Friday, 17 December 2021

Tip : Secret of long lasting pickle

आप लोगों को बहुत से अचार की recipe share कर चुके हैं। 

Pickles and chutneys (sides)

इस link पर click करने से आपको सभी recipe मिल जाएगी।

पर अभी लोगों की यह भी request आ रही है कि कैसे अचार रखा जाए कि, अचार सालों तक चल सके।

आप से हमने promise भी किया था कि आप को जल्दी ही यह tip देंगे कि अचार को लम्बे समय तक कैसे चलाया जाए।

तो चलिए आज यही tip share कर देते हैं।

Secret of long lasting pickle




  • जब भी कोई सा भी अचार डालें, ध्यान रखें कि जो भी ingredients आप use कर रहे हैं, वो fresh हों।
  • कोई भी सड़ा-गला, दागदार या बासी नहीं होना चाहिए। चाहे वो आम हो, नींबू हो, मिर्च हो, कटहल हो या वो कोई seasonal veggies ही क्यों ना हो।
  • अचार डालते समय इस बात का विशेष ध्यान रखिएगा। 
  • अचार में डाले जाने वाले spice भी fresh ही लीजिएगा, साथ ही उनके अचार में डालने से पहले उन्हें slightly dry roast कर लीजिएगा। 
  • Slightly dry roast होने से वो पिस भी easily जाता है, साथ ही अचार में aroma भी बहुत दिनों तक अच्छी आती है। 
  • जिस भी container में अचार डाल रहे हैं, वह पूरी तरह सूखा और साफ होना चाहिए। वैसे अचार और मुरब्बा डालने के लिए glass के container से अच्छा कुछ नहीं होता है।
  • ऐसा इसलिए है क्योंकि glass किसी भी फल, सब्जी या मसाले के साथ react नहीं करता है।
  • कोई भी खट्टी चीजें जैसे आम, नींबू, आंवला आदि के अचार या मुरब्बे को तो जरूर से कांच की बरनी में ही डालें।
  • अचार में डाले जाने वाला तेल कच्चा ही डालें। इससे भी अचार का रंग और सुगंध बहुत दिनों तक fresh रहती है।
  • अचार के तैयार होने में लगने वाले समय से तेल के कच्चे होने का स्वाद खत्म हो जाता है।
  • अगर आप को कच्चे तेल का स्वाद पसंद है तो आप अचार जल्दी खाना भी start कर सकते हैं। 
  • अगर आप चाहते हैं कि आप के द्वारा डाले गए अचार का रंग बहुत दिनों तक fresh जैसा बना रहे तो, अचार में उतना तेल डालें कि अचार उसमें डूबा रहे।
  • तेल में डूबे रहने से अचार देर से भी गलता है। तो जिन्हें अचार बहुत गला हुआ नहीं पसंद है वो भी तेल ज्यादा डालें।
  • आप अचार या मुरब्बा कुछ भी डाल रहे हैं तो याद रखियेगा कि अचार में salt और मुरब्बे में sugar की quantity proper रखेंगी तो आप को अचार अधिक समय तक चलाने के लिए कोई preservative डालने की requirements नहीं है। 
  • Salt and Sugar से अच्छा कोई preservative नहीं होता है।
  • अचार जब भी निकालें, सूखे और साफ चम्मच से निकालें।
  • झूठे(गंदे) या अन्न के हाथ से अचार कभी नहीं निकालें। 
  • जब अचार को use करना start कर चुके हों और अचार आपने जिस container में रखा है उसमें आधे से भी कम हो जाए तो उसका container change कर के उसे छोटे container में रख दीजिए।
  • अचार ऐसे container में रखा हो, जो बहुत ज्यादा खाली हो तब भी उसके जल्दी ख़राब होने की संभावना रहती है। क्योंकि तब अचार में oxidation की process बढ़ जाती है।
  • अचार को बीच-बीच में हिलाते रहना चाहिए, जिससे पूरे अचार में मसाला एकसार रहे।
  • अन्यथा मसाला नीचे बैठ जाता है। जिससे ऊपर के टुकड़े फीके और बेरंग हो जाते हैं और आखिर के हिस्से में केवल तेल और मसाला ही रह जाता है। 


Key points :

  • कुछ भी सड़ा-गला, दाग-धब्बेदार ना हो।
  • किसी भी तरह की नमी ना रहे।
  • नमक की मात्रा सही होनी चाहिए।
  • झूठे/गंदे और अन्न के हाथ ना लगाएं।
  • अचार सदैव सूखे और साफ चम्मच से ही निकालें।

तो बस इन tips को follow करें और अपने द्वारा बनाए गए स्वादिष्ट अचार को सालों चलाएं, वो भी बिना किसी preservative को डाले। 

अगर आप इन tips को follow करेंगे तो आपको preservative के रूप में vinegar डालने की भी जरूरत नहीं है।

जब आप का अचार बिना किसी preservative को डाले भी सालों तक चल सकता है तो harmful  preservative को डालकर अपने tasty pickles को unhealthy क्यों बनाना? 

अगर आप health conscious हैं तो आप कम तेल या बिना तेल का भी अचार डाल सकते हैं।

Pickle without oil or oil free pickle की recipe भी आप को blog में मिल जाएगी...

OIL-FREE MANGO PICKLE

इस link को click करने से आपको इस अचार की recipe मिल जाएगी।

यह अचार भी सालों ठीक रहता है।

तो अब से अचार घर पर बनाएं और अपने बनाए खाने के taste को enhance करें...


Myth :

Periods के days में ना तो अचार डालें ना ही उस समय अचार निकले, अन्यथा अचार ख़राब हो जाएगा।

Fact :

यह बात सरासर ग़लत है, इसका अचार के ख़राब होने से कोई सरोकार नहीं है। 

अचार ख़राब ना हो, उसके लिए क्या किया जाए, उसका जिक्र ऊपर किया है।


उपरोक्त Tips को follow कीजिए और बाजार से लाए गए preservative पड़े unhealthy अचार को खाना बंद करें 😊

Wednesday, 15 December 2021

Story of Life : ज़िन्दगी बड़े शहरों की (भाग- 4)

अब तक आपने पढ़ा,

ज़िन्दगी बड़े शहरों की (भाग- 1)..,

ज़िन्दगी बड़े शहरों की (भाग- 2)... और

ज़िन्दगी बड़े शहरों की (भाग- 3)...


अब आगे...

ज़िन्दगी बड़े शहरों की (भाग- 4)


मुझे शहर की हवा रास नहीं आई...

दो क्षण तो राघव कुछ नहीं बोला, फिर उसने गीतिका को गले लगा लिया और कहा, मैं भी यही चाहता था कि गांव लौट जाऊं, पर मुझमें तुम सा साहस नहीं था। 

मैं चलने को तैयार हूँ, पर अब हम वहांँ जाकर क्या करेंगे?

खेती-किसानी तो अपने बस की है नहीं...

हम वही करेंगे जो हम यहांँ करते थे, बस तब हम अपने मालिक खुद होंगे। वहाँ सबको भी यह काम सिखाएंगे।

थोड़ा समय लगेगा पर हमारा भविष्य सुनहरा ही होगा।

और इन सबके लिए पैसे कहाँ से आएंगे?

जो हमारे हैं, हम लगाएंगे, बाकी कुछ पिता जी व भैया से लेंगे। मुझे पता है अच्छे काम के लिए कोई मना नहीं करेगा।

दोनों गांव लौट आए। शहर से बहुत सारा सामान ले गये। उन्होंने वहाँ factory लगाई।

गांव आकर उन्होंने अपनी scheme सभी को बताई। जो गांव में बहुत लोगों को पसंद आई।  

जिससे पिता जी और भैया के साथ ही कुछ गांव वालों ने भी पैसे लगा दिये।

राघव और गीतिका के साथ ही बाकी सब की भी मेहनत रंग लाई...

कुछ ही दिनों में पूरा गांव, उस factory से फलने-फूलने लगा। 

अब तो गांव के विकास के लिए अन्य योजनाओं के लिए राघव और गीतिका ने सरकार से सहयोग प्रदान करने की मांग रखी।

सरकार ने देखा कि गांव के लोग परिश्रमी और लगनशील हैं तो उन्होंने गांव को अन्य योजनाओं के लिए सहयोग प्रदान करना आरंभ कर दिया...

गांव के लोग अपने भाई भतीजों और बेटों को शहर से वापस आने को कहने लगे। वो कहा करते, शहर की धूल फांकने से अच्छा है, गांव लौट आओ।

राघव भैया ने factory लगाकर गांव में भी ज़िन्दगी आसान कर दी है। अब यहाँ भी बहुत जल्दी सब सुविधाएं आती जा रही हैं। साथ ही अपनों का साथ भी है।

कहीं, कोई भी यह नहीं कहता कि वाह रे! राघव उतर गया, शहर का भूत? 

हाँ सब किशन सिंह जी से यह ज़रुर कहते थे, आप के बेटे ने शहर से आकर गांव की काया पलट दी।

तब किशन सिंह जी बड़े गर्व से बोलते, अरे राघव शहर गया ही इसलिए था कि शहर से काम सीख आए और गांव को खुशहाल बना दे।

राघव और गीतिका पिताजी के चरणों में गिर कर आशीर्वाद लेते हैं और कहते कि जिनके सिर पर आप जैसे पिताजी का हाथ हो, वहाँ अवगुण भी गुण बन जाता है और जीवन सफल।

किशन सिंह जी बड़े प्यार से उन्हें गले लगाते और कहते, मेरे बच्चे मेरे पास हैं, इससे बढ़कर हमारे लिए कुछ नहीं...

और फिर राघव एकाएक कहता है,  ज़िन्दगी गांव और अपनों के साथ है, बड़े-बड़े शहरों में नहीं...

यह सुनकर सब हंसने लगते हैं..

Tuesday, 14 December 2021

Story of Life : ज़िन्दगी बड़े शहरों की (भाग -3)

अब तक आपने पढ़ा, 

ज़िन्दगी बड़े शहरों की  (भाग -1)  और

ज़िन्दगी बड़े शहरों की  (भाग -2)...

अब आगे....

ज़िन्दगी बड़े शहरों की  (भाग -3)



सबको छोड़कर आना, फिर work load बढ़ना। इससे राघव और गीतिका दोनों चिड़चिड़े रहने लगे थे। वो जब भी आपस में बात करते झगड़ते ज्यादा थे।

ऐसे ही एक महीना बीत गया। Sunday की एक रात band बाजे की आवाज आ रही थी, उसे सुनकर गीतिका उत्साह से भर गई, अपनी खिड़की से झांक झांक कर देख रही थी कि दूल्हा कैसा है...

 फिर मायूस होकर बोली, हमारी जिंदगी कितनी नीरस हो गई है, ना कोई हमें जन्मदिन में बुलाता है, ना ही कोई विवाह बारात में शामिल करता है।

इन खुशी भरे माहौल की तो छोड़ो, ना ही कोई हमें अपने घर बुलाता है ना हम किसी को बुलाते हैं।

दिन भर काम करते रहो, फिर भी खर्चे पूरे नहीं पड़ते हैं। हमारे पास एक-दूसरे के लिए भी समय नहीं है। कहीं घूमने-फिरने के लिए हम साथ हैं ही नहीं! हम चाहकर भी बच्चे को अपनी जिंदगी में लाने की नहीं सोच सकते हैं...

हम जी क्यों रहे हैं, बस दौड़ते रहने के लिए?

क्या इसी बेरंग जिंदगी की चाह थी तुम्हें? 

क्या यही है बड़े शहर की जिंदगी? 

राघव मैं थक गई हूँ, यहाँ ना हमारे पास एक दूसरे के लिए समय है, ना कोई अड़ोसी-पड़ोसी हमारा अपना है। ना कोई सुख में है ना दुःख में। ना हंसी, ना ख़ुशी, ना कोई उमंग।

बस दौड़ते रहो, दौड़ते रहो...

और अंत क्या, खर्चे तब भी पूरे नहीं होंगे, हाथ आएगी केवल हताशा...

मुझे अपने गांव वापस जाना है, मुझे फिर से सुकून चाहिए। मुझे अपना बच्चा चाहिए। मुझे उसका बचपन जीना है। बस यह दे दो मुझे, फिर कभी कुछ नहीं मांगूंगी।

राघव बोला, तुम्हें यह क्यों नहीं दिखता, शहर कितना advance है, हर सुख-सुविधा है यहाँ। क्या रखा है गांव में?  

फिर गांव किस मुंह से जाऊंगा? लोग सिर्फ मज़ाक ही उड़ाएंगे कि बड़ा सीना फुलाकर गया था।

गीतिका ने गर्व से ओत-प्रोत होकर कहा, गांव में जिंदगी है! 

तुम्हें advance और सुख-सुविधा दिखती है, मन का सुकून नहीं...

पिता जी ने यहांँ आने के पहले ही बोल दिया था, जब आना हो आ जाना। कोई कुछ नहीं बोलेगा और अगर कोई कुछ बोलेगा तो कह देना कि मेरी सबके बिना तबियत बिगड़ गई थी।

मुझे शहर की हवा रास नहीं आई...

दो क्षण तो राघव कुछ नहीं बोला...

आगे पढ़े, आखिर अंक, ज़िन्दगी बड़े शहरों की (भाग -4) में