Wednesday, 28 December 2022

Story of Life: बंटवारा प्रेम का (भाग - 3)

यह एक ऐसी कहानी है, जिससे हर एक लड़की जुड़ी हुई है। 

बंटवारा प्रेम का (भाग - 1)

बंटवारा प्रेम का (भाग - 2) के आगे पढें...

बंटवारा प्रेम का (भाग - 3) 

छोटे भाइयों और बहन को भी इससे कोई फर्क नहीं पड़ता था क्योंकि खुशी अपने छोटे भाइयों और बहन को इतना प्यार करती थी, कि सबकी कमी पूरी हो जाती थी।

खुशी जो उनसे कह देती, उनके लिए पत्थर की लकीर हों जाती।

बड़े आनन्द पूर्वक जिंदगी गुजर रही थी। 

खुशी ने जवानी की दहलीज पर कदम रख दिए थे।

खुशी, ठंड की गुनगुनी धूप सी बेहद खूबसूरत, गर्मी में चलने वाली ठंडी हवा सी शीतल, कान्हा की बांसुरी सी सुरीली थी। जो भी उसे देखता, दीवाना हो जाता। 

जितनी वो खूबसूरत थी, उतनी ही होशियार भी। उसने first attempt में ही PCS clear कर लिया था।

खुशी की उम्र, शादी योग्य हो गई थी, माँ ने कहा, बिटिया अब हम चाहते हैं कि तुम्हारी शादी कर दें। तो तुम बताओ क्या करना है?

खुशी ने कहा, माँ आप जाने क्या करना है, यह कहकर, खुशी ने शादी की बात, अपने मां-पापा के ऊपर छोड़ दी थी।

उसकी शादी के लिए बहुत से रिश्ते आने लगे।

कुछ बड़े officers के, कुछ बड़े bussinessman, कुछ NRI के... 

जिम्मेदारी मां-पापा के ऊपर थी, तो वो भी खूब देख-परख कर रिश्ता तय करना चाह रहे थे।

काफ़ी लड़ाकों को reject करने के बाद, finally उन्हें वो मिल गया, जिसकी उन्हें तलाश थी।

लंबा ऊंचा कद, sharp features, जितनी खुशी खूबसूरत थी, अनंत उतना ही smart. उसने भी first attempt में IAS clear कर लिया था।

यूं कहें कि दोनों, एक दूसरे के पूरक थे, तो कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी...

माँ को सबसे ज्यादा प्रसन्नता तो, इस बात की थी कि दामाद अपने ही शहर का मिल गया था। अब सारी उम्र खुशी उनसे मात्र 30 मिनट की दूरी पर रहेगी। 

बड़ी धूमधाम से खुशी और अनंत की शादी कर दी गई। 

शादी के बाद खुशी, अपने ससुराल चली गई और पीछे छोड़ गई, ऐसा सूनापन, कि मेहमानों से खचाखच भरे घर में भी सबकी निगाहें बस खुशी को ही ढूंढ रही थी।

अगले दिन शाम को reception था। तो सोचा जा रहा था कि किस को ले जाएं और किसको छोड़ दें?

सबमें से कोई भी खुशी से मिलने का मौका नहीं गवाना चाह रहा था, इसलिए ना चाहते हुए भी 50-60 लोग हो गये।

इतने सारे लोगों के साथ, reception में जाना पापा को अच्छा नहीं लग रहा था, क्या कहेंगे, खुशी के ससुराल वाले, सोच सोच कर वो परेशान हो गए।

आखिरकार उन्होंने खुशी के ससुर जी को फोन लगा दिया... 

आगे पढ़े, बंटवारा प्रेम का ( भाग - 4) में

Tuesday, 27 December 2022

Story of Life: बंटवारा प्रेम का (भाग - 2)

यह एक ऐसी कहानी है, जिससे हर एक लड़की जुड़ी हुई है। 

बंटवारा प्रेम का (भाग - 1) के आगे...

बंटवारा प्रेम का (भाग - 2)



बच्चे के रूदन की आवाज सुनाई दी तो, सब एक दूसरे को बधाई देने लगे। 

जब नर्स बच्चे को लेकर सबके सामने पहुंची तो, सबको बधाई देते हुए देख कर सकुचाते हुए बोली

बेटी हुई है! 

थोड़ी देर सन्नाटा पसर गया, सब एक दूसरे का मुंह देखने लगे...

फिर थोड़ी देर बाद बच्चे की दादी आगे बढ़ी और मुस्कुराते हुए बोलीं, लक्ष्मी माता आई हैं, हमारे द्वार, सबको करो प्रणाम🙏🏻

बच्चे की नानी भी आगे बढ़ चुकी थीं और प्यार से बोली, मां जगदम्बा स्वयं प्रकट हुई हैं, कहकर उन्होंने बच्ची के चरण स्पर्श कर लिए।

थोड़ी देर में ही फिर से पूरे अस्पताल में बधाइयों का सिलसिला और खुशी की लहर छा गई।

नर्स को भी भरपूर इनाम दिया गया। 

जब अड़ोसी-पड़ोसी लोगों को पता चला कि बेटी हुई है तो वो बोलने लगे, अब मालती के सारे लाड़ खत्म हो जाएंगे... पर ऐसा कुछ नहीं हुआ।

अभी भी मालती और बच्ची का उतने ही प्यार से ध्यान रखा जा रहा था।

नामकरण संस्कार भी बड़े धूमधाम से मनाया गया और क्योंकि उसके पैदा होने, सब जगह खुशी की लहर छा गई थी, अतः उसका नाम खुशी ही रख दिया।

खुशी अपने ददिहाल ननिहाल दोनों जगह लाडली थी। उस एक के तीन नाम थे, लक्ष्मी, जगदंबा और खुशी...

हां खुशी, सबसे ज्यादा अपने खुशी नाम से खुश थी। 

खुशी के होने के चंद सालों बाद दो जुड़वां भाई हुए। वो लड़के थे और एक साथ दो भी। फिर भी उनके होने से घर में वो खुशहाली ना छाई, जो खुशी के होने से हुई थी।

होती भी कैसे?

 पहला बच्चा, पहला ही होता है, उसके आने से सिर्फ वो नहीं आता है, बल्कि उसके साथ आती है, एक अनूठी खुशी, सबका पहली बार नये रिश्ते में बंधने का अटूट बंधन.. 

पहली बार मां-पापा बनना, पहली बार दादी-नानी, बुआ-चाचा,  मौसी-मामा, बनना... सब ही तो पहली बार बन रहे होते हैं। 

उस सुख का एहसास, यह सोचने ही नहीं देता है कि बच्चा क्या हुआ है, लड़का या लड़की? 

तो बस दो भाई होने के बाद भी, सब जगह खुशी को ही सबसे ज्यादा प्यार मिलता था।

फिर एक छोटी सी बहन‌ भी हो गई, पर सबका नंबर बाद में आता था, क्योंकि लाडली तो हमारी खुशी ही थी। 

छोटे भाइयों और बहन को भी इससे कोई फर्क नहीं पड़ता था क्योंकि खुशी अपने छोटे भाइयों और बहन को इतना प्यार करती थी, कि सबकी कमी पूरी हो जाती थी।

खुशी जो उनसे कह देती, उनके लिए पत्थर की लकीर हों जाती।

आगे पढें, बंटवारा प्रेम का (भाग - 3) में 

Monday, 26 December 2022

Story of Life: बंटवारा प्रेम का

आज एक ऐसी कहानी post कर रहे हैं, जिससे हर एक लड़की जुड़ी हुई है। 

बंटवारा प्रेम का 



राजशेखर व मालती अपने भरे-पूरे परिवार के साथ रह रहे थे। शादी के दो साल बीत चुके थे। मालती मां बनने वाली थी।

दोनों परिवारों में रौनक छा गई। बच्चे के आने की जितनी तैयारी उसके दादा-दादी कर रहे थे, उतनी ही नाना-नानी भी।

जब बच्चा अपनी मां के पेट में था, तब से ही राजशेखर को तो मालती के लिए कुछ भी सोचना भी नहीं पड़ता था, क्योंकि  सब उसका बहुत ध्यान रखते थे। दोनों ही घरों से मालती के लिए खूब फल, दूध, मेवा मिठाई, सबकी भरमार थी। 

जब मालती को इतना लाड़ प्यार मिलता था, तो अड़ोसी-पड़ोसी सभी यही कहा करते थे, जरुर से इन लोगों ने पता कर लिया है कि बेटा होने वाला है। तभी सब तिमारदारी में पागल हुए जा रहे हैं।

बाकी इतना भी क्या बांवरा होना कि बहू को सिर पर चढ़ लो, ऐसा भी कौन सा बिरला काम कर रही है। सारी बहुएं ही, अपने सास-ससुर को वारिस देती हैं। 

सास, मालती पर वारी जाती और कहतीं, तुम सब जलनखोर हो। जब बहू, वारिस दे रही हो, तब तो सबसे ज्यादा बहू का ध्यान रखना ही चाहिए।

एक तो इसलिए कि बहू की कोख में हमारे खानदान का भविष्य होता है, दूसरा उस भविष्य को संवारने के लिए मां का स्वस्थ रहना भी जरूरी होता है।

कोई मालती की माँ से कहता, आप क्यों बांवरी हुई जा रही हैं, कौन आपके खानदान का वारिस आ रहा है तो मालती की माँ, गुस्से से आग-बबूला होती हुई कहती कि, जब बेटी मेरी हैं, तो उसका बच्चा पराया कैसे हो गया, भला... 

इन ही सब में नौ महीने कब निकल गए, पता ही नहीं चला और वो दिन आ गया, जिसका सबको बेसब्री से इंतजार था।

दोनों ही परिवार, एक ही शहर में थे, अतः जब मालती अस्पताल में पहुंचीं तो दोनों ही तरफ से सब पहुंचे हुए थे।

सबको पहले से आया देखकर, मालती और राजशेखर प्रसन्न हो गए। 

बच्चे के रूदन की आवाज सुनाई दी तो, सब एक दूसरे को बधाई देने लगे। जब नर्स बच्चे को लेकर सबके सामने पहुंची तो....