मेरी बेटी अद्विका ने brush से उकेर कर नारायण के निराकार रूप को कान्हा के साकार रूप में बनाया।
तो मन बरबस ही उस ओर खिंचा चला गया और कलम ने यह भाव उकेर दिए, आज जन्माष्टमी महोत्सव के पावन पर्व पर उसी को साझा कर रहे हैं…
तुम हुए साकार
तुम निराकार,
तुम हुए साकार,
नारायण, कान्हा बनकर।
मुरली की तान,
मीठी मुस्कान,
नटवर गिरिधारी बनकर।
मोरपंख का मान,
भक्तों की शान,
श्याम वर्ण कृष्णा बनकर।
लकुटी को बांध,
दिया सुख का भान,
रक्षक बनवारी बनकर।
तुम निराकार,
तुम हुए साकार,
नारायण, कान्हा बनकर।
आप सभी को जन्माष्टमी के पावन पर्व पर हार्दिक शुभकामनाएँ!
