Monday, 15 March 2021

Kids story: मेहनत और मेहनताना

मेहनत और मेहनताना


हमारे घर के पीछे एक बड़ा सा park है, जिसमें पास की बस्ती के लड़के दिन भर खेलते रहते थे।

उन्हें देखकर बेटा आर्यन बोला, माँ इन लड़कों के कितने मजे हैं।

यह दिनभर खेलते रहते हैं, ना तो इन्हें school जाना होता है ना ही कोई homework करना होता है।

काश, ऐसे ही मैं भी दिनभर मस्ती कर पाता! 

माँ, कुछ नहीं बोलीं, बस बेटे की बात सुन ली।

कुछ दिनों बाद, पूरे parking space में tiles लगाने का कार्य आरम्भ हो गया।

बहुत से मज़दूर थे, कुछ मिस्त्री और एक ठेकेदार कार्य में लगे थे।

मज़दूर दूर रखी ईंटा गारा सीमेंट लाकर देते। मिस्त्री, एक बार भी सामान लाने के लिए नहीं उठता, बैठे बैठे ही सारा काम करता।

धूप बहुत तेज थी, पर सब अपना काम तल्लीनता से कर रहे थे। 

हर रोज़ सिर्फ 3 घंटे के लिए ठेकेदार आता, सारे काम को observe करता।

अगला काम कैसे करना है, वो समझाता; क्या क्या सामान और चाहिए, इसकी list बनाता; कुछ देर तक यह देखता कि, काम ठीक से हो रहा है, और फिर चला जाता।

यह सब काम वो, एक छोटे कमरे में बैठ कर करता, जहाँ पंखा लगा हुआ था।

जिस officer ने ठेकेदार को काम दिया था, वो alternate दिन में 10 minutes के लिए आता था। बाकी समय वो अपने AC वाले office में रहता था।

कार्य शुरू हुए मात्र 1 week ही गुज़रा था, कि बहुत ज़ोर से बारिश शुरू हो गई।

मज़दूरों और मिस्त्री ने जो काम किया था वो खराब होने लगा। उन्हें फिर से मेहनत करनी पड़ी, पर भरी बरसात में भी वो लगे रहे।

 चार-पांच दिनों तक बारिश होती रही, उतने दिन में ठेकेदार दो दिन ही आया। और executive तो एक भी दिन नहीं आया।

बारिश बन्द हो गई और चंद दिनों बाद काम भी पूरा हो गया। Parking space बहुत ही सुन्दर लगने लगी।

सभी को उनकी मेहनत का मेहनताना दिया गया। 

सबसे अधिक रुपए executive को मिले, उससे कुछ कम ठेकेदार को, ठेकेदार से कम मिस्त्री को और सबसे कम रुपए मज़दूरों को मिले।

कुछ दिन बाद parking space का inauguration हुआ। सभी लोग executive officer की बहुत तारीफ कर रहे थे कि उसने बहुत अच्छा काम कराया।

चंद लोग उस ठेकेदार के काम की भी तारीफ कर रहे थे।

पर उन मिस्त्रियों और मज़दूरों के काम की प्रशंसा कोई नहीं कर रहा था। एक भी ऐसा नहीं था, जो कह रहा हो कि असली मेहनत तो मिस्त्री और मज़दूरों ने की है।

आर्यन बोला, माँ यह तो ग़लत बात है कि किसी ने भी असली मेहनत करने वालों की तारीफ़ नहीं की और ना ही उन्हें मेहनताना ज्यादा मिला।

माँ ने समझाया, बेटा जिसने ज्यादा मेहनत की है, मेहनताना उसे ही ज्यादा मिली है।

वो कैसे माँ ?

वो ऐसे कि जो बच्चे दिन भर खेलते रहते हैं और अपने बचपन का अनमोल समय व्यर्थ बर्बाद करते हैं। वो बड़े होकर किसी लायक नहीं होते हैं।

उन्हें अपना जीवन यापन करने के लिए बहुत अधिक मेहनत करनी पड़ती है। पर ना उन्हें अधिक रुपए मिलते हैं ना ही प्रशंसा। यह वो लोग हैं जो मज़दूर थे।

जो बच्चे दिन भर खेलते हैं, पर बड़े होने से पहले ही मेहनत कर के कुछ विशेष कार्य सीख लेते हैं। उन्हें बड़े होकर मेहनत थोड़ी कम और चंद रुपए ज्यादा मिल जाते हैं। यह वो लोग हैं जो मिस्त्री थे।

जो बच्चे स्कूल तो जाते हैं, पर पढ़ने में मेहनत कम करते हैं। उन्हें बड़े होकर कुछ मेहनत और कम करना पड़ता है और रुपए ज्यादा मिल जाते हैं, कभी कभी लोगों से प्रशंसा भी मिल जाती है और कुछ आदर भी। यह वो लोग हैं जैसे ठेकेदार था।

जो बच्चे स्कूल जाते हैं, अपना home work पूरा करते हैं, मेहनत से पढ़ते हैं। फिर उन्हें बड़े होकर, सबसे कम मेहनत करनी पड़ती है, मेहनताने में सबसे अधिक रुपए और बहुत सारी तारीफ मिलती है, सब लोग उनका सम्मान करते हैं। यह वो लोग हैं जो कि बड़े होकर executive officer बनते हैं।

ओह! मतलब जो बचपन में ज्यादा मेहनत करते हैं, उन्हें ही बड़े होकर कम मेहनत में ज्यादा मेहनताना मिलता है।

एकदम सही!!

उसके बाद आर्यन ने कभी नहीं कहा कि बस्ती वाले लोगों के बहुत मज़े हैं, क्योंकि अब वो उन जैसा कभी नहीं बनना चाहता था।

उसे तो बड़ा होकर कम मेहनत और ज्यादा मेहनताना चाहिए था। 

Thursday, 11 March 2021

Bhajan (Devotional Song) : मेरा भोला है सबसे निराला

भगवान शिव जी, के बहुत सारे नाम हैं-शिव,  शंभू, नटराज, भोलेनाथ, महादेव, आदि.....।

 आज महा शिवरात्रि के पावन पर्व पर उनके भोले स्वभाव को प्रदर्शित करने की कोशिश करते हुए उन्हें यह भजन समर्पित कर रहें हैं।

आइए हम सब उनकी भक्ति में लीन हो जाएं और अपने आराध्य के श्री चरणों में शीश नवाएं 🙏🏻

मेरा भोला है सबसे निराला 



मेरा भोला है सबसे निराला,

बड़ी जल्दी से खुश होने वाला।

मेरा भोला, बड़ा भोला भाला,

बड़ी जल्दी से खुश होने वाला।।


जब भी पूजा करो,

मेवा मिठाई धरो।

उसने पी लिया था,

विष का प्याला।

वो धतूरे से,

खुश होने वाला।।


मेरा भोला है सबसे निराला,

बड़ी जल्दी से खुश होने वाला।

मेरा भोला, बड़ा भोला भाला,

बड़ी जल्दी से खुश होने वाला।।


जब भी पूजा करो,

फल और फूल धरो।

वो तो पहने हैं,

मुंडों की माला।

बेलपत्तर से,

खुश होने वाला।।


मेरा भोला है सबसे निराला,

बड़ी जल्दी से खुश होने वाला।

मेरा भोला, बड़ा भोला भाला,

बड़ी जल्दी से खुश होने वाला।।


जब भी पूजा करो,

वस्त्र आभूषण धरो।

उसने भभूति को,

तन पे है डाला।

 वो तो भांग से,

खुश होने वाला।।


मेरा भोला है सबसे निराला,

बड़ी जल्दी से खुश होने वाला।

मेरा भोला, बड़ा भोला भाला,

बड़ी जल्दी से खुश होने वाला।।


जब भी पूजा करो,

कठिन व्रत को धरो।

वो तो मस्ती में

घूमें है ऐसे,

जैसे सबसे बड़ा

मतवाला।


मेरा भोला है सबसे निराला,

बड़ी जल्दी से खुश होने वाला।

मेरा भोला, बड़ा भोला भाला,

बड़ी जल्दी से खुश होने वाला।।


जब भी पूजा करो,

बड़े नियम को धरो।

उसने बराबर का,

सबको है समझा।

अर्द्धनारीश्वर,

कहलाने वाला।


मेरा भोला है सबसे निराला,

बड़ी जल्दी से खुश होने वाला।

मेरा भोला, बड़ा भोला भाला,

बड़ी जल्दी से खुश होने वाला ।। 


इस भजन को 8 साल के छोटे बच्चे अद्वय सहाय ने गाया है। आप इसे किसी अन्य धुन में भी गा सकते हैं।

आप सभी को महा शिवरात्रि के पावन पर्व पर हार्दिक शुभकामनाएँ, महादेव हम सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें🔱🕉️💐🙏🏻

Wednesday, 10 March 2021

Recipe : Sama rice and Sabudane ka Dosa

कल महा शिवरात्रि का महापर्व है, हम सभी उपवास रखेंगे।

उपवास में, निर्जल व्रत या खाली फलों के सहारे व्रत तो साधक ही रख सकते हैं। समान्य लोग, व्रत के लिए फलाहारी व्यंजन बनाते हैं। 

पर आज कल लोग बहुत diet conscious हो गये हैं। उन्हें पूड़ी-कचौड़ी, पकौड़ी जैसी oily dishes पसन्द नहीं आती हैं।

तो व्रत में क्या बनाया जाए, यह बहुत बड़ी समस्या बन जाती है।

पर जब Shades of Life है आप के साथ तो फिक्र की क्या है बात......

हम पहले भी आपको ऐसी recipe बता चुके है, जिसमें बहुत कम ghee or oil use होता है। उन recipes को पढ़ने के लिए, Recipes for Fasts को click करें।

Kuttu ka dosa हम आपको बता चुके हैं,  इसकी recipe आप को Blog में मिल जाएगी,‌ जिसमें perfect dosa बनाने की पूरी recipe मिल जाएगी। 

आज आपको, समा के चावल (फलाहारी चावल) और साबूदाने से डोसा बनाने की recipe share करेंगे।

संस्कृत में समा के चावल को श्रामक कहा जाता है। गुजराती में इसे सामो या मोरियो कहते हैं। मराठी में समा के चावल को भगर और वरी के नाम से जाना जाता है। हिंदी में मोरधन और समा के चावल या व्रत के चावल कहा जाता है।


समा के चावल व साबूदाने का डोसा




Ingredients

• Sama ke rice - 1cup

• Sago (Sabudana) - 4 tsp.

• Sugar - 1tsp.

• Rock Salt (Sendha Namak) - as per taste

Method 

1. समा के चावल, साबूदाना और चीनी को महीन पीसकर powder बना लें।

2. अब इसमें पानी और सेंधा नमक डालकर पतला batter बना लीजिए।

3. Batter को 30 minutes के लिए छोड़ दीजिए।

4. अब जैसे डोसा बनाते, उसी तरह से इस batter से डोसा बना लीजिए।

5. आप इसमें, आलू की या पनीर की मनचाही filling भर लीजिए।

फलाहारी डोसे को आप नारियल या मूंगफली की चटनी के साथ serve कर सकते हैं।

अगर आप पनीर की filling कर रहे हैं तो, आलू टमाटर के पतले झोल के साथ भी serve कर सकते हैं।

इस batter से बने डोसे का taste almost rice dosa जैसा ही है।

कल ही बनाएं। व्रत में tasty dosa भी खा सकते हैं, यह देखकर पूरा परिवार आप के गुणगान करेगा।

आइए कुछ tips and tricks भी बता देते हैं, जिससे आप का dosa perfect बने।

Tips and Tricks

• डोसे का mixture बिल्कुल महीन पीसें। 

• घोल पतला ready कीजिए, जिससे डोसा crispy बने।

• आप चाहें तो चावल व साबूदाने को भिगाकर भी बना सकते हैं।

   → उसके लिए 2 to 4 minutes के लिए soak कीजिएगा; और batter को grind करते समय, उसमें कम पानी डालकर पीसें, वरना पतला batter नहीं बनेगा।

• अगर आप को डोसे का खट्टा (खमीरे/fermentation वाला) taste पसन्द हो तो आप ¼ cup Curd भी use कर सकते हैं।

• Dosa perfect बनाने के लिए temperature सही होना जरूरी होता है।

   →तवा इतना गर्म होना चाहिए कि batter, फैले पर चिपके नहीं।

       ★ उसके लिए हर डोसा बना कर 1 minute के लिए  gas off कर दीजिए। फिर अगला डोसा बनाएं, इससे तवे का perfect temperature रहेगा और आप के सारे डोसे perfect बनेंगा।

• अगर आप व्रत में साबुदाना नहीं खाते हैं तो उसकी जगह 2 tsp कुट्ट का आटा डाल सकते हैं।