Tuesday, 19 January 2021

Story of Life : यह कैसा प्यार (भाग -5)

यह कैसा प्यार (भाग-1), 

यह कैसा प्यार (भाग -2),

यह कैसा प्यार (भाग - 3) और 

यह कैसा प्यार ( भाग -4) के आगे.....


यह कैसा प्यार (भाग -5) 



एक दिन रोहित ने, ऋषि से आकर कहा, मैं अब और तुम्हारे साथ काम नहीं कर पाऊंगा।

ऋषि बोला, ऐसी भी क्या बात हो गई है? हम दोनों के साथ से हमारा business कितना अच्छा चल रहा है।

हमारा business? रोहित ने चौंकते हुए पूछा।

हाँ, रोहित मैंने कल ही सोचा था कि, तुम्हें अपने business के 30% की partnership दें दूँ।

क्या कह रहे हो ? ऋषि तुम अभी मुझे जानते ही कितना हो? अभी कुछ दिन पहले ही तो मैं तुमसे मिला हूँ।

इतनी जल्दी किसी पर इतबार नहीं करते हैं दोस्त।

ऋषि बोला वाह, दोस्त भी कहते हो, और इतबार करने को भी मना करते हो।

तुम ने मुझ पर भरोसा करके मुझे रुकने को मजबूर कर दिया है, पर मैं अकेले घर में रहते रहते bore हो गया हूँ। मैं वापस अपनों के बीच में जाना चाहता हूँ। रोहित एक सांस में बोल गया।

अरे, मेरे रहते तुम कैसे अकेले हो गये?

 तुम एक काम करो, मेरा बंगला बहुत बड़ा है, तुम हमारे साथ ही रहने लगो। दिन रात का साथ हमारे business development में चार चांद लगा देगा। और तुम्हें अकेलापन भी नहीं सताएगा।

तुम्हरा बंगला!..... 

अरे कहाँ खो गये रोहित? ऋषि ने रोहित को झकझोरते हुए कहा, मैं अपने बंगले पर ही रहने की बात कर रहा हूँ।

रोहित चौंकते हुए बोला, नहीं कुछ नहीं, कुछ पुरानी यादों में खो गया था। 

ओह पुरानी यादें! सच यह कभी साथ नहीं छोड़ती हैं, कहकर आज ऋषि को बहुत दिनों अपने घर वाले याद आने लगे।

रोहित तुम हमारे साथ रहो और एक हफ्ते के लिए तुम और एक हफ्ते के लिए मैं अपने घर वालों से मिलने चले जाएंगे।

घर में सब कितने खुश होंगे, मुझे देख कर। जब से तान्या से मिला हूँ, तब से एक बार ही गया था, दो दिन के लिए सबसे मिलने। 

फिर तो तान्या ने वापस बुला लिया था और business की चिंता भी सता रही थी।

पर अब जब तुम हो तो मुझे किसी बात की फ़िक्र नहीं है।

एक बार, तान्या से पूछ लेते ऋषि।

तान्या से क्या पूछना, तुम तो उसके childhood friend हो, वो तो बल्कि खुश हो जाएगी जानकर कि हम सब साथ में रह रहे हैं।

Childhood friend.... ओ हाँ, वही तो हूँ मैं।

क्यों कुछ ग़लत कहा, मैंने? ऋषि ने पूछा।

अरे नहीं,..... सब ठीक है। चलो मैं चलता हूँ, आज शाम ही सामान के साथ पहुंचाता हूँ, तुम्हारे..... बंगले पर।

ऋषि को रोहित का आज behaviour कुछ अजीब सा लग रहा था।

उसने तान्या को phone कर दिया.....

आगे पढ़ें, यह कैसा प्यार (भाग- 6) में

Monday, 18 January 2021

Story of Life : यह कैसा प्यार (भाग -4)

यह कैसा प्यार (भाग -1), 

यह कैसा प्यार (भाग -2) और

यह कैसा प्यार (भाग - 3) के  आगे.....

यह कैसा प्यार (भाग -4) 




पर ऋषि ने जैसा सोचा था, रोहित उसके विपरीत निकला।

रोहित काम के प्रति बहुत sincere था। ऋषि, रोहित को जो भी काम देता, वो बड़े लगन से उस काम को समय से पहले पूरा कर देता।

कुछ ही दिनों में ऋषि और रोहित में बहुत गहरी दोस्ती हो गई। अब तो ऋषि, रोहित को हर important meeting में ले जाने लगा।

रोहित के आ जाने से ऋषि को अब अपनी जिंदगी में एक सुदृढ़ साथ मिल गया था। वो अपने business में बहुत busy रहने लगा था।

जिसका नतीजा यह हो रहा था कि वो तान्या के साथ, बहुत कम समय व्यतीत करने लगा। अब उसे तान्या की बहुत ज्यादा चाह भी नहीं रहती।

कई बार तो ऐसा भी होता कि वो तान्या से वादा करके भी उससे मिलने नहीं जा पाता।

ना ही आजकल वो उसको  abroad tour पर ले जाता था, ना ही उसको मंहगे तोहफे दे रहा था।

ऐसा नहीं था कि वो abroad नहीं जा रहा था या मंहगे तोहफे नहीं खरीद रहा था।

वो abroad तो जा रहा था, पर अक्सर meetings के सिलसिले में और साथ में होता था, रोहित।

वो तान्या के लिए मंहगे तोहफे भी खरीद रहा था, पर वो इतना व्यस्त रह रहा था कि उसके पास अभी इतना समय नहीं रह पा रहा था कि वो तान्या से मिलकर उन्हें दे सके, अपना प्यार दिखा सके।

तान्या,  ऋषि के इस तरह के बदलाव से तिलमिला उठती।

जहाँ तान्या उसके बहुत अधिक साथ से bore होती थी, आज उसका साथ पाने को तरस जा रही थी।

ऋषि से छुटकारा पाने वाली तान्या, अभी ऋषि का घंटों इंतज़ार करने लगी थी।

वो जानती थी कि यह सब रोहित के आने के कारण से हो रहा है, पर फिर भी वो ऋषि को रोहित से अलग नहीं कर रही थी।

आखिर कौन था, यह रोहित? उसका childhood friend या कोई और?

क्यों वो शामिल हुआ था, ऋषि की जिंदगी में?

आखिर ऐसी क्या वजह थी कि, तान्या ने रोहित को ऋषि की जिंदगी में शामिल किया था और उसके रहने से उसे बहुत चिढ़ भी हो रही है, फिर भी वो रोहित को ऋषि से दूर नहीं कर पा रही थी.....

यह सब जानते हैं, यह कैसा प्यार (भाग-5) में.....



Saturday, 16 January 2021

Article : उम्मीदों का सवेरा

 उम्मीदों का सवेरा 



"जिसका हमें था इंतजार, वो घड़ी, आ गई, आ गई आज......"

आज का दिन, वो दिन है जिसका हम सब ने बहुत इंतजार किया। यह दिन उम्मीदों का सवेरा बनकर आया है, आशाओं की किरण बनकर आया है। 

और सबसे बड़ी खुशी की बात यह है कि, इस सवेरे को लाने के लिए हमें किसी अन्य देश पर निर्भर नहीं रहना है। 

यह भारत के लिए बहुत गर्व की बात है कि  कोरोना को मात देने के लिए, जहाँ कितने ही देश, दूसरे देशों पर निर्भर हैं। वहीं भारत के पास दो-दो vaccine मौजूद हैं।

आज हमारे पास sirum institute की Covishield और Bharat biotech की Covaxin, मौजूद हैं।

आज वो शुभ दिन है, जब हमारे देश के विभिन्न भागों में vaccination start हो गया है।

जहाँ बहुत से देशों ने vaccination campaign की शुरुआत बड़े बड़े politician के vaccine लगने से हुई है। 

वहीं भारत ने यह शुरुआत अपने frontline warriors के vaccination से start की है।

यह सोच, किसी संत की हो सकती है कि जिन frontline warriors ने आपदा के समय सबसे आगे रहकर पूरे देश की सुरक्षा की है। उसी को सुरक्षा भी सर्वप्रथम मिलनी चाहिए। 

वैसे भी आगे भी, वो ही सम्पूर्ण देश की सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में सहयोगी रहेंगे।

इसलिए आज शुरुआत उनसे ही प्रारंभ की जा रही है। उसके बाद देश के उन लोगों की सुरक्षा व्यवस्था की जाए, जो शारीरिक रूप से कमजोर हों, इसलिए दूसरे स्थान पर वृद्ध व्यक्तियों को, तदोपरान्त उन लोगों का स्थान है जो पहले से ही रोगों से ग्रस्त हैं। उसके बाद अन्य लोगों का स्थान है।

तो जिस तरह से vaccination campaign की planning की गई है, वो सिर्फ भारत जैसे संस्कारी देश में ही संभव है।

अब हम सब भारत वासियों को vaccination campaign को सफल बनाने का हर संभव प्रयास करना चाहिए। 

किसी भी तरह के बहकावे में ना आएं और हाँ दवाई भी कड़ाई भी। 

यही तरीका है, corona से मुक्ति पाने का। 

हमें इस बात पर गर्व करना चाहिए कि बहुत सारे देश भारत से उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उन्हें भी शीघ्र कोरोना जैसी महामारी से मुक्ति मिल जाएगी। 

जिसमें, ब्राजील, मोरक्को, सऊदी अरब, म्यांमार, बांग्लादेश, दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों ने भारत से वैक्सीन की आधिकारिक तौर पर मांग की है. लेकिन सूत्रों का कहना है कि कोरोना वैक्सीन के वितरण में भारत सरकार बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, श्रीलंका और अफगानिस्तान जैसे पड़ोसी देशों को प्राथमिकता देगी.

आज इस महामारी से मुक्ति पाने के लिए इन देशों को सबसे ज्यादा भारत पर भरोसा है।

तो गर्व से कहिए कि हम भारतीय हैं, जो हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर रहा है।