Tuesday, 26 December 2023

Article : बहू को कैसे लगे ससुराल अपना घर

बहू को कैसे लगे ससुराल अपना घर  

आज कल शादियों का season चल रहा है। शादी होने के साथ ही होता है, नई बहू का गृह-प्रवेश... 

गृह प्रवेश, यह केवल घर में प्रवेश करनी की रस्म नहीं होती है, बल्कि इस का सही अर्थ होता है कि क्या आपकी बहू, बेटी बनेगी और इस घर को अपना समझेगी? या हमेशा के लिए उसके लिए यह एक ससुराल ही बना रहेगा, जहां वो कभी अपने आप को comfortable नहीं समझेगी? 

यह सब निर्भर करता है बहुत सी छोटी-छोटी बातों पर, जिनके नज़रअंदाज़ से ही आपकी अपनी बहू, कभी बेटी नहीं बन पाती है। 

आइए उन छोटी-छोटी बातों पर ध्यान केंद्रित करते हैं।




Physically harassment :

यदि आप की बहू के कान या नाक नहीं छिदे हैं, तो उन्हें सामाजिक मान्यताओं के कारण या अपनी जिद्द के कारण मत छिदवाएं। कभी भी किसी को कष्ट देकर आप उसके नजदीक नहीं जा सकते हैं, बल्कि उसकी परेशानियां को समझ कर उसके निदान से उसके बन सकते हैं।


Financial support :

अगर आप के एक से अधिक बेटे हैं तो, जिस बहू के मायके से जो आया हो, उसे वो दे दीजिए। उससे तीन फायदे होंगे;

पहला, वो उन सामानों में कोई मीन-मेख नहीं निकालेगी, बाकी निकाल सकते हैं।

दूसरा, उसके मायके का दिया पैसा और सामान उसके ही गृहस्थ जीवन को संवारने के लिए दिया गया था।

सबसे बड़ी बात, उसकी अपनी ससुराल से bonding अच्छी होगी कि उसका उसे देकर ससुराल वालों ने अपनापन दिखाया।


Attachment :

बहू-बेटा, चाहे किसी दूसरे शहर में रहते हों, पर ससुराल में उनका भी एक कमरा होना चाहिए। जिसमें उनका सामान होना चाहिए और वो सब सुख-सुविधाएं जो बाकी कमरों में हो। जिससे जब भी वो आएं, सीधे उसी कमरे में आकर रहें। उन्हें आकर हर बार यह ना सोचना पड़े कि हम कहां रहेंगे और हमारा सामान कहां रहेगा। 

अपना fix कमरा होने से उन्हें लगेगा कि यह घर उनका भी है, यहां उनके लिए जगह, उनकी अनुपस्थिति में भी है।


Detachment :

जब लड़की ससुराल आती है तो पीछे सबको छोड़ कर नहीं आती है, उनके साथ ही नए लोगों को भी अपनाने आती है। तो अपनी बहू को उसके मायके से अलग करके नहीं बल्कि उसे अपने आप से जोड़ कर, उसे अपनी बेटी बना सकते हैं।

उसके मायके वालों की तरह, अगर आप उसकी hobby, उसकी खुशी, उसकी परेशानियां और बेचैनी को समझ गए, तब वो आपकी बन जाएगी।


Patience :

बहू आते से आपसे नहीं जुड़ जाएगी, उसे थोड़ा समय चाहिए होगा, आप से जुड़ने में... वो समय कितना लगेगा, यह आप दोनों की compatibility से होगा। तो धैर्य से काम लीजिए, सब वही होगा, जैसा आप चाहते हैं, क्योंकि हर बहू, धीरे-धीरे अपने ससुराल में रम ही जाती है। कुछ जल्दी, कुछ थोड़ा देर से।


Allegation :

बहू के बेटा हो या बेटी, उसकी तोहमत उस पर ना लगाएं, बेटा-बेटी दोनों एक समान हैं। जो भी है वो आपका है, उसे पूरे मन से अपनाएं। अगर किसी भी माँ के बच्चे को कोई प्यार करता है तो वो उसके लिए हमेशा प्रेम भाव में ही रहती है। तो बस अगर आप अपने पोते-पोतियों को प्यार देंगे तो बहू तो अपने आप ही आपकी हो जाएगी।

वैसे आपकी information के लिए बता दें, scientifically बच्चे का gender, पिता से ही decide होता है, माँ से ही नहीं... 

बस इन जैसी ही और भी छोटी-छोटी बातें हैं, जिस पर ध्यान देने से आपकी बहू कब आपकी बेटी बन जाएगी, यह ना आपको पता चलेगा ना उसको... 

क्योंकि सच तो यही है कि ससुराल ही बहू का अपना घर होता है तो जल्दी या देर से वो रम ही जाती है अपने ससुराल में... 

उसके मुंह से बहुत जल्दी निकलने लगता है, ऐसा हमारे यहां होता है और ऐसा हमारे यहां नहीं होता है, और ऐसा वो अपने ससुराल के reference में उसके नियम कानून के संदर्भ में बोलती है। 


हर घर में

खुशियों का वास हो

रिश्तों में मिठास का 

एहसास हो 

हर घर में बेटी सी बहू

और माँ सी सास हो  

अगर आप को लगता है और भी कुछ ऐसी ही छोटी बातें हैं तो उन्हें comment box में जरूर लिखें..


सबके सुख की कामना 🙏🏻

Friday, 22 December 2023

Article: Christmas celebration

Christmas  Celebration  

अभी कल ही market जाना हुआ तो देखा पूरा market तो Christmas celebration के लिए ready था।

Shop अगर clothes की थीं तो वहां ज़्यादातर dresses red colour के थे, चाहे वो kids collection हो या ladies dresses। और हां साथ में हर size की Santa Claus dress तो available थी हीं...

Shop अगर general store थी, तो उसमें plum cake, Christmas cake, cup cakes, cookies etc. सजी हुई थीं। ध्यान दीजिएगा हमने general store लिखा है, cake and confectionery and sweets की shops पर तो भरमार थी cakes, cookies etc. की...

जो shops, books and decorative items की थीं, वहां पर तो X-mas tree व उससे related gift items थे।

मतलब हर दुकान पर कुछ ना कुछ Christmas celebration से related सामान ज़रूर था।

कुछ देर बाद कुछ schools का dispersal time हो गया और देखते क्या हैं, बहुत से बच्चे Red colour की dress और Santa Claus dress पहने हुए थे।

यह सब देखकर हम सोचने पर मजबूर हो गए कि आखिर आज दिन क्या है?

फिर याद आया कि आज तो 21 तारीख है, means Christmas आने में पूरे चार दिन और... 

फिर सोचा हैं कहाँ? India में ही ना? 

इतने दिन पहले से ही पूरा market लालिमा लिए हुए था। जैसे हम India में ना होकर European countries में हो...

फिर सोचा कि अगर किसी celebration के लिए लोग इतने excited हैं तो क्या हमारा कुढ़ना ठीक है?

खुश रहने के बहाने ही तो होते हैं, festival and celebrations। फिर सब खुश ही तो हैं, कोई दंगे फसाद तो नहीं हो रहे हैं।

साथ ही, Red colour dress या Santa Claus dress पहनने से, cake cutting और cookies खाने से, Christmas tree सजाने या बच्चों को surprise gifts देने भर से लोग Christian बन जाएंगे। 

ऐसा तो बिल्कुल नहीं है...

जब तक कोई regularly church ना जाए, Bible ना पढ़े या Jesus Christ को follow ना करे, वो कैसे Christian बन जाएगा? 

तो किसी भी तरह के celebration से चिढ़ने-कुढ़ने का क्या औचित्य?

खुशियां तो जिस भी बहाने से आए, अच्छी ही हैं। हाँ बस अपने धर्म से जुड़े नियम, कानून और परंपराओं का नियमित रूप से पालन होना चाहिए। उसके celebration के उत्साह, उमंग और जोश में किसी तरह की कोई कमी नहीं आनी चाहिए। 

साथ ही हमें दूसरे धर्मों के लोगों को भी अपने धर्म में रंगना चाहिए, पर जबरदस्ती नहीं बल्कि उसकी छटा को इतना बिखरा कर कि हर कोई दिल से हमारे रंग में हमारे उत्सव में घुल-मिल जाएं... 

तो चलिए उत्साह के थोड़े लाल रंग में हम भी रंग जाते हैं, पहले Christmas and New year मनाते हैं। फिर पतंग उड़ानें से लेकर पटाखों को फोड़ने तक देश को त्यौहारों के रंग में रंगते चले जाते हैं....

अभी दिल्ली में 25 December से 1 January तक बहुत सारी जगहों में carnival arrange किए जाते हैं। जिसके कारण ठंड के यह दिन बहुत खूबसूरत होते हैं।

Tuesday, 19 December 2023

Short story: Neglect

 Neglect 




 शक्ति और बॉबी एक चाल में रहते थे, बचपन तंगी में बीत रहा था। हर जरुरत की चीजें भी बहुत मुश्किल से दिलाते थे, दोनों के माता-पिता...

जब दोनों जवान हुए तो, उन दोनों को अच्छे काम मिल गए, जिससे उन्होंने अपने घर की जिम्मेदारी पूरी करनी शुरू कर दी। 

पूरे चाल में दोनों की  समझदारी, सूझ-बूझ और मेहनत की तारीफ होने लगी।

ना जाने कब और कैसे दोनों एक-दूसरे से आकर्षित होने लगे। 

अब तो अपने-अपने काम से लौट कर दोनों एक घंटा एक दूसरे को भी देने लगे। और बहुत से छोटे छोटे तोहफे देने लगे।

प्यार परवान चढ़ने लगा, दोनों के घर वालो की तरफ़ से भी रिश्ते को मंजूरी थी। शादी भी हो गई दोनों की।

दोनों ही लोग एक-दूसरे के लिए first night के लिए एक gift लाए थे और बहुत खुशी से दोनों ने एक-दूसरे को बहुत से वादों के साथ में दे दिया। 

पर शायद यह gift, एक वज्रपात था, दोनों के रिश्ते पर...

ऐसा भी क्या दे दिया था एक-दूसरे को?...

वही जो हम सबके रिश्तों पर घात है। 

शक्ति और बॉबी से सब पूछ रहे थे, क्या दिया पहला तोहफा? 

शक्ति बहुत शान से और बॉबी शरमाते हुए कहती, touch वाला mobile...

पर आह रे किस्मत!  उन दोनों ने ही एक-दूसरे को बहुत ग़लत तोहफा दे दिया था...

चंद ही महीनों में दोनों के रिश्तों में बहुत दूरी आ गई थी, दोनों को ही एक-दूसरे का साथ बंधन लगने लगा था।

पहले वो घंटों एक-दूसरे को दिया करते थे, आज कुछ पल भी साथ नहीं गुज़ारते थे, उन्हें अब बस केवल एक चीज की चाह थी, अपने मोबाइल की...वो एक-दूसरे को neglect करने लगे थे।

झूठी दुनिया के जंजाल में वो इस कदर फंसे कि अपने अटूट प्यार को भूल गए। 

यह दूरियां, इस क़दर बढ़ीं कि दोनों ने एक-दूसरे से रिश्ता तोड़ दिया।

पर चंद ही महीनों में उन्हें एहसास हो गया कि उन्होंने कितना गलत तोहफा दे दिया था, एक-दूसरे को...

उनका अनमोल प्यार जितनी तेजी से परवान चढ़ा था, उससे भी जल्दी टूट गया। 

काश! उन्होंने एक-दूसरे को मोबाइल ना दिया होता, झूठी दुनिया के जंजाल में ना फंसा होता, एक दूसभरे को neglect ना किया होता तो आज भी उनके पास वो धरोहर होती, जिसके लिए सात जन्म भी कम हैं।

दोनों ने ही touch mobile, अपने-अपने मां-पापा को दे दिया।

खुद के घर पर उन्होंने landline phone लगवाया, जिससे सब से जुड़े रहे। उसके बाद दोनों ने कभी एक-दूसरे को neglect नहीं करने की कसम खाई और बहुत प्यार से जीने लगे। 



कहीं आप का रिश्ता भी मोबाइल की भेंट तो नहीं चढ़ रहा है? ध्यान रखिएगा कि अनमोल आपका प्यार है, मोबाइल नहीं... 

वो एक सुविधा यंत्र है, उसकी सीमा वहीं तक रहे, आप पर हावी होकर आपको आपके अपनों से दूर ना ले जाए....