तेरे चेहरे से नज़र नहीं हटती
नज़ारे हम क्या देखें”
अनिका के लिए दिन सोना और रात चांदी सी गुज़र रही थी, हर पल सुहास के साथ से उसे ऐसा लगता था, मानो उससे सुखी इस जहां में दूसरा नहीं।
सावन का romantic मौसम भी आ गया।
अनिका सुबह ही उठकर नहा-धोकर, बन-ठन कर शिव आराधना करने चली गई।
जब वो लौटी, तब तक सुहास भी उठ चुका था और अनिका के रूप को देखकर मोहित हो गया और गाने लगा-
“यह मौसम का जादू है मितवा
न अब दिल पर काबू है मितवा”
अनिका अपनी खूबसूरती पर इतरा कर सुहास की बाहों में समा गई। अभी दोनों प्रेमालाप में ही थे कि फोन घनघना उठा।
जब सुहास ने phone उठाया, तो उस बात को सुनकर वो धम्म से सोफे पर बैठ गया, उसके चेहरे पर उदासी साफ़ झलक रही थी।
सुहास को ऐसा देखकर अनिका सहम गई कि न जाने phone पर ऐसी क्या बात हुई, जिसने चहकते हुए सुहास को यूं खामोश कर दिया…
आगे पढ़ें, सावन के झूले (भाग-2) में…
