Wednesday, 30 September 2026

Article : दुखों की दुनिया

आजकल मन अशांत-सा रहता है, ऐसा प्रतीत होता है मानो दुनिया में सबसे अधिक दुःख हमें ही है।

न किसी से मिलने की इच्छा, न कहीं जाने की। मानो दुनिया रुकी-सी, थमी-सी हो गई हो। आपको भी कभी ऐसा लगता होगा? 

पर एक बात कहें, मानो तो आप ही सबसे ज़्यादा दुःखी, और अगर चारों ओर नजर घुमाएंगे तो एहसास होगा कि पूरी दुनिया ही दुखों की है। A true sense of melancholy!

दुखों की दुनिया


कहीं कोई सुखी है ही नहीं। किसी को किसी बात की परेशानी, तो किसी को किसी और बात का ग़म।

सच में इधर कुछ ऐसे लोगों से मुलाकात हुई कि एहसास हुआ कि अभी भी हम ही भाग्यशाली हैं कि अभी भी हम बहुत सुखी हैं।

दरअसल हम मनुष्यों की एक विशेष आदत होती है, कि हम दूसरे के दुःख को कम और अपना बढ़ा-चढ़ाकर बताते हैं।

जबकि दुख तो दुःख होता है, कम या ज़्यादा कहाँ होता है। वैसे ही जैसे दर्द तो दर्द होता है, किस जगह हो‌ रहा है, उससे उसकी intensity में कोई फर्क नहीं पड़ता है। 

तो दूसरों की तकलीफ़, कष्ट, परेशानी की समझने का प्रयास कीजिए, उसे खत्म करने की कोशिश कीजिए। इससे देखिएगा, आपके कष्ट अपने आप कम लगने लगेंगे।

और शायद सचमुच दूसरों के दुःख कम करते-करते आपके दुःख कम हो जाएँ या फिर शायद खत्म ही हो जाएँ।


कबीरदास जी का यह दोहा शायद आपने सुना होगा-

“बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय।

जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय।।”


आज उसी दोहे की तर्ज़ पर-

“दुःखी जो देखन मैं चला, दुःखी मिलिया सब कोय।

जो दिल खोजा आपना, मेरा दुःख ही कम होय।।”


हे ईश्वर, आपसे कामना है कि इस दुखों की दुनिया में से सबके दुखों को खत्म कर दें और सभी को सुखी करें।

सर्वे भवन्तु सुखिन:, सर्वे भवन्तु निरामया...

Tuesday, 29 September 2026

Article : हमारे अपनों के दिन

इस वर्ष पितृपक्ष या कनागत की शुरुआत 26 September (शनिवार) को पूर्णिमा श्राद्ध के साथ हो चुकी है, और इसका समापन 10 October (शनिवार) को सर्वपितृ अमावस्या के दिन होगा।

इन विशेष दिनों को हमारे अपनों के दिन भी कहा जा सकता है, क्योंकि इन दिनों में हम किसी देवी-देवता की पूजा-अर्चना नहीं करते हैं, बल्कि अपने पूर्वजों की पूजा-अर्चना करते हैं।

अपने पूर्वजों के विशेष दिन में पंडित जी को बुलाकर उनके नाम से दान-पुण्य, पूजा-हवन इत्यादि करते हैं‌।

पर यह विशेष दिन हमारे लिए और अधिक महत्वपूर्ण इसलिए हो जाते हैं, क्योंकि इन दिनों में हम ईश्वर से अधिक नज़दीक हो जाते हैं…

हमारे अपनों के दिन


हमारे द्वारा की गई पूजा-अर्चना ईश्वर जल्दी स्वीकार कर लेते हैं, क्योंकि इस समय में की गई पूजा-अर्चना दान-पुण्य इत्यादि हमारे पूर्वजों से होते हुए ईश्वर तक पहुंचते हैं।

हमारे पूर्वज, ईश्वर के प्रिय होते हैं और हम अपने पूर्वजों के। तो हो गई न ईश्वर से नज़दीकी!

पर क्या इसमें उन्हीं पूर्वजों की पूजा-अर्चना करनी चाहिए, जो स्वर्गवासी या ब्रह्मलीन हो गए हैं?

नहीं, ऐसा नहीं है कि केवल उन्हीं की पूजा-अर्चना से पुण्य अर्जित किया जा सकता है। 

बल्कि उनकी पूजा-अर्चना के साथ-साथ ही अगर आप अपने जीवित दादा-दादी, नाना-नानी, माता-पिता या सास-ससुर की सेवा करेंगे, उनकी इच्छाओं की पूर्ति करेंगे, उनके साथ समय व्यतीत करते हैं, तब भी आप को वही पुण्य मिलेगा।

यह विशेष दिन हमारे अपनों के हैं, उनकी सेवा और पूजा-अर्चना के दिन है।

भारतीय संस्कृति में यह 16 दिन इसलिए ही निर्धारित किए गए हैं, कि हर साल हम atleast 16 दिन अपने पूर्वजों से जुड़ें, उन्हें धन्यवाद दें, उनके नाम से दान-पुण्य पूजा-अर्चना करें।

पर जो चले गए, उनके लिए विधिवत कर्मकाण्ड संस्कार करना, और हमारे जो बुजुर्ग जीवित हैं उन्हें neglect करने से कुछ पुण्य अर्जित नहीं होगा।

अगर पूरी प्रक्रिया विधिवत करनी है, तो जो ब्रह्मलीन पूर्वजों के लिए पूजा-अर्चना दान-पुण्य करें और जो बुजुर्ग जीवित हैं उनकी सेवा-सुश्रुषा करें, उन्हें मान-सम्मान दें, उनके साथ समय व्यतीत करें।

तब आपकी पूजा अर्चना विधिवत पूर्ण होगी। और उनके आशीर्वाद से होंगे आपके सभी कार्य सम्पन्न व पूर्ण होगी सभी मनोकामनाएं, जिससे आप सुखी, स्वस्थ और समृद्ध रहेंगे।

एक और सबसे बड़ी बात होगी, हमारे अपनों के दिन में अपने पूर्वजों और बुजुर्गों की सेवा से, कि आपके बच्चों में संस्कार आएंगे, वो भी सबसे जुड़ेंगे और सबसे बढ़कर वो सीखेंगे। अपनों से जुड़ना, उनकी सेवा करने, उन्हें मान-सम्मान देना।

और एक दिन पलट कर यह आपको भी सुख प्रदान करेगा, क्योंकि ध्यान रखिएगा कि एक दिन बुजुर्ग सबको होना है और ब्रह्मलीन भी।

तो जाने से पहले सबकी सेवा कर लीजिए, क्योंकि ईश्वर भी उन्हीं से प्रसन्न होते हैं, जिनके पूर्वज और बुजुर्ग उनसे प्रसन्न हैं।

हमारे सभी पितर तृप्त रहें, हम से प्रसन्न रहें और उनकी कृपा दृष्टि सदैव बनी रहे।

हमारे सभी पूर्वजों व बुजुर्गों को शत-शत प्रणाम!

Monday, 28 September 2026

India's Heritage : Bharatiya Math-Magicians (Virahanka)

Maths Storytelling Day था, तो India's Heritage segment में महान महर्षि बौधायन के विषय में जानकारी share की थी- https://shadesoflife18.blogspot.com/2026/09/indias-heritage-bharatiya-math.html?m=1

फिर उसी श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए भारत के एक और महान गणितज्ञ, जिन्हें Madhava of Sangamagrama कहते हैं, के विषय से जुड़ी कुछ बातें share की- https://shadesoflife18.blogspot.com/2026/09/indias-heritage-bharatiya-math_0152809532.html?m=1

इनके बाद महान गणितज्ञ और संस्कृत भाषा के ज्ञाता श्रीधराचार्य के विषय में जानकारी share की- https://shadesoflife18.blogspot.com/2026/09/indias-heritage-bharatiya-math_0980722856.html?m=1

आज भारत के एक और महान गणितज्ञ और संस्कृत के प्रकांड विद्वान, विरहांक के विषय में जानकारी share कर रहे हैं।

Bharatiya Math-Magicians (Virahanka)


(I) Who Was He :

इन्होंने संस्कृत भाषा की ऐसी विद्या में maths के formulae दिए हैं, जो कि अपने आप में सर्वोच्च है और सिद्ध करती है कि क्यों भारतीय संस्कृति सर्वोपरि है।

Virahanka 6th से 8th c. CE के बीच के एक प्राचीन भारतीय गणितज्ञ और छंदशास्त्री थे, जिन्होंने संस्कृत छंदों का अध्ययन करते हुए Fibonacci Sequence को सबसे पहले खोजा था।

संस्कृत भाषा में अत्यंत समृद्ध और व्यवस्थित छंद शास्त्र (जिसे पिंगल शास्त्र भी कहते हैं) पाया जाता है, जिसके आधार पर वैदिक और लौकिक संस्कृत के श्लोक रचे जाते हैं।

इनके विषय में पढ़कर आपको एहसास होगा कि भारत सदैव से महान और विकसित रहा है।


(II) Major Information :

  • Time Period- इनका अनुमानित समय 6th to 8th c. CE माना जाता है।
  • Treatises- इन्होंने Pingala (4th c. BCE) के ‘छंदसूत्र’ पर आधारित 'वृत्तजातिसमुच्चय' नामक ग्रंथ की रचना की थी।


(III) Main Contributions :

  • Expansion Process- इस ग्रंथ में इन्होंने मात्रा-छंदों के pattern और उनकी गिनती के लिए ‘expansion’ process की विस्तृत व्याख्या की है।
  • Virahanka-Fibonacci Sequence (Arithmetic Progression + Recursive Rule)- उनका सबसे बड़ा योगदान उस number sequence की खोज है, जिसे आज western world में गलती से ‘Fibonacci Numbers’ कहा जाता है। उन्होंने Italian mathematician Fibonacci (1202 CE) से लगभग 500 वर्ष पहले ही इस सूत्र की खोज संस्कृत कविता के छंदों (मात्राओं) को गिनने के लिए कर ली थी। विरहंक संख्या अनुक्रम का Recursive Formula विरहंक ने दिया था, कि यदि किसी sequence का अगला पद निकालना हो, तो वह पिछले दो पदों के sum के बराबर होता है। इसे गणितीय रूप में इस प्रकार लिखा जाता है- [V(n) = V(n-1) + V(n-2)] Initial conditions यह हैं कि उसके शुरुआती terms कुछ इस प्रकार हैं- [V₀ = 0, V₁ = 1] [At some places, V₀ = 1] इस सूत्र के आधार पर बनने वाली विरहंक संख्या श्रृंखला निम्नलिखित है- [0, 1, 1, 2, 3, 5, 8, 13, 21, 34, 55]
  • Combinatorial Rules for Prosody- विरहंक ने संस्कृत कविता में लघु (short syllable = 1 मात्रा) और गुरु (long syllable = 2 मात्रा) के संयोजन से बनने वाले कुल छंदों (rhythms) की संख्या ज्ञात करने के लिए इस सूत्र का आविष्कार किया था।यदि हमें n मात्राओं (beats) वाले कुल संभावित छंदों की संख्या निकालनी है, तो उसका सूत्र है- [n = V(n+1)] E.g.- यदि कुल मात्राएँ n = 3 हैं, तो कुल संयोजन V₄ = 3 होंगे (जैसे; लघु-लघु-लघु [1+1+1], गुरु-लघु [2+1], लघु-गुरु [1+2])।
  • Connection to Golden Ratio- हालांकि विरहंक ने सीधे तौर पर decimal मान नहीं दिया था, लेकिन उनके इसी सूत्र के दो लगातार नंबरों को विभाजित करने पर Golden Ratio प्राप्त होता है- [Lim (n→∞) V(n)/V(n-1) = φ ≈ 1.6180339887...] यह ratio प्रकृति की बनावट (फूलों की पंखुड़ियाँ, शंख आदि) में हर जगह दिखाई देता है।


ऐसे ही अनेकानेक Math-Magicians, Scientists, वीर‌ योद्धा, भाषाओं के ज्ञाता, दार्शनिकों, आदि भारत के कण-कण में व्याप्त हैं, जिनकी जानकारी हम समय-समय पर अपने India's Heritage segment में share करते रहेंगे।

तो इससे जुड़े रहिए और विशेष रूप से अपने बच्चों को बताएँ, जिससे वो भारत का सच्चा और समृद्ध इतिहास जान सकें और गर्व कर सकें अपने भारत पर।

मेरा भारत महान!

Stay tuned…

Sunday, 27 September 2026

India's Heritage : Bharatiya Math-Magicians (Sridharacharya)

Maths Storytelling Day से India's Heritage segment में भारत के गणितज्ञों के विषय में जानकारी share कर रहे हैं।

सबसे पहले महान महर्षि बौधायन के विषय में जानकारी share की थी- https://shadesoflife18.blogspot.com/2026/09/indias-heritage-bharatiya-math.html?m=1

फिर उसी श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए भारत के एक और महान गणितज्ञ, जिन्हें Madhava of Sangamagrama कहते हैं, के विषय से जुड़ी कुछ बातें share की थीं- https://shadesoflife18.blogspot.com/2026/09/indias-heritage-bharatiya-math_0152809532.html?m=1

आज भारत के एक और महान गणितज्ञ श्रीधराचार्य के विषय में जानकारी share कर रहे हैं। इसे पढ़कर आपको एहसास होगा कि भारत सदैव से महान और विकसित रहा है।

और साथ ही यह भी ज्ञात होगा कि संस्कृत भाषा के ज्ञाता किस तरह से गणित से जुड़कर यह सिद्ध कर रहे हैं कि संस्कृत भाषा और विज्ञान एक ही मंच पर आसीन हैं…

Bharatiya Math-Magicians (Sridharacharya)


अर्थात् संस्कृत भाषा केवल एक भाषा नहीं है, बल्कि अपने आप में सम्पूर्ण है, जिसमें कला, विज्ञान, दर्शन सब निहित हैं।

बात करते हैं श्रीधराचार्य जी के विषय में, और उनसे जुड़ी खोजों व सिद्धान्तों के विषय में।


(I) Main Overview :

श्रीधराचार्य 8वीं से 9वीं शताब्दी के एक प्रसिद्ध भारतीय गणितज्ञ, संस्कृत पंडित और दार्शनिक थे।

  • Time- इनका अनुमानित समय 750 से 930 CE के बीच माना जाता है।
  • Birthplace- इनका जन्म बंगाल के हुगली क्षेत्र (दक्षिण राधा) के भूरिश्रेष्टि गाँव में हुआ था।


(II) Major Contributions :

  • Quadratic Formula [x=(-b±√{b²-4ac})/2a]- श्रीधराचार्य का सबसे प्रसिद्ध योगदान Quadratic Formula है, जिसका उपयोग किसी quadratic equation (ax²+bx+c=0) के roots या हल निकालने के लिए किया जाता है। यदि कोई Quadratic Equation इस रूप में है; [ax²+bx+c=0] तो इसे हल करने का श्रीधराचार्य सूत्र है; [x=(-b±√{b²-4ac})/2a]
  • Rules of Zero [x±0=x, 0(x)=0]- उन्होंने 0 को add करने [x+0=x], subtract करने [x-0=x], और multiply करने (x×0=0) के नियम समझाए।
  • Main Treatises- उन्होंने ‘पाटीगणित’ और ‘त्रिशतिका’ (पाटीगणितसार) नामक प्रसिद्ध पुस्तकें लिखीं, जिनमें अंकगणित और बीजगणित के नियम बताए गए।
  • Area of Circle- उन्होंने circle के area को निकालने के लिए भी शुरुआती सूत्र दिए।

मेरा भारत महान!

Saturday, 26 September 2026

India's Heritage : Bharatiya Math-Magicians (Madhava)

(I) Main Introduction :

कल Maths Storytelling Day था, तो India's Heritage segment में महान महर्षि बौधायन के विषय में जानकारी share की थी- https://shadesoflife18.blogspot.com/2026/09/indias-heritage-bharatiya-math.html?m=1

आज उसी श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए भारत के एक और महान गणितज्ञ, जिन्हें Madhava of Sangamagrama कहते हैं, के विषय से जुड़ी कुछ बातें share करेंगें।

इन्हें पढ़कर आपको एहसास होगा कि भारत सदैव से महान और विकसित रहा है।

इनके द्वारा की गई खोजें गणित के विषय में विशेष महत्त्व रखती हैं। और हमें हमेशा से यही बताया गया कि उन खोजों को विदेशी गणितज्ञों ने खोजा है। पर आप जब इसे पढ़ेंगे, तो आप को यह ज्ञात होगा कि हमें कितनी बातों से अनभिज्ञ रखा गया या false information (myth) दी गई हैं।

आइए जानते हैं माधव जी और उनके द्वारा की गई खोजों और उन खोजों के सिद्धांत (theorems/principles) के विषय में…

Bharatiya Math-Magicians (Madhava)


(II) Overview :

Madhava of Sangamagrama ने 14th-15th c. CE में maths और astronomy के क्षेत्र में कई revolutionary discoveries की थीं।

इन्होंने ‘Kerala School of Astronomy and Mathematics’ की नींव रखी थी।


(III) Major Contributions :

  • Infinite Series [S∞=a/(r-1), r<|1|]- माधव ने sine (sin), cosine (cos) और arctangent (tan) जैसे trigonometric functions के लिए Infinite Series की खोज की थी। इन्हें “Madhava Series” भी कहा जाता है।
  • Accurate Pi Approximation [π≈3.14159265359]- उन्होंने अपनी Infinite Series का उपयोग करके π (Pi) का मान 13 decimal places तक बिल्कुल accurate ज्ञात किया था। इसे Madhava-Leibniz series के रूप में भी जाना जाता है।
  • Calculus Foundations [(d/dx),∂]- Europe में Isaac Newton और Gottfried Leibniz द्वारा calculus के विकास से लगभग 200–250 वर्ष पहले ही माधव ने differentiation और integration से जुड़ी कई अनन्त processes और approximations का उपयोग कर लिया था।
  • Error Term Evaluation [F1n=(1/4n)]- Infinite Series के योग में सटीकता लाने और errors को सुधारने के लिए उन्होंने correction terms की अवधारणा का विकास किया था।

मेरा भारत महान! 

Friday, 25 September 2026

India's Heritage : Bharatiya Math-Magicians (Baudhayana)

(I) Today's Occasion :

आज Maths Storytelling Day है, तो सोचा एक अच्छा मौका है। India's Heritage segment में बच्चों को भारत के इतिहास से, नहीं बल्कि यह कहना अधिक उचित होगा कि भारत के विकास की, कहानी सुनाई जाए।

नहीं, अभी के विकास की बात नहीं कर रहे हैं, बल्कि बात कर रहे हैं भारत के उस विकास की, जो यह सिद्ध करता है कि भारत आज नहीं बल्कि शताब्दियों पहले से विकसित है।

आज Maths Storytelling Day है, तो बात भी भारत के mathematicians की करेंगे, जिसे पढ़ने के बाद आपको पता चलेगा कि भारत सदैव से महान और विकसित था।

इस श्रृंखला में आज महर्षि बौधायन के विषय में बात करते हैं…

Bharatiya Math-Magicians (Baudhayana)


(II) Overview :

महर्षि बौधायन प्राचीन भारत के एक महान गणितज्ञ, व दार्शनिक और वैदिक ऋषि थे।

हमें हमेशा से यह पढ़ाया गया है कि Pythagorean Theorem Greece के great mathematician Pythagoras ने दी है, जबकि उनसे बहुत पहले ही 7th-8th c. BCE में ही महान महर्षि बौधायन ने यह theorem दे दी थी।

आइए जानते हैं और किस-किस का ज्ञान वो पहले ही दे चुके थे। उन्होंने Pythagorean Theorem और Geometry से जुड़े कई महत्वपूर्ण principle Greeks से सदियों पहले दिए थे।


(III) Main Introduction :

  • Time- इनका समय लगभग 8th से 7th c. BCE (लगभग 800 ईसा पूर्व) माना जाता है।
  • Relation- ये कृष्ण यजुर्वेद की तैत्तिरीय शाखा से संबंधित थे और वैदिक संस्कृति के ज्ञाता थे।
  • Main Treatises- इन्होंने 'बौधायन सूत्र' की रचना की, जिसके अंतर्गत श्रौतसूत्र, धर्मसूत्र, गृह्यसूत्र और बौधायन शुल्बसूत्र जैसे महत्वपूर्ण ग्रंथ आते हैं।


(IV) Major Contributions :

  • Baudhayana-Pythagoras Theorem [h=√(l²+b²) in ∆90°]- Pythagoras से सैकड़ों साल पहले बौधायन ने ही right-angled triangle के संबंध में यह theorem (rectangle का diagonal) दिया था, जिसके अनुसार किसी rectangle के diagonal का square उसके दोनों legs (base और height) के square के sum के बराबर होता है।
  • Square Root of 2 [√2≈1.414216]- इन्होंने √2 का मान बहुत ही accuracy के साथ (approximately 1.414216) निकाला था, जो पांच decimal places तक सही है।
  • Value of Pi [π≈(900/289)≈3.114]- यज्ञ altars के निर्माण और circular figures को बनाने के लिए इन्होंने Pi (π) के अनुमानित मान का उपयोग किया था।
  • Shulbasutras [e.g. s=√(a•b)]- यह geometry और mathematical principles का सबसे प्राचीन ग्रंथ है, जिसमें altars के accurate mesaurement और area को बराबर करने के नियम दिए गए हैं।

मेरा भारत महान!

Madhava-https://shadesoflife18.blogspot.com/2026/09/indias-heritage-bharatiya-math_0152809532.html?m=1

Thursday, 24 September 2026

Short Story : अपनों को जानो

अपनों को जानो

संजना और उसकी सास रैना में आपस में बहुत अच्छी बनती थी। कोई कह ही नहीं सकता था कि दोनों सास-बहू हैं, बल्कि सब उन्हें मां-बेटी ही समझते थे।

आज भी दोनों रजत की पसंद का खाना बना रहे थे। दोनों ही रजत को बहुत चाहते थे, तो उसकी हर पसंद उनके लिए सर्वोपरि थी।

रजत जब kitchen में गया तो दोनों उसे देखकर चहक उठीं।

“आ गए आप! आज मम्मी जी ने आपकी पसंद का शाही पनीर और मैंने लच्छा पराठा बनाया है। चलिए, खाना लगा देती हूं।

“हाँ संजना, पहले एक बात बताओ, तुम लोगों को याद है कि मुझे खानें में क्या पसंद है?” रजत गंभीर स्वर में बोला।

“हाँ, तभी तो बनाया है, पर इसमें इतना serious होने वाली क्या बात है?”

“मम्मी, मेरी favourite icecream?”

“Butterscotch!” रैना ने झट से बता दिया।

“और संजना तुम बताओ, मेरी favourite movie?”

“दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे! पर क्यों रजत? आखिर आज तुम यह सब कुछ क्यों पूछ रहे हो?”

“अच्छा, अब दोनों लोग यह बताओ कि मेरी saving कितनी है?
मैंने पैसे कहाँ-कहाँ invest किए हैं?
मैंने कितने की और कितनी life insurance policies ली हैं?
हम में से किसी को भी कोई critical health issue होगा तो कौन से hospital में admit होना है?
Ambulance number क्या है?”

“ऐसा भी क्या हो गया है रजत, जो तुम हमसे यह बेकार के प्रश्न कर रहे हो?” रैना गुस्से से बोली।

“नहीं माँ, यह बेकार के प्रश्न नहीं हैं, इन्हें परिवार में सबको पता होना चाहिए।
आज मैं बहुत दिनों बाद अपने दोस्त निखिल के घर गया था। वहाँ जाकर पता चला कि उसे अचानक से heart-attack आया और वो इस दुनिया से चला गया।
शिखा भाभी को उससे जुड़ी इस तरह की knowledge नहीं थी, अतः उसकी सारी saving या तो lapse हो गई, या है भी तो कहाँ और कितनी, उन्हें कुछ नहीं पता।
इस कारण उन्होंने अपने बेटे को private school से निकाल कर government school में डाला है, और खुद लोगों के घर-घर जाकर बर्तन-झाड़ू-पोंछा कर रही हैं।

इसलिए मैं चाहता हूँ, हम सबको केवल एक-दूसरे की पसंद ही न पता हो, बल्कि सारी financial information भी पता हो।
 
इसलिए, खाना खाने के बाद आज मैं आप लोगों के साथ सारी financial information share करूँगा, जिसे आप लोग अच्छे से ध्यान रखिएगा।
जब हम सब लोग, सब कुछ अच्छे से जानेंगे, तभी सही मायने में कह सकेंगे कि हम अपनों को जानते हैं।”

Wednesday, 23 September 2026

Recipe : Cornflakes Cookies

आजकल बेटे के exams हैं तो वो school से जल्दी घर आ रहा है। आते से ही भूख लगती, पर lunch तो अपने time से ही खाना है।

तो सोचा, कुछ हल्का-फुल्का बना लेते हैं, जो health के point of view से भी अच्छा हो और tasty भी हो।

तो आज बनाई, बचपन में सीखी हुईं Cornflakes Cookies.

Instantly और easily prepare होने वाली, तो चलिए आज इसे ही share कर देते हैं…

Cornflakes Cookies


Ingredients :

  • Fresh and thick malai - 1½ cup 
  • Powdered sugar - ¾ cup/as per taste 
  • Vanilla essence - 1 tsp.
  • All-purpose flour (maida) - 1 cup 
  • Baking powder - ½ tsp.
  • Cornflakes - 50g (lightly crushed; divided for dough and coating)


Method :

  1. मलाई में powdered sugar को डालकर अच्छे से मिला लें।
  2. अब इसमें मैदा और vanilla essence डालकर अच्छे से mix कर लें।
  3. फिर इसमें ½ (of amount) crushed cornflakes मिला लें।
  4. उसके बाद उसमें baking powder और 1 tsp. पानी डालकर अच्छे से mix कर लीजिए।
  5. अब आपको बहुत soft-सा dough मिल जाएगा। इस dough के 8 to 10 portions कर लीजिए।
  6. इन सभी cookies को बचे हुए crushed cornflakes में roll कर दीजिए।
  7. उसके बाद, हाथ में हल्का-सा घी लगाकर cookies का shape दीजिए।
  8. Airfryer को 200°C पर 5 minutes के लिए preheat कर लीजिए।
  9. अब cookies को silicon mould में place करके airfryer में 180°C पर 10 minutes के लिए airfry कर लीजिए।
  10. फिर cookies को पलटकर 10 minutes के लिए airfry कर लीजिए या फिर golden brown और crunchy होने तक।
  11. अब इसे 10 to 15 minutes के लिए ठंडा होने के लिए रख दीजिए। 

Your crunchy and aromatic Cornflakes Cookies are ready to serve. These rich yet flaky cookies are just perfect for your teatime, and become truly irresistible with Vanilla icecream!


Tips and Tricks :

  • Dough बहुत ही soft बनता है, आप चाहें तो cookies को सीधे छोटे-छोटे silicon mould में place कर दें, बनने के बाद वो खुद से proper shape ले लेंगे।
  • आजकल बहुत बड़ी-बड़ी cookies का trend चला है, इसलिए हमने भी बड़े shape की बनाई है, cookies को बिना shape दिए सीधे silicon mould में डालकर।
  • इसका dough बहुत soft होता है, इसलिए इसकी outer shell crunchy और inner shell soft होती है, जिससे यह cookies and cake का combo लगती है।
  • Cornflakes fresh लीजिए, तब ही अच्छा flavour आएगा, soggy होने से अच्छा crunch नहीं आता है। Fresh cornflakes होने से वो हाथ से ही easily crush हो जाते हैं।
  • Cornflakes को mixer grinder में डालकर crush मत कीजिएगा, वरना cornflakes का powder बन जाएगा, तो proper taste और crunch नहीं आएगा।

अब आप इंतज़ार किसका कर रहे हैं? अपनी चाय की रौनक में इन Cornflakes Cookies के संग चार चाँद लगाएँ…

Tuesday, 22 September 2026

Satire : महान हर एक इंसान

आज बैठे-बैठे यूँ ही ख़्याल आया कि कौन होते हैं महान, कौन हैं सबसे सफल इंसान। 

फिर बस लगा दिमाग अपने घोड़े दौड़ाने।

देश के प्रधानमंत्री- श्री नरेन्द्र मोदी महान... पर आखिर क्यों?

उन्होंने देश के विकास के लिए विभिन्न कार्य किए इसलिए?

नहीं, क्योंकि वो एक चाय बेचने वाले से देश के प्रधानमंत्री बन गए। वैसे कुछ उन्हें चाय बेचने वाले से देश बेचने वाले भी कहते हैं, हालांकि मोदी जी को इससे क्षणिक फ़र्क नहीं पड़ता।

वो देश के विकास के लिए अथक प्रयास करने में अपने दिन-रात न्यौछावर किए हुए हैं। 

जबकि कोई व्यक्ति अपने परिवार के प्रभाव से राजनीति में बड़ा कद पाता है, तो वो महान नहीं।

तो क्या गरीब होने से महान बना जा सकता है?

महान हर एक इंसान


सचिन तेंदुलकर एक महान cricketer माना जाता है। उसको देखेंगे तो वो भी दसवीं तक pass नहीं कर पाया था।

तो क्या महान खिलाड़ी बनने के लिए पढ़ाई-लिखाई में लद्दड़ होना चाहिए?

अमिताभ बच्चन, सदी के महानायक हैं।

बहुत सारी जगहों से reject होने के बाद सफलता के शिखर पर पहुंचे थे। 

तो क्या असफलता ही सफलता की कुंजी है?

ऐसे ही बहुत से उदाहरण हैं, जहां असफल समझे जाने व्यक्तियों ने महानता के झंडे गाड़े हैं। तो क्या प्रार्थना की जाए ईश्वर से? 

“हे प्रभो, हमें गरीब, पढ़ाई-लिखाई में लद्दड़ और असफल बनना, क्योंकि यही वो विशेषताएँ होती हैं, जो आगे चलकर मनुष्य को महान बनाती हैं।”

पर हाय-हाय! वैसे ही रह गए तो मोदी जी, सचिन तेंदुलकर और अमिताभ बच्चन आदि के जैसे न बन पाए तो!.. 

कहीं महान बनने की ख्वाहिश पूरी न हो पाई तो इंसान की श्रेणी में भी नहीं आएंगे।

वैसे एक theory में यह भी निकल कर आया है कि अविष्कार आलस्य के कारण ही संभव हो पाता है।

Isaac Newton आलसी था, तभी भरी दोपहरी में पेड़ के नीचे बैठा था, और वहीं बैठकर उसने गुरुत्वाकर्षण बल (gravity) का अविष्कार कर दिया, पर कसम से बाकी सब के आलस की वाट लगवा दी।

तो क्या आलसी होने से महान बना जा सकता है? 

भाई साहब! बहुत गड़बड़झाला है। यह ही नहीं समझ आ रहा है कि कामना किस की करें?

एक ही बात समझ में आती है, महान हर इंसान, जिसका जब भाग्य चमक जाए। 

इसलिए गरीब हो, असहाय हो, कमजोर हो, लद्दड़ हो, कोई वांधा नहीं।

भाग्य चमकना होगा, तो कभी भी चमक जाएगा और हो सकता है ऐसा चमके कि सब चकाचौंध हो जाएँ कि यह भी इतना महान बन गया। 

बाकी जिसकी डोर राम के हाथ, उसके सब बनते काम…

जय श्री राम!

Monday, 21 September 2026

Article : Taxpayers - The Unsung Heroes

Tax एक ऐसी चीज़ है, जिसका नाम सुनते ही लोगों के पसीने छूटने लगते हैं, हर कोई यह सोचने लगता है कि कैसे क्या किया जाए कि tax से छूटकारा मिल जाए…

पहले समझ लेते हैं कि tax होता क्या है और यह क्यों ज़रूरी होता है।


Tax मतलब “कर”, यह एक compulsory amount या financial charge है जो किसी भी सरकार द्वारा किसी व्यक्ति या organisation पर लगाया जाता है…


अब जान लेते हैं कि क्यों है tax collection इतना ज्यादा ज़रूरी क्यों है?

दरसअल tax collection के पैसों से ही सर्वोत्तम सुविधाएँ और बुनियादी ढाँचा प्रदान करने वाले सार्वजनिक कार्यों को किया जाता है।

मतलब, better infrastructure; जैसे सड़क, पुल, इत्यादि।

हालांकि हमारे देश में महज 6% taxpayers हैं, जिनमें से भी 5.5% पर तो zero tax है (Salary≤₹12 LPA).

2020-21 में आखिरी बार सार्वजनिक हुए आंकड़ों के मुताबिक, देश की कुल 132 करोड़ की population में 8.22 करोड़ taxpayers थे।

इनमें 7.5 करोड़ zero tax के दायरे में थे। वहीं, एक बड़ी आबादी मोटी कमाई करने के बावजूद कोई tax नहीं चुका रही। न सिर्फ सरकार बल्कि कई economist भी इस पर चिंता जता चुके हैं।

ऐसे में लगभग 1.5 करोड़ taxpayers के दम पर ही केंद्र सरकार को income tax collection करना पड़ रहा है।

USA (United States of America) में 60% population income tax भरती है, इसलिए ही उनके पास देश की सुरक्षा और सुदृढ़ता के लिए अधिक पैसा है।

देश के income tax collection में 48% हिस्सेदारी UP-बिहार और MP समेत 5 राज्यों की है। 

केंद्र द्वारा total tax collection में राज्यों के हिस्से 10.21 लाख करोड़ रुपये आते हैं। 

इसमें UP 1.8 लाख करोड़ रुपए यानी 18% की हिस्सेदारी के साथ पहले स्थान पर आता है।

बिहार की 10%, मध्यप्रदेश की 8% और महाराष्ट्र-राजस्थान की 6-6% है। जबकि हर साल 11% की रफ्तार से बढ़ रहे हैं करोड़पति।

Report के मुताबिक देश में एक साल के अंदर 7 करोड़ से ज्यादा संपत्ति वाले 11% बढ़कर 4.58 लाख हो गए।

Finance minister द्वारा राज्यसभा में दिए विवरण के मुताबिक साल 2021-22 में 10 लाख से एक करोड़ रुपये कुल income वाले लोग 77 लाख हो गए।

जब लोगों की paying capacity बढ़ रही है, तो उतनी तेज़ी से सरकार के पास पैसे एकत्रित क्यों नहीं हो रहे हैं?

पता है, क्यों? क्योंकि अमेरिका जैसी सुरक्षा, सुदृढ़ता और सुविधाएं तो सबको चाहिए, पर tax कोई नहीं देना चाहता है।

वहीं देश के कुछ नागरिक हैं, जो नियम से और समय से tax pay कर रहे हैं। जानना चाहते हैं, वो कौन लोग हैं?

Government employees. जी हाँ, आपने एकदम सही सुना। इन्हें अगर unsung heroes कहा जाए, तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।

ऐसा इसलिए क्योंकि यही हैं, जिनके दिए हुए tax से ही देश का निर्माण; जैसे पुल, सड़क, रेलवे station आदि बनते हैं। 

इनके लिए हुए tax से ही गरीबों को subsidy दी जाती है, उन्हें दुनिया-भर के सामान जैसे मुफ्त ration, hospital facilities और घर मिलते हैं।

पर यह कहाँ का न्याय है कि ख़र्चा एक व्यक्ति उठाए और सुविधा सबको एक-सी दी जाए? कुछ तो विशेष सुविधाओं पर केवल taxpayer का अधिकार होना चाहिए।

सुविधाएँ तो छोड़ दीजिए, taxpayer को इसके लिए न‌ कोई विशेष सम्मा दिया जाता है और न उनकी बढ़ाई की जाती है, कि “यही वो देश के नागरिक हैं जिनके कारण देश सुरक्षित और सुदृढ़ है।”

पर सरकार से यह निवेदन है कि taxpayers को विशेष सम्मान दिया जाए, उनके बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए विशेष schemes लाई जाएँ। कुछ सुविधाएं केवल taxpayers को प्रदान की जाएं। 

जब सरकार इस बात को अपने cognizance में लेगी, तब न केवल tax चोरी होना बंद होगा, बल्कि लोग आगे आएंगे tax pay करने।

और यह तो बताने की आवश्यकता नहीं है, जितना अधिक tax सरकार के पास होगा, उतना ही अधिक पैसा देश‌ की सुरक्षा और सुदृढ़ता के लिए होगा।

तब तक Taxpayers- The Unsung Heroes के लिए हमारा salute, “आप ही हैं देश की असली ताकत, आप हैं इसलिए ही देश सुरक्षित है, सुदृढ़ है।”

Friday, 18 September 2026

Recipe : सेव टमाटर की सब्जी

आज आपके लिए एक ऐसी recipe share कर रहे हैं, जो कि एक नहीं बल्कि दो-दो states की delicacy है।‌

इसकी एक खासियत यह भी है कि जब घर में सब्जी न हो, तब भी आप इसे घर में बना सकते हैं। उसके साथ ही यह instantly और easily prepare होने वाली dish है। 

और taste? वो तो बहुत ही बढ़िया है…

सेव टमाटर की सब्जी


Ingredients :

  • Tomatoes (red & ripe) - 4 (medium)
  • Ratlami sev - 1 cup 
  • Clarified butter (ghee) -  2 to 3 tbsp.
  • Small mustard seeds - ½ tsp.
  • Cumin seeds - ½ tsp.
  • Asafoetida - ¼ tsp.
  • Onion - 1 (medium)
  • Ginger - 1 inch 
  • Garlic - 4 to 6 cloves 
  • Green chillies - 2/as per taste 
  • Kasuri methi - 1 tsp.
  • Turmeric powder - ½ tsp. 
  • Kashmiri Lal Mirch - 1 tsp. 
  • Coriander powder - 1 tsp.
  • Salt - as per taste 
  • Sugar - ½ tsp.


Method :

  1. प्याज़ और हरी मिर्च को finely chop कर लीजिए।
  2. 2 टमाटर, लहसुन और अदरक को mixer grinder में डालकर fine paste बना लें।
  3. 2 टमाटर को coarsely chop कर लीजिए।
  4. 1 wok लीजिए, उसमें घी डालकर गर्म करें। अब गर्म घी में हींग, राई और जीरा डालकर चटकाएं।
  5. अब इसमें finely chopped प्याज डालकर सुनहरा होने तक पकाएं। अब इसमें कटे टमाटर और हरी मिर्च को डालकर हल्का-सा भून लें।
  6. अब इसमें हल्दी powder, कश्मीरी लाल मिर्च powder, धनिया powder, कसूरी मेथी, नमक और चीनी डालकर थोड़ा-सा भूनें।
  7. अब इसमें टमाटर-लहसुन-अदरक के paste को डालकर तब तक भूनें, जब तक मसाला घी छोड़ने लगे।
  8. अब इसमें 1½ cup पानी डालकर ढककर पकाएं।
  9. टमाटर की gravy में proper texture आ जाने पर gas off कर दीजिए।
  10. Serving से पहले गर्म टमाटर gravy में रतलामी सेव डालकर अच्छे से mix कीजिए।
  11. अब इसमें finely chopped धनिया पत्ती से garnishing कर दें। 

The irresistible delicacy Sev Tamatar ki Sabzi is ready to serve! Enjoy it as it is, with Bhakri (millets/multigrain roti), Chapati, or rice.


Tips and Tricks :

  • सेव टमाटर की सब्जी राजस्थान और गुजरात दोनों states की delicacy है।जहाँ राजस्थानी सब्जी का flavour spicy होता है, वहीं गुजराती सब्जी का flavour sweet और sour होता है, क्योंकि इसमें गुड़ या चीनी भी ठीक amount में पड़ता है।
  • राजस्थानी (मारवाड़ी) सब्जी में घी डालते हैं, जबकि गुजराती सब्जी में घी या तेल दोनों में से कुछ भी ले सकते हैं।
  • राजस्थानी flavour में प्याज़, लहसुन व अदरक डालते हैं, specially लहसुन को अधिक मात्रा में डालते हैं। वहीं गुजराती flavour में बिना प्याज़-लहसुन के भी बनाई जाती है।
  • आप को जो flavour (राजस्थानी या गुजराती) ज्यादा पसंद हो, अपने taste के according वैसी बना सकते हैं।
  • इसे गुजराती (काठियावाड़ी)में सेव तमेटा नू शाक (sev tamatar ki sabji) भी कहते हैं और राजस्थानी(मारवाड़ी) में सेव टमाटर री सब्जी कहते हैं।
  • इसमें टमाटर लाल और पके हुए लीजिएगा, क्योंकि उससे ही authentic taste आएगा।
  • आपको टमाटर खड़े (bite texture) या गले जैसे पसंद हों, उसके अनुसार टमाटर के टुकड़ों को पकाएँ। दोनों ही तरह से serve किए जाते हैं। 
  • कहीं-कहीं इसमें दही, करी पत्ता इत्यादि भी डालते हैं, पर authentically नहीं।
  • हमने इसे घी से बनाया है, इससे सब्जी का स्वाद enhance हो जाता है, आप चाहें तो तेल में भी बना सकते हैं। 
  • पर ध्यान रखिएगा कि इस सब्जी का मसाला तब तक भूनते हैं, जब तक अगर घी डालकर बना रहे हैं तो घी छोड़ेगा और अगर तेल डालकर बना रहे हैं तो तेल छोड़ेगा।
  • ध्यान रखिएगा, जब कभी आप मसाले में टमाटर puree डालकर भून रहे हैं, तो उसे बीच-बीच में ढककर भूनेंगे तो वो जल्दी घी या तेल छोड़ता है। इस तरह से छूटे हुए घी या तेल को रोगन कहते हैं।
  • आप मसाले में नमक डालते समय ध्यान रखिएगा कि सेव में भी नमक है, तो सही amount में नमक डालें, अन्यथा ज्यादा नमक हो जाएगा।
  • हमने राजस्थानी (मारवाड़ी) flavour की सब्जी बनाई है, पर ½ tsp. sugar भी डाली है। आप चाहें तो इसे discard कर सकते हैं। पर इतनी चीनी से टमाटर की खटास और spicy flavour balance होते हैं। स्वाद में मिठास नहीं आती है, बल्कि taste enhance होता है।
  • आप चाहें तो चीनी की जगह गुड़ भी डाल सकते हैं। पर एक बात ध्यान रखिएगा कि अगर आप गुजराती flavour चाह रहे हैं, तो चीनी या गुड़ का amount बढ़ा कर इतना डालना है कि सब्जी में मिठास भी आए।
  • रतलामी सेव से ही perfect taste आता है, जो‌ कि online भी बहुत easily available है। लेकिन अगर आप के पास रतलामी सेव न हो, तो आप इस सब्जी के लिए मोटे‌ सेव use कीजिएगा।
  • रतलामी सेव, अपने आप में काफ़ी spicy flavour के होते हैं। इसलिए सेव टमाटर की सब्जी बनाने से पहले सेव चख लें और उसके अनुसार ही टमाटर की gravy में spice डालें। 
  • जिससे सब्जी आपके taste के according spicy बने, न‌ कि overspicy.
  • सब्जी में सेव डालकर ज़्यादा देर रखने से सब्जी रसेदार से सूखी में बदल जाती है। सेव गलकर मुलायम हो जाएँगे, घुल जाएँगे, जिससे सारा taste spoil हो जाएगा।
  • इसलिए serve करने से पहले एक बार gravy अच्छे से गर्म कर लें और जब आप खाना खाने बैठ गए हों, तभी सेव डालकर अच्छे से चला लें। और सिर्फ उतनी gravy में सेव डालें, जितनी तब use हो।
  • आप gravy बनाकर दो-चार दिन के लिए refrigerator में store करके रख सकते हैं। 
  • Gravy को थोड़ा पतला ही बनाएँ, क्योंकि सेव डालने से gravy गाढ़ी होने लगती है।
  • Gravy का amount थोड़ा बढ़ा कर रखें, क्योंकि सेव डालते ही वो gravy को soak करना शुरू कर देती है।

इतनी आसान थी सेव टमाटर की सब्जी, खुद भी खाएँ और दूसरों को भी खिलाएँ यह “instant delicacy”!