Monday, 12 October 2020

Poem: New Normal

This poem has been created by my daughter, Advika. The poem won second position in an interschool competition. Your feedbacks will help her enhance & grow. You can also view the video below, which was sent for the competition, and has her recitation in the background.

New Normal


The things are now washed and sanitized through,

New normal has brought new things to me and you.

The Humanistic approach is now coming true,

Thinking and knowing self is somewhat new.

Studying online and WFH has shown,

Limits of our self control are now known.

The screen time has rapidly grown,

And parties today are now inside a phone.

Bonds are stronger than usual.

Calendars are flipped when days have passed dual!

The nature is also getting re-fuel,

Our attitude towards it was way so cruel!

Going out with sanitizers and masks on.

In entertainment, binging stations have won.

Sleeping till noon & awake until dawn,

Giving exams with a big sleepy yawn.

Conditioning to laziness has been so well,

The outfit of ours can clearly tell.

Self care required is the loudest ringing bell,

For an appetitive stimulus your body may swell.

New normal has brought a life really new,

Later relishing it will be me & you.





Friday, 9 October 2020

Poems : अरुणोदय व विधा

आज आप सब के साथ मुझे  राजस्थान(सिरोही) के मंझे हुए साहित्यकार छगन लाल गर्ग "विज्ञ" जी की कविता को साझा करते हुए अपार प्रसन्नता हो रही है। इनको हिन्दी साहित्य में उत्कृष्ट स्थान प्राप्त है।

छगन लाल जी ने अपनी रचना को दुर्मिल सवैया वर्णिक छंद में प्रस्तुत किया है।

इस विधा में इनका सुप्रभात कहना अति आकर्षक लगा, तो आप सबके ‌साथ साझा कर रहे हैं।

आइए हम इस कविता के माध्यम से अद्भुत सुप्रभात का आनन्द लें।

अरुणोदय व विधा 



छवि तारक ज्योति उजास भरी , 

उर नीरव नेह विचुंबित है !


अरुणोदय स्नेहिल स्वप्न जगा , 

नव चेतन रूप विमोचित है !


वसुधा जड़ अंतर विश्व बसा , 

नभ में नव रश्मि प्रकाशित है !


गुरु देव दया दृग दीप जले , 

मन मंदिर श्याम  सुशोभित है  !!


Disclaimer:

इस पोस्ट में व्यक्त की गई राय लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं। जरूरी नहीं कि वे विचार या राय इस blog (Shades of Life) के विचारों को प्रतिबिंबित करते हों। कोई भी चूक या त्रुटियां लेखक की हैं और यह blog उसके लिए कोई दायित्व या जिम्मेदारी नहीं रखता है। 

Thursday, 8 October 2020

Kids stories : खिलौने

खिलौने



टिन्नी अपने मम्मी पापा की इकलौती संतान थी। उसके मम्मी-पापा दोनों job करते थे और दोनों ही high post पर थे।

तो दोनों ही के पास समय नहीं था। जिस के कारण, वो टिन्नी की हर बात को सिर-माथे रखते थे। उसकी सारी फरमाइश, जरुरत हो या ना हो, झट पूरी कर देते थे।

टिन्नी के पास, खिलौनों की भरमार थी, फिर भी हर महीने ना जाने कितने और आ जाते।

टिन्नी एक भी खिलौने ढंग से नहीं रखती थी। मंहगे से मंहगे खिलौने, चंद दिनों में ही बेकद्री की भेंट चढ़ जाते।

टिन्नी की माँ ने टिन्नी की देखभाल के लिए एक नई कामवाली को रख लिया।

कामवाली के साथ उसकी बेटी कमली भी आती, जो  टिन्नी की हमउम्र थी।

जब तक कमली की माँ काम करती, टिन्नी कमली के साथ खेला करती।

कमली को टिन्नी के खिलौने बहुत भाते, वो बड़ ललचाई नज़रों से उन्हें देखा करती।

एक दिन कमली की माँ भांप गई, कि कमली खिलौने देखकर ललचाती है तो वो अनहोनी के डर से अंदर तक कांप गई। उसे अपने अच्छे काम छूटने का डर सताने लगा।

उसने कमली को बहुत समझाया, कि दूसरे की चीज़ देखकर नहीं ललचाते, पर कमली का बाल मन खिलौने देखकर, सब भूल जाता।

एक दिन कमली नहीं आयी, केवल उसकी माँ ही आयी।

उस दिन टिन्नी के मम्मी पापा देर से आने वाले थे।

तो टिन्नी पीछे पड़ गई, कि उसे कमली से मिलने जाना है।

कमली की माँ समझाने लगी, उनका घर बहुत छोटा है, टिन्नी को वहाँ अच्छा नहीं लगेगा।

 चलना है, चलना है, कहकर टिन्नी रोने लगी।

कमली की माँ, उसे अपने साथ ले गयी। जब टिन्नी वहाँ पहुंची तो उसने देखा, घर सचमुच बहुत छोटा था। पर कमली को देख कर वह बहुत खुश हो गई।

कुछ देर बाद वो कमली के पीछे पड़ गई कि कमली अपने खिलौने लेकर आए, और वो लोग खेल सके।

कमली अपने पुराने और टूटे-फूटे खिलौने लेकर चली आई।

टिन्नी ने देखा, कमली ने पुराने और टूटे-फूटे खिलौने भी बहुत संभाल कर रखे थे।

टिन्नी का पुराने और टूटे-फूटे खिलौनों में बहुत मन नहीं लगा, वो जल्दी अपने घर लौट आई।

आते ही सब से पहले वो अपने खिलौनों के पास गयी।

शाम को जब मम्मी पापा घर आए, तो उन्होंने देखा कि टिन्नी ने अपनी खिलौनों की shelf को बहुत अच्छे से सजा लिया था। साथ ही कुछ खिलौने उसने नीचे भी सजाकर रखें थे।

उन लोगों ने टिन्नी की, shelf सजाने के लिए बहुत सारा प्यार किया और तारीफ भी की।

फिर उन्होंने पूछा, कुछ खिलौने नीचे क्यों हैं?

तो टिन्नी ने बताया कि वो आज कमली के घर गयी थी, जहाँ उसने अपने पुराने, टूटे-फूटे खिलौने भी बहुत संभाल कर रखे थे।

यह देखकर उसने decide किया कि वो भी अपने खिलौने भी ढंग से रखेगी। साथ ही कुछ अच्छे खिलौने कमली को भी दे दे, जिससे कमली को पुराने, टूटे-फूटे खिलौनों से ना खेलना पड़े।

टिन्नी के मम्मी पापा उसकी, समझदारी व अच्छी सोच से बहुत खुश हुए।

टिन्नी अब सारे खिलौने बहुत ढंग से रखने लगी, हर महीने ढेरों खिलौने लेना भी उसने बंद कर दिया।

कमली, अब टिन्नी के खिलौने देखकर ललचाती नहीं थी, पर अब उसे टिन्नी से बहुत प्यार हो गया था।