Tuesday, 23 September 2025

Tip : Tasty Medicine for Acidity

नवरात्रि पर्व आरंभ हो गया है, उसके साथ ही शुरू हो गया है व्रत का समय। कुछ लोग पूरे नौ दिन माता रानी का व्रत रखते हैं तो वहीं कुछ पहला और आखिरी नवरात्र का व्रत रखते हैं। 

जो लोग इन नौ दिन केवल विभिन्न प्रकार के फल ही खाते हैं, वो तो सबसे बेहतर है। लेकिन नौ दिनों तक केवल फल खाकर रहना, हर एक के लिए संभव नहीं है। इसीलिए लोग फलाहारी व्यंजन खाते हैं।

पर एक बात है, फलाहारी व्यंजन में नमकीन स्वाद वाले अधिकतर व्यंजन ऐसे होते हैं जो बहुत oily होते हैं। अतः acidity की problem बढ़ जाती है।

तो बस आप सभी व्रत अच्छे से रख सकें और आपको acidity भी न हो, उसके लिए ही आज की यह interesting tip share कर रहे हैं।

Acidity problem को control करने के लिए एक ऐसी चीज़ का नाम बता रहे हैं, जिसको सुनकर आपको विश्वास नहीं होगा कि ऐसा भी हो सकता है, साथ ही आप के मुंह में पानी भी आ जाएगा।

और वो चीज़ है काजू…

Tasty Medicine for Acidity


Acidity होने पर काजू आपको किस तरह से खाना है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपको किस तरह की acidity है।

अगर आपको बार-बार acidity या सीने में जलन होती है, तो आपको काजू की मात्रा बहुत कम रखनी होगी।

लेकिन एक सवाल उठता है कि क्या काजू acidity को बढ़ा सकते हैं?


(1) High fat content :

काजू में fat अधिक होता है, और high fat content वाले भोजन heartburn पैदा कर सकते हैं, जो acidity का एक लक्षण है।


(2) Heat-increasing nature :

आयुर्वेद के अनुसार, काजू की प्रकृति गर्म होती है। अर्थात् पित्त को भड़काने वाली, या acidity को बढ़ाने वाली होती है। अतः यह gastritis के लक्षणों को बढ़ा सकती है।

अब जबकि काजू में fat content ज्यादा होता है और वो तासीर में भी गर्म होता है, means acidity problem को increase करने वाला होता है। फिर कैसे वो acidity problem को control कर सकता है।

चलिए पहले उसको कैसे खाएँ, वही देख लेते हैं।


(3) Options for eating :

• Soak & eat -

काजू में phytic acid (C₆H₁₈O₂₄P₆) होता है, जो digestion को impact कर सकता है। इसे पानी में भिगोकर खाने से phytic acid कम हो जाता है, जिससे यह easily digest हो जाता है।


• Eat less -

अगर आपको acidity की problem है, तो काजू को बहुत कम मात्रा में खाएँ।


• Kaju Katli -

ऐसे में काजू की बर्फी भी एक अच्छा option है। इसमें काजू की मात्रा कम हो जाती है, पर अगर आप को diabetes भी है तो आप एक ही काजू बर्फी खाएँ, उससे कुछ देर आपको आराम मिल जाएगा, फिर acidity problem होने से ही दूसरी खाएँ। ऐसा भी हो सकता है कि एक काजू बर्फी से ही आपको दिन भर का आराम मिल जाए। वैसे रात में खाने से रातभर acidity problem नहीं होती है और आप चैन से सो सकेंगे।


• Other nuts -

अगर आपको काजू खाने से problem हो रही है, तो कम fat वाले मेवा जैसे पिस्ता या अखरोट खा सकते हैं।


Acidity problem control करने के लिए हम tablets or syrup लेते हैं। पर उनके side effects होते हैं, साथ ही कुछ दिन बाद वो effective भी नहीं रहते हैं। ऐसे में अगर कोई option खाने-पीने की चीजों में मिल जाए तो ज्यादा अच्छा है, कुछ दिनों के लिए ही सही, बस ऐसा ही option है काजू...

कुछ भीगे हुए काजू या एक काजू बर्फी खाते ही आपको 5 to 10 minutes में relief मिलेगा। अगर ऐसा न हो, या आपको भीगे हुए काजू या काजू कतली खाने से आराम न मिले या कोई problem हो तो आप काजू कतली न खाएँ।

यह tip काजू को roast या fry करके खाने में कारगर सिद्ध नहीं होगी।

हमें बहुत serve acidity problem है और हमें काजू कतली खाने से बहुत आराम मिला था, इसलिए share किया, कि शायद आपको भी relief मिल जाए।

हालांकि हमें diabetes की problem भी है, अतः हमने काजू कतली घर पर कम चीनी की बनाई थी।

तो अगर आप को भी diabetes है और आप भी इस tip को use करना चाहें तो आप अपने घर पर भी काजू कतली बना सकते हैं, और उसे आप अपने मुताबिक customize भी कर सकते हैं, मतलब चीनी कम-ज्यादा भी कर सकते हैं। Recipe जानने के लिए दिए गए link पर click करें -

https://shadesoflife18.blogspot.com/2020/11/recipe-kaju-katli.html?m=1


तो क्या कहते हैं आप, है न यह acidity का tasty इलाज?


Disclaimer :

This post is not any substitute for medical treatment. Following the tips given above is wholly & solely of the reader's choice. This blog shall not be responsible for any adverse effect caused by consumption of any food item as recommended above.

Monday, 22 September 2025

Mata Rani ke Bhajan : माँ के आने से

शारदीय नवरात्र में मां के आगमन से पूरी दुनिया में धूम मच गई है, हर ओर सुख सम्पन्नता और सौभाग्य बरस रहा है। आइए हम भी इस पावन अवसर पर माँ की असीम कृपा में सराबोर होकर माँ का जयकारा लगाते हैं।

माँ के आने से 




अंगना में आएगी बहार 

माँ के आने से 

भक्तों की लगेगी कतार 

माँ के आने से 


माँ का है गोरा गोरा 

मुखड़ा सुहाना 

दर्शन करने को उनके 

उमड़ा ज़माना 

भक्ति होगी स्वीकार 

माँ के आने से 

भक्तों की लगेगी है कतार 

माँ के आने से 


लाल लाल जोड़ा 

मेरी माँ ने है पहना 

सिर से पांव तक 

सजा है गहना 

खुशियां मिलेंगी अपार 

माँ के आने से 

भक्तों की लगेगी है कतार

 माँ के आने से 


हरी हरी चूड़ी 

माँ ने हाथों में सजाई 

सुंदर सलोनी है

 मेहंदी लगाई

होगा बेड़ा पार 

माँ के आने से 

भक्तों की लगेगी है कतार 

माँ के आने से 


छम छम पायल 

माँ के पैरों में बजेगी 

शेर पर सवार 

मैय्या खूब जंचेगी

सबका ही होगा उद्धार 

माँ के आने से 

भक्तों की लगेगी कतार 

माँ के आने से 


अंगना में आएगी बहार 

माँ के आने से 

भक्तों की लगेगी कतार 

माँ के आने से 




बोलो सांचे दरबार की जय 🙏🏻

जयकारा शेरावाली दा 🚩


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माता रानी के भजन 

Sunday, 21 September 2025

Article : सर्वपितृ अमावस्या

आज सर्वपितृ अमावस्या है। अपने पूर्वजों की अर्चना-आराधना करने का विशेष दिन...

क्या होता है सर्वपितृ अमावस्या, और क्यों होता है यह विशेष?

पितृपक्ष का आखिरी दिन सर्वपितृ अमावस्या कहलाता है। सर्वपितृ इसलिए क्योंकि इस दिन हम अपने सभी पितरों का श्राद्ध-तर्पण आदि क्रिया विधि कर सकते हैं, हमें जिनकी तिथि पता हो या न हो।

सर्वपितृ अमावस्या


• Date (Vikram Samvat) :

हिन्दी calendar के अनुसार हर महीना 15-15 दिनों के 2 पक्षों (कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष) में बंटा होता है।पितृपक्ष भी 16 दिनों में विभाजित होता है।

अगर आप के पूर्वजों की तिथि, इन 15 दिनों में से किसी एक दिन होती है और आपको ज्ञात है तो श्राद्ध तर्पण आदि क्रिया विधि उस दिन विशेष में होती है।

पर अगर तिथि नहीं ज्ञात है, तो क्या पूर्वजों की पूजा अर्चना नहीं कर सकते हैं?

कर सकते हैं, और उसी स्थिति के प्रावधान (व्यवस्था) के लिए सर्वपितृ अमावस्या रखी गई है, जिसमें आप अपने सभी पूर्वजों की पूजा-अर्चना कर सकें।

सभी तिथियों से सर्वपितृ अमावस्या को विशेष महत्व दिया जाता है, क्योंकि यह एक ऐसी तिथि है, जिस दिन आप अपने सभी पूर्वजों की पूजा, अर्चना, श्राद्ध तर्पण आदि क्रिया विधि कर सकते हैं। फिर चाहे वो पूर्वज पुरुष हों या स्त्री... वैसी स्त्री पूर्वजों के लिए मातृ नवमी तिथि का भी प्रावधान है। 

यूँ ही नहीं हिन्दू धर्म को सत्य-सनातन और सर्वश्रेष्ठ कहते हैं, अपितु यह है क्योंकि सिर्फ और सिर्फ हिन्दू धर्म ही है, जहाँ सब को पूजा जाता है, सम्मान दिया जाता है।


• Why these ‘16’ days?

अब एक सवाल और आता होगा आपके मन में, कि यह 16 दिन श्राद्ध पक्ष के लिए क्यों चुने जाते हैं।

गरुड़ पुराण में कहा गया है कि श्राद्ध पक्ष वह अवधि है जब पूर्वज पृथ्वी पर आते हैं। और सर्व पितृ अमावस्या पर पितृ पृथ्वी छोड़कर अपने लोक लौट जाते हैं। अतः यह दिन, हिंदू धर्म में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।


• More about Garud Puran :

अब यह गरुड़ पुराण क्या है और किसने लिखी है?

गरुड़ पुराण वैष्णव सम्प्रदाय से सम्बन्धित एक महापुराण है। इसकी रचना गुरु वेदव्यास जी ने की है।

यह सनातन धर्म में मृत्यु के बाद सद्गति प्रदान करने वाला माना जाता है। अतः सनातन हिन्दू धर्म में मृत्यु के बाद गरुड़ पुराण के श्रवण (सुनने) का प्रावधान है।

इस पुराण के अध्भयक्ष भगवान विष्णु हैं। इसमें भक्ति, ज्ञान, वैराग्य, सदाचार, निष्काम कर्म की महिमा के साथ यज्ञ, दान, तप तीर्थ आदि शुभ कर्मों में सर्व साधारण को प्रवृत्त (तत्पर) करने के लिये अनेक लौकिक और पारलौकिक फलों का वर्णन किया गया है। 

इसके अतिरिक्त इसमें आयुर्वेद, नीतिसार आदि विषयों के वर्णन के साथ मृत जीव के अन्तिम समय में किये जाने वाले कार्यों का विस्तार से व्यवस्थित वर्णन किया गया है। आत्मज्ञान का interpretation भी इसका मुख्य विषय है।


• Summary :

तो आप को ज्ञात हो गया होगा कि सर्वपितृ अमावस्या क्या है और क्यों महत्वपूर्ण है तो अपने सभी पूर्वजों की पूजा अर्चना करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करें। आपकी कर्मकांड करने की इच्छा न हो तो 10-15 minutes के लिए उनका मनन ध्यान तो कर सकते हैं, उनके नाम से प्रसाद तो चढ़ा सकते हैं, जैसे ईश्वर को चढ़ाते हैं।

जैसे ईश्वर की पूजा-अर्चना करते हैं, वैसे ही अपने पितरों की भी अवश्य कीजिए। ईश्वर के लिए हम सभी समान हैं, इसलिए उनकी कृपा भी सब पर एक समान होगी। किन्तु पितर आपके अपने पूर्वज हैं, इसलिए आप पर उनकी विशेष कृपा रहेगी।

सभी पूर्वजों को ह्रदय से आभार, दंडवत प्रणाम... आप सभी का आशीर्वाद सदैव बना रहे 🙏🏻