Sunday, 24 September 2023

Stories of Life : बस कुछ दिन

बहुत ही मार्मिक, दिल को छू लेने वाली कहानी। एक बार पढ़िएगा ज़रूर, आपको भी अपनी बेटी से और ज़्यादा प्यार हो जाएगा।

Happy Daughter's Day 🎉💐💕


बस कुछ दिन


ईश्वर ने शादी के बाद पहला तौहफा दिया, एक नन्ही सी परी। पर दिल खुश ही नहीं हुआ, उसकी मासूम सी किलकारी पर। मन में तो एक बेटे की चाह थी।

उस सुन्दर सी मासूम परी को तो मैं नज़र भर कर देखना भी नहीं चाह रही थी। फर्ज था तो, वक़्त से उसकी जरूरतों को पूरी करती रही, पर कभी मन से नहीं।

वो नन्ही मासूम ज्यों ज्यों बड़ी हो रही थी, उसकी दुनिया मेरे ही इर्द-गिर्द समाती जा रही थी। पर सब जानते हुए भी मैं कभी उसे तवज्जो नहीं देती थी।

वक़्त के साथ ही मेरा एक सुन्दर सा राजकुमार हुआ। उसके होने से दिल ऐसे खुश हुआ, जैसे साक्षात प्रभु दर्शन कर लिए।

अब तो हर पल उसकी ही चिंता में घुली रहती। पर वो, उसे तो जैसे मुझसे कोई मतलब ही नहीं था। दिन भर अपनी ही धुन में रहा करता।

बेटी विवाह योग्य हो गयी, तो अच्छा घर देखकर उसका विवाह कर दिया।

वो विदा क्या हुई, मैंने सोचा, अब उसकी तरफ से चिंता मुक्त हो गयी। पर वो ऐसा नहीं सोचती थी, हर रोज़ मुझसे घंटों बात किया करती, मुझे दूर से भी सलाह मशविरा दिया करती थी।

बेटा पास होकर भी ना जान पाता था, कि मेरी तबीयत नासाज़ है, और वो आवाज़ सुनकर तबीयत तो क्या, mood अच्छा है या बुरा, सब जान लेती थी।

जब कभी ससुराल से आती, मेरे लिए ढेरों उपहार लाती, जब तक रुकती मेरे साथ ही सोती, रोज़ खूब अच्छा बनाकर खिलाती, घुमाने भी ले जाती, shopping भी करवाने जाती थी। और जाते समय ठीक से रहने के लिए कितनी ही हिदायत दे जाती।

बेटे की भी शादी हो गयी, अब तो वो और ही कुछ नहीं पूछता था, तो बहू से क्या उम्मीद करती।

एक दिन मेरी बहुत तबीयत खराब हो गयी थी, बेटे ने तुरन्त फोन कर दिया, दीदी, माँ की बहुत तबीयत खराब है, आकर ले जाओ।

साथ ही ये कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया, आप ही जानती हो क्या चाहिए, उन्हें? तो आप के पास जल्दी ठीक हो जाएंगी।

उसने एक सवाल नहीं किया, मुझे साथ ले गयी। मेरा बहुत ज्यादा ध्यान रखा, मेरी एक एक छोटी से छोटी बातें उसे पता थी। और पसंद तो वो..., वह सारी भी जानती थी, जो मुझे भी नहीं पता थी। सच में उसकी सेवा ने मुझे बहुत जल्दी पूर्णतः ठीक कर दिया।

फिर वापस बेटे के पास आ गयी, पर उसकी उपेक्षा से चंद दिनों में ऐसी बीमार पड़ी कि अबकि बार बेटी के आने के पहले ही दुनिया से चली गयी।

जब वो आई, तब तक कुछ भी नहीं हुआ था, मैं वैसी ही निश्चेत बिस्तर पर थी। उसके आते ही बेटा बोला, दीदी मुझे तो कुछ पता नहीं है, सब आप ही कर लीजिये।

और हाँ, तेरही के चक्कर में ना रहिएगा, आप तो जानती हैं, मैंने Bengaluru में एक बड़ी software company join की है। मेरी  और आहना की पाँच दिन बाद Bengaluru की flight है। बड़ी मुश्किल से settings बैठाई है, company से, तो cancel भी नहीं कर सकते। और वहाँ रहने के लिए flat भी book कर दिया है। 

आप को तो पता हैं ना, उसमें कितने रुपए लग जाते हैं। तो सब खर्चा भी आपको ही देखना पड़ेगा।

आत्मा ने शरीर तो छोड़ दिया था, पर तब तक परमात्मा में लीन नहीं हुई थी, बेटे की इस हरकत पर अचकचा के रह गयी, जिस बेटी का कभी नहीं खाया, जब उसके घर गई, उसके मना करने के बावजूद उसे हमेशा अपने रहने का ख़र्चा देकर आई। आज वही अंतिम यात्रा पूरी करवाएगी।

जिसको कभी प्यार से नहीं देखा, वो बेटी पूरे जतन से लग गयी। उसने सारे संस्कार पूर्ण विधि से कराये। बेटा तो बस पंडित के सामने बैठकर सारी रस्में भर जैसे-तैसे पूरी करता रहा। फिर अपने Bengaluru जाने की तैयारी में जुट गया।

बेटी तो कई महीनों तक मेरे गम में ही गुम रही, हर त्यौहार में मुझे याद करती। पर बेटा तो जैसे मुझसे छुटकारा ही पा गया था।

एक दिन ईश्वर के सामने गयी, वो बोले क्या चाहती हो बताओ?

मैं बोली, बस एक बार मुझे मेरी बेटी की माँ बना दीजियेगा।

प्रभु बोले, उसके लिए तो बहुत लंबी लाइन है, जल्दी number नहीं आएगा। सब अब अपनी बेटी को ही वापस चाहते हैं। बेटा चाहिए तो बोलो? 

नहीं नहीं.... अब मुझे बेटे की कोई चाह नहीं है।

मैं भी लाइन में लग गयी, बेटी के साथ, जिंदगी के बस कुछ दिन गुजारने के लिए।

अपनी बेटी को बहुत सारा प्यार देने के लिए, वो  जो इस जन्म में नहीं और वो भी जो अगले जन्म में देना है...


Disclaimer: यह कहानी किसी पर भी आधारित नहीं है, इस कहानी, या इससे जुड़ी घटना किसी की ज़िंदगी से मिलना एक संयोग मात्र है। जीवन से जुड़ी कहानी है, जो की बेटी के प्यार को दर्शाती है। 

Thursday, 21 September 2023

Article; झुरमुट का सूरज

 झुरमुट का सूरज 



हम हरतालिका तीज का व्रत रखते हैं, जिसमें व्रत का पारण, early morning में किया जाता है। उसके लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करके प्रसाद तैयार करते हैं और सूर्य उदय के साथ ही सूर्य देवता को अर्क दिया जाता है। 

हम भी सुबह चार बजे उठ गये थे और स्नान आदि करके प्रसाद तैयार कर लिया। फिर देखा अभी भी रात्रि का अंधकार फैला हुआ था। 

 Internet में देखा कि सूर्य उदय कितने बजे होगा? तो पता चला कि 6:10 min पर होना था। तो हमने सुबह के लिए नाश्ता और दोपहर के लिए भोजन भी बना लिया। सब काम 5:15 तक खत्म हो गया।

अब क्या करें? क्योंकि पति और बच्चे सब सो रहे थे और सूर्य देव के भी उदित होने में समय था...

सोचा कि "सुबह ए बनारस और शाम ए अवध* तो सुना है। और दोनों देखा भी है। अवध में तो ससुराल ही है और एक बार बनारस भी जाना हुआ था। 

तब हमारे जीजा जी ने कहा था कि अगर बनारस की सुबह नहीं देखी तो, बनारस अधूरा है।अब उनकी आज्ञा की अवहेलना तो कर नहीं सकते थे, तो बस हम पतिदेव और जेठानी जी सुबह चार बजे पहुंच गए, दशाश्वमेध घाट, सूर्य उदय देखने के लिए...

हम तीनों घाट की सीढ़ियों पर बैठे थे, सूर्य उदय के इंतजार में। सुबह के चार बज रहे थे, बहुत कम लोग वहां थे। अभी आकाश में अंधेरा व्याप्त था। थोड़ी देर बाद हमने देखा कि सामने आसमान नारंगी रंग में बदलने लगा और साथ ही सूर्य देवता सिंदूरी रंग में ऐसे प्रकट होने लगे, मानो धीरे धीरे गंगा की गोद से बाहर आ रहे हों। जैसे कोई नन्हा राजकुमार, अठखेलियां करता अपनी मां की गोद से जागकर उठ गया हो, वो दृश्य बेहद मनोरम था। धीरे धीरे सूर्यदेव आसमान में ऊपर ही ऊपर उठते जा रहे थे, अपने यौवन की तरफ और साथ ही प्रकृति का रंग भी बदलता जा रहा था। सब ओर रोशनी हो चुकी थी। पेड़ पौधे, पशु पक्षी सब जाग गये थे। घाट पर गंगा आरती की पूरी तैयारी हो चुकी थी, हम भी उस पवित्र पावन आरती का हिस्सा बने। आरती के पश्चात हम उस अविस्मरणीय पल के साथ वापस लौट आए। जीजा जी कहना‌ बिल्कुल सही था, बनारस की सुबह नहीं देखी तो, बनारस देखना अधूरा है।

पर आज हम आपको कल की खूबसूरत सुबह का विवरण बताने जा रहे हैं।

सोचा कि "सुबह ए बनारस" तो देख लिया था, आज "सुबह ए गाजियाबाद" देखा जाए। क्योंकि सब काम खत्म हो चुका था तो वहीं बालकनी में खड़े होकर उस दिशा में एकटक देखने लगे, जहां से सूर्य देव उदित होने थे।

हमने देखा कि पूर्ण अंधेरा था। आसमान में कुछ सितारे टिमटिमा रहे थे। नहीं, नहीं... चांद नहीं था, वो तो पश्चिम दिशा की ओर बढ़ चुका था ना। और हम तो सूर्य उदय के लिए पूरब दिशा में देख रहे थे। 

हमारे व आसपास के appartment में parking की और कुछ घरों की light जगमगा रही थी, इसलिए अंधेरा होने के बावजूद घुप अंधेरा नहीं था। 

थोड़ी देर बाद ही आसमान काले से नीले रंग में बदलने लगा और जिस जगह से सूरज निकलना था, वो सिंदूरी होने लगा।

जगाते होंगे मुर्गे अपनी बांग से, पर शहरों में तो कौओं की कांव कांव से ही सुबह होती है। फिर पक्षियों के कलरव और चिड़ियों की चहचहाहट भी सुनाई देने लगी। कुछ देर बाद कुत्ते और बिल्लियों की आवाजें भी आने लगी थी।

आसमान काले से नीला, नीले से नारंगी और नारंगी से सफेद होने लगा था। पक्षी आसमान पर ऊंचाई पर पहुंच गये थे। सितारे सारे लुप्त हो चुके थे।

पार्किंग व आसपास की lights जो थोड़ी देर पहले जगमगा रही थी, अब मद्धम पड़ चुकी थी।

सामने सड़क पर बीच-बीच में कुछ कार और बाइक निकल रही थी। शायद जल्दी निकलते होंगे अपने गंतव्य पर पहुंचने के लिए...

पेड़-पौधे साफ़ साफ़ दिखाई देने लगे थे। और जिस ओर से सूर्यदेव निकलने थे, वहां पेड़ से सुनहरी चमक आ रही थी। जैसे पेड़ों के झुरमुट से सूर्य देव झांक रहे हों...

इन सब को देखकर समझ आ गया था कि सूर्य उदय हो चुका है। पर अब इंतजार, सूर्यदेव के पूर्ण दर्शन और पतिदेव के उठने का था। सुबह सात बजे सूर्यदेव और पतिदेव दोनों के एक साथ दर्शन हुए और व्रत का पारण कर दिया।

पर आज व्रत पूर्ण होने के साथ ही सुबह का इंतजार बहुत सुखद रहा। 

कैसे धीरे धीरे सुबह हो रही थी, आसमान का रंग बदलना, पक्षियों का जागना, उनकी कलरव, तारों का धीरे धीरे लुप्त होना, पक्षियों का आसमान के शीर्ष पर पहुंचना, चंद देर पहले रोशनी से जगमगा रही पार्किंग का मद्धम पड़ जाना, धीरे धीरे सड़क पर बढ़ता इंसानों और गाड़ियों का काफिला... कोई कहेगा कि उन सब से शांति भंग हो रही होगी? पर हम इसे कहेंगे कि, जिंदगी जाग रही थी। जिंदगी जो बहुत खूबसूरत होती है, इन सब को होते हुए देखना, बहुत सुखद है। लेकिन यह सब जिसके कारण हो रहा था... झुरमुट के सूरज के कारण, वो सबसे खूबसूरत था, हां सुबह ए बनारस जैसा तो नहीं... 

पर जब जिंदगी जाग रही होती है, चाहे किसी भी शहर में, जब सूरज निकलता है पेड़ों के झुरमुट से ही सही, उससे बड़ा healer कुछ भी नहीं। कभी आपको अकेलापन महसूस हो, low feel कर रहे हों, किसी का साथ चाहिए या आपको एक boost चाहिए, तो देखिएगा जरुर अपने शहर की सुबह...  सच किसी भी सुखद अनुभूति से यह अधिक सुखद होगी...😊

Tuesday, 19 September 2023

Bhajan (Devotional Song) गणपति बप्पा आ रे आ रे

गणेश चतुर्थी के पावन पर्व पर आप सभी को Shades of Life की तरफ से हार्दिक शुभकामनाएं💐

गणपति जी का आगमन, होता है शुभ का आगमन , उत्सव का आगमन, खुशियों का आगमन....

गणेश जी के आगमन पर उनकी स्तुति करते हुए यह भजन साझा किया है, आइए इसका आनन्द लें....

गणपति बप्पा आ रे आ रे


 गणपति बप्पा आ रे आ रे,

तुझको हरदम दिल ये पुकारे।

आ रे, आ रे,  आ रे, आ रे...

गणपति बप्पा आ रे, आ रे,


गेंहू ज्वार का, आसन मैं बनाऊं।

लाल कपड़े से, उसे सजाऊं।

तेरे आने से,

खुशियाँ पधारे।


गणपति बप्पा आ रे आ रे,

तुझको हरदम, दिल ये पुकारे।

आ रे आ रे...


जल पंचामृत से, तुम्हें नहलाऊं।

अंग अंग पर, मैं हरषाऊं।

तेरे ही दर्शन के खातिर,

हमने कितने, दिन रात गुजारे।


गणपति बप्पा आ रे आ रे,

तुझको हरदम, दिल ये पुकारे।

आ रे, आ रे..


मोदक का मैं, भोग लगाऊं,

मोतीचूर का, लड्डू चढ़ाऊं.

तेरे आने से,

विध्न, दूर हों सारे।


गणपति बप्पा आ रे आ रे,

तुझको हरदम, दिल ये पुकारे।

आ रे आ रे...


धूप दीप नैवेद्य सजाऊं,

जन जन को दर्शन करवाऊं।

तुम्ही ही हो धरती के रक्षक,

तुम्ही कर्ता, धरता हमारे।


गणपति बप्पा आ रे आ रे,

तुझको हरदम, दिल ये पुकारे।

आ रे, आ रे..


हे विनायक, हे लम्बोदर,

हे गणेश, हे सर्वेश्वर।

कृपा दृष्टि तुम, हरदम रखना।

हम सदा से, भक्त तुम्हारे।


गणपति बप्पा आ रे आ रे,

तुझको हरदम, दिल ये पुकारे।

आ रे, आ रे, आ रे, आ रे....


🙏🏻🌹गणपति बप्पा मोरया, मंगल मूर्ति मोरया🌹🙏🏻